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भाग 1
रोज की तरह माया किचेन में ब्यस्त अपने पति के लिए नाश्ता बना रही थी l मानस (माया का पति ) एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था, उसने बाथरूम से ही माया को आवाज़ लगाई l
मानस - माया.... माया.... मेरी टॉवेल दे दो l
माया किचेन के दरवाजे से ही झांकती हुई....
माया - मुझे काम करने दो मानस तुम्हारी शरारत खूब समझती हूँ मैं l
मानस - अरे टॉवल ही तो मांग रहा हूँ, तुम भी ना माया l प्लीज दे दो
माया - खुद ले लो मुझे तंग मत करो l
मानस - प्लीज माया मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है l
माया मानस की बात मान बैडरूम से टॉवल हाथ में लिए हुवे बाथरूम का दरवाजा खटखटाती है l
बाथरूम का दरवाजा खुलता है मानस हँसते हुवे माया के सामने बिलकुल नंगा खड़ा था l माया की नज़र मानस के तने हुवे लंड पे जाती है उसे मानस की शरारत समझते जरा भी देर नहीं लगती, वो towel फेंक भागने ही वाली थी की मानस उसे पीछे से दबोच लेता है l पानी में भीगा मानस माया से सट जाता है l माया उस वक़्त एक नीली साड़ी में होती है उसके 38 इंच के भारी कूल्हों पे मानस अपने लंड का दबाव बना रहा होता है साथ ही वो मौका देख साड़ी के पल्लू के अंदर हाथ अपना दायां हाथ सरकाते हुवे माया के उरोज थाम लेता है l
माया इस आक्रमण से अनजान थी वो मानस के बाँहों में कसमसाने लगती है मगर मानस के मर्दानी पकड़ से छूट नहीं पाती l
मानस - ओह माया आज कितने दिन हो गए, (मानस ब्लाउज के ऊपर से माया के बूब्स दबाते हुवे पीछे उसकी गर्दन पे होंठ फेरता है l
(मानस आज सुबह ही तो घर लौटा था कंपनी के काम से उसे पुणे जाना पड़ा था 3 week पहले )
माया - (अपनी आवाज़ में सनसनाहट लिए हुवे मानस के baalon में ungliyaan फेरती है l )
जाने दो ना छोड़ो मुझे मानस l
मानस - ( माया की दोनों बूब्स को थामते हुवे )
क्या तुम्हारा मन नहीं करता माया ? इतने दिनों से मेरे लंड को तुम्हारी हाथों की गर्माहट नहीं मिली एक बार पकड़ के देखो तो
(मानस माया का हाथ पकड़ के अपने लंड पे rakh देता है )
मानस - कर दो न माया, निकाल दो मेरा रस l
माया - ( माया पलट के मानस की आँखों में बेताबी देखती हुई उसके लंड का स्किन नीचे खोल देती है, फिर उसे मुट्ठी में भींचे ऊपर खींचती है, मानस आनंद से भर उठता है उसकी आँखे मस्ती में बंद होने लगती hain.. ओह माया.... )
माया - ऑफिस नहीं जाना ?
मानस - आह... नहीं माया कर दो बस
माया - तो फिर यहाँ नहीं बेड पे l ( लंड से हाथ हटा लेती है ) तुम सच में ऑफिस नहीं जाओगे ?
मानस इस पल कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं था उसे तो बस 3 वीक से जमा हुवा वीर्य बाहर निकालना था I
(तीन week से वो खुद ही मुट्ठ kyon नहीं मारा उसका reason आगे पता चलेगा )
माया इस मीठे अहसास से सरोबोर थी उसके उन्माद का रस panty mein उतरने लगा था I
वो अपने पति के सीने mein सर छिपाए बिना कोई हरकत किये sharm से laal थी l
मानस ने हथेली से panty का छोर ढूंढा और इस बार फिर हाथ माया के नंगी चूत पे सरक गई l
माया का पूरा शरीर काँप गया, उसकी नंगी चूत मानस के हाथ में थी l चूत की फांक से गरमाहट को साफ़ महसूस किया जा सकता था l माया उत्तेजित होकर चूत को अच्छी तरह मानस के हथेली पे दबायी और एक लम्बी आह्ह भरी l मानस की चारो ऊँगली चूत की चिकनाहट में फिसल रही थी l
मानस - तुम्हारी चूत तो बहुत गीली है माया l
माया शरम से पानी हो गई थी, कंधे पे दांत काटते हुवे वो अपना moan छिपा रही थी l
मानस - बोलो माया क्यों इतना पानी छोड़ रही hai तुम्हारी चूत ?
(साड़ी पूरा ऊपर उठाये मानस माया की गांड को दबोचता रहा, कभी panty में सामने की तरफ हाथ डालता तो कभी पीछे l और फिर वो दोनों तरफ से पकड़ के panty को घुटने तक उतार दिया l) नंगी गीली चूत की छुवन पाकर मानस का लंड फुंफकार मारने लगा l
वो अपने लंड को हाथ में लिए चूत की फांको पे रगड़ता, माया की चूत लंड को अंदर लेने के लिए खुल गई थी l लेकिन मानस ने तो जैसे बदला लेने की ठान ली थी, वो कामरस में भीगी चूत को सहलाता रहा l माया से जब रहा नहीं गया तो वो कान में धीरे से बोली.... डालो ना l
मानस - क्या डालो ?
माया - अपना wo..(इशारे से बोली )
मानस - वो क्या मेरी रानी ?
माया समझ गई की मानस उसे तंग कर रहा तो वो भी नखरे करते हुवे बोली
माया - ठीक है मत करो मैं जाती हूँ किचन का काम करने l (और वो उठने की झूठी एक्टिंग करती है )
मानस तुरंत उसे दबोच लेता है l
मानस - क्या माया तुम भी ना, मूड ख़राब कर देती हो l कितनी बार बोला है ऐसा मत किया करो l
माया - अच्छा मेरे बेचैन पतिदेव गुस्सा मत हो बोलो क्या करूँ l
मानस - गन्दी बात करो प्लीज l
माया - ok डालो मेरे अंदर l
मानस - ऐसे नहीं, जैसे मैं तुम्हे हमेशा कहता हूँ वैसे बरशर्मी से बोलो l किसी प्यासी रंडी ki तरह l
माया - ok
माया - मानस के होंठ पे अपना होंठ रगड़ते हुवे.... मानस अपना लंड डाल दो मेरी नरम pussy में l
मानस - नहीं........ देसी स्टाइल बोलो
माया - छी कितने बदमाश हो तुम l अपनी तरह बिगाड़ doge मुझे l
माया - ओके l मानस....... अपने खड़े लंड को मेरी गीली चूत में पेल दो, 3 week से इस लंड की प्यास है मुझे l पेलो ना l
मानस बीवी के मुँह से गन्दी बातें सुनकर वासना से भर उठता है l अपने लंड को वो चूत के मुहाने पे रखता hai
मानस - ओह माया (लंड का सुपाड़ा गीली चूत में फिसलता चला जाता है l)
घुटने तक उतरी चड्ढी में ही मानस माया को चोदने लगता है l
माया अपनी पति का भरपूर साथ देती hai और दोनों एक ही रीदम में धक्के लगाते हैं l मानस माया को चोदते हुवे अपनी हथेली को सूंघता है जिसमे से माया के चूत की मदहोश karne वाली महक आ रही थी l दो उँगलियों के बीच चूत के रस की चासनी बन रही थी l
मानस चोदते हुवे माया का सर उठाकर उससे पूछता है, ये क्या है माया ?

माया जानती थी की इस वक़्त उसे कैसे जवाब देना है l वो मानस की आँखों में देखती हुई बड़ी sexy अदा से कहती है l
माया - मेरी चूत का रस है चाट लो l
मानस तेजी से धक्का मारते हुवे अपनी उंगलियां चाट लेता है l फिर दोनों के होंठ मिल जाते हैं l
हर एक धक्के के साथ फच्च फच्च की आवाज़ आती है l जोर जोर की चुदाई से दोनों हांफने लगते हैं l
आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स्स
अब माया किसी प्यासी औरत की तरह कमर हिला हिला कर चुदवा रही होती है l माया की ये हरकत मानस के बर्दाश्त से बाहर थी उसके लंड से गाढ़े वीर्य की धार फुट पड़ती है l कमर से कस के पकड़े हुवे वो लंड को 4-5 बार झटके देता है l माया ऊपर थी इसलिए आधा वीर्य तो वापस उसके लंड से होते हुवे उसके पेट पे गिरता है l वीर्य में सना उसका लंड फिसल फिसल कर इधर उधारहो जाता l दोनों के shareer ढीले पड़ जाते हैं, माया मानस के ऊपर से हटती है और बगल में लेट जाती है, उसकी चूत से सफ़ेद पानी बह रहा था जो जांघो के बीच से बिस्तर पे गिर रहा था l
थोड़ी देर बाद माया अपनी panty खीच पति के तरफ karwat बदलती है
वो जैसे ही मानस के पेट पे हाथ रखती है तो तो उसका पूरा हाथ गाढ़े मुट्ठ में सन जाता है l फेविकोल ki तरह चिपचिपा हाथ देख उसे उकाई आने लगती है l
माया - छी मानस ओह यककक
मानस को हंसी आ जाती है वो माया का हाथ पकड़ उसे वापस उसी के गाल पे रगड़ देता है l
Maya- ईईई बदमाश.....
मानस को धक्का दे वो तेजी से बाथरूम की तरफ भागती है और अपने गालों को पानी से साफ़ करती है l
इधर मानस बेड पे लेटे लेटे बगल से माया की ब्रा में मुट्ठ पोछ लेता है l
माया वापस आ के पति की ये हरकत देखती है तो उसे मारने को दौड़ती है, लेकिन मानस उसका हाथ पकड़ अपनी ओर खींच लेता है l
ऊपर से टॉपलेस माया की चूची को वो कस के रगड़ देता है l तभी घर की door bell बजती है ओर दोनों alag होते हैं l[/URL]
वो अपने पति के सीने mein सर छिपाए बिना कोई हरकत किये sharm से laal थी l
मानस ने हथेली से panty का छोर ढूंढा और इस बार फिर हाथ माया के नंगी चूत पे सरक गई l
भाग 3
माया का पूरा शरीर काँप गया, उसकी नंगी चूत मानस के हाथ में थी l चूत की फांक से गरमाहट को साफ़ महसूस किया जा सकता था l माया उत्तेजित होकर चूत को अच्छी तरह मानस के हथेली पे दबायी और एक लम्बी आह्ह भरी l मानस की चारो ऊँगली चूत की चिकनाहट में फिसल रही थी l
मानस - तुम्हारी चूत तो बहुत गीली है माया l
माया शरम से पानी हो गई थी, कंधे पे दांत काटते हुवे वो अपना moan छिपा रही थी l
मानस - बोलो माया क्यों इतना पानी छोड़ रही hai तुम्हारी चूत ?
(साड़ी पूरा ऊपर उठाये मानस माया की गांड को दबोचता रहा, कभी panty में सामने की तरफ हाथ डालता तो कभी पीछे l और फिर वो दोनों तरफ से पकड़ के panty को घुटने तक उतार दिया l) नंगी गीली चूत की छुवन पाकर मानस का लंड फुंफकार मारने लगा l
वो अपने लंड को हाथ में लिए चूत की फांको पे रगड़ता, माया की चूत लंड को अंदर लेने के लिए खुल गई थी l लेकिन मानस ने तो जैसे बदला लेने की ठान ली थी, वो कामरस में भीगी चूत को सहलाता रहा l माया से जब रहा नहीं गया तो वो कान में धीरे से बोली.... डालो ना l
मानस - क्या डालो ?
माया - अपना wo..(इशारे से बोली )
मानस - वो क्या मेरी रानी ?
माया समझ गई की मानस उसे तंग कर रहा तो वो भी नखरे करते हुवे बोली
माया - ठीक है मत करो मैं जाती हूँ किचन का काम करने l (और वो उठने की झूठी एक्टिंग करती है )
मानस तुरंत उसे दबोच लेता है l
मानस - क्या माया तुम भी ना, मूड ख़राब कर देती हो l कितनी बार बोला है ऐसा मत किया करो l
माया - अच्छा मेरे बेचैन पतिदेव गुस्सा मत हो बोलो क्या करूँ l
मानस - गन्दी बात करो प्लीज l
माया - ok डालो मेरे अंदर l
मानस - ऐसे नहीं, जैसे मैं तुम्हे हमेशा कहता हूँ वैसे बरशर्मी से बोलो l किसी प्यासी रंडी ki तरह l
माया - ok
माया - मानस के होंठ पे अपना होंठ रगड़ते हुवे.... मानस अपना लंड डाल दो मेरी नरम pussy में l
मानस - नहीं........ देसी स्टाइल बोलो
माया - छी कितने बदमाश हो तुम l अपनी तरह बिगाड़ doge मुझे l
माया - ओके l मानस....... अपने खड़े लंड को मेरी गीली चूत में पेल दो, 3 week से इस लंड की प्यास है मुझे l पेलो ना l
मानस बीवी के मुँह से गन्दी बातें सुनकर वासना से भर उठता है l अपने लंड को वो चूत के मुहाने पे रखता hai
मानस - ओह माया (लंड का सुपाड़ा गीली चूत में फिसलता चला जाता है l)
घुटने तक उतरी चड्ढी में ही मानस माया को चोदने लगता है l
माया अपनी पति का भरपूर साथ देती hai और दोनों एक ही रीदम में धक्के लगाते हैं l मानस माया को चोदते हुवे अपनी हथेली को सूंघता है जिसमे से माया के चूत की मदहोश karne वाली महक आ रही थी l दो उँगलियों के बीच चूत के रस की चासनी बन रही थी l
मानस चोदते हुवे माया का सर उठाकर उससे पूछता है, ये क्या है माया ?

माया जानती थी की इस वक़्त उसे कैसे जवाब देना है l वो मानस की आँखों में देखती हुई बड़ी sexy अदा से कहती है l
माया - मेरी चूत का रस है चाट लो l
मानस तेजी से धक्का मारते हुवे अपनी उंगलियां चाट लेता है l फिर दोनों के होंठ मिल जाते हैं l
हर एक धक्के के साथ फच्च फच्च की आवाज़ आती है l जोर जोर की चुदाई से दोनों हांफने लगते हैं l
आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स्स
अब माया किसी प्यासी औरत की तरह कमर हिला हिला कर चुदवा रही होती है l माया की ये हरकत मानस के बर्दाश्त से बाहर थी उसके लंड से गाढ़े वीर्य की धार फुट पड़ती है l कमर से कस के पकड़े हुवे वो लंड को 4-5 बार झटके देता है l माया ऊपर थी इसलिए आधा वीर्य तो वापस उसके लंड से होते हुवे उसके पेट पे गिरता है l वीर्य में सना उसका लंड फिसल फिसल कर इधर उधारहो जाता l दोनों के shareer ढीले पड़ जाते हैं, माया मानस के ऊपर से हटती है और बगल में लेट जाती है, उसकी चूत से सफ़ेद पानी बह रहा था जो जांघो के बीच से बिस्तर पे गिर रहा था l
थोड़ी देर बाद माया अपनी panty खीच पति के तरफ karwat बदलती है
वो जैसे ही मानस के पेट पे हाथ रखती है तो तो उसका पूरा हाथ गाढ़े मुट्ठ में सन जाता है l फेविकोल ki तरह चिपचिपा हाथ देख उसे उकाई आने लगती है l
माया - छी मानस ओह यककक
मानस को हंसी आ जाती है वो माया का हाथ पकड़ उसे वापस उसी के गाल पे रगड़ देता है l
Maya- ईईई बदमाश.....
मानस को धक्का दे वो तेजी से बाथरूम की तरफ भागती है और अपने गालों को पानी से साफ़ करती है l
इधर मानस बेड पे लेटे लेटे बगल से माया की ब्रा में मुट्ठ पोछ लेता है l
माया वापस आ के पति की ये हरकत देखती है तो उसे मारने को दौड़ती है, लेकिन मानस उसका हाथ पकड़ अपनी ओर खींच लेता है l
ऊपर से टॉपलेस माया की चूची को वो कस के रगड़ देता है l तभी घर की door bell बजती है ओर दोनों alag होते हैं l[/URL]
थैंक यू bhaiबहुत ही उम्दा …....अपडेट था....
मानस माया के सेक्स सीन जबरदस्त था.....
भाग 1
रोज की तरह माया किचेन में ब्यस्त अपने पति के लिए नाश्ता बना रही थी l मानस (माया का पति ) एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था, उसने बाथरूम से ही माया को आवाज़ लगाई l
मानस - माया.... माया.... मेरी टॉवेल दे दो l
माया किचेन के दरवाजे से ही झांकती हुई....
माया - मुझे काम करने दो मानस तुम्हारी शरारत खूब समझती हूँ मैं l
मानस - अरे टॉवल ही तो मांग रहा हूँ, तुम भी ना माया l प्लीज दे दो
माया - खुद ले लो मुझे तंग मत करो l
मानस - प्लीज माया मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है l
माया मानस की बात मान बैडरूम से टॉवल हाथ में लिए हुवे बाथरूम का दरवाजा खटखटाती है l
बाथरूम का दरवाजा खुलता है मानस हँसते हुवे माया के सामने बिलकुल नंगा खड़ा था l माया की नज़र मानस के तने हुवे लंड पे जाती है उसे मानस की शरारत समझते जरा भी देर नहीं लगती, वो towel फेंक भागने ही वाली थी की मानस उसे पीछे से दबोच लेता है l पानी में भीगा मानस माया से सट जाता है l माया उस वक़्त एक नीली साड़ी में होती है उसके 38 इंच के भारी कूल्हों पे मानस अपने लंड का दबाव बना रहा होता है साथ ही वो मौका देख साड़ी के पल्लू के अंदर हाथ अपना दायां हाथ सरकाते हुवे माया के उरोज थाम लेता है l
माया इस आक्रमण से अनजान थी वो मानस के बाँहों में कसमसाने लगती है मगर मानस के मर्दानी पकड़ से छूट नहीं पाती l
मानस - ओह माया आज कितने दिन हो गए, (मानस ब्लाउज के ऊपर से माया के बूब्स दबाते हुवे पीछे उसकी गर्दन पे होंठ फेरता है l
(मानस आज सुबह ही तो घर लौटा था कंपनी के काम से उसे पुणे जाना पड़ा था 3 week पहले )
माया - (अपनी आवाज़ में सनसनाहट लिए हुवे मानस के baalon में ungliyaan फेरती है l )
जाने दो ना छोड़ो मुझे मानस l
मानस - ( माया की दोनों बूब्स को थामते हुवे )
क्या तुम्हारा मन नहीं करता माया ? इतने दिनों से मेरे लंड को तुम्हारी हाथों की गर्माहट नहीं मिली एक बार पकड़ के देखो तो
(मानस माया का हाथ पकड़ के अपने लंड पे rakh देता है )
मानस - कर दो न माया, निकाल दो मेरा रस l
माया - ( माया पलट के मानस की आँखों में बेताबी देखती हुई उसके लंड का स्किन नीचे खोल देती है, फिर उसे मुट्ठी में भींचे ऊपर खींचती है, मानस आनंद से भर उठता है उसकी आँखे मस्ती में बंद होने लगती hain.. ओह माया.... )
माया - ऑफिस नहीं जाना ?
मानस - आह... नहीं माया कर दो बस
माया - तो फिर यहाँ नहीं बेड पे l ( लंड से हाथ हटा लेती है ) तुम सच में ऑफिस नहीं जाओगे ?
मानस इस पल कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं था उसे तो बस 3 वीक से जमा हुवा वीर्य बाहर निकालना था I
(तीन week से वो खुद ही मुट्ठ kyon नहीं मारा उसका reason आगे पता चलेगा )
बुर चीज़ ही ऐसी है की उसका पानी भी मज़ा दे देyaar ye kya kiya,bahu ne.sasur ko apna namkeen pani cakhaa diya,wah maza aa gaya
तभी फ़ोन की घंटी बजती है l
फ़ोन पे मानस का बॉस था, किसी जरुरी काम के लिए उसे ऑफिस जाना था l
मानस - सॉरी माया जाना होगा l
मानस माया को kiss कर bathroom की तरफ चला जाता है l
इसी तरह माया और मानस की दिनचर्या चलती रहती है l मानस रोज सुबह ऑफिस को चला जाता और माया अकेली घर पे रह जाती l आस पास पडोसी थे जिनसे कभी कभी माया बातें करती, उसका ज्यादातर टाइम घर की साफ़ सफाई और टीवी देखने में ब्यतीत होता था l
एक अच्छी बहु होने के नाते वो अपने परिवार, रिश्तेदारों से बातें करती l देखते हे देखते 2 महीने बीत गए, मानस ऑफिस के काम में ज्यादा busy हो गया हालाँकि दोनों की सेक्स लाइफ अभी भी रोमांच से भरी थी l जब भी कभी मौका मिलता दोनों सेक्स का मज़ा लेने से नहीं चूकते, अलग अलग पोजीशन और अलग अलग जगहों पे सेक्स करना दोनों को बहुत पसंद आता था, यूँ कह लें की दोनों के विचार सामान थे और एक दूसरे को भलीभांति समझते थे l
संडे का दिन था माया छत पे कपड़े डाल रही thi, दिल्ली के bheed bhad इलाके में मानस ने ये घर किराये पे लिया था l घर तो बहुत सुन्दर था डुप्लेक्स हाउस aur बड़ा सा छत l घर का मकान मालिक US mein करीब 6 साल se रहता था, बहुत कम आना जाना था इस वजह से पूरा घर माया और मानस ही देखते थे l माया सीढ़ियों से नीचे जाती है तो देखती है मानस अपने पापा से कुछ बात कर रहा था l
मानस - नहीं पापा आप खामों खां परेशान हो रहे हैं l
मैं कर लूँगा बात..... ओके... हाँ... हम्म्म अच्छा तो फिर आप यहाँ ही आ जाइयेl हाँ 1 हफ्ते से ज्यादा नहीं लगेगा l मैं टिकट भेजवा दूंगा l ok haan नमस्ते l
माया - क्या हुवा सब ठीक तो है ?
मानस - हाँ सब ठीक है, वो हमारा पुराना मकान है न गावं में उसे कुछ दबंग लोगों ने हड़प लिया है तो उसी सिलसिले में मेरा एक दोस्त जो वकील है मुझे कुछ सुझाव दिया था l मैं पापा से बोला तो वो बोल रहे थे की येभी try करते हैं शायद कुछ अच्छा हो l bas इसीलिए मैंने पापा को यहाँ बुलाया है l
दोस्त से मिलवा दूंगा और कुछ क़ानूनी कार्यवाही भी l
माया - ओके अच्छा किये आप l कब तक आएंगे l
मानस - मैं अभी फ्रेंड से बात करके टिकट भिजवाता हूँ कल सुबह tak आ जायेंगे l
दूसरे दिन मानस सुबह सुबह स्टेशन चला गया, माया भी जल्दी सारा काम ख़तम कर नाश्ता बनाने लगी l
माया एक पटियाला सूट सलवार पहनी हुई थी टाइट kurti में उसके दोनों बूब और भी बड़े लग रहे थे l
माया ने सोचा jabtak हस्बैंड और ससुर जी आएंगे वो नहा के फ्रेश हो जाएगी l टॉवल लिए वो बाथरूम की तरफ बढ़ी ही थी की door bell बजी towel रख वो तेज कदम से हॉल की तरफ गई, door खोली तो सामने मानस सामान लिए खड़ा था और उनके पीछे महेन्द्र सिंह मानस के पिता l
माया - नमस्ते बाबूजी l (माया झुक के पैर छुई )
महेन्द्र - खुश raho बेटी, कैसी हो ?
माया - ठीक हु बाबूजी, आपको आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई l
महेन्द्र - नहीं बेटा l
बैठिये पापा, माया जरा पानी देना l मानस माया से बोला
माया - जी
महेन्द्र - तो बेटा वकील से आगे कुछ बात हुई ?
मानस - हाँ दोपहर को मिलने बुलाया है, पास में ही घर है l
माया पानी देती है, महेन्द्र थैंक्स बोल मानस से बात करते हैं आगे l
काफी देर तक बात होती है इस बीच माया भी कई बार बातचीत का हिस्सा बनती है घर के बाकी लोगों के बारे में भी बात होती है l
सभी dining टेबल पे बैठ खाना खाते हैं, एक बार फिर दोनों वकील के घर को चले जाते हैं l
दोपहर के 2 बज रहे होते hain, माया नहा के फ्रेश हो जाती है कपबोर्ड से एक कुर्ती और लेग्गीन निकाल के पहनती है और बेड पे लेटे मोबाइल में खो जाती है l दिन भर की थकान से उसे नींद की आगोश में ले लेती है l
शाम को नींद khulne पे वो मानस को कॉल करती है तो मानस बताता है की दोनों को आने में देर lagegi और वो खाना बाहर ही खा लेंगे l
माया relax हो कर टीवी देखने लगती है, उसके दिमाग में puraani सारी बातें घूमने लगती हैं l बाबूजी पहले से कितना चेंज हो गए हैं, कितनी प्यारी बातें करते हैं l और आज तो unhone मेरे खाने की भी बहुत तारीफ की l
माया के हाथ में एक bracelet watch थी जो बाबूजी ने उसे dophar mein दिया था l जिसे वो अभी भी पहनी थी l हलकी हल्की मुस्कान लिए वो सारी बातें अपने मन में दोहराती है l
काफी देर बाद उसे ऑटो की आवाज़ sunaayi देती है, वो door खोलती hai तो सामने बाबूजी खड़े थे, उनकी नज़र सीधा बिना दुपट्टा के टाइट कुर्ती में फूली माया की बूब पे पड़ती है l माया का थोड़ा सा क्लीवेज भी दिखाई देता है l महेन्द्र बहु की उभार देख नज़रें नीचे करता है मगर उनकी नज़र चोरी से दुबारा माया की गोलाई नापने लगती हैं l माया उनका ध्यान तोड़ते पूछती है l
माया - काम हुवा बाबूजी ? मानस कहाँ हैं ?
बाबूजी - (dhayn भंग होते ही) हाँ बहु....मानस बेटा किसी पडोसी से बात कर रहा है l
महेन्द्र अंदर आ के सोफे पे बैठता है तो उसे एक और shock लगता है,
मानस का वेट करते हुवे माया door पे ही खड़ी थी l घड़े के अकार की उसकी गांड टाइट लेग्गिंग और कुर्ती से ढँक भी ना पा रही थी l

महेन्द्र मन mein.... ओह बहु आज लेग्गिंग पहनी है uff... बहु का पीछे का भाग कितना बड़ा और उभरा हुवा है, मैंने तो कभी ध्यान ही नहीं दिया l
मानस को तो बहुत मज़ा आता होगा, सोचते हुवे महेन्द्र अपनी बहु की गांड देर तक निहारता है, इसका असर सीधे उसके लंड पे होता है l महेन्द्र का लंड pant के अंदर ही बड़ा होने लगता है l सोचते सोचते उसके मन में विचार आता है, काश ऐसी उभरी गांड पे एक बार हाथ फेरने को मिल जाता l
महेन्द्र इस haseen mauke को खोना नहीं चाहता उसकी नजरें भर भर के बहु की गांड निहार रही थी l छण भर के लिए वो सारे रिश्ते भूल बस उस उत्तेजक पल का आनंद लेना चाहता था l उसके लंड की नसों में दबाव badhta जा रहा था l वासना में डूबा कभी वो बहु की गांड पे हाथ फेरने की ख्व्हिश भरता तो कभी नीचे बैठ किस करते हुवे अपना पूरा फेस बहु की गांड में रगड़ने की सोचता l
महेंद्र पे तो जैसे आज किस्मत भी मेहरबान थी, अभी वो खाव्हिशों के सपने में गोते लगा ही रहा था की हल्की सी आती हवा ने माया की कुर्ती को उसके घड़े जैसे नितम्ब से उड़ा दी l एक सेकंड के लिए महेन्द्र को बहु के पुरे गांड के दर्शन हो गए l एक पल के लिए तो बहु टाइट लेग्गीन में नंगी ही प्रतीत हो रही थी l
जवान बहु की मादक गांड देख महेंद्र का तो जैसे वीर्य छलकने वाला हो l वो pant के ऊपर से हे लंड को कस के पकड़ लेता है l लंड को नीचे दबाते वो अपना वीर्य रोकना चाहता tha, लेकिन जैसे ही वो हाथ हटाता है तो जैसे गोंद के tube से gum बाहर आ जाता हो waise ही शायद लंड ने भी गाढ़ी रिसाव कर दिया था l
महेंद्र को बहुत आत्मग्लानि सी होती है वो ठंडी सांस लिए टीवी की तरफ देखता है, लेकिन नज़रें तो जैसे आज काबू में ही ना हों l
वो मन में बस अंतिम बार एक झलक देखना चाहता था, जैसे पता नहीं ऐसा कभी मौका मिले न मिले l इससे पहले की वो इस उधेड़बुन से निकल पाता माया तबतक पलट चुकी थी, महेन्द्र तड़प के रह गया l इतना की कमरे में बैठा वो अपनी जगह से जरा सा भी नहीं हिला, वो लगातार कोशिश करता की बहु की गांड देख सके l लेकिन ऐसा हुवा नहीं जब बहु सामने होती तो मानस भी वहीँ होता महेन्द्र में इतनी बेशर्मी नहीं थी की वो बेटे के सामने अपनी बहु के जिस्म को निहारे l बीच बीच में उसे अपने आप पे गुस्सा भी आ रहा था l
समय बीतता जा रहा था, आखिरकार बहु और मनीष बैडरूम में जा चुके थे l महेन्द्र की बाकी उम्मीद भी टूट गई l वो निराश मन से अपने कमरे में आ गया l
फ़ोन पे मानस का बॉस था, किसी जरुरी काम के लिए उसे ऑफिस जाना था l
मानस - सॉरी माया जाना होगा l
मानस माया को kiss कर bathroom की तरफ चला जाता है l
भाग 5
इसी तरह माया और मानस की दिनचर्या चलती रहती है l मानस रोज सुबह ऑफिस को चला जाता और माया अकेली घर पे रह जाती l आस पास पडोसी थे जिनसे कभी कभी माया बातें करती, उसका ज्यादातर टाइम घर की साफ़ सफाई और टीवी देखने में ब्यतीत होता था l
एक अच्छी बहु होने के नाते वो अपने परिवार, रिश्तेदारों से बातें करती l देखते हे देखते 2 महीने बीत गए, मानस ऑफिस के काम में ज्यादा busy हो गया हालाँकि दोनों की सेक्स लाइफ अभी भी रोमांच से भरी थी l जब भी कभी मौका मिलता दोनों सेक्स का मज़ा लेने से नहीं चूकते, अलग अलग पोजीशन और अलग अलग जगहों पे सेक्स करना दोनों को बहुत पसंद आता था, यूँ कह लें की दोनों के विचार सामान थे और एक दूसरे को भलीभांति समझते थे l
संडे का दिन था माया छत पे कपड़े डाल रही thi, दिल्ली के bheed bhad इलाके में मानस ने ये घर किराये पे लिया था l घर तो बहुत सुन्दर था डुप्लेक्स हाउस aur बड़ा सा छत l घर का मकान मालिक US mein करीब 6 साल se रहता था, बहुत कम आना जाना था इस वजह से पूरा घर माया और मानस ही देखते थे l माया सीढ़ियों से नीचे जाती है तो देखती है मानस अपने पापा से कुछ बात कर रहा था l
मानस - नहीं पापा आप खामों खां परेशान हो रहे हैं l
मैं कर लूँगा बात..... ओके... हाँ... हम्म्म अच्छा तो फिर आप यहाँ ही आ जाइयेl हाँ 1 हफ्ते से ज्यादा नहीं लगेगा l मैं टिकट भेजवा दूंगा l ok haan नमस्ते l
माया - क्या हुवा सब ठीक तो है ?
मानस - हाँ सब ठीक है, वो हमारा पुराना मकान है न गावं में उसे कुछ दबंग लोगों ने हड़प लिया है तो उसी सिलसिले में मेरा एक दोस्त जो वकील है मुझे कुछ सुझाव दिया था l मैं पापा से बोला तो वो बोल रहे थे की येभी try करते हैं शायद कुछ अच्छा हो l bas इसीलिए मैंने पापा को यहाँ बुलाया है l
दोस्त से मिलवा दूंगा और कुछ क़ानूनी कार्यवाही भी l
माया - ओके अच्छा किये आप l कब तक आएंगे l
मानस - मैं अभी फ्रेंड से बात करके टिकट भिजवाता हूँ कल सुबह tak आ जायेंगे l
दूसरे दिन मानस सुबह सुबह स्टेशन चला गया, माया भी जल्दी सारा काम ख़तम कर नाश्ता बनाने लगी l
माया एक पटियाला सूट सलवार पहनी हुई थी टाइट kurti में उसके दोनों बूब और भी बड़े लग रहे थे l
माया ने सोचा jabtak हस्बैंड और ससुर जी आएंगे वो नहा के फ्रेश हो जाएगी l टॉवल लिए वो बाथरूम की तरफ बढ़ी ही थी की door bell बजी towel रख वो तेज कदम से हॉल की तरफ गई, door खोली तो सामने मानस सामान लिए खड़ा था और उनके पीछे महेन्द्र सिंह मानस के पिता l
माया - नमस्ते बाबूजी l (माया झुक के पैर छुई )
महेन्द्र - खुश raho बेटी, कैसी हो ?
माया - ठीक हु बाबूजी, आपको आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई l
महेन्द्र - नहीं बेटा l
बैठिये पापा, माया जरा पानी देना l मानस माया से बोला
माया - जी
महेन्द्र - तो बेटा वकील से आगे कुछ बात हुई ?
मानस - हाँ दोपहर को मिलने बुलाया है, पास में ही घर है l
माया पानी देती है, महेन्द्र थैंक्स बोल मानस से बात करते हैं आगे l
काफी देर तक बात होती है इस बीच माया भी कई बार बातचीत का हिस्सा बनती है घर के बाकी लोगों के बारे में भी बात होती है l
सभी dining टेबल पे बैठ खाना खाते हैं, एक बार फिर दोनों वकील के घर को चले जाते हैं l
दोपहर के 2 बज रहे होते hain, माया नहा के फ्रेश हो जाती है कपबोर्ड से एक कुर्ती और लेग्गीन निकाल के पहनती है और बेड पे लेटे मोबाइल में खो जाती है l दिन भर की थकान से उसे नींद की आगोश में ले लेती है l
शाम को नींद khulne पे वो मानस को कॉल करती है तो मानस बताता है की दोनों को आने में देर lagegi और वो खाना बाहर ही खा लेंगे l
माया relax हो कर टीवी देखने लगती है, उसके दिमाग में puraani सारी बातें घूमने लगती हैं l बाबूजी पहले से कितना चेंज हो गए हैं, कितनी प्यारी बातें करते हैं l और आज तो unhone मेरे खाने की भी बहुत तारीफ की l
माया के हाथ में एक bracelet watch थी जो बाबूजी ने उसे dophar mein दिया था l जिसे वो अभी भी पहनी थी l हलकी हल्की मुस्कान लिए वो सारी बातें अपने मन में दोहराती है l
काफी देर बाद उसे ऑटो की आवाज़ sunaayi देती है, वो door खोलती hai तो सामने बाबूजी खड़े थे, उनकी नज़र सीधा बिना दुपट्टा के टाइट कुर्ती में फूली माया की बूब पे पड़ती है l माया का थोड़ा सा क्लीवेज भी दिखाई देता है l महेन्द्र बहु की उभार देख नज़रें नीचे करता है मगर उनकी नज़र चोरी से दुबारा माया की गोलाई नापने लगती हैं l माया उनका ध्यान तोड़ते पूछती है l
माया - काम हुवा बाबूजी ? मानस कहाँ हैं ?
बाबूजी - (dhayn भंग होते ही) हाँ बहु....मानस बेटा किसी पडोसी से बात कर रहा है l
महेन्द्र अंदर आ के सोफे पे बैठता है तो उसे एक और shock लगता है,
मानस का वेट करते हुवे माया door पे ही खड़ी थी l घड़े के अकार की उसकी गांड टाइट लेग्गिंग और कुर्ती से ढँक भी ना पा रही थी l

महेन्द्र मन mein.... ओह बहु आज लेग्गिंग पहनी है uff... बहु का पीछे का भाग कितना बड़ा और उभरा हुवा है, मैंने तो कभी ध्यान ही नहीं दिया l
मानस को तो बहुत मज़ा आता होगा, सोचते हुवे महेन्द्र अपनी बहु की गांड देर तक निहारता है, इसका असर सीधे उसके लंड पे होता है l महेन्द्र का लंड pant के अंदर ही बड़ा होने लगता है l सोचते सोचते उसके मन में विचार आता है, काश ऐसी उभरी गांड पे एक बार हाथ फेरने को मिल जाता l
महेन्द्र इस haseen mauke को खोना नहीं चाहता उसकी नजरें भर भर के बहु की गांड निहार रही थी l छण भर के लिए वो सारे रिश्ते भूल बस उस उत्तेजक पल का आनंद लेना चाहता था l उसके लंड की नसों में दबाव badhta जा रहा था l वासना में डूबा कभी वो बहु की गांड पे हाथ फेरने की ख्व्हिश भरता तो कभी नीचे बैठ किस करते हुवे अपना पूरा फेस बहु की गांड में रगड़ने की सोचता l
महेंद्र पे तो जैसे आज किस्मत भी मेहरबान थी, अभी वो खाव्हिशों के सपने में गोते लगा ही रहा था की हल्की सी आती हवा ने माया की कुर्ती को उसके घड़े जैसे नितम्ब से उड़ा दी l एक सेकंड के लिए महेन्द्र को बहु के पुरे गांड के दर्शन हो गए l एक पल के लिए तो बहु टाइट लेग्गीन में नंगी ही प्रतीत हो रही थी l
जवान बहु की मादक गांड देख महेंद्र का तो जैसे वीर्य छलकने वाला हो l वो pant के ऊपर से हे लंड को कस के पकड़ लेता है l लंड को नीचे दबाते वो अपना वीर्य रोकना चाहता tha, लेकिन जैसे ही वो हाथ हटाता है तो जैसे गोंद के tube से gum बाहर आ जाता हो waise ही शायद लंड ने भी गाढ़ी रिसाव कर दिया था l
महेंद्र को बहुत आत्मग्लानि सी होती है वो ठंडी सांस लिए टीवी की तरफ देखता है, लेकिन नज़रें तो जैसे आज काबू में ही ना हों l
वो मन में बस अंतिम बार एक झलक देखना चाहता था, जैसे पता नहीं ऐसा कभी मौका मिले न मिले l इससे पहले की वो इस उधेड़बुन से निकल पाता माया तबतक पलट चुकी थी, महेन्द्र तड़प के रह गया l इतना की कमरे में बैठा वो अपनी जगह से जरा सा भी नहीं हिला, वो लगातार कोशिश करता की बहु की गांड देख सके l लेकिन ऐसा हुवा नहीं जब बहु सामने होती तो मानस भी वहीँ होता महेन्द्र में इतनी बेशर्मी नहीं थी की वो बेटे के सामने अपनी बहु के जिस्म को निहारे l बीच बीच में उसे अपने आप पे गुस्सा भी आ रहा था l
समय बीतता जा रहा था, आखिरकार बहु और मनीष बैडरूम में जा चुके थे l महेन्द्र की बाकी उम्मीद भी टूट गई l वो निराश मन से अपने कमरे में आ गया l
ओके samjha तो यहाँ husband cuckold नहीं है, वो बस एक सेक्सी बीवी चाहता है जो बैडरूम में ना शर्माए और ये सब वो अपनी सेक्स लाइफ को spice up करने के लिए करता है lNahi Bhai
Story to bahut aachi hai, par kai bar MANAS ka apni Wife ko galat situation me fasa dene ke bare me kaha tha.
Husband Situation ko sambhalene wala aur Caring ho to thik lagta hai,
Haa, situation ke hisab se Doodwala ya Sasur ka Erotic hona aur fir SEX thik lagta hai,
par Husband hi Wife ko galat situation me fasa kar MAZA le to bekar lagta hai (Haa, agar Husband "Cuckoldry" ho to thik hai.)
मानस और माया का प्यार आप देख ही chuke हैं l लेकिन छोटी छोटी छेड़छाड़ उनके सेक्स लाइफ को अच्छा बनाती है, हस्बैंड ये नहीं चाहेगा की उसकी wife को कोई real mein चोदे l
लेकिन इन सब के बीच कुछ स्थितियों में पड़ के माया गरम होती रहेगी और ना चाहते हुवे भी वो कर बैठेगी जो उसने पहले कभी नहीं सोचा था l
थैंक you भाई, कहानी का कौन सा पार्ट या scene सबसे ज्यादा hot था ये भी बताएं मुझे lHottttt.......
Khada ho gaya bhai........
महेन्द्र - रहने दे बहू मोमबत्ती की क्या जरुरत l
माया - नहीं बाबूजी लाती हूँ, माया उठ गई थी महेन्द्र ने भी हाथ हटा लिया था l माया उठकर किचन में आयी उसकी बुर कामरस में पूरी तरह गीली हो गई थी l
माया किचन के पास डाइनिंग हॉल में एक मोमबत्ती जला दी, और बैडरूम की तरफ बढ़ी l उसकी बुर इतनी गीली थी उस वक़्त की जब वो चलती तो उसकी अंदरूनी जाँघ आपस में चिपचिपी हो जाती थी l वो धीरे से दरवाज़ा खोल कमरे में दाखिल हुई, उसने देखा मानस गहरी नींद सो रहा है l माया की बुर पानी पानी हो रही थी तो वो वहीँ खड़ी अपने गाउन से ही बुर का पानी पोछ ली l बेड की साइड एक बॉक्स में माया के undergarments पड़े थे unme से वो एक satin की पतली पैंटी निकाल पहन ली l
उधर महेन्द्र ने जब माया को कमरे में जाते देखा तो उदास हो गया उसे लगा की माया को शायद बुरा लग गया हो उसका बहू को इस तरह छूना l उसे ये भी डर था की माया मानस से कुछ कह ना दे l
उसकी जल्दबाजी ने सारा काम बिगाड़ दिया था शायद, इस बीच पावर भी आ गया था कमरे की light जल उठी, महेन्द्र को लगा जैसे पिक्चर अब ख़तम हो गया हो l वो निराश मन से उठ के अपने कमरे में जाने की सोच ही रहा था की उसे माया का bedroom से बाहर आने का आहाट मिला l वो रुक गया, माया बैडरूम से बाहर आकर धीमी आवाज़ में बोली .. ...
माया - बाबूजी पानी पिएंगे l
महेन्द्र को मानो जान में जान आयी l माया normally behave कर रही थी l वो खुश हो गया... हाँ बहू पियूँगा l
माया 2 ग्लास पानी ला कर सोफे पे महेन्द्र के बगल में बैठ गई l
माया - (पानी की घूँट लेते हुवे... )
बहुत गर्मी है ना बाबूजी, गला सूख गया मेरा l
महेंद्र मन में खुद से कहते हुवे (हाँ बहू तुम्हारा गला तो सूखा है मगर तेरी बुर बहुत गीली है उफ़ क्या महक थी, महेन्द्र के दिमाग में बहू की नशीली बुर की smell समायी थी l
महेन्द्र ने सोचा जब बहू अभी भी कुछ कह नहीं रही तो क्यों ना थोड़ा खुल के बात करूँ l )
महेन्द्र - हाँ बहू... गर्मी तो बहुत है तभी तो देख मैं बनियान पहना हूँ l एक तू है जो इतना बड़ा गाउन पहन रखी है l
माया - मेंरी क्या गलती बाबूजी मैं तो सब निकाल कर सोने वाली थी आपने ही मुझे बुला लिया l
(माया भी बेझिझक खुल के बोल रही थी
सब खोल के सोने वाली बात पे महेन्द्र उत्तेजित सा हो गया l )
महेन्द्र - अच्छा बहू माफ़ कर दे ऐसा है तो.... तू चेंज कर के आ जा l
माया - its ok बाबूजी
महेन्द्र - ना बहू गर्मी बहुत है कुछ हलके कपड़े पहन लो l जरा मैं भी तो देखूं मेरी बहू हलके कपड़ों में कैसी दिखती है l
(महेन्द्र की हिम्मत बढ़ती जा रही थी, माया को भी महेन्द्र की बात का बुरा नहीं लग रहा था बल्कि उनका इस तरह डिमांड करना उसे अच्छा लग रहा था l )
माया - ठीक है बाबूजी आप कहते हैं तो पहन लेती हूँ l आप इंतज़ार करिये मैं अभी आती हूँ l
(माया वापस कमरे में आ गई, आज का दिन खास था,, नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी l वो पहली बार पति के अलावा किसी गैर मर्द की कंपनी enjoy कर रही थी l ससुर के साथ बातें करना उनके पास baithana उसे बहुत अच्छा लग रहा था l ससुर की तारीफ और रात का माहौल भी माया की शरीर में अलग गर्मी पैदा कर रहा था l
धीमी रौशनी में वो शीशे के सामने खड़ी हुई l कुछ सोचकर उसने पहले अपना गाउन उतरा फिर अपनी ब्रा भी खोल दी l माया खुद की नंगी चूचियों को ध्यान से देख रही थी, उसने एक बूब को अपने हाथ में भर लिया और हल्का सा निप्पल पे ऊँगली फेरी लेकिन उसकी गोल चूचियां तो जैसे किसी मर्द के हाथ के स्पर्श के लिए तड़प रही थीं l

आँखे बंद कर वो उस पल को याद करने लगी जब सोफे पे ससुर जी का हाथ उसकी जांघो पे रेंग रहा था l माया उस अनुभव से आनंदित थी, उसकी शरीर की गर्मी बढ़ रही थी वो टांगों के बीच नमी महसूस कर रही थी l
वो पैंटी में हाथ अंदर डाल अपनी दो उँगलियों को को बुर के मुहाने पे रगड़ रही थी, जैसे वो महसूस करना चाहती हो की जब ससुर जी ने उसकी नंगी बुर पे हाथ रखा होगा तो उन्हें कैसा लगा होगा l फिर माया अपना हाथ निकाली उसे याद आया कि वो किस काम के लिए कमरे में आयी है l
ससुर जी ने उसे हलके कपड़े पहनने को बोला था तो वो कपबोर्ड़ से एक बहुत झीना और बरीक कपड़े का sphegetti उठा ली l वो sphegetti पहन अपने आप को शीशे में देखी तो पाया की वो झीना सा कपडा उसके बूब को कहीं से कवर नहीं कर रहा था बल्कि उसके नंगेपन को और दिखा रहा था l फिर भी माया ने वही पहनना चाहा हाँ उसके ऊपर एक satin nighty robe जैसी जरूर डाल ली जो सामने से पूरी खुली थी l robe को सिर्फ बीच में बांधा जा सकता था l माया की ये nighty उसके बदन को dhakne के bajaaye और नुमाईश कर रही थी l
माया इस वक़्त किसी बी grade की हॉट एवं chubby एक्ट्रेस के सामान दिख रही थी l
जब वो महेन्द्र के सामने आयी तो महेन्द्र अपनी बहू के भरे बदन को ऊपर से नीचे तक देखता रह गया, satin robe के अंदर sphagetti mein बहू की क्लीवेज और भारी चूची की गोलायी साफ़ नज़र आ रही थी l महेन्द्र का लंड अकड़ गया वो लंड को पायजामा के ऊपर से मसल दिया l माया ने महेन्द्र की ये हरकत देख ली थी फिर भी वो ignore कर दी l
महेन्द्र - तुम बहुत खूबसूरत हो बहू l
महेन्द्र बहू के कमर में दोनों हाथ डालते उसे खींच कर बिठा लिया l माया का दिल जोर जोर से dhadak रहा था और लम्बी साँसों से साथ उसकी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी l
कम्फर्टेबले हो के बैठो बहू, माया ने दोनों टाँगे ऊपर की तो robe घुटने से हट गई l
महेंद्र ने तुरंत माया के घुटनो पे हाथ रख दिया l और साथ ही robe को उसकी जांघो से भी हटा दिया l
माया पहले की तरह तकिया लिए सोफे पे लेट सी गई, फर्क इतना था की इस बार गाउन से बदन ढका नहीं था बल्कि robe हटने से वो two piece कपड़े में अधनंगी सी हो गई थी l माया का खुला बदन महेन्द्र के सामने था उसकी गहरी नाभि देख महेन्द्र खुद को रोक ना सका और वो हाथ सीधा बहू की नाभि पे रख दिया l
महेन्द्र - बहू.... तुम्हारी नाभि बहुत खूबसूरत है l
माया अपनी तारीफ सुन मचल गई l ऐसा क्या ख़ास है बाबूजी इसमें?
महेन्द्र - बहू तुम्हारी नाभि बहुत गहरी है, ऐसी नाभि तो किसी actress की भी नहीं (महेन्द्र माया की नंगी कमर और पेट को दबोच रहा था )
फिर महेन्द्र ने अपनी एक ऊँगली माया की नाभि में डाल दी l वो नाभि सहलाते बहू की साइड लेटने लगा l
माया भी सोफे पे हल्का सा जगह बनाते खिसक गई l
ससुर बहू दोनों एक ही सोफे पे आपस में सटे लेट गए थे l महेन्द्र का हाथ अभी भी माया की नाभि पे था l
महेन्द्र - पता है बहू, मुझे हमेशा से दरकरार थी की मेरी बहू खूबसूरत हो, पढ़ी लिखी हो, सभी काम में निपुण हो, सबकी सेवा करे, मेरा अकेलापन दूर करे l आज तुम्हारे साथ बात करके ऐसा लगा जैसे भगवान् ने मेरी सुन ली जो तुम जैसी संस्कारी बहू मिली मुझे l
माया - ओह बाबूजी थैंक यू सो मच ( कहते हुवे वो करवट हो महेन्द्र से लिपट गई, और साथ ही उनके गाल पे एक हल्का सा चुम्बन दे दी )
महेन्द्र भी कहाँ पीछे हटने वाला था वो भी बहू को कस के बाँहों में भर लिया फिर बहू के गालों के साथ साथ उसके chin और गर्दन के भाग पे भी किस किया l माया हल्का सा खिलखिलाई तो महेन्द्र कंधे से spaghetti की पट्टी नीचे कर उसके नंगे कंधे को चूमने लगा l

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महेन्द्र - आह बहू तेरी बॉडी की स्मेल कितनी अच्छी है l
माया - सच बाबूजी ?
महेन्द्र - हाँ
(महेन्द्र माया की बाहँ ऊपर कर दिया और उसकी खुली armpit पे नाक लगा उसे सूंघा )
माया - बाबूजी.......
महेन्द्र - क्या बहू l
माया - बात करिये ना l
महेन्द्र - एक shart पर
माया - क्या... ?
महेन्द्र - बहू मुझे प्यार करेगी तब l
माया - प्यार तो की ना बाबूजी (कहते हुवे माया ने मह्रन्द्र के गाल पे एक और चुम्बन दे डाला )
महेन्द्र - ऐसे नहीं... होंठ पे
माया सोच में पड़ गई l
महेन्द्र - sorry बहू मैंने तुमसे कुछ ज्यादा ही मांग ........
महेन्द्र इससे पहले की अपनी बात पूरी करता माया ने अपने होंठ महेन्द्र के होंठ से सटा दिए l
महेन्द्र की तो जैसे lottery लग गई वो बहू को कस के बाँहों में bheenchta माया के होंठ खा रहा था l माया भी खुल के साथ दी, दोनों किसी प्यासे couple की तरह kiss कर रहे थे l

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करीब आधे मिनट के kiss के बाद दोनों के होंठ अलग हुवे l
महेन्द्र - थैंक यू बहू...
माया - बाबूजी.. क्या मैं एक अच्छी बहू हूँ ? (माया ने महेन्द्र की आँखों में देख सवाल किया )
महेन्द्र - हाँ बहू.. तुम वाकई में बहुत अच्छी बहू हो l
माया खुश हो गई जैसे उसने कोई exam अच्छे मार्क्स से पास कर लिया हो l
माया - आप भी बहू अच्छे हो l
माया - (माहौल को नार्मल करती हुई ) अच्छा बाबूजी.... तिल के अलावा और क्या बता रहे the...कुछ नंबर कलर उससे भी ब्यक्ति के बारे में पता चलता है... ? वो कैसे होता है बाबूजी l
महेन्द्र - बहू तू इतना interest क्यों ले रही hai.. तुझे भी सीखना है क्या ?
माया - हाँ बाबूजी l
महेन्द्र - अच्छा ठीक है सीखा दूंगा, लेकिन मुझे गुरू दक्छिना में क्या दोगी ?
माया - आप जो मांगेंगे वो दे दूँगी l
महेन्द्र - (माया की मोटी जांघ पे हाथ फेरते हुवे ) सोच लो बहू जो मागूंगा देना होगा l

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माया महेन्द्र की आँखों में देखते हुवे अपना हाथ महेन्द्र के हाथ पे रखी जो उसकी जांघ पे था l उसे अंदरूनी जांघो की ओर ले गई और सेक्सी अदा से महेन्द्र के हथेली अपनी बुर की उभारों पे दबाव बनाते हुवे ऊपर पेट पे रख ली l

माया की ये हरकत महेन्द्र को अंदर तक झकझोर के रख दी l लेकिन ये एक झटका था दूसरा झटका तब लगा जब माया इतने तक नहीं रुकी वो महेन्द्र की एक उंगली अपने मुँह तक ले गई l महेन्द्र से नज़रें मिलाये वो गीले होठों के अंदर ऊँगली भर ली और आह भरते गीली ऊँगली ऐसे अंदर बाहर की जैसे वो ऊँगली नहीं ससुर जी का लंड हो l
माया - आप जो भी मांगेंगे दूँगी बाबूजी, आप बेझिझक मांगिये आपको निराश नहीं करुँगी l (माया की आँखों मैं वासना भरी थी )
एक एक पल महेन्द्र के लिए मुश्किल हो रहा था , बहू की ये हरकत किसी रंडी से कम नहीं थी और इस बार उसका इशारा साफ़ था l
महेन्द्र झुक कर एक बार फिर बहू के होंठ से अपना होंठ मिला दिया, बहू के गर्दन को चूमते हुवे वो क्लीवेज पे kiss करने लगा साथ ही इस बार हिम्मत करके महेन्द्र ने बहू की नर्म चूची भी दबा दी थी l

माया - नहीं बाबूजी लाती हूँ, माया उठ गई थी महेन्द्र ने भी हाथ हटा लिया था l माया उठकर किचन में आयी उसकी बुर कामरस में पूरी तरह गीली हो गई थी l
भाग 12
माया किचन के पास डाइनिंग हॉल में एक मोमबत्ती जला दी, और बैडरूम की तरफ बढ़ी l उसकी बुर इतनी गीली थी उस वक़्त की जब वो चलती तो उसकी अंदरूनी जाँघ आपस में चिपचिपी हो जाती थी l वो धीरे से दरवाज़ा खोल कमरे में दाखिल हुई, उसने देखा मानस गहरी नींद सो रहा है l माया की बुर पानी पानी हो रही थी तो वो वहीँ खड़ी अपने गाउन से ही बुर का पानी पोछ ली l बेड की साइड एक बॉक्स में माया के undergarments पड़े थे unme से वो एक satin की पतली पैंटी निकाल पहन ली l
उधर महेन्द्र ने जब माया को कमरे में जाते देखा तो उदास हो गया उसे लगा की माया को शायद बुरा लग गया हो उसका बहू को इस तरह छूना l उसे ये भी डर था की माया मानस से कुछ कह ना दे l
उसकी जल्दबाजी ने सारा काम बिगाड़ दिया था शायद, इस बीच पावर भी आ गया था कमरे की light जल उठी, महेन्द्र को लगा जैसे पिक्चर अब ख़तम हो गया हो l वो निराश मन से उठ के अपने कमरे में जाने की सोच ही रहा था की उसे माया का bedroom से बाहर आने का आहाट मिला l वो रुक गया, माया बैडरूम से बाहर आकर धीमी आवाज़ में बोली .. ...
माया - बाबूजी पानी पिएंगे l
महेन्द्र को मानो जान में जान आयी l माया normally behave कर रही थी l वो खुश हो गया... हाँ बहू पियूँगा l
माया 2 ग्लास पानी ला कर सोफे पे महेन्द्र के बगल में बैठ गई l
माया - (पानी की घूँट लेते हुवे... )
बहुत गर्मी है ना बाबूजी, गला सूख गया मेरा l
महेंद्र मन में खुद से कहते हुवे (हाँ बहू तुम्हारा गला तो सूखा है मगर तेरी बुर बहुत गीली है उफ़ क्या महक थी, महेन्द्र के दिमाग में बहू की नशीली बुर की smell समायी थी l
महेन्द्र ने सोचा जब बहू अभी भी कुछ कह नहीं रही तो क्यों ना थोड़ा खुल के बात करूँ l )
महेन्द्र - हाँ बहू... गर्मी तो बहुत है तभी तो देख मैं बनियान पहना हूँ l एक तू है जो इतना बड़ा गाउन पहन रखी है l
माया - मेंरी क्या गलती बाबूजी मैं तो सब निकाल कर सोने वाली थी आपने ही मुझे बुला लिया l
(माया भी बेझिझक खुल के बोल रही थी
सब खोल के सोने वाली बात पे महेन्द्र उत्तेजित सा हो गया l )
महेन्द्र - अच्छा बहू माफ़ कर दे ऐसा है तो.... तू चेंज कर के आ जा l
माया - its ok बाबूजी
महेन्द्र - ना बहू गर्मी बहुत है कुछ हलके कपड़े पहन लो l जरा मैं भी तो देखूं मेरी बहू हलके कपड़ों में कैसी दिखती है l
(महेन्द्र की हिम्मत बढ़ती जा रही थी, माया को भी महेन्द्र की बात का बुरा नहीं लग रहा था बल्कि उनका इस तरह डिमांड करना उसे अच्छा लग रहा था l )
माया - ठीक है बाबूजी आप कहते हैं तो पहन लेती हूँ l आप इंतज़ार करिये मैं अभी आती हूँ l
(माया वापस कमरे में आ गई, आज का दिन खास था,, नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी l वो पहली बार पति के अलावा किसी गैर मर्द की कंपनी enjoy कर रही थी l ससुर के साथ बातें करना उनके पास baithana उसे बहुत अच्छा लग रहा था l ससुर की तारीफ और रात का माहौल भी माया की शरीर में अलग गर्मी पैदा कर रहा था l
धीमी रौशनी में वो शीशे के सामने खड़ी हुई l कुछ सोचकर उसने पहले अपना गाउन उतरा फिर अपनी ब्रा भी खोल दी l माया खुद की नंगी चूचियों को ध्यान से देख रही थी, उसने एक बूब को अपने हाथ में भर लिया और हल्का सा निप्पल पे ऊँगली फेरी लेकिन उसकी गोल चूचियां तो जैसे किसी मर्द के हाथ के स्पर्श के लिए तड़प रही थीं l

आँखे बंद कर वो उस पल को याद करने लगी जब सोफे पे ससुर जी का हाथ उसकी जांघो पे रेंग रहा था l माया उस अनुभव से आनंदित थी, उसकी शरीर की गर्मी बढ़ रही थी वो टांगों के बीच नमी महसूस कर रही थी l
वो पैंटी में हाथ अंदर डाल अपनी दो उँगलियों को को बुर के मुहाने पे रगड़ रही थी, जैसे वो महसूस करना चाहती हो की जब ससुर जी ने उसकी नंगी बुर पे हाथ रखा होगा तो उन्हें कैसा लगा होगा l फिर माया अपना हाथ निकाली उसे याद आया कि वो किस काम के लिए कमरे में आयी है l
ससुर जी ने उसे हलके कपड़े पहनने को बोला था तो वो कपबोर्ड़ से एक बहुत झीना और बरीक कपड़े का sphegetti उठा ली l वो sphegetti पहन अपने आप को शीशे में देखी तो पाया की वो झीना सा कपडा उसके बूब को कहीं से कवर नहीं कर रहा था बल्कि उसके नंगेपन को और दिखा रहा था l फिर भी माया ने वही पहनना चाहा हाँ उसके ऊपर एक satin nighty robe जैसी जरूर डाल ली जो सामने से पूरी खुली थी l robe को सिर्फ बीच में बांधा जा सकता था l माया की ये nighty उसके बदन को dhakne के bajaaye और नुमाईश कर रही थी l
माया इस वक़्त किसी बी grade की हॉट एवं chubby एक्ट्रेस के सामान दिख रही थी l
जब वो महेन्द्र के सामने आयी तो महेन्द्र अपनी बहू के भरे बदन को ऊपर से नीचे तक देखता रह गया, satin robe के अंदर sphagetti mein बहू की क्लीवेज और भारी चूची की गोलायी साफ़ नज़र आ रही थी l महेन्द्र का लंड अकड़ गया वो लंड को पायजामा के ऊपर से मसल दिया l माया ने महेन्द्र की ये हरकत देख ली थी फिर भी वो ignore कर दी l
महेन्द्र - तुम बहुत खूबसूरत हो बहू l
महेन्द्र बहू के कमर में दोनों हाथ डालते उसे खींच कर बिठा लिया l माया का दिल जोर जोर से dhadak रहा था और लम्बी साँसों से साथ उसकी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी l
कम्फर्टेबले हो के बैठो बहू, माया ने दोनों टाँगे ऊपर की तो robe घुटने से हट गई l
महेंद्र ने तुरंत माया के घुटनो पे हाथ रख दिया l और साथ ही robe को उसकी जांघो से भी हटा दिया l
माया पहले की तरह तकिया लिए सोफे पे लेट सी गई, फर्क इतना था की इस बार गाउन से बदन ढका नहीं था बल्कि robe हटने से वो two piece कपड़े में अधनंगी सी हो गई थी l माया का खुला बदन महेन्द्र के सामने था उसकी गहरी नाभि देख महेन्द्र खुद को रोक ना सका और वो हाथ सीधा बहू की नाभि पे रख दिया l
महेन्द्र - बहू.... तुम्हारी नाभि बहुत खूबसूरत है l
माया अपनी तारीफ सुन मचल गई l ऐसा क्या ख़ास है बाबूजी इसमें?
महेन्द्र - बहू तुम्हारी नाभि बहुत गहरी है, ऐसी नाभि तो किसी actress की भी नहीं (महेन्द्र माया की नंगी कमर और पेट को दबोच रहा था )
फिर महेन्द्र ने अपनी एक ऊँगली माया की नाभि में डाल दी l वो नाभि सहलाते बहू की साइड लेटने लगा l
माया भी सोफे पे हल्का सा जगह बनाते खिसक गई l
ससुर बहू दोनों एक ही सोफे पे आपस में सटे लेट गए थे l महेन्द्र का हाथ अभी भी माया की नाभि पे था l
महेन्द्र - पता है बहू, मुझे हमेशा से दरकरार थी की मेरी बहू खूबसूरत हो, पढ़ी लिखी हो, सभी काम में निपुण हो, सबकी सेवा करे, मेरा अकेलापन दूर करे l आज तुम्हारे साथ बात करके ऐसा लगा जैसे भगवान् ने मेरी सुन ली जो तुम जैसी संस्कारी बहू मिली मुझे l
माया - ओह बाबूजी थैंक यू सो मच ( कहते हुवे वो करवट हो महेन्द्र से लिपट गई, और साथ ही उनके गाल पे एक हल्का सा चुम्बन दे दी )
महेन्द्र भी कहाँ पीछे हटने वाला था वो भी बहू को कस के बाँहों में भर लिया फिर बहू के गालों के साथ साथ उसके chin और गर्दन के भाग पे भी किस किया l माया हल्का सा खिलखिलाई तो महेन्द्र कंधे से spaghetti की पट्टी नीचे कर उसके नंगे कंधे को चूमने लगा l

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महेन्द्र - आह बहू तेरी बॉडी की स्मेल कितनी अच्छी है l
माया - सच बाबूजी ?
महेन्द्र - हाँ
(महेन्द्र माया की बाहँ ऊपर कर दिया और उसकी खुली armpit पे नाक लगा उसे सूंघा )
माया - बाबूजी.......
महेन्द्र - क्या बहू l
माया - बात करिये ना l
महेन्द्र - एक shart पर
माया - क्या... ?
महेन्द्र - बहू मुझे प्यार करेगी तब l
माया - प्यार तो की ना बाबूजी (कहते हुवे माया ने मह्रन्द्र के गाल पे एक और चुम्बन दे डाला )
महेन्द्र - ऐसे नहीं... होंठ पे
माया सोच में पड़ गई l
महेन्द्र - sorry बहू मैंने तुमसे कुछ ज्यादा ही मांग ........
महेन्द्र इससे पहले की अपनी बात पूरी करता माया ने अपने होंठ महेन्द्र के होंठ से सटा दिए l
महेन्द्र की तो जैसे lottery लग गई वो बहू को कस के बाँहों में bheenchta माया के होंठ खा रहा था l माया भी खुल के साथ दी, दोनों किसी प्यासे couple की तरह kiss कर रहे थे l

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करीब आधे मिनट के kiss के बाद दोनों के होंठ अलग हुवे l
महेन्द्र - थैंक यू बहू...
माया - बाबूजी.. क्या मैं एक अच्छी बहू हूँ ? (माया ने महेन्द्र की आँखों में देख सवाल किया )
महेन्द्र - हाँ बहू.. तुम वाकई में बहुत अच्छी बहू हो l
माया खुश हो गई जैसे उसने कोई exam अच्छे मार्क्स से पास कर लिया हो l
माया - आप भी बहू अच्छे हो l
माया - (माहौल को नार्मल करती हुई ) अच्छा बाबूजी.... तिल के अलावा और क्या बता रहे the...कुछ नंबर कलर उससे भी ब्यक्ति के बारे में पता चलता है... ? वो कैसे होता है बाबूजी l
महेन्द्र - बहू तू इतना interest क्यों ले रही hai.. तुझे भी सीखना है क्या ?
माया - हाँ बाबूजी l
महेन्द्र - अच्छा ठीक है सीखा दूंगा, लेकिन मुझे गुरू दक्छिना में क्या दोगी ?
माया - आप जो मांगेंगे वो दे दूँगी l
महेन्द्र - (माया की मोटी जांघ पे हाथ फेरते हुवे ) सोच लो बहू जो मागूंगा देना होगा l

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माया महेन्द्र की आँखों में देखते हुवे अपना हाथ महेन्द्र के हाथ पे रखी जो उसकी जांघ पे था l उसे अंदरूनी जांघो की ओर ले गई और सेक्सी अदा से महेन्द्र के हथेली अपनी बुर की उभारों पे दबाव बनाते हुवे ऊपर पेट पे रख ली l

माया की ये हरकत महेन्द्र को अंदर तक झकझोर के रख दी l लेकिन ये एक झटका था दूसरा झटका तब लगा जब माया इतने तक नहीं रुकी वो महेन्द्र की एक उंगली अपने मुँह तक ले गई l महेन्द्र से नज़रें मिलाये वो गीले होठों के अंदर ऊँगली भर ली और आह भरते गीली ऊँगली ऐसे अंदर बाहर की जैसे वो ऊँगली नहीं ससुर जी का लंड हो l
माया - आप जो भी मांगेंगे दूँगी बाबूजी, आप बेझिझक मांगिये आपको निराश नहीं करुँगी l (माया की आँखों मैं वासना भरी थी )
एक एक पल महेन्द्र के लिए मुश्किल हो रहा था , बहू की ये हरकत किसी रंडी से कम नहीं थी और इस बार उसका इशारा साफ़ था l
महेन्द्र झुक कर एक बार फिर बहू के होंठ से अपना होंठ मिला दिया, बहू के गर्दन को चूमते हुवे वो क्लीवेज पे kiss करने लगा साथ ही इस बार हिम्मत करके महेन्द्र ने बहू की नर्म चूची भी दबा दी थी l

माया - हाँ बाबूजी सब साफ़ हो गया.... क्यों मानस सब साफ़ हो गया ना... (आँख मारते हुवे )
मानस तो शॉक में कुछ भी बोल नहीं पा रहा था l
डिनर के बाद मानस और माया दोनों ही खुश थे वो अपने कमरे में बैठे बातें कर रहे थे l कुछ देर बातें करने के बाद मानस शॉर्ट्स पहन के बेड पे वापस आता है, माया भी बाल खोल कर बिस्तर पे आ गई l कमरे में हल्की रोशिनी छाई थी l
मानस माया को बाँहों में ले कर बेड पे लिटा देता है, होठों को चूमते हुवे उसके हाथ माया के बूब्स पे फिसल रहे थे l गाउन के अंदर ब्रा में माया के बूब काफी उभरे नज़र आ रहे थे l
मानस - आज तो तुमने कमाल कर दिया l
माया - kyon? तुम्हे अपना माल मेरे मुंह में गिराने दी इसलिए बोल रहे हो ?
मानस - हाँ इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया माया, वैसे मेरे वीर्य का स्वाद कैसा लगा तुम्हे ?
माया - अच्छा था गरम नमकीन सा गाढ़ा पानी (माया खिलखिलाई )
मानस माया के ऊपर चढ़ उसे रोंदने लगा, माया उसे धकेलती लेकिन मानस तो उसे अच्छे से दबोच लिया था l माया के गाउन के सारे बटन खोल दिए, गाउन ढीला होने के कारण मानस को अंदर हाथ डालने mein कोई परेशानी नहीं हुई वो बड़ी asani से ब्रा उठा दियाl ब्रा उठाते ही माया के गोरे बूब बाहर को आ गए l

मानस नंगे बूब को अपनी आँखों के सामने पा कर खुद को रोक नहीं पाया और नीचे झुक कर उसने माया के नंगे बूब को मुँह में भर लिया l वो दूसरे बूब को हाथों से मसलते हुवे मुहँ से जीभ निकाल माया के निप्पल पे घूमाने लगा l माया अब गरम होने लगी थी, उसकी सिसकारी निकलने लगी l
वो वासना की मस्त में मानस को अपने बूब्स पीला रही थी l
मस्ती में वो एक लम्बी सी moan की..
आआआअह्ह्ह्हह..... maaaanaaaas......
मानस माया की moan सुन उसके मुहँ पे हाथ रखा तो माया ने उसका हाँथ हटा दिया और जोर से moan करने लगी ....
aaaaaaaaaaahhhhhhhh ssssssssss aaaaaaahhhhhhhhhh maaaaaanaaaaas aaaaaaaannnnhhhhhhhh
मानस रुकते हुवे, क्या कर रही हो माया... बगल के रूम में पापा हैं l
माया - (मानस को चिढ़ाते हुवे ) तो क्या हो गया.. उस दिन तो वो दूध वाले काका को तुम मेरी आह सुनाना चाहते थे तुम्हे बड़ा मज़ा आ रहा था तो अब क्या हुवा l
माया और जोर से आह भरी l..... Sssss आआह्ह्ह्हह
मानस - तुम पागल हो गई हो l
माया - (हँसते हुवे ) अरे बुद्धू door बंद है और बाबूजी 10 बजे तक सो जाते hain l तुम करो ना.... माया सेक्स के लिए बहुत उतावली थी l
अपने कोमल निप्पल पे मानस के मुँह की गर्मी पाकर माया खुल के बेशर्मी से moan करने लगी l
उधर महेन्द्र अपने कमरे में बेड पे लेटा था, जब उसे चूड़ियों की खनखनाहट और माया की आह सुनाई दी l उसने सोचा माया और मानस कहीं झगड़ा तो नहीं कर रहे l वो कमरे से बाहर आया चूड़ियों और माया की moaning तेज हो गई वो dabey पाओं door के करीब आया तो उसके होश उड़ गए l
माया मानस से आग्रह कर रही थी...
माया - आह ससस मानस... एक ही को चुसते rahoge क्या ?? मेरी दूसरी बूब को भी तो पियो l
अपने कानो में बहू के उत्तेजक शब्द सुनते ही महेन्द्र के पाओं जम से गए l पायजामा के अंदर उसका लंड मुँह उठाने लगा l
अब चूड़ियों की आवाज़ एक रीदम में आ रही थी, महेन्द्र दोनों की पोजीशन imagine करने लगा मानस के मुँह से बस उमम की आवाज़ अा रही, इसका मतलब बहू की चूची उसके मुँह में है, और लगातार आ रही चूड़ियों की आवाज़ मतलब बहू मानस का लंड पकड़ हिला रही है l
महेन्द्र वासना से भर उठा उसे अपनी बहू का नंगा शरीर देखने की लालसा बढ़ चली थी, मगर कैसे... वो इधर उधर कोई छेद ढूंढ़ता रहा लेकिन कोई फ़ायदा नहीं एक key होल था भी तो उससे बेड की सिर्फ साइड देखा जा सकता था l समय बीतता जा रहा था उसे डर था की कहीं दोनों बाहर ना आ जाएं l तभी उसे door के ऊपर एक gap दिखा, वो बेचैनी से आस पास नज़रें दौड़ाया तो उसे एक चेयर दिखाई दी l
बड़ी सावधानी से वो chair उसने door ke पास लगाया l महेन्द्र को डर तो बहुत था कहीं बेटे बहू ने उसे ऐसा करते देख लिया तो वो जीवन भर उनसे आँख नहीं mila पायेगाl इन सब के बावजूद महेन्द्र की वासना उसके डर पे हावी थी l
वो चुपके से चेयर के ऊपर चढ़ा और अंदर धीमी रोशनी में जो उसने देखा, उसने शायद अपने जीवन में कभी नहीं देखा था l
बहू सर से पाऊँ तक पूरी नंगी थी वो doggy स्टाइल में बेड पे झुकी थी और मानस उसे पीछे से कमर पकड़ चोद रहा था l बहू की नंगी गांड में मानस का लंड लगातार अंदर बाहर हो रहा था l बहू को नंगा देखते हुवे महेन्द्र ने चेयर पे खड़े खड़े झटपट पायजामा नीचे कर दिया और लंड बाहर निकाल मुट्ठ मारते हुवे वो हवा में कमर हिलाने लगा जैसे की वो भी बहू को चोद रहा हो l
अन्दर मानस कभी माया को chodata kabhi उसकी चूत चाटता तो कभी अपना लंड उसके मुँह में डालता l माया भी आज भरपूर साथ दे रही थी l महेंद्र सब देख रहा था उसे तो मानो अपनी आँख पे यकीन नहीं था सबकुछ सपना जैसा लग रहा था l माया किसी रंडी की तरह सेक्स का मज़ा ले रही थी, मध्यम रौशनी में भी माया का gora बदन चमक रहा था l महेन्द्र हल्की रोशिनी में साफ़ साफ़ तो नहीं देख paya लेकिन बहू के शरीर का कटाव, उसकी चौड़ी गांड, मोटी दोनों जांघ और गदराया बदन उसके लंड में बेतहाशा हलचल मचा रही थी l

माया कस कस के चुदवाती रही, गांड पे मानस का लंड फट फट ki आवाज़ के साथ टकरा रहा रहा था l
थोड़ी देर चुदाई के बाद बाद मानस अपने लंड का माल माया के face पे छोड़ देता है l माया मुट्ठ से नहा ली थी, उसकी फेस पे मानस वीर्य की लम्बी लम्बी धार छोड़ रहा था... माया चेहरे पे लगे मुट्ठ को उँगलियों से पोछ चाट रही thi.

महेन्द्र को पता नहीं था की उसकी संस्कारी बहू इतनी ज्यादा चुदक्कड़ है जो मुट्ठ को भी चाट के मज़ा लेती है l ये सब देख अब उसका भी पानी निकलने वाला ही था...वो माया का नंगा बदन देखते हुवे मुट्ठ मार रहा था, जैसे ही उसका क्लाइमेक्स आया उसने लंड को पायजामा के अंदर डाल दिया l लंड का ढेर सारा पानी पायजामा के अंदर ही बह गया l उसके बाद
Chair साइड में रख वो भीगे पायजामा में ही दबे अपने कमरे में आ गया l
बिस्तर पे लेटे हुवे महेन्द्र की आँखों के सामने बस उसकी बहू का नंगा शरीर था l उसकी चुदासी हरकत बार बार महेन्द्र के आँखों के सामने घूम रही थी l वो दुबारा गीले पायजामा में हाथ डाल लंड को सहलाने लगा l महेन्द सोचने लगा आज कल की लड़कियाँ कितना खुल गई हैं सेक्स का पूरा मज़ा लेती हैं l और बहू तो उफ़.... कितना चुदवा रही थी क्या वो और भी मर्दों से chudi होगी ? महेन्द्र के मन में हज़ारों सवाल थे l
बहू की चौड़ी गांड पे मानस का लंड कैसे थप थप कर रहा था... ओह........बहू मेरा भी लंड ले ले अपनी प्यासी बुर में l बोलते huwe... आआअह्ह्ह्हह.... बहू...... ये दूसरी बार था जब महेन्द्र के लंड ने पिचकारी छोड़ दी l
2 बार झड़ने के बाद भी महेन्द्र का लंड खड़ा था, होता भी क्यों नहीं उसने जो देखा था वो वाकई मज़ा से भरा था l

महेन्द एक पल के लिए भी माया को बहू की तरह नहीं सोचता बल्कि उसे एक गरम बदन की मालकिन की तरह देखता l उसे तो बस बहू की बुर चोदना था l करीब 1 घंटा बीत चूका था लंड का तनाव ख़त्म ही नहीं हो रहा था की तभी माया के बैडरूम का door खुला और चूड़ियों की आवाज़ आयी l
ये बहू इस वक़्त... उफ़ उसने पास पड़े चादर को अपने ऊपर खींच लियाl
माया महेन्द्र के कमरे की तरफ ही आ रही थी l
माया - धीमी आवाज़ में... बाबूजी... बाबूजी...
महेन्द्र करवट लिए हुवे था l माया जैसे ही कमरे में आयी उसकी नथुनों में जैसे कोई जानी पहचानी महक समां गई,,, वो नाक पे ऊँगली रख कुछ सोच ही रही थी की महेन्द्र बोला... क्या हुवा बहू ?
आ.... बाबूजी अपने अपनी दवाई ली आज ?
महेन्द्र - ओह नहीं बहू l भूल गया l
माया बेड के पास खड़ी हुई, महेन्द्र भी जैसे ही बैठने के लिए चादर हटाया माया को वो अनजानी अजीब सी महक और तेज सुंघाई दी l
माया तुरंत पहचान गई... (अपने मन mein)...उफ़ ये तो वीर्य की स्मेल है, यहाँ kaise.. ??
माया ने चुपके से अपना गाउन सूंघा...उसे लगा शायद मानस का वीर्य की smell उसकी बॉडी से आ रही है l... यहाँ से to.नहीं आ रही मैं तो सब साफ़ कर दी थी.. और ये स्मेल तो बहुत strong है l जैसे ताज़ा निकला हुवा वीर्य l
तो क्या बाबूजी नहीं nahi nahi...
लेकिन क्यों नहीं हो सकता... हो ना हो बाबूजी अपनी पत्नी को मिस कर रहे hain... ओह मैं ये क्या सोच रही हूँ l... माया दुबारा बोली
माया - बाबूजी आप लिविंग हॉल में बैठिये मैं अभी लाती हूं दवाई l
महेन्द्र - ओके बहू,
महेन्द्र बेड से उठकर सीधा लिविंग hall में आ gaya.. माया किसी जासूस की तरह चादर उठा के सूंघी... वही smell, उसका धयान बेड पे गया जहाँ महेन्द्र का ताज़ा वीर्य गिरा था. वो देखते ही समझ गई फिर भी confirm करने के लिए वो झुक के स्मेल कीl गाढ़े मुट्ठ की smell मानस के मुट्ठ से कहीं ज्यादा थी उसे पक्का यकीन हो गया l
माया सोचने लगी लगता है बाबूजी सच mein सासू मां को बहुत मिस कर रहे hain....... बेचारे l मैं और मानस तो सेक्स के बगैर बिलकुल नहीं रह पाते और मानस भी तो जब मैं नहीं होती तो हाथ से ही वीर्य निकालते हैं l
शायद बाबूजी भी बहुत मजबूर हैं और हाथ से ही काम चला रहे हैं l अब समझी क्यों बोल रहे थे dinner के टाइम की घर जाना है l
माया ऐसे खुश हो रही थी जैसे उसने कोई क्राइम केस solve कर लिया हो l
महेन्द्र - लिविंग हॉल से... क्या हुवा बहू l
माया - (माया का ध्यान toota).....आ आ आयी बाबूजी ll
माया jhatpat dava ली और लिविंग हॉल की तरफ बढ़ चली l
महेन्द्र उसे आते हुवे चोदने वाली नज़र से देख रहा था, ख़ास कर कमर से नीचे का हिस्सा जहाँ माया ने जन्नत छुपा रखी थी गाउन के अंदर l
सोफे पे बैठा महेन्द्र लेकिन उसका लंड बिलकुल सीधा था खड़ा हवा में l
माया - ये लीजिये बाबूजी l
महेन्द्र दवा लिया और पूछा क्यों बहू तुम्हे नींद नहीं आ रही... क्या कर रही थी l(महेन्द्र का question में शरारत थी )
माया - कुछ नहीं बाबूजी बातें कर रही थी l
महेन्द्र - आ ना मेरे पास बैठ, मुझसे बातें नहीं करेगी ? आज मुझे भी नींद नहीं आ रही l
माया - जी बाबूजी क्यों नहीं.... l
महेंद्र - मानस क्या कर रहा है l
माया - वो सो गए बाबूजी l
मानस तो शॉक में कुछ भी बोल नहीं पा रहा था l
भाग 9
डिनर के बाद मानस और माया दोनों ही खुश थे वो अपने कमरे में बैठे बातें कर रहे थे l कुछ देर बातें करने के बाद मानस शॉर्ट्स पहन के बेड पे वापस आता है, माया भी बाल खोल कर बिस्तर पे आ गई l कमरे में हल्की रोशिनी छाई थी l
मानस माया को बाँहों में ले कर बेड पे लिटा देता है, होठों को चूमते हुवे उसके हाथ माया के बूब्स पे फिसल रहे थे l गाउन के अंदर ब्रा में माया के बूब काफी उभरे नज़र आ रहे थे l
मानस - आज तो तुमने कमाल कर दिया l
माया - kyon? तुम्हे अपना माल मेरे मुंह में गिराने दी इसलिए बोल रहे हो ?
मानस - हाँ इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया माया, वैसे मेरे वीर्य का स्वाद कैसा लगा तुम्हे ?
माया - अच्छा था गरम नमकीन सा गाढ़ा पानी (माया खिलखिलाई )
मानस माया के ऊपर चढ़ उसे रोंदने लगा, माया उसे धकेलती लेकिन मानस तो उसे अच्छे से दबोच लिया था l माया के गाउन के सारे बटन खोल दिए, गाउन ढीला होने के कारण मानस को अंदर हाथ डालने mein कोई परेशानी नहीं हुई वो बड़ी asani से ब्रा उठा दियाl ब्रा उठाते ही माया के गोरे बूब बाहर को आ गए l

मानस नंगे बूब को अपनी आँखों के सामने पा कर खुद को रोक नहीं पाया और नीचे झुक कर उसने माया के नंगे बूब को मुँह में भर लिया l वो दूसरे बूब को हाथों से मसलते हुवे मुहँ से जीभ निकाल माया के निप्पल पे घूमाने लगा l माया अब गरम होने लगी थी, उसकी सिसकारी निकलने लगी l
वो वासना की मस्त में मानस को अपने बूब्स पीला रही थी l
मस्ती में वो एक लम्बी सी moan की..
आआआअह्ह्ह्हह..... maaaanaaaas......
मानस माया की moan सुन उसके मुहँ पे हाथ रखा तो माया ने उसका हाँथ हटा दिया और जोर से moan करने लगी ....
aaaaaaaaaaahhhhhhhh ssssssssss aaaaaaahhhhhhhhhh maaaaaanaaaaas aaaaaaaannnnhhhhhhhh
मानस रुकते हुवे, क्या कर रही हो माया... बगल के रूम में पापा हैं l
माया - (मानस को चिढ़ाते हुवे ) तो क्या हो गया.. उस दिन तो वो दूध वाले काका को तुम मेरी आह सुनाना चाहते थे तुम्हे बड़ा मज़ा आ रहा था तो अब क्या हुवा l
माया और जोर से आह भरी l..... Sssss आआह्ह्ह्हह
मानस - तुम पागल हो गई हो l
माया - (हँसते हुवे ) अरे बुद्धू door बंद है और बाबूजी 10 बजे तक सो जाते hain l तुम करो ना.... माया सेक्स के लिए बहुत उतावली थी l
अपने कोमल निप्पल पे मानस के मुँह की गर्मी पाकर माया खुल के बेशर्मी से moan करने लगी l
उधर महेन्द्र अपने कमरे में बेड पे लेटा था, जब उसे चूड़ियों की खनखनाहट और माया की आह सुनाई दी l उसने सोचा माया और मानस कहीं झगड़ा तो नहीं कर रहे l वो कमरे से बाहर आया चूड़ियों और माया की moaning तेज हो गई वो dabey पाओं door के करीब आया तो उसके होश उड़ गए l
माया मानस से आग्रह कर रही थी...
माया - आह ससस मानस... एक ही को चुसते rahoge क्या ?? मेरी दूसरी बूब को भी तो पियो l
अपने कानो में बहू के उत्तेजक शब्द सुनते ही महेन्द्र के पाओं जम से गए l पायजामा के अंदर उसका लंड मुँह उठाने लगा l
अब चूड़ियों की आवाज़ एक रीदम में आ रही थी, महेन्द्र दोनों की पोजीशन imagine करने लगा मानस के मुँह से बस उमम की आवाज़ अा रही, इसका मतलब बहू की चूची उसके मुँह में है, और लगातार आ रही चूड़ियों की आवाज़ मतलब बहू मानस का लंड पकड़ हिला रही है l
महेन्द्र वासना से भर उठा उसे अपनी बहू का नंगा शरीर देखने की लालसा बढ़ चली थी, मगर कैसे... वो इधर उधर कोई छेद ढूंढ़ता रहा लेकिन कोई फ़ायदा नहीं एक key होल था भी तो उससे बेड की सिर्फ साइड देखा जा सकता था l समय बीतता जा रहा था उसे डर था की कहीं दोनों बाहर ना आ जाएं l तभी उसे door के ऊपर एक gap दिखा, वो बेचैनी से आस पास नज़रें दौड़ाया तो उसे एक चेयर दिखाई दी l
बड़ी सावधानी से वो chair उसने door ke पास लगाया l महेन्द्र को डर तो बहुत था कहीं बेटे बहू ने उसे ऐसा करते देख लिया तो वो जीवन भर उनसे आँख नहीं mila पायेगाl इन सब के बावजूद महेन्द्र की वासना उसके डर पे हावी थी l
वो चुपके से चेयर के ऊपर चढ़ा और अंदर धीमी रोशनी में जो उसने देखा, उसने शायद अपने जीवन में कभी नहीं देखा था l
बहू सर से पाऊँ तक पूरी नंगी थी वो doggy स्टाइल में बेड पे झुकी थी और मानस उसे पीछे से कमर पकड़ चोद रहा था l बहू की नंगी गांड में मानस का लंड लगातार अंदर बाहर हो रहा था l बहू को नंगा देखते हुवे महेन्द्र ने चेयर पे खड़े खड़े झटपट पायजामा नीचे कर दिया और लंड बाहर निकाल मुट्ठ मारते हुवे वो हवा में कमर हिलाने लगा जैसे की वो भी बहू को चोद रहा हो l
अन्दर मानस कभी माया को chodata kabhi उसकी चूत चाटता तो कभी अपना लंड उसके मुँह में डालता l माया भी आज भरपूर साथ दे रही थी l महेंद्र सब देख रहा था उसे तो मानो अपनी आँख पे यकीन नहीं था सबकुछ सपना जैसा लग रहा था l माया किसी रंडी की तरह सेक्स का मज़ा ले रही थी, मध्यम रौशनी में भी माया का gora बदन चमक रहा था l महेन्द्र हल्की रोशिनी में साफ़ साफ़ तो नहीं देख paya लेकिन बहू के शरीर का कटाव, उसकी चौड़ी गांड, मोटी दोनों जांघ और गदराया बदन उसके लंड में बेतहाशा हलचल मचा रही थी l

माया कस कस के चुदवाती रही, गांड पे मानस का लंड फट फट ki आवाज़ के साथ टकरा रहा रहा था l
थोड़ी देर चुदाई के बाद बाद मानस अपने लंड का माल माया के face पे छोड़ देता है l माया मुट्ठ से नहा ली थी, उसकी फेस पे मानस वीर्य की लम्बी लम्बी धार छोड़ रहा था... माया चेहरे पे लगे मुट्ठ को उँगलियों से पोछ चाट रही thi.

महेन्द्र को पता नहीं था की उसकी संस्कारी बहू इतनी ज्यादा चुदक्कड़ है जो मुट्ठ को भी चाट के मज़ा लेती है l ये सब देख अब उसका भी पानी निकलने वाला ही था...वो माया का नंगा बदन देखते हुवे मुट्ठ मार रहा था, जैसे ही उसका क्लाइमेक्स आया उसने लंड को पायजामा के अंदर डाल दिया l लंड का ढेर सारा पानी पायजामा के अंदर ही बह गया l उसके बाद
Chair साइड में रख वो भीगे पायजामा में ही दबे अपने कमरे में आ गया l
बिस्तर पे लेटे हुवे महेन्द्र की आँखों के सामने बस उसकी बहू का नंगा शरीर था l उसकी चुदासी हरकत बार बार महेन्द्र के आँखों के सामने घूम रही थी l वो दुबारा गीले पायजामा में हाथ डाल लंड को सहलाने लगा l महेन्द सोचने लगा आज कल की लड़कियाँ कितना खुल गई हैं सेक्स का पूरा मज़ा लेती हैं l और बहू तो उफ़.... कितना चुदवा रही थी क्या वो और भी मर्दों से chudi होगी ? महेन्द्र के मन में हज़ारों सवाल थे l
बहू की चौड़ी गांड पे मानस का लंड कैसे थप थप कर रहा था... ओह........बहू मेरा भी लंड ले ले अपनी प्यासी बुर में l बोलते huwe... आआअह्ह्ह्हह.... बहू...... ये दूसरी बार था जब महेन्द्र के लंड ने पिचकारी छोड़ दी l
2 बार झड़ने के बाद भी महेन्द्र का लंड खड़ा था, होता भी क्यों नहीं उसने जो देखा था वो वाकई मज़ा से भरा था l

महेन्द एक पल के लिए भी माया को बहू की तरह नहीं सोचता बल्कि उसे एक गरम बदन की मालकिन की तरह देखता l उसे तो बस बहू की बुर चोदना था l करीब 1 घंटा बीत चूका था लंड का तनाव ख़त्म ही नहीं हो रहा था की तभी माया के बैडरूम का door खुला और चूड़ियों की आवाज़ आयी l
ये बहू इस वक़्त... उफ़ उसने पास पड़े चादर को अपने ऊपर खींच लियाl
माया महेन्द्र के कमरे की तरफ ही आ रही थी l
माया - धीमी आवाज़ में... बाबूजी... बाबूजी...
महेन्द्र करवट लिए हुवे था l माया जैसे ही कमरे में आयी उसकी नथुनों में जैसे कोई जानी पहचानी महक समां गई,,, वो नाक पे ऊँगली रख कुछ सोच ही रही थी की महेन्द्र बोला... क्या हुवा बहू ?
आ.... बाबूजी अपने अपनी दवाई ली आज ?
महेन्द्र - ओह नहीं बहू l भूल गया l
माया बेड के पास खड़ी हुई, महेन्द्र भी जैसे ही बैठने के लिए चादर हटाया माया को वो अनजानी अजीब सी महक और तेज सुंघाई दी l
माया तुरंत पहचान गई... (अपने मन mein)...उफ़ ये तो वीर्य की स्मेल है, यहाँ kaise.. ??
माया ने चुपके से अपना गाउन सूंघा...उसे लगा शायद मानस का वीर्य की smell उसकी बॉडी से आ रही है l... यहाँ से to.नहीं आ रही मैं तो सब साफ़ कर दी थी.. और ये स्मेल तो बहुत strong है l जैसे ताज़ा निकला हुवा वीर्य l
तो क्या बाबूजी नहीं nahi nahi...
लेकिन क्यों नहीं हो सकता... हो ना हो बाबूजी अपनी पत्नी को मिस कर रहे hain... ओह मैं ये क्या सोच रही हूँ l... माया दुबारा बोली
माया - बाबूजी आप लिविंग हॉल में बैठिये मैं अभी लाती हूं दवाई l
महेन्द्र - ओके बहू,
महेन्द्र बेड से उठकर सीधा लिविंग hall में आ gaya.. माया किसी जासूस की तरह चादर उठा के सूंघी... वही smell, उसका धयान बेड पे गया जहाँ महेन्द्र का ताज़ा वीर्य गिरा था. वो देखते ही समझ गई फिर भी confirm करने के लिए वो झुक के स्मेल कीl गाढ़े मुट्ठ की smell मानस के मुट्ठ से कहीं ज्यादा थी उसे पक्का यकीन हो गया l
माया सोचने लगी लगता है बाबूजी सच mein सासू मां को बहुत मिस कर रहे hain....... बेचारे l मैं और मानस तो सेक्स के बगैर बिलकुल नहीं रह पाते और मानस भी तो जब मैं नहीं होती तो हाथ से ही वीर्य निकालते हैं l
शायद बाबूजी भी बहुत मजबूर हैं और हाथ से ही काम चला रहे हैं l अब समझी क्यों बोल रहे थे dinner के टाइम की घर जाना है l
माया ऐसे खुश हो रही थी जैसे उसने कोई क्राइम केस solve कर लिया हो l
महेन्द्र - लिविंग हॉल से... क्या हुवा बहू l
माया - (माया का ध्यान toota).....आ आ आयी बाबूजी ll
माया jhatpat dava ली और लिविंग हॉल की तरफ बढ़ चली l
महेन्द्र उसे आते हुवे चोदने वाली नज़र से देख रहा था, ख़ास कर कमर से नीचे का हिस्सा जहाँ माया ने जन्नत छुपा रखी थी गाउन के अंदर l
सोफे पे बैठा महेन्द्र लेकिन उसका लंड बिलकुल सीधा था खड़ा हवा में l
माया - ये लीजिये बाबूजी l
महेन्द्र दवा लिया और पूछा क्यों बहू तुम्हे नींद नहीं आ रही... क्या कर रही थी l(महेन्द्र का question में शरारत थी )
माया - कुछ नहीं बाबूजी बातें कर रही थी l
महेन्द्र - आ ना मेरे पास बैठ, मुझसे बातें नहीं करेगी ? आज मुझे भी नींद नहीं आ रही l
माया - जी बाबूजी क्यों नहीं.... l
महेंद्र - मानस क्या कर रहा है l
माया - वो सो गए बाबूजी l
महेन्द्र - आ ना मेरे पास बैठ, मुझसे बातें नहीं करेगी ? आज मुझे भी नींद नहीं आ रही l
माया - जी बाबूजी क्यों नहीं.... l
महेंद्र - मानस क्या कर रहा है l
माया - वो सो गए बाबूजी l
माया सोफे पे महेन्द्र के बगल में बैठ जाती है l
माया को पता था की बाबूजी सासू माँ को miss कर रहे हैं l
माया - क्या हुवा बाबूजी, सासू माँ की याद आ रही है ?
महेन्द्र - हाँ बहू, काफी दिन हो गए l कबतक तुम्हारे ऊपर बोझ बना रहूँगा l
(माया बड़े प्यार से बाबूजी को देखती है और कहती है )
माया - बोझ कहाँ बाबूजी उल्टा मैं आपका ध्यान नहीं रख पाती सासू माँ की तरह इसलिए आप जाना चाहते हैं हैं na?
(माया दुलार में बोली )
महेन्द्र - अरे नहीं बहू तू तो मेरी बेटी से बढ़कर है (महेन्द्र ने ये बात माया के करीब आकर उसकी गाल पे हाथ लगा के बोला था )
माया भी दुलार में पास आ जाती है महेन्द्र उसकी कंधे पे हाथ रख देता है l
उसकी बाहँ सहलाते वो माया की लम्बी लटक रही कान के झुमको से खेलता है l
महेन्द्र - बहू तुम खुश तो हो ना...
माया - हाँ बाबूजी l
महेन्द्र - मेरा बेटा थोड़ा नासमझ है बात बात पे गुस्सा हो जाता है l उसकी बातों का बुरा ना माना करो l एक बात पूछूं अगर तुम बुरा ना मानो तो l
माया - पूछिए ना बाबूजी l
महेन्द्र - बहू... मानस तुम्हे प्यार तो करता है ना ? मैं जब कमरे में था तो तुम्हारी आवाज़ आ रही थी.. क्या तुम दोनों झगड़ा कर रहे थे ?
(महेन्द्र सब जानते हुवे भी बड़े भोलेपन से सवाल किया )
माया शर्म से लाल हो गई... उसे समझ नहीं आ रहा था की सवाल का क्या उत्तर देl फिर वो बहाना की l
माया - ओह वो वो तो बाबूजी मेरे पैर में हल्का दर्द था तो मानस मेरी मालिश कर रहे थे l (माया को जल्दी में कोई और बहाना नहीं सूझा )
महेन्द्र - ओह बहू तू दिनभर इतना काम करती है अपना ध्यान रखा कर l कुछ दवा ली l
माया - नहीं बाबूजी उसकी जरुरत नहीं l
महेन्द्र - अरे कैसे जरुरत नहीं है, रुक मैं तेरे लिए एक दवा लाता हूं, मेरे पैरों में दर्द होता था तो एक पहचान के डॉ ने मुझे एक दवा prescribe किया l बहुत फैयदा हुवा उस दवा से, रुको बहू लाता हूं l
माया मना करती रही मगर महेन्द्र अपने कमरे में आ गया... बैग से एक दवा लेकर वापस माया के करीब आया l
ये लो बहू ये दवा पी लो सब दर्द ठीक हो जायेगा l माया को समझ नहीं आया क्या बोले वो तो बहाना की थी तो फिर एक और झूठ बोली l
माया - ओह बाबूजी ये तो आयुर्वेदिक दवा है, और मुझे आयर्वेद से एलर्जी है l इसलिए main ये दवा नहीं ले सकती l
महेन्द्र - ओह बहू तो और कोई दवा तो नहीं है मेरे पास (महेन्द्र उदास मन से बोला )
माया अपने ससुर को अपने लिए इतना परेशान देख भावुक सी हो गई l
माया - बाबूजी आप इतना क्यों परेशान हैं, main ठीक हूं l आप बैठिये (माया ये बात महेन्द्र का हाथ पकड़ बोली थी )
महेन्द्र इस बार माया से रगड़ के बैठा ख़ास कर माया की मोटी जांघ महेन्द्र की जांघो से चिपक सी गई थी l
महेन्द्र के शरीर में तो जैसे गरम खून दौड़ गया l माया की मांसल जांघ भी काफी गरम फील हो रही थी l वो सोच में डूब गया उसकी आँखों के सामने कुछ देर पहले का दृश्य उमड़ उठा जब माया अपनी भारी जांघ फैलाये मानस को बीच में ली थी और जोश में कमर hilaate चुदवा रही थी l सोचते ही लंड हवा में उठ गया, महेन्द्र एक हाथ से अपना erection छुपाने की नाकाम कोशिश किया l
माया थोड़ी असमंजस सी महेन्द्र के टांगों के बीच देखी तो उसे वहां उनका लंड हरकत करते दिखा साथ ही माया की नज़र वहाँ भीगे पायजामा पे भी पड़ी l माया के लिए ये काफी अजीब था एक अधेड़ उम्र का आदमी जो उसका ससुर है बिलकुल पास बैठा है और अपने शरारती लंड को छिपा रहा है, माया मन में सोच थोड़ा सा मुस्कुरा भी दी l
माया अपने ससुर को अकेला छोड़ना ही मुनासिब समझा, वो महेन्द्र से बोली l
माया - अच्छा बाबूजी सो जाइये अब, (कह के वो उठने वाली ही थी की महेन्द्र ने उसे रोकते हुवे अपना हाथ अनायास ही उसकी मांसल जांघो पे रख दिया l माया के बदन में तो जैसे करंट सा दौड़ गया l
महेन्द्र - बैठो ना बहू, अभी तो बैठना चाहती थी तुम l
अचानक ही सही मगर एक ससुर ने बहू की जांघ पे हाथ रख दिया था l सख्त हांथों का स्पर्श माया के बदन में भी झुरझुरी पैदा कर दिया l उसकी दिल की धड़कन तेज़ थी, उसने नज़रें नीची कर देखा तो महेन्द्र का लंड पायजामा में ऊपर नीचे हो रहा था l
माया - मुझे लगा आपको नींद आ रही है l
महेन्द्र - नहीं बहू नींद तो बिलकुल नहीं आ रही मुझे (महेन्द्र हिम्मत करके हाथ जांघ पे ही रहने दिया l जवान औरत की जांघ वो भी अपनी बहू की उफ्फ्फ... patle गाउन में महेन्द्र को ऐसा लग रहा था जैसे वो बहू की नंगी जांघ छू रहा हो l
महेन्द्र हल्का सा हाँथ बहू की जांघ पे फेरा और bola.. बहू तुम्हारा गाउन बहुत सुन्दर है l
माया कुछ ना बोल पाई उसने बस हामी में सर हिला दिया l महेन्द्र ने दुबारा सवाल किया.. बहू तुम क्या सोते हुवे हर रोज यही गाउन पहनती हो ?
माया कुछ समझ नहीं पा रही थी, आज बाबूजी मुझसे इतने प्राइवेट सवाल क्यों पूछ रहे हैं l या फिर सवाल नार्मल है शायद rishta अलग है जिससे वो इन सवालों से थोड़ी असहज थी l
माया ने फिर भी जवाब दिया... नहीं बाबूजी कुछ भी पहन के सो जाती हूं कल कुर्ती लेग्गिंग पहनी थी तो वही पहने सो गई l लेग्गिंग की बात सुनते ही महेन्द्र के आँखों के सामने माया की बड़ी गांड का मंज़र याद आ गया l
उसने हाथ का दबाव बढ़ाते हुवे कहा... ओह हाँ बहू... वैसे तुम कल बहुत सुन्दर लग रही थी.. ख़ास कर... (महेन्द्र कहते कहते रुक सा गया )
माया अपनी तारीफ सुन बहुत खुश हो गई और शर्मायी भी...कोई भी लड़की अपनी तारीफ सुन खुश हो जाती है चाहे कोई भी हो... लेकिन वहीँ महेन्द्र की अधूरी बात उसके मन में जिज्ञासा को जगा दी... क्या बाबूजी..?? वो सुनाना चाहती थी की बाबूजी क्या बोलना चाहते हैं l
महेन्द्र - बहुत सुन्दर लग रही थी tum...
माया - बेसब्री दिखाते हुवे लेकिन आप क्या बोल रहे थे क्या ख़ास...
महेन्द्र - वो वो..... तुम तुम... पे लेग्गिंग्स काफी अच्छी लगती है l महेन्द्र बिना रुके एक सांस में बोल गया l
(माया को भली भांति पता था की लेग्गिंग में कमर के नीचे का भाग उभर के दिखता है और कॉलेज में तो लड़कियाँ भी उसकी hip की साइज से जलती थीं l माया को तो बहुत लड़कों ने उसके curvy फिगर की तारीफ की थी आज पहली बार किसी उम्रदराज़ व्यक्ति के मुँह से अपनी तारीफ सुन वो फुले नहीं समा रही थी l)
माया - एक बात कहूं बाबूजी l
महेन्द्र - हाँ बोलो बहू l
माया - मैं ना शादी से पहले हमेशा सोचती थी की मेरा ससुराल कैसा होगा ससुराल के लोग कैसे होंगे क्या मुझे फ्रीडम मिलेगी क्या मैं मनचाहा काम कर सकूंगी मनचाहा कपड़े पहन सकूंगी, लेकिन मैं किस्मत वाली हूं जो आप जैसा पिता सामान ससुर मिला मुझे l(माया ये बात महेन्द्र के करीब आकर उनकी आँखो में देखते हुवे बोली )
महेन्द्र - ओह बहू मैंने कहा na.. तू तो मेरी बहू नहीं बेटी है l (महेन्द्र कहते हुवे माया की कमर में हाथ डाल उसे अपनी ओर खींच लिया, माया सम्भलते सम्भलते भी महेन्द्र के सीने पे आ गई, उसकी दायीं बूब महेन्द्र के सीने से सट गई l)
माया ससुर के साथ इतने करीब कभी नहीं बैठी ना ही कभी वो इस तरह प्यार भरी बातें की थी, वो असहज सी नज़रें अपने bedroom की तरफ घुमाई उसे डर था की कहीं मानस ना आ जाए l ऐसा नहीं था की वो कुछ गलत कर रही थी उसे तो बस चिंता थी की मानस उसे ससुर के इतना करीब देख गलत ना समझ ले l तभी महेन्द्र माया की कमर पे हाँथ फेरता बोला l
महेन्द्र - बहू... मानस सो रहा है ना.. ? कहीं ऐसा तो नहीं की hum इधर बातें कर रहे हो और उसकी नींद ख़राब हो l
माया - पता नहीं बाबूजी l
महेन्द्र - उसे disturb होगा बहू.. तू एक काम कर दरवाजा बाहर से बंद करके आ जा l
(महेन्द्र ने जैसे माया की मन की बात पढ़ ली हो इस situation में माया को भी यही बात अच्छी लगी )
वो हामी भरती हुई उठ कर door के पास आयी देखा तो मानस सो रहा था वो धीरे से door खींची अजीब सी feeling थी माया के मन में उस वक़्त जैसे कोई पाप करने जा रही हो... और नहीं भी.... आखिरकार वो मानस को बेवजह किसी परेशानी में नहीं पड़ने देना चाहती थी l
माया - जी बाबूजी क्यों नहीं.... l
महेंद्र - मानस क्या कर रहा है l
माया - वो सो गए बाबूजी l
भाग 10
माया सोफे पे महेन्द्र के बगल में बैठ जाती है l
माया को पता था की बाबूजी सासू माँ को miss कर रहे हैं l
माया - क्या हुवा बाबूजी, सासू माँ की याद आ रही है ?
महेन्द्र - हाँ बहू, काफी दिन हो गए l कबतक तुम्हारे ऊपर बोझ बना रहूँगा l
(माया बड़े प्यार से बाबूजी को देखती है और कहती है )
माया - बोझ कहाँ बाबूजी उल्टा मैं आपका ध्यान नहीं रख पाती सासू माँ की तरह इसलिए आप जाना चाहते हैं हैं na?
(माया दुलार में बोली )
महेन्द्र - अरे नहीं बहू तू तो मेरी बेटी से बढ़कर है (महेन्द्र ने ये बात माया के करीब आकर उसकी गाल पे हाथ लगा के बोला था )
माया भी दुलार में पास आ जाती है महेन्द्र उसकी कंधे पे हाथ रख देता है l
उसकी बाहँ सहलाते वो माया की लम्बी लटक रही कान के झुमको से खेलता है l
महेन्द्र - बहू तुम खुश तो हो ना...
माया - हाँ बाबूजी l
महेन्द्र - मेरा बेटा थोड़ा नासमझ है बात बात पे गुस्सा हो जाता है l उसकी बातों का बुरा ना माना करो l एक बात पूछूं अगर तुम बुरा ना मानो तो l
माया - पूछिए ना बाबूजी l
महेन्द्र - बहू... मानस तुम्हे प्यार तो करता है ना ? मैं जब कमरे में था तो तुम्हारी आवाज़ आ रही थी.. क्या तुम दोनों झगड़ा कर रहे थे ?
(महेन्द्र सब जानते हुवे भी बड़े भोलेपन से सवाल किया )
माया शर्म से लाल हो गई... उसे समझ नहीं आ रहा था की सवाल का क्या उत्तर देl फिर वो बहाना की l
माया - ओह वो वो तो बाबूजी मेरे पैर में हल्का दर्द था तो मानस मेरी मालिश कर रहे थे l (माया को जल्दी में कोई और बहाना नहीं सूझा )
महेन्द्र - ओह बहू तू दिनभर इतना काम करती है अपना ध्यान रखा कर l कुछ दवा ली l
माया - नहीं बाबूजी उसकी जरुरत नहीं l
महेन्द्र - अरे कैसे जरुरत नहीं है, रुक मैं तेरे लिए एक दवा लाता हूं, मेरे पैरों में दर्द होता था तो एक पहचान के डॉ ने मुझे एक दवा prescribe किया l बहुत फैयदा हुवा उस दवा से, रुको बहू लाता हूं l
माया मना करती रही मगर महेन्द्र अपने कमरे में आ गया... बैग से एक दवा लेकर वापस माया के करीब आया l
ये लो बहू ये दवा पी लो सब दर्द ठीक हो जायेगा l माया को समझ नहीं आया क्या बोले वो तो बहाना की थी तो फिर एक और झूठ बोली l
माया - ओह बाबूजी ये तो आयुर्वेदिक दवा है, और मुझे आयर्वेद से एलर्जी है l इसलिए main ये दवा नहीं ले सकती l
महेन्द्र - ओह बहू तो और कोई दवा तो नहीं है मेरे पास (महेन्द्र उदास मन से बोला )
माया अपने ससुर को अपने लिए इतना परेशान देख भावुक सी हो गई l
माया - बाबूजी आप इतना क्यों परेशान हैं, main ठीक हूं l आप बैठिये (माया ये बात महेन्द्र का हाथ पकड़ बोली थी )
महेन्द्र इस बार माया से रगड़ के बैठा ख़ास कर माया की मोटी जांघ महेन्द्र की जांघो से चिपक सी गई थी l
महेन्द्र के शरीर में तो जैसे गरम खून दौड़ गया l माया की मांसल जांघ भी काफी गरम फील हो रही थी l वो सोच में डूब गया उसकी आँखों के सामने कुछ देर पहले का दृश्य उमड़ उठा जब माया अपनी भारी जांघ फैलाये मानस को बीच में ली थी और जोश में कमर hilaate चुदवा रही थी l सोचते ही लंड हवा में उठ गया, महेन्द्र एक हाथ से अपना erection छुपाने की नाकाम कोशिश किया l
माया थोड़ी असमंजस सी महेन्द्र के टांगों के बीच देखी तो उसे वहां उनका लंड हरकत करते दिखा साथ ही माया की नज़र वहाँ भीगे पायजामा पे भी पड़ी l माया के लिए ये काफी अजीब था एक अधेड़ उम्र का आदमी जो उसका ससुर है बिलकुल पास बैठा है और अपने शरारती लंड को छिपा रहा है, माया मन में सोच थोड़ा सा मुस्कुरा भी दी l
माया अपने ससुर को अकेला छोड़ना ही मुनासिब समझा, वो महेन्द्र से बोली l
माया - अच्छा बाबूजी सो जाइये अब, (कह के वो उठने वाली ही थी की महेन्द्र ने उसे रोकते हुवे अपना हाथ अनायास ही उसकी मांसल जांघो पे रख दिया l माया के बदन में तो जैसे करंट सा दौड़ गया l
महेन्द्र - बैठो ना बहू, अभी तो बैठना चाहती थी तुम l
अचानक ही सही मगर एक ससुर ने बहू की जांघ पे हाथ रख दिया था l सख्त हांथों का स्पर्श माया के बदन में भी झुरझुरी पैदा कर दिया l उसकी दिल की धड़कन तेज़ थी, उसने नज़रें नीची कर देखा तो महेन्द्र का लंड पायजामा में ऊपर नीचे हो रहा था l
माया - मुझे लगा आपको नींद आ रही है l
महेन्द्र - नहीं बहू नींद तो बिलकुल नहीं आ रही मुझे (महेन्द्र हिम्मत करके हाथ जांघ पे ही रहने दिया l जवान औरत की जांघ वो भी अपनी बहू की उफ्फ्फ... patle गाउन में महेन्द्र को ऐसा लग रहा था जैसे वो बहू की नंगी जांघ छू रहा हो l
महेन्द्र हल्का सा हाँथ बहू की जांघ पे फेरा और bola.. बहू तुम्हारा गाउन बहुत सुन्दर है l
माया कुछ ना बोल पाई उसने बस हामी में सर हिला दिया l महेन्द्र ने दुबारा सवाल किया.. बहू तुम क्या सोते हुवे हर रोज यही गाउन पहनती हो ?
माया कुछ समझ नहीं पा रही थी, आज बाबूजी मुझसे इतने प्राइवेट सवाल क्यों पूछ रहे हैं l या फिर सवाल नार्मल है शायद rishta अलग है जिससे वो इन सवालों से थोड़ी असहज थी l
माया ने फिर भी जवाब दिया... नहीं बाबूजी कुछ भी पहन के सो जाती हूं कल कुर्ती लेग्गिंग पहनी थी तो वही पहने सो गई l लेग्गिंग की बात सुनते ही महेन्द्र के आँखों के सामने माया की बड़ी गांड का मंज़र याद आ गया l
उसने हाथ का दबाव बढ़ाते हुवे कहा... ओह हाँ बहू... वैसे तुम कल बहुत सुन्दर लग रही थी.. ख़ास कर... (महेन्द्र कहते कहते रुक सा गया )
माया अपनी तारीफ सुन बहुत खुश हो गई और शर्मायी भी...कोई भी लड़की अपनी तारीफ सुन खुश हो जाती है चाहे कोई भी हो... लेकिन वहीँ महेन्द्र की अधूरी बात उसके मन में जिज्ञासा को जगा दी... क्या बाबूजी..?? वो सुनाना चाहती थी की बाबूजी क्या बोलना चाहते हैं l
महेन्द्र - बहुत सुन्दर लग रही थी tum...
माया - बेसब्री दिखाते हुवे लेकिन आप क्या बोल रहे थे क्या ख़ास...
महेन्द्र - वो वो..... तुम तुम... पे लेग्गिंग्स काफी अच्छी लगती है l महेन्द्र बिना रुके एक सांस में बोल गया l
(माया को भली भांति पता था की लेग्गिंग में कमर के नीचे का भाग उभर के दिखता है और कॉलेज में तो लड़कियाँ भी उसकी hip की साइज से जलती थीं l माया को तो बहुत लड़कों ने उसके curvy फिगर की तारीफ की थी आज पहली बार किसी उम्रदराज़ व्यक्ति के मुँह से अपनी तारीफ सुन वो फुले नहीं समा रही थी l)
माया - एक बात कहूं बाबूजी l
महेन्द्र - हाँ बोलो बहू l
माया - मैं ना शादी से पहले हमेशा सोचती थी की मेरा ससुराल कैसा होगा ससुराल के लोग कैसे होंगे क्या मुझे फ्रीडम मिलेगी क्या मैं मनचाहा काम कर सकूंगी मनचाहा कपड़े पहन सकूंगी, लेकिन मैं किस्मत वाली हूं जो आप जैसा पिता सामान ससुर मिला मुझे l(माया ये बात महेन्द्र के करीब आकर उनकी आँखो में देखते हुवे बोली )
महेन्द्र - ओह बहू मैंने कहा na.. तू तो मेरी बहू नहीं बेटी है l (महेन्द्र कहते हुवे माया की कमर में हाथ डाल उसे अपनी ओर खींच लिया, माया सम्भलते सम्भलते भी महेन्द्र के सीने पे आ गई, उसकी दायीं बूब महेन्द्र के सीने से सट गई l)
माया ससुर के साथ इतने करीब कभी नहीं बैठी ना ही कभी वो इस तरह प्यार भरी बातें की थी, वो असहज सी नज़रें अपने bedroom की तरफ घुमाई उसे डर था की कहीं मानस ना आ जाए l ऐसा नहीं था की वो कुछ गलत कर रही थी उसे तो बस चिंता थी की मानस उसे ससुर के इतना करीब देख गलत ना समझ ले l तभी महेन्द्र माया की कमर पे हाँथ फेरता बोला l
महेन्द्र - बहू... मानस सो रहा है ना.. ? कहीं ऐसा तो नहीं की hum इधर बातें कर रहे हो और उसकी नींद ख़राब हो l
माया - पता नहीं बाबूजी l
महेन्द्र - उसे disturb होगा बहू.. तू एक काम कर दरवाजा बाहर से बंद करके आ जा l
(महेन्द्र ने जैसे माया की मन की बात पढ़ ली हो इस situation में माया को भी यही बात अच्छी लगी )
वो हामी भरती हुई उठ कर door के पास आयी देखा तो मानस सो रहा था वो धीरे से door खींची अजीब सी feeling थी माया के मन में उस वक़्त जैसे कोई पाप करने जा रही हो... और नहीं भी.... आखिरकार वो मानस को बेवजह किसी परेशानी में नहीं पड़ने देना चाहती थी l
उदय को बहुत ग्लानि महसूस हुई, कॉल कट गया था l उसने मोबाइल हाथ में लिया तो माया की दुबारा कॉल आने लगी, इस बार उदय ने ध्यान दिया तो पाया उसकी गाढ़ी मुठ माया के ठीक होठो पे थी l अंगूठे से जब वो मुट्ठ पोछता तो ऐसा लगता जैसे वो अपना वीर्य माया के होंठ पे रगड़ रहा हो l एक बार फिर कॉल miss हो गई l उदय का ध्यान टूटा वो मोबाइल को बिस्तर पे साफ़ किया और बगल में रख के सो गया l
अगले दिन तड़के सुबह माया के message से उदय की नींद tooti, देखा तो माया बेड पे लेटी अपनी सेल्फी भेजी थी और नीचे good morning लिखा था l
उदय ने भी जवाब में good morning बोला l
माया - क्या पापा कल रात आप जल्दी सो गए थे l
उदय - हाँ बेटी बेड पे पड़े नींद आ गई थी l तुम कब सोयी ?
माया - मैं आपका वेट की आप नहीं आये तो 1 घंटे बाद सो गई l
उदय - सॉरी बेटी l
माया - its allright, ड्रिंक तो नहीं की थी आपने ?
उदय - नहीं बेटी l
उदय - मानस से क्या बात हुई वो ठीक तो है l
माया - हाँ पापा वो ठीक हैं, काम अच्छे से कर रहे हैं l
उदय - miss करती होगी तू..
maya - हाँ पापा मिस तो करती हूँ l आप करते हैं मम्मी को miss
उदय - बिलकुल बेटी रोज करता हूँ l
माया - हम्म बस मुझे मिस नहीं कारते l
उदय - ये कैसी बात कर रही हो tum, तुम्हे भी बहुत मिस करता हूँ l शादी के बाद से tujhse मिला भी नहीं हूँ l
माया - हम्म i miss you too papa, अच्छा मैं दोपहर को फ़ोन करुँगी आज एक फ्रेंड के साथ शॉपिंग जा रही हूँ l
उदय - ओके बेटी मैं वेट करूँगा l
माया - मैं आपसे whatsapp पे चैट करती रहूंगी okay?
उदय - ओके बेटी l
फ़ोन पे बात करने के बाद माया ब्लैंकेट के अंदर पापा की बात सोचने लगी जो उन्होंने मानस को मिस करने की कही थी l वाकई मानस को गए आज 1 वीक हो गया था और वो अब उसे मिस करने लगी थी l
वो करवट होकर अपनी एक सेल्फी ली और मानस को भेज दी l मानस का तुरंत रिप्लाई आया... बहुत अच्छी लग रही हो l
माया - क्या कर रहे हो ?
मानस - बेड पे लेता हूँ, तुम्हे मिस कर रहा हूँ l
माया - झूठे l
मानस - सच माया... यकीं नहीं होता ?
माया - नहीं तुम झूठे हो l
मानस - देखो कितना मिस कर रहा हूँ तुम्हे l (मानस ने अपने खड़े लंड की तस्वीर भेज दी थी )

माया - ओह माँ ये क्या ? सुबह ही l
मानस - अरे माया तुम तो जानती हो ना हम लड़कों का प्रॉब्लम, सभी लड़कों का सुबह सुबह लंड खड़ा रहता है और चूत के लिए बेचैन l
माया - तो बेचैनी क्यों बढ़ा रहे हो l
मानस - क्या करूँ, तुम मेरे पास नहीं हो l
माया - मुझे imagine कर लो अपने पास.... अपने बिस्तर पे (माया सरसराहट भरी आवाज़ में बोली )
मानस - आह माया आओ मेरी बाँहों में l
माया - लो आ गई, तुम्हे किस कर रही हूँ l
मानस - उम्म्म मैं ब्रा के ऊपर से तुम्हारे बूब्स दबा रहा हूँ l
माया - ब्रा के ऊपर से क्यों ? ब्रा खोल के दबाव ना l
(हमेशा की तरह माया मानस का भरपूर साथ दे रही थी )
मानस - आह बहुत मज़ा दे रही हो तुम माया....
माया - अच्छा maza और बढ़ाऊँ
मानस - (अपना लंड मसलते... हाँ )
माया शरारत में पहले तो अपने टॉप उतार दी फिर ब्रा भी l और एक हाथ से बूब छुपाते हुवे सेल्फी लेकर मानस को भेज दी l

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मानस मचल गया l
मानस - ओह माया... सेक्सी... उम्म्म हाथ हटाओ ना
माया - नहीं
मानस - प्लीज दिखाओ
माया उसके बाद हाथ हटा के अपनी नंगे बूब्स के फोटो भेजी l

मानस माया की नंगी निप्पल को देख कामातुर हो गया l
मानस - माया... आह्ह्ह्हह वीडियो कॉल करूँ
माया - क्यों
मानस - वीडियो कॉल पे दिखा दो सब खोल के माया l
माया - छी मैं कोई पोर्न करैक्टर हूँ
मानस - प्लीज माया
माया - नो
मानस - अच्छा सॉरी तो अपनी नंगी पिक्स ही भेज दो l
माया - हम्म
माया हामी भरते अपने सारे कपड़े उतारी और कई सारी नंगी पिक्स मानस को भेजी l
मानस सभी पिक्स को बारी बारी देख लंड रगड़ता रहा l
मानस - माया चूत का पिक्स भेजो l
माया मानस की बात मां वैसा ही किया l टाँगे फैला अपनी फूली हुई चूत का फोटो भेज दिया l

my geo com
माया की चूत देख मानस खुद को रोक नहीं पाया और जल्द ही पानी छोड़ दिया l इतना सब कर के माया का भी मूड बहुत सेक्सुअल हो गया था l वो जोश में गन्दी बातें करने लगी l
लेकिन मानस अब देर से और छोटा जवाब देता, माया तड़प रही थी चूत में ऊँगली डाल वो मानस से गंदे words की बातचीत expect कर रही थी l
माया - आह मानस चूत चाटो मेरी sssss...
उदय - मानस कुछ ही शब्द बोला..उसकी बेचैनी कम थी l.... माया एक मिनट boss का कॉल आ रहा है, जरा रुको l
माया - ओके (माया कॉल ख़त्म होने का बेसब्री से वेट करने लगी )
मगर कुछ देर बाद मानस माया से बोला की उसे ऑफिस जाना होगा जरुरी काम आ गया है l
माया अच्छी तरह समझ गई थी की मानस का पानी निकल चूका है, लेकिन वो मानस से पूछना उचित नहीं समझी l उसके बातों में ढीलापन साफ़ बता रहा था की उसका लंड भी पानी निकाल कर ढीला पड़ गया है l
वो गुस्से में फ़ोन बेड पे पटक दी, मर्द कितने सेल्फिश होते हैं पानी निकलने से पहले कितना पीछे पड़ते हैं और जैसे ही मुट्ठ निकला पराये की तरह behave करते हैं l मानस से वो चिढ़ गई थी, मगर अपना मूड ख़राब नहीं करना चाहती थी इसलिये वो टाँगे खोल फिंगरिंग करने लगी l
मानस से वो बहुत नाराज़ थी, इसलिए तो फिंगरिंग करते हुवे वो मानस
के बारे में नहीं बल्कि कार्तिक के बारे में सोच ऊँगली चूत में पेल रही थी l

मोबाइल पे कार्तिक के हॉट pics देखते हुवे वो स्खलित हो गई l चूत पानी छोड़ दी थी, वो rahat की गहरी सांस लेटे हुवे बेड पे निढाल हो गई l
कार्तिक के लंड को इमेजिन कर उसे बड़ा मज़ा आया था l आज पहली बार वो किसी एक्टर को सोचकर स्खलित हुई थी l वो छत की तरफ देखती सोचने लगी, सभी मर्द भी तो एक्ट्रेस के नाम की मुट्ठ मारते हैं l उसने हॉस्टल में लगभग सभी लड़कियों से सुना था की उनके बॉयफ्रेंड अपनी फेवरेट एक्ट्रेस की फोटो या वीडियो देख लंड से पानी निकालते हैं l और पति ने भी batatey थे l मोबाइल हाथ में लिए वो whatsapp के मैसेज देख रही थी तभी उसकी नज़र उसके अपने पापा को भेजे रात के मैसेज पे गई l
ileana dcruz वाली मैसेज को देख उसके दिमाग में हलचल hui, क्या पापा भी..... मन में कहते कहते रुक गई l
नो क्या सच में ?... हो भी सकता है... मम्मी से दूर हैं तो शायद करते होंगे l माया पागलों की तरह बेड पे लेटी.. खुद से सवाल और खुद को जवाब भी दे रही थी l थोड़ी देर उसे realize हुवा की वो पापा के बारे में ऐसा सोच रही है l वो बेड से उठी फ्रेश हुई बार बार पापा का चैट खोलती लेकिन कोई मैसेज नहीं था l आखिरकार वो अपनी फ्रेंड को कॉल की शॉपिंग पे जाने के लिए l
भाग 18
अगले दिन तड़के सुबह माया के message से उदय की नींद tooti, देखा तो माया बेड पे लेटी अपनी सेल्फी भेजी थी और नीचे good morning लिखा था l
उदय ने भी जवाब में good morning बोला l
माया - क्या पापा कल रात आप जल्दी सो गए थे l
उदय - हाँ बेटी बेड पे पड़े नींद आ गई थी l तुम कब सोयी ?
माया - मैं आपका वेट की आप नहीं आये तो 1 घंटे बाद सो गई l
उदय - सॉरी बेटी l
माया - its allright, ड्रिंक तो नहीं की थी आपने ?
उदय - नहीं बेटी l
उदय - मानस से क्या बात हुई वो ठीक तो है l
माया - हाँ पापा वो ठीक हैं, काम अच्छे से कर रहे हैं l
उदय - miss करती होगी तू..
maya - हाँ पापा मिस तो करती हूँ l आप करते हैं मम्मी को miss
उदय - बिलकुल बेटी रोज करता हूँ l
माया - हम्म बस मुझे मिस नहीं कारते l
उदय - ये कैसी बात कर रही हो tum, तुम्हे भी बहुत मिस करता हूँ l शादी के बाद से tujhse मिला भी नहीं हूँ l
माया - हम्म i miss you too papa, अच्छा मैं दोपहर को फ़ोन करुँगी आज एक फ्रेंड के साथ शॉपिंग जा रही हूँ l
उदय - ओके बेटी मैं वेट करूँगा l
माया - मैं आपसे whatsapp पे चैट करती रहूंगी okay?
उदय - ओके बेटी l
फ़ोन पे बात करने के बाद माया ब्लैंकेट के अंदर पापा की बात सोचने लगी जो उन्होंने मानस को मिस करने की कही थी l वाकई मानस को गए आज 1 वीक हो गया था और वो अब उसे मिस करने लगी थी l
वो करवट होकर अपनी एक सेल्फी ली और मानस को भेज दी l मानस का तुरंत रिप्लाई आया... बहुत अच्छी लग रही हो l
माया - क्या कर रहे हो ?
मानस - बेड पे लेता हूँ, तुम्हे मिस कर रहा हूँ l
माया - झूठे l
मानस - सच माया... यकीं नहीं होता ?
माया - नहीं तुम झूठे हो l
मानस - देखो कितना मिस कर रहा हूँ तुम्हे l (मानस ने अपने खड़े लंड की तस्वीर भेज दी थी )

माया - ओह माँ ये क्या ? सुबह ही l
मानस - अरे माया तुम तो जानती हो ना हम लड़कों का प्रॉब्लम, सभी लड़कों का सुबह सुबह लंड खड़ा रहता है और चूत के लिए बेचैन l
माया - तो बेचैनी क्यों बढ़ा रहे हो l
मानस - क्या करूँ, तुम मेरे पास नहीं हो l
माया - मुझे imagine कर लो अपने पास.... अपने बिस्तर पे (माया सरसराहट भरी आवाज़ में बोली )
मानस - आह माया आओ मेरी बाँहों में l
माया - लो आ गई, तुम्हे किस कर रही हूँ l
मानस - उम्म्म मैं ब्रा के ऊपर से तुम्हारे बूब्स दबा रहा हूँ l
माया - ब्रा के ऊपर से क्यों ? ब्रा खोल के दबाव ना l
(हमेशा की तरह माया मानस का भरपूर साथ दे रही थी )
मानस - आह बहुत मज़ा दे रही हो तुम माया....
माया - अच्छा maza और बढ़ाऊँ
मानस - (अपना लंड मसलते... हाँ )
माया शरारत में पहले तो अपने टॉप उतार दी फिर ब्रा भी l और एक हाथ से बूब छुपाते हुवे सेल्फी लेकर मानस को भेज दी l

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मानस मचल गया l
मानस - ओह माया... सेक्सी... उम्म्म हाथ हटाओ ना
माया - नहीं
मानस - प्लीज दिखाओ
माया उसके बाद हाथ हटा के अपनी नंगे बूब्स के फोटो भेजी l

मानस माया की नंगी निप्पल को देख कामातुर हो गया l
मानस - माया... आह्ह्ह्हह वीडियो कॉल करूँ
माया - क्यों
मानस - वीडियो कॉल पे दिखा दो सब खोल के माया l
माया - छी मैं कोई पोर्न करैक्टर हूँ
मानस - प्लीज माया
माया - नो
मानस - अच्छा सॉरी तो अपनी नंगी पिक्स ही भेज दो l
माया - हम्म
माया हामी भरते अपने सारे कपड़े उतारी और कई सारी नंगी पिक्स मानस को भेजी l
मानस सभी पिक्स को बारी बारी देख लंड रगड़ता रहा l
मानस - माया चूत का पिक्स भेजो l
माया मानस की बात मां वैसा ही किया l टाँगे फैला अपनी फूली हुई चूत का फोटो भेज दिया l

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माया की चूत देख मानस खुद को रोक नहीं पाया और जल्द ही पानी छोड़ दिया l इतना सब कर के माया का भी मूड बहुत सेक्सुअल हो गया था l वो जोश में गन्दी बातें करने लगी l
लेकिन मानस अब देर से और छोटा जवाब देता, माया तड़प रही थी चूत में ऊँगली डाल वो मानस से गंदे words की बातचीत expect कर रही थी l
माया - आह मानस चूत चाटो मेरी sssss...
उदय - मानस कुछ ही शब्द बोला..उसकी बेचैनी कम थी l.... माया एक मिनट boss का कॉल आ रहा है, जरा रुको l
माया - ओके (माया कॉल ख़त्म होने का बेसब्री से वेट करने लगी )
मगर कुछ देर बाद मानस माया से बोला की उसे ऑफिस जाना होगा जरुरी काम आ गया है l
माया अच्छी तरह समझ गई थी की मानस का पानी निकल चूका है, लेकिन वो मानस से पूछना उचित नहीं समझी l उसके बातों में ढीलापन साफ़ बता रहा था की उसका लंड भी पानी निकाल कर ढीला पड़ गया है l
वो गुस्से में फ़ोन बेड पे पटक दी, मर्द कितने सेल्फिश होते हैं पानी निकलने से पहले कितना पीछे पड़ते हैं और जैसे ही मुट्ठ निकला पराये की तरह behave करते हैं l मानस से वो चिढ़ गई थी, मगर अपना मूड ख़राब नहीं करना चाहती थी इसलिये वो टाँगे खोल फिंगरिंग करने लगी l
मानस से वो बहुत नाराज़ थी, इसलिए तो फिंगरिंग करते हुवे वो मानस
के बारे में नहीं बल्कि कार्तिक के बारे में सोच ऊँगली चूत में पेल रही थी l

मोबाइल पे कार्तिक के हॉट pics देखते हुवे वो स्खलित हो गई l चूत पानी छोड़ दी थी, वो rahat की गहरी सांस लेटे हुवे बेड पे निढाल हो गई l
कार्तिक के लंड को इमेजिन कर उसे बड़ा मज़ा आया था l आज पहली बार वो किसी एक्टर को सोचकर स्खलित हुई थी l वो छत की तरफ देखती सोचने लगी, सभी मर्द भी तो एक्ट्रेस के नाम की मुट्ठ मारते हैं l उसने हॉस्टल में लगभग सभी लड़कियों से सुना था की उनके बॉयफ्रेंड अपनी फेवरेट एक्ट्रेस की फोटो या वीडियो देख लंड से पानी निकालते हैं l और पति ने भी batatey थे l मोबाइल हाथ में लिए वो whatsapp के मैसेज देख रही थी तभी उसकी नज़र उसके अपने पापा को भेजे रात के मैसेज पे गई l
ileana dcruz वाली मैसेज को देख उसके दिमाग में हलचल hui, क्या पापा भी..... मन में कहते कहते रुक गई l
नो क्या सच में ?... हो भी सकता है... मम्मी से दूर हैं तो शायद करते होंगे l माया पागलों की तरह बेड पे लेटी.. खुद से सवाल और खुद को जवाब भी दे रही थी l थोड़ी देर उसे realize हुवा की वो पापा के बारे में ऐसा सोच रही है l वो बेड से उठी फ्रेश हुई बार बार पापा का चैट खोलती लेकिन कोई मैसेज नहीं था l आखिरकार वो अपनी फ्रेंड को कॉल की शॉपिंग पे जाने के लिए l
DeletedBhai meri to samjh me nahi aa rahi he teri kahani ek aurat ghar me akeli he or wo lund lene ke liye apne Baap ko pashaye jo k usse dur he chal sasur ka samjh me aaya tha post karne ke liye platform mil gaya he to kuch be chutiyapa post na karo
तेल की परवाह किये बगैर महेन्द्र बहू की गांड चोदने laga, तेल इतना ज्यादा था की बार बार लंड फिसल जाता दोनों का बदन तेल में फिसल रहे थे l आखिरकार महेन्द्र का वीर्य बहू की गांड पे निकल गया l
सुबह के चार बज गए थे चुदाई करते करते l पूरा कमरा ससुर बहू की जबर्दश्त चुदाई का सबूत दे रहा था l
महेन्द्र और माया दोनों ही पुरे नंगे सोफे पे लेटे थे l तेल और पसीना मिला हुवा उनका शरीर आपस में चिपका था l
महेन्द्र पीछे से हाथ डाल माया की दोनों चूची दबाते हुवे... .
महेन्द्र - बहू आज तुझे चोद के बहुत मज़ा आया l ऐसी गांड मैंने सालों बाद चोदी है l
माया - मुझे भी आपसे चुदवा के बहुत मज़ा आया बाबूजी... आपका लंड इस उम्र में भी किसी जवान लड़की को थका दे l
माया - अच्छा बाबूजी अब आप सो जाइये, मानस उठ गए तो प्रॉब्लम हो जाएगी l
महेन्द्र - हाँ बहू l
महेन्द्र और माया अपने अपने कमरे में आकर सो गए l
सुबह मानस की नींद खुली वो उठ कर फ्रेश हुवा, न्यूज़ पेपर लिए वो लिविंग हॉल में सोफे पे बैठा तो फर्श पे तेल और वीर्य से उसके पैर चिपचिपा गए l उसने माया को आवाज़ दी, माया... माया...
माया ऊंघते हुवे हॉल में आयी तो उसे रात की मस्ती याद आयी, वो भूल गई थी की मानस के उठने से पहले उसे कमरा साफ़ करना था l
मानस - माया ये क्या hai...?
माया बहाने सोचने लगी.. .
मानस - क्या हुवा कहाँ खो गई तुम,
माया - वो कल रात में बाबूजी के घुटने में दर्द था तो मैंने उन्हें oil दिया था लगता है बाबूजी के हाथ से गिर गया l
मानस - लेकिन तुमने मुझे बताया क्यों नहीं ? और पापा को तेल देने से अच्छा तुम लगा देती l कितनी problem हुई होगी उन्हें, मैं पूछता हूँ l l
मानस सीधा पापा के कमरे में आता है, माया भी पीछे पीछे आती है l
कमरे में महेन्द्र बेड पे बैठा था थोड़ी देर पहले ही उसकी नींद खुली थी l
मानस - पापा आप ठीक तो हैं l
महेन्द्र - क्या हुवा बेटा, मैं समझा नहीं l
मानस - पापा,,, माया ने बताया की आपको पैर में दर्द था कल रात
(माया ने आँखों ही आँखों में इशारा किया )
महेन्द्र - हां हां बेटा वो.. थोड़ा सा l अभी ठीक है l कल रात बहू ने मालिश की थी l
मानस - मालिश ? आप झूठ क्यों बोल रहे हैं माया ने तो सिर्फ तेल दिया था आपको l
माया ने आँख दिखाई to..महेन्द्र अपनी बात करेक्ट की...
बेटा मेरा मतलब तेल दिया था, मैं लगा लिया और अभी ठीक भी है l
मानस - मैं कुछ नहीं जानता, माया बाबूजी के पैर की मालिश करो l आज ब्रेकफास्ट मैं बाहर ऑफिस के पास कर लूँगा l (मानस माया को आदेश दिया )
महेन्द्र - अरे बेटा रहने दे l
मानस - नहीं बाबूजी
माया खड़ी क्यों हो जाओ तेल लाओ l माया एक आज्ञाकारी पत्नी की तरह कमरे में गई और तेल ले के आयी l
महेंद्र ने धोती पहनी थी l
मानस - माया तुम अच्छे से मालिश करो, मैं ऑफिस के लिए तैयार होता हूँ
मानस के जाने के बाद माया फर्श पे बैठ गई, माया और महेन्द्र एक दूसरे को देख मुस्कुरा रहे थे l
महेंद्र ने धोती के अंदर से अपना लंड बाहर किया, लो बहू करो मालिश l माया की हंसी छूट गई l वो धीमी आवाज़ में बोली, हाथ से करू या मुँह से l
महेन्द्र का लंड खड़ा हो gaya, वो तुरंत माया का सर पकड़ अपने लंड को माया के मुहँ के पास रखा.... चुसो बहू l
माया किसी संस्कारी बहू की तरह ससुर जी की बात मान उनका लंड चूसने लगी l महेन्द्र गाउन के ऊपर से माया के बूब भी दबा रहा था l
आआह बहू..... कितना अच्छा चूसती हो l.....थोड़ी चुसाई के बाद महेन्द्र का वीर्य आने को था l
आआअह्ह्ह्हह्हह आआआह्ह्ह्ह की आवाज़ के साथ महेन्द्र बहू के मुहँ में स्खलित हो गया l

माया - ओह बाबूजी आप तो जल्दी निकाल दिए... मुझे प्यार भी नहीं किया l
(माया मुहँ से वीर्य पोछते हुवे बोली )
महेन्द्र - sorry bahu... मेरा लंड तेरे मुहँ की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया l
एक बार मानस को ऑफिस जाने दे फिर तुझे मैं पूरे घर में जी भर के चोदता हूँ l
माया की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा l
महेन्द्र और माया एक दूसरे को एक लवर की तरह किस किये l महेन्द्र फ्रेश होने गया और bahu किचन में काम करने लगी l
उधर मानस कुछ देर बाद फ़ोन पे बात करते हुवे लिविंग हॉल में बैठा था l
papa.. पापा...
महेन्द्र - क्या हुवा बेटा l
मानस - पापा वो मेरे फ्रेंड ने urgently बुलाया है l
महेन्द्र - बेटा हम दोनों को ?
मानस - हाँ... लगता है काम हो गया l जल्दी चलिए... अगर काम हो गया तो आप आज दोपहर को ही घर जा सकते हैं l
महेन्द्र को तो जैसे शॉक laga... कितना badkismat है वो l वो भगवान से प्रार्थना करने लगा की काम ना हुवा हो l
मानस - क्या हुवा बाबूजी... आप खुश नहीं हो ?
महेंद्र - नहीं beta...मेरा मतलब बहुत अच्छा... आ... आ... अभी चलना होगा ?
(महेन्द्र माया की तरफ देखा... माया भी उनकी बातें सुन रही थी )
मानस - हाँ... आपको क्या हुवा l आप खुश नहीं लग रहे l
महेंद्र कुछ बोल ना पाया.... हाँ बेटा.. वही सोच रहा था, यकीन नहीं होता l बहुत खुश हूँ मैं... थैंक यू बेटा l
महेन्द्र उदास हो कमरे में आया और तैयार होने लगा l चेहरे पे उदास भाव थे जैसे कोई सुन्दर सपना टूट अचानक से टूट गया हो l
इधर माया भी अपनी किस्मत को कोस रही थी l इतना अच्छा मौका था आज खुल के ससुर के साथ सेक्स कर सकती थी l माया को बहुत गुस्सा भी आ रहा था l
माया बहाने से महेन्द्र के कमरे में आयी मगर लिविंग हाल में मानस बैठा था तो कुछ बोल नहीं पाई l
दोनों ने बस एक दूसरे को आँखो ही आँखों में देखा l माया गुस्से में आग बबूला थी, उसे समझ नहीं आ रहा इस situation में वो क्या करे l महेन्द्र bahu को बाँहों में लेना चाहा तो माया गुस्से से कमरे से बाहर आ गई l
मानस ने दुबारा महेन्द्र को जल्दी तैयार होने के लिए pressure डाला l
महेन्द्र और माया कुछ भी बात नहीं कर paaye l
आखिरकार दोनों घर से बाहर आ गए l माया दोनों को bye कर वापस घर का काम करने लगी l
एक घंटे बाद मानस का फ़ोन आया की वो बाबूजी के साथ स्टेशन पे hai,... सारा काम ख़तम हो चूका था l मानस की बात सुनकर माया की बची उम्मीद भी टूट गई, वो अफ़सोस करने लगी की ससुर जी के साथ जो हुवा काश वो 2 दिन पहले हुवा होता तो वो पूरी मस्ती लूट पाती l उसे अधूरापन सा लग रहा था l
वो बैडरूम में लेटी काफी देर तक रात के हुवे हसीं पल को याद करती रही, उसका पुरा जिस्म तड़प रहा था l लेकिन उसे तो अब इस अधूरे पल के साथ ही जीना था l ना जाने कब दुबारा ऐसा मौका मिले और वो ससुर जी के मोटे लंड का लुफ्त उठा पाए l
सुबह के चार बज गए थे चुदाई करते करते l पूरा कमरा ससुर बहू की जबर्दश्त चुदाई का सबूत दे रहा था l
भाग 15
महेन्द्र और माया दोनों ही पुरे नंगे सोफे पे लेटे थे l तेल और पसीना मिला हुवा उनका शरीर आपस में चिपका था l
महेन्द्र पीछे से हाथ डाल माया की दोनों चूची दबाते हुवे... .
महेन्द्र - बहू आज तुझे चोद के बहुत मज़ा आया l ऐसी गांड मैंने सालों बाद चोदी है l
माया - मुझे भी आपसे चुदवा के बहुत मज़ा आया बाबूजी... आपका लंड इस उम्र में भी किसी जवान लड़की को थका दे l
माया - अच्छा बाबूजी अब आप सो जाइये, मानस उठ गए तो प्रॉब्लम हो जाएगी l
महेन्द्र - हाँ बहू l
महेन्द्र और माया अपने अपने कमरे में आकर सो गए l
सुबह मानस की नींद खुली वो उठ कर फ्रेश हुवा, न्यूज़ पेपर लिए वो लिविंग हॉल में सोफे पे बैठा तो फर्श पे तेल और वीर्य से उसके पैर चिपचिपा गए l उसने माया को आवाज़ दी, माया... माया...
माया ऊंघते हुवे हॉल में आयी तो उसे रात की मस्ती याद आयी, वो भूल गई थी की मानस के उठने से पहले उसे कमरा साफ़ करना था l
मानस - माया ये क्या hai...?
माया बहाने सोचने लगी.. .
मानस - क्या हुवा कहाँ खो गई तुम,
माया - वो कल रात में बाबूजी के घुटने में दर्द था तो मैंने उन्हें oil दिया था लगता है बाबूजी के हाथ से गिर गया l
मानस - लेकिन तुमने मुझे बताया क्यों नहीं ? और पापा को तेल देने से अच्छा तुम लगा देती l कितनी problem हुई होगी उन्हें, मैं पूछता हूँ l l
मानस सीधा पापा के कमरे में आता है, माया भी पीछे पीछे आती है l
कमरे में महेन्द्र बेड पे बैठा था थोड़ी देर पहले ही उसकी नींद खुली थी l
मानस - पापा आप ठीक तो हैं l
महेन्द्र - क्या हुवा बेटा, मैं समझा नहीं l
मानस - पापा,,, माया ने बताया की आपको पैर में दर्द था कल रात
(माया ने आँखों ही आँखों में इशारा किया )
महेन्द्र - हां हां बेटा वो.. थोड़ा सा l अभी ठीक है l कल रात बहू ने मालिश की थी l
मानस - मालिश ? आप झूठ क्यों बोल रहे हैं माया ने तो सिर्फ तेल दिया था आपको l
माया ने आँख दिखाई to..महेन्द्र अपनी बात करेक्ट की...
बेटा मेरा मतलब तेल दिया था, मैं लगा लिया और अभी ठीक भी है l
मानस - मैं कुछ नहीं जानता, माया बाबूजी के पैर की मालिश करो l आज ब्रेकफास्ट मैं बाहर ऑफिस के पास कर लूँगा l (मानस माया को आदेश दिया )
महेन्द्र - अरे बेटा रहने दे l
मानस - नहीं बाबूजी
माया खड़ी क्यों हो जाओ तेल लाओ l माया एक आज्ञाकारी पत्नी की तरह कमरे में गई और तेल ले के आयी l
महेंद्र ने धोती पहनी थी l
मानस - माया तुम अच्छे से मालिश करो, मैं ऑफिस के लिए तैयार होता हूँ
मानस के जाने के बाद माया फर्श पे बैठ गई, माया और महेन्द्र एक दूसरे को देख मुस्कुरा रहे थे l
महेंद्र ने धोती के अंदर से अपना लंड बाहर किया, लो बहू करो मालिश l माया की हंसी छूट गई l वो धीमी आवाज़ में बोली, हाथ से करू या मुँह से l
महेन्द्र का लंड खड़ा हो gaya, वो तुरंत माया का सर पकड़ अपने लंड को माया के मुहँ के पास रखा.... चुसो बहू l
माया किसी संस्कारी बहू की तरह ससुर जी की बात मान उनका लंड चूसने लगी l महेन्द्र गाउन के ऊपर से माया के बूब भी दबा रहा था l
आआह बहू..... कितना अच्छा चूसती हो l.....थोड़ी चुसाई के बाद महेन्द्र का वीर्य आने को था l
आआअह्ह्ह्हह्हह आआआह्ह्ह्ह की आवाज़ के साथ महेन्द्र बहू के मुहँ में स्खलित हो गया l

माया - ओह बाबूजी आप तो जल्दी निकाल दिए... मुझे प्यार भी नहीं किया l
(माया मुहँ से वीर्य पोछते हुवे बोली )
महेन्द्र - sorry bahu... मेरा लंड तेरे मुहँ की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया l
एक बार मानस को ऑफिस जाने दे फिर तुझे मैं पूरे घर में जी भर के चोदता हूँ l
माया की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा l
महेन्द्र और माया एक दूसरे को एक लवर की तरह किस किये l महेन्द्र फ्रेश होने गया और bahu किचन में काम करने लगी l
उधर मानस कुछ देर बाद फ़ोन पे बात करते हुवे लिविंग हॉल में बैठा था l
papa.. पापा...
महेन्द्र - क्या हुवा बेटा l
मानस - पापा वो मेरे फ्रेंड ने urgently बुलाया है l
महेन्द्र - बेटा हम दोनों को ?
मानस - हाँ... लगता है काम हो गया l जल्दी चलिए... अगर काम हो गया तो आप आज दोपहर को ही घर जा सकते हैं l
महेन्द्र को तो जैसे शॉक laga... कितना badkismat है वो l वो भगवान से प्रार्थना करने लगा की काम ना हुवा हो l
मानस - क्या हुवा बाबूजी... आप खुश नहीं हो ?
महेंद्र - नहीं beta...मेरा मतलब बहुत अच्छा... आ... आ... अभी चलना होगा ?
(महेन्द्र माया की तरफ देखा... माया भी उनकी बातें सुन रही थी )
मानस - हाँ... आपको क्या हुवा l आप खुश नहीं लग रहे l
महेंद्र कुछ बोल ना पाया.... हाँ बेटा.. वही सोच रहा था, यकीन नहीं होता l बहुत खुश हूँ मैं... थैंक यू बेटा l
महेन्द्र उदास हो कमरे में आया और तैयार होने लगा l चेहरे पे उदास भाव थे जैसे कोई सुन्दर सपना टूट अचानक से टूट गया हो l
इधर माया भी अपनी किस्मत को कोस रही थी l इतना अच्छा मौका था आज खुल के ससुर के साथ सेक्स कर सकती थी l माया को बहुत गुस्सा भी आ रहा था l
माया बहाने से महेन्द्र के कमरे में आयी मगर लिविंग हाल में मानस बैठा था तो कुछ बोल नहीं पाई l
दोनों ने बस एक दूसरे को आँखो ही आँखों में देखा l माया गुस्से में आग बबूला थी, उसे समझ नहीं आ रहा इस situation में वो क्या करे l महेन्द्र bahu को बाँहों में लेना चाहा तो माया गुस्से से कमरे से बाहर आ गई l
मानस ने दुबारा महेन्द्र को जल्दी तैयार होने के लिए pressure डाला l
महेन्द्र और माया कुछ भी बात नहीं कर paaye l
आखिरकार दोनों घर से बाहर आ गए l माया दोनों को bye कर वापस घर का काम करने लगी l
एक घंटे बाद मानस का फ़ोन आया की वो बाबूजी के साथ स्टेशन पे hai,... सारा काम ख़तम हो चूका था l मानस की बात सुनकर माया की बची उम्मीद भी टूट गई, वो अफ़सोस करने लगी की ससुर जी के साथ जो हुवा काश वो 2 दिन पहले हुवा होता तो वो पूरी मस्ती लूट पाती l उसे अधूरापन सा लग रहा था l
वो बैडरूम में लेटी काफी देर तक रात के हुवे हसीं पल को याद करती रही, उसका पुरा जिस्म तड़प रहा था l लेकिन उसे तो अब इस अधूरे पल के साथ ही जीना था l ना जाने कब दुबारा ऐसा मौका मिले और वो ससुर जी के मोटे लंड का लुफ्त उठा पाए l
वो बैडरूम में लेटी काफी देर तक रात के हुवे हसीं पल को याद करती रही, उसका पुरा जिस्म तड़प रहा था l लेकिन उसे तो अब इस अधूरे पल के साथ ही जीना था l ना जाने कब दुबारा ऐसा मौका मिले और वो ससुर जी के मोटे लंड का लुफ्त उठा पाए l
धीरे-धीरे 4 महीने बीत गए, माया ससुर के साथ हुवे आकस्मिक सेक्स के बारे में भूल चुकी थी l वापस अपनी सीधी जीवन शैली में उसका समय बीतता गया l मानस भी काम को लेकर बहुत busy रहने लगा था, अब मानस और माया का सेक्स भी कम होता था l दोनों कई बार कोशिश करते अपनी सेक्स लाइफ को रोमांचक बनाने के लिए मगर मानस का काम बीच में अड़चने डाल देता l
एक दिन दोपहर को माया अपनी माँ से बात कर रही थी l गौरतलब है की माया अक्सर खाली समय में अपने family और रिश्तेदारों से बातचीत करती l
माया - माँ... मैं सोच रही थी कोई जॉब कर लूँ l घर पे सारा दिन बहुत बोर होती हूँ l मानस के पास भी मेरे लिए टाइम नहीं है l
माया की माँ (अंजू ) - बेटी जॉब इतना आसान है क्या ? देख तेरा छोटा भाई कितने महीनो से कोशिश कर रहा है l लेकिन अबतक कोई फ़ायदा नहीं हुवा l बेटी जॉब में थोड़ी व्यस्तता तो होती ही है, मानस भी तुझे वक्त देगा तू चिंता ना कर l
अब अपने पापा को ही देख ले अगले एक साल के लिए रायपुर से काम करना होगा, कितने दिनों से उनसे बात नहीं हुई ना जाने कब छुट्टी मिलेगी l
माया - क्या कहा माँ, पापा रायपुर में हैं कबसे ?
अंजू - बेटी अभी 2 वीक हुवे l
माया - माँ.. मुझे तुमने पराया कर दिया क्या ? पापा की जॉब की बात आप दोनों में से किसी ने नहीं बताया मुझे l
अंजू - अरे बेटा सबकुछ जल्दी में हुवा, उनके ऑफिस का एक employee अचानक जॉब छोड़ दिया l काम ज्यादा था तो उन्हें रायपुर जाना पड़ा l
माया - हम्म्म
अंजू - गुस्सा क्यों होती है l तेरी सेहत ठीक है ना l
माया - haan ठीक है l
माया - अच्छा माँ मैं शाम को बात करुँगी l बाई
अंजू - बाई बेटी
माया बिस्तर पे लेटी अपने कॉलेज के दिनों को याद करने लगी, फेसबुक पे कॉलेज की फोटो देखती और मुस्कुराती l उसे याद आया कॉलेज का पहला दिन जब उसके पापा (उदय), माया के साथ कॉलेज एडमिशन के लिए आये थे l कितनी उम्मीदें थी कॉलेज ख़त्म करके जॉब करने के, independent होने की लेकिन शादी के बाद सारे सपने खत्म हो गए l
माया को माँ की बात याद आयी तो सोचा क्यों ना पापा को कॉल करूँ l वो पापा को फ़ोन की, लेकिन कोई रिस्पांस नही मिला l खैर वो फ़ोन साइड में रख के लेट गई, बिस्तर पे पड़े करीब 1 घंटे बाद फ़ोन की आवाज़ से उसकी नींद खुली l देखा तो पापा का कॉल था l
माया - हेलो पापा..
उदय - माया बेटी कैसी हो ?
माया - ठीक हूँ पापा.. आप कैसे हो ?
उदय - ठीक हूँ बेटी, थोड़ा काम में busy हूँ l मानस कैसा hai? सब ठीक तो है ?
माया - हाँ पापा सब ठीक hai..मानस भी ठीक हैं l
ओके पापा आप busy हो मैं बाद में कॉल करुँगी l
उदय - its ओके beti, तुमसे एक बात कहनी थी
माया - मुझे पता है l
उदय - क्या
माया - यही की आप घर पे नहीं हैं, रायपुर में हैं l
उदय - ओह बेटी तुम्हे कैसे पता
माया - माँ से... आप तो मुझे पराया कर दिए हो है ना... ?
उदय - नहीं बेटी ऐसा मत बोलो... sorry
माया - its ओके मुझे पता है आप बिजी हो सो नो प्रॉब्लमl
उदय - थैंक यू बेटी l
.
.
(इस तरह माया और उदय ने काफी देर तक बात की...)
दूसरे दिन भी माया सब काम ख़त्म कर बेड पे लेटी थी, उसने सोचा पापा ने लंच क्या किया होगा तो एक मैसेज किया l
पापा कैसे हो ? लंच कर लिए ?
काफी देर तक रिप्लाई नहीं आया फिर बाद में मैसेज आया haan...मैं अभी बिजी हूँ शाम को बात karunga l
माया बोर हो के सो gai... शाम को मानस के साथ dinner करने के बाद वो बेड पे थी जब उदय ने कॉल किया l
माया फ़ोन ली और मैसेज कर दी की वो सोने जा रही है l
उदय ने भी गुड night बोल मैसेज end कर दिया l
दूसरे दिन जब बात हुई तो उदय ने सॉरी बोला और बताया की कंपनी के गेस्ट हाउस में वो अकेला है और शाम को सारा काम ख़त्म करते उसे अक्सर देर हो जाता है l
माया ने भी अपनी दिनचर्या बतायी, फिर उदय उससे बोला की कल से वो रोज लंच में गेस्ट हाउस आ जायेगा l इस तरह लंच के साथ साथ वो रोज माया से बात भी कर लिया करेगा l
समय बीतता गया, पापा बेटी रोज बातें करते, और sms भी जब भी उन्हें वक़्त मिलता l बाद में माया ने whatsapp के बारे में बताया और दोनों उसपे भी chat करते रहते l माया का समय अच्छा बीत रहा था l
कभी कभी किसी कारणवश बात नहीं हो पाती तो हल्की नाराजगी भी दिखती थी l
माया अपने पापा को व्हाट्सप्प और ढेरों एप्लीकेशन के बारे में बताती l उदय भी interest लेता, akele होने की वजह से माया ही थी जिससे वो सारी बात share करता l
कुछ दिन बाद मानस को कंपनी के काम से 3 week के लिए किसी training पे जाना पड़ा l
माया इस बात से बेहद नाराज़ थी, लेकिन मानस अपने प्रमोशन को लेकर बहुत सीरियस था और वो अपने बॉस को कोई मौका नहीं देना चाहता था इसलिए उसे ना चाहते हुवे भी जाना पड़ा l
जिस दिन मानस गया उस दिन माया बहुत उदास थी, हॉल ke कमरे में एक kone बैठी वो टीवी देख रही रही जब उदय का मैसेज आया l
उदय - क्या कर रही हो beti, आज ना फ़ोन की ना मैसेज l
माया का मूड अच्छा नहीं था तो वो मैसेज पे बहाना बना दी की कोई गेस्ट घर पे हैं तो उसे टाइम nahi मिल पाया l
उदय भी ओके बोल कर फ़ोन jeb में रख लिया l
रात करीब 11 बजे उदय गहरी नींद सो रहा था जब फ़ोन की घंटी बजी l उसने देखा माया,,, वो सोच में पड़ गया शायद गलती से माया ने फ़ोन किया होगाl थोड़ी देर बाद एक बार और फ़ोन आने पे उसने attend किया l
उदय - ( धीमी आवाज़ में... ) हेलो... हेलो...
माया - हेलो पापा
उदय - hi बेटी तुमने इस वक़्त फ़ोन किया सब ठीक तो है l
माया - हाँ पापा..क्या आप सो रहे the?
उदय - बस हल्की नींद आ रही थी l
माया - मगर आप तो बोलते थे की आप रात को देर में सोते हैं l
उदय - हाँ बेटी ये सच है, लेकिन आज थोड़ा थक गया था l
माया - ok
उदय - लेकिन तुम इस वक़्त ?
माया - पापा वो मानस कुछ दिनों के लिए बाहर हैं, 3 वीक के लिए l अकेली बोर हो रही थी तो मैंने सोचा शायद आप फ्री होंगे l
ठीक है आप सो जाइये l उदय भी सो गया, दअसल उदय अपना अकेलापन दूर करने के लिए हर रात मोबाइल पे पोर्न movies या एक्ट्रेस की पोर्न pics देखता और मुट्ठ मार कर सो जाता था l
हमेशा की तरह उस दिन भी वो थका था और sona चाहता था l
उस दिन के बाद माया से दोपहर में बात होती और रात में भी l लेकिन रात में उदय ज्यादा बात नहीं करता, अक्सर व्हाट्सप्प चैट पे ही बात होती l लेकिन माया के लगातार disturbance और messages से वो ठीक से मजे नहीं कर पाता l 4 दिन बीत गए थे, माया के डिस्टर्बेंस की वजह से वो मुट्ठ नहीं मार पाया था l आलम यह था की 4 दिन बाद उदय हर कोई लड़की को देख उत्तेजित हो जाता था l जब भी उसे मौका मिलता वो पुरे dhanke कपड़े में भी लड़की की गोलाई और शरीर का उभार बड़े गौर से देखता और आनंदित होता था l
भाग 16
धीरे-धीरे 4 महीने बीत गए, माया ससुर के साथ हुवे आकस्मिक सेक्स के बारे में भूल चुकी थी l वापस अपनी सीधी जीवन शैली में उसका समय बीतता गया l मानस भी काम को लेकर बहुत busy रहने लगा था, अब मानस और माया का सेक्स भी कम होता था l दोनों कई बार कोशिश करते अपनी सेक्स लाइफ को रोमांचक बनाने के लिए मगर मानस का काम बीच में अड़चने डाल देता l
एक दिन दोपहर को माया अपनी माँ से बात कर रही थी l गौरतलब है की माया अक्सर खाली समय में अपने family और रिश्तेदारों से बातचीत करती l
माया - माँ... मैं सोच रही थी कोई जॉब कर लूँ l घर पे सारा दिन बहुत बोर होती हूँ l मानस के पास भी मेरे लिए टाइम नहीं है l
माया की माँ (अंजू ) - बेटी जॉब इतना आसान है क्या ? देख तेरा छोटा भाई कितने महीनो से कोशिश कर रहा है l लेकिन अबतक कोई फ़ायदा नहीं हुवा l बेटी जॉब में थोड़ी व्यस्तता तो होती ही है, मानस भी तुझे वक्त देगा तू चिंता ना कर l
अब अपने पापा को ही देख ले अगले एक साल के लिए रायपुर से काम करना होगा, कितने दिनों से उनसे बात नहीं हुई ना जाने कब छुट्टी मिलेगी l
माया - क्या कहा माँ, पापा रायपुर में हैं कबसे ?
अंजू - बेटी अभी 2 वीक हुवे l
माया - माँ.. मुझे तुमने पराया कर दिया क्या ? पापा की जॉब की बात आप दोनों में से किसी ने नहीं बताया मुझे l
अंजू - अरे बेटा सबकुछ जल्दी में हुवा, उनके ऑफिस का एक employee अचानक जॉब छोड़ दिया l काम ज्यादा था तो उन्हें रायपुर जाना पड़ा l
माया - हम्म्म
अंजू - गुस्सा क्यों होती है l तेरी सेहत ठीक है ना l
माया - haan ठीक है l
माया - अच्छा माँ मैं शाम को बात करुँगी l बाई
अंजू - बाई बेटी
माया बिस्तर पे लेटी अपने कॉलेज के दिनों को याद करने लगी, फेसबुक पे कॉलेज की फोटो देखती और मुस्कुराती l उसे याद आया कॉलेज का पहला दिन जब उसके पापा (उदय), माया के साथ कॉलेज एडमिशन के लिए आये थे l कितनी उम्मीदें थी कॉलेज ख़त्म करके जॉब करने के, independent होने की लेकिन शादी के बाद सारे सपने खत्म हो गए l
माया को माँ की बात याद आयी तो सोचा क्यों ना पापा को कॉल करूँ l वो पापा को फ़ोन की, लेकिन कोई रिस्पांस नही मिला l खैर वो फ़ोन साइड में रख के लेट गई, बिस्तर पे पड़े करीब 1 घंटे बाद फ़ोन की आवाज़ से उसकी नींद खुली l देखा तो पापा का कॉल था l
माया - हेलो पापा..
उदय - माया बेटी कैसी हो ?
माया - ठीक हूँ पापा.. आप कैसे हो ?
उदय - ठीक हूँ बेटी, थोड़ा काम में busy हूँ l मानस कैसा hai? सब ठीक तो है ?
माया - हाँ पापा सब ठीक hai..मानस भी ठीक हैं l
ओके पापा आप busy हो मैं बाद में कॉल करुँगी l
उदय - its ओके beti, तुमसे एक बात कहनी थी
माया - मुझे पता है l
उदय - क्या
माया - यही की आप घर पे नहीं हैं, रायपुर में हैं l
उदय - ओह बेटी तुम्हे कैसे पता
माया - माँ से... आप तो मुझे पराया कर दिए हो है ना... ?
उदय - नहीं बेटी ऐसा मत बोलो... sorry
माया - its ओके मुझे पता है आप बिजी हो सो नो प्रॉब्लमl
उदय - थैंक यू बेटी l
.
.
(इस तरह माया और उदय ने काफी देर तक बात की...)
दूसरे दिन भी माया सब काम ख़त्म कर बेड पे लेटी थी, उसने सोचा पापा ने लंच क्या किया होगा तो एक मैसेज किया l
पापा कैसे हो ? लंच कर लिए ?
काफी देर तक रिप्लाई नहीं आया फिर बाद में मैसेज आया haan...मैं अभी बिजी हूँ शाम को बात karunga l
माया बोर हो के सो gai... शाम को मानस के साथ dinner करने के बाद वो बेड पे थी जब उदय ने कॉल किया l
माया फ़ोन ली और मैसेज कर दी की वो सोने जा रही है l
उदय ने भी गुड night बोल मैसेज end कर दिया l
दूसरे दिन जब बात हुई तो उदय ने सॉरी बोला और बताया की कंपनी के गेस्ट हाउस में वो अकेला है और शाम को सारा काम ख़त्म करते उसे अक्सर देर हो जाता है l
माया ने भी अपनी दिनचर्या बतायी, फिर उदय उससे बोला की कल से वो रोज लंच में गेस्ट हाउस आ जायेगा l इस तरह लंच के साथ साथ वो रोज माया से बात भी कर लिया करेगा l
समय बीतता गया, पापा बेटी रोज बातें करते, और sms भी जब भी उन्हें वक़्त मिलता l बाद में माया ने whatsapp के बारे में बताया और दोनों उसपे भी chat करते रहते l माया का समय अच्छा बीत रहा था l
कभी कभी किसी कारणवश बात नहीं हो पाती तो हल्की नाराजगी भी दिखती थी l
माया अपने पापा को व्हाट्सप्प और ढेरों एप्लीकेशन के बारे में बताती l उदय भी interest लेता, akele होने की वजह से माया ही थी जिससे वो सारी बात share करता l
कुछ दिन बाद मानस को कंपनी के काम से 3 week के लिए किसी training पे जाना पड़ा l
माया इस बात से बेहद नाराज़ थी, लेकिन मानस अपने प्रमोशन को लेकर बहुत सीरियस था और वो अपने बॉस को कोई मौका नहीं देना चाहता था इसलिए उसे ना चाहते हुवे भी जाना पड़ा l
जिस दिन मानस गया उस दिन माया बहुत उदास थी, हॉल ke कमरे में एक kone बैठी वो टीवी देख रही रही जब उदय का मैसेज आया l
उदय - क्या कर रही हो beti, आज ना फ़ोन की ना मैसेज l
माया का मूड अच्छा नहीं था तो वो मैसेज पे बहाना बना दी की कोई गेस्ट घर पे हैं तो उसे टाइम nahi मिल पाया l
उदय भी ओके बोल कर फ़ोन jeb में रख लिया l
रात करीब 11 बजे उदय गहरी नींद सो रहा था जब फ़ोन की घंटी बजी l उसने देखा माया,,, वो सोच में पड़ गया शायद गलती से माया ने फ़ोन किया होगाl थोड़ी देर बाद एक बार और फ़ोन आने पे उसने attend किया l
उदय - ( धीमी आवाज़ में... ) हेलो... हेलो...
माया - हेलो पापा
उदय - hi बेटी तुमने इस वक़्त फ़ोन किया सब ठीक तो है l
माया - हाँ पापा..क्या आप सो रहे the?
उदय - बस हल्की नींद आ रही थी l
माया - मगर आप तो बोलते थे की आप रात को देर में सोते हैं l
उदय - हाँ बेटी ये सच है, लेकिन आज थोड़ा थक गया था l
माया - ok
उदय - लेकिन तुम इस वक़्त ?
माया - पापा वो मानस कुछ दिनों के लिए बाहर हैं, 3 वीक के लिए l अकेली बोर हो रही थी तो मैंने सोचा शायद आप फ्री होंगे l
ठीक है आप सो जाइये l उदय भी सो गया, दअसल उदय अपना अकेलापन दूर करने के लिए हर रात मोबाइल पे पोर्न movies या एक्ट्रेस की पोर्न pics देखता और मुट्ठ मार कर सो जाता था l
हमेशा की तरह उस दिन भी वो थका था और sona चाहता था l
उस दिन के बाद माया से दोपहर में बात होती और रात में भी l लेकिन रात में उदय ज्यादा बात नहीं करता, अक्सर व्हाट्सप्प चैट पे ही बात होती l लेकिन माया के लगातार disturbance और messages से वो ठीक से मजे नहीं कर पाता l 4 दिन बीत गए थे, माया के डिस्टर्बेंस की वजह से वो मुट्ठ नहीं मार पाया था l आलम यह था की 4 दिन बाद उदय हर कोई लड़की को देख उत्तेजित हो जाता था l जब भी उसे मौका मिलता वो पुरे dhanke कपड़े में भी लड़की की गोलाई और शरीर का उभार बड़े गौर से देखता और आनंदित होता था l
महेन्द्र झुक कर एक बार फिर बहू के होंठ से अपना होंठ मिला दिया, बहू के गर्दन को चूमते हुवे वो क्लीवेज पे kiss करने लगा साथ ही इस बार हिम्मत करके महेन्द्र ने बहू की नर्म चूची भी दबा दी थी l
माया के पुरा शरीर वासना की आग में तप रहा था, समय के साथ उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी l इधर महेन्द्र भी बहू की चूचियों पे जी भर के हाथ फेरता रहा, जैसे पता नहीं कब ये पल दुबारा आये l
उसके बाद महेंद्र ने बहू के दोनों हाथ ऊपर कर दिए, बहू की दोनों चूचियां की गोलियां और उभर आयी l वो बहू के ऊपर आते हुवे उसकी खुली armpit पे मुंह लगा के चाटने लगा, हलके नमी ली हुई बहू की underarms की गन्ध महेन्द्र पे अलग ही जादू कर रही थी l वो underarms चाटने के साथ साथ बहू के उभरे बूब्स को भी दबा रहा था l
महेन्द्र ने कभी सपने में भी ये नहीं सोचा था की वो एकदिन अपनी बहू की चूचियों को हाथ लगा पायेगा l
माया - आआआअह्ह्ह्ह बाबूजी l
माया और इंतज़ार नहीं कर पाई, उसने एक बूब के ऊपर से spaghetti हटा दी l माया की एक चूची नंगी हो गई, महेन्द्र आँखे फाड़ बहू का नंगापन देखता रहा l sabkuch किसी सपने से कम नहीं था, महेन्द्र सबसे पहले बहू के नंगे बूब को छुवा, ऐसा लग रहा था जैसे उसने गरम gel से भरी कोई पोटली हाथ में ले ली हो l वो अनायास ही बहू पे jhukta चला गया और मुहँ खोल के बहू की डार्क ब्राउन निप्पल को मुहँ में भर लिया l निप्पल चूसते हुवे वो दूसरी बूब के ऊपर से भी spaghetti हटा दिया l नंगे बूब को छूने का मज़ा ही अलग था l

महेन्द्र - (माया के कान में )... बहू जी करता है तुम्हारी चूची खा जाऊं l
माया और महेन्द्र के बीच शर्म का parda हट गया था, तो महेन्द्र उत्तेजना में गंदे शब्द use कर रहा था l
माया भी पूरा साथ देती ससुर का बाल पकड़े अपने बूब पे दबाती l
माया - आह बाबूजी खा जाइये ना मेरी दोनों........ चूची...... l
(माया महेन्द्र की वासना को भड़काने के लिए बेझिझक चूची शब्द का estemaal की )
माया कहर ढा रही थी, एक जवान औरत के मुहँ से उसने कभी इस तरह के गंदे शब्द नहीं सुने थे l और आज खुद की बहू के मुहँ से चूची शब्द सुन कर वो आनंदित हो उठा l
वो पागलों की तरह बड़ा सा मुहँ खोल माया की पूरी चूची मुहँ में भर लेता l कभी बच्चे की तरह निप्पल chusta l माया की चूची लार से भीगी चमक रही थी l
माया की बुर lagataar पानी छोड़ रही थी, वो पूरी तरह से कामोत्तेजित हो गई थी l उसने सोफे पे लेट हुवे पहले बैडरूम की तरफ देखा, वजह साफ़ थी उसने ससुर जी से चुदवाने का मन बना लिया था l
माया मर्दों की कमजोरी से अच्छी तरह वाकिब थी, वो अपना एक हाथ नीचे ले गई और ससुर जी का पायजामा में खड़ा लंड सहला दी l
माया - ( दूसरे हाथ से ससुर जी का फेस अपनी चूची से उठाकर ) बाबूजी.... लंड बाहर निकालो ना..... l
महेन्द्र बहू की नंगी जिस्म का मज़ा तो ले ही रहा था, साथ साथ बहू का खुलापन उसकी वासना को दुगुना कर देता l वो तुरंत सोफे से उतरकर पायजामा खोला और फड़फड़ाता लंड बहू के सामने था l बहू से कुछ उम्मीद कर वो अपना लंड हाथ में लेकर दिखाया, माया कोई नासमझ नहीं थी वो बाबूजी की आँख में देखते हुवे लंड पकड़ ली और उसका स्किन खोल दी l महेन्द्र को तो लगा वो बहू के हाथ में ही स्खलित हो जायेगा, उसकी आंख बंद थी बहू महेन्द्र के लंड का स्किन ऊपर नीचे कर रही थी l
तभी उसे लंड पे कुछ गर्म सा अहसास हुवा, उसने आँख खोल के देखा तो लंड का टोपी माया के मुहँ में था l वो मस्ती में दबाव बना के बाकी का लंड भी बहू के मुँह में पेल दिया l माया चप - चप की आवाज़ के साथ लंड चूसने लगी, ससुर जी के लंड का स्वाद मानस के लंड से बहुत अलग था l महेन्द्र का लंड ज्यादा फुला हुवा था, लंड की टेढ़ी मेढ़ी नस माया को और मज़ा दे रही थी l ससुर जी का तगड़ा लंड चूस के तो वो मानस का लंड भूल गई l
जल्द से जल्द वो इस तगड़े लंड को अपने बुर में भींचना चाहती थी l
लंड चूसते चूसते वो सोफे से उतर फर्श पे आ गई थी l

महेन्द्र - बहू.... मुझे भी तो अपने बुर का स्वाद दिलाओ l ये कहते हुवे महेन्द्र बहू को उठाया और उसे घुमा कर सोफे पे झुका दिया l अगले ही पल उसकी गांड नंगी हो गई, महेंद्र एक झटके में पैंटी नीचे कर दिया था l पैंटी उतरने के बाद बहू की नंगी गांड और बड़ी लग रही थी l नीचे बैठकर वो अपना मुहँ बहू की बड़ी सी गांड में डाल दिया, माया कसमसा के रह गई l महेन्द्र की जीभ उसकी गांड की chhed पे हरकत करने लगी थी l माया के लिए ये बहुत अलग अनुभव था, मानस oral तो करता था लेकिन उसने कभी माया की गांड में मुहँ नहीं लगाया l आज महेन्द्र उसे काफी अलग मज़ा दे रहा था l धीरे धीरे मह्रन्द्र की जीभ माया के बुर तक आ रही थी l बहू के बुर का गन्दा पानी ससुर बड़े मज़े से चाट रहा था l कुछ देर बाद महेन्द्र माया का कमर पकड़ खड़ा हुवा, माया अभी भी झुकी थी, अब वो लंड बिलकुल गांड के बीच सटा दिया l कमर पहले नीचे किया और फिर ऊपर तो जैसे बहू के बुर ने लंड को चुम्बक की तरह अपने अंदर खींच लिया हो l चिपचिपे पानी से सराबोर बहू की बुर में महेन्द्र का लंड बड़ी आसानी से फिसल रहा रहा था l महेन्द्र बहू की लटक रही दोनों चूची को पकड़े पुरे जोश में कस कस के बहू को पेल रहा था l
सोफे पे झुक के माया आज पहली बार पेलवा रही थी, उसे बहुत मज़ा आ रहा था l कुछ देर की चुदाई के बाद महेन्द्र तेज़ से हांफने लगा, उसका क्लाइमेक्स नज़दीक था l बहू की गांड को जोर से पकड़ते हुवे वो पूरा वीर्य बहू की बुर में उड़ेल दिया l महेंद्र 10-15 बार और चोद के जब लंड बाहर निकला तो माया के बुर से सफ़ेद पानी की चासनी जमीन तक चू गई l वो बहू की गांड के पीछे से हाथ डाल बहू की बुर के पानी को हाथ में लिया और अपने लंड के ऊपर लगाया l
महेन्द्र - चाट बहू, ये भी तो चाट
माया एक अच्छी बहू की तरह नीचे बैठ के महेन्द्र का लंड जीभ से साफ़ की l
माया - बाबूजी... आपका लंड बहुत स्वादिष्ट है l
महेंद्र - बहू, लगता है तेरी प्यास नहीं बुझी l
महेन्द्र बहू की गांड पे thappad मारा.... और उसे सोफे पे गिरा दिया l
माया खिलखिलाने लगी और झुक के अपनी position ले li, महेन्द्र इस बार लंड बहू की गांड में डाला l माया कराह उठी वो बाबूजी को पीछे धक्का दीl
माया - आह नहीं बाबूजी ये बहुत बड़ा है l
महेन्द्र - प्लीज बहू, चोदने दो l आज मत रोक मुझे l
माया - ओके बाबूजी आप रुको मैं तेल लेकर आती हूँ l
माया जल्दी से उठ के नंगे ही बैडरूम में आयी l

मानस गहरी नींद सो रहा था l वो टेबल से एक तेल की शीशी उठाई और वापस भाग आयी l
ये लीजिये बाबूजी, महेन्द्र लंड पे तेल लगाया l काला नाग सा लंड चमचमा उठा l
बहू दुबारा झुक गई, महेन्द्र शीशी को उल्टा कर बहू की गांड पे तेल गिराया तो पूरा ढक्कन खुल गया सारा तेल बहू की गांड से होता हुवा सोफे और जमीन पे फ़ैल गया l
महेन्द्र - ओह बहू वो गलती से l
माया - आप चिंता मत करिये बाबूजी मैं साफ़ कर दूँगी आप chodiye मुझे l

तेल की परवाह किये बगैर महेन्द्र बहू की गांड चोदने laga, तेल इतना ज्यादा था की बार बार लंड फिसल जाता दोनों का बदन तेल में फिसल रहे थे l आखिरकार महेन्द्र का वीर्य बहू की गांड पे निकल गया l
सुबह के चार बज गए थे चुदाई करते करते l पूरा कमरा ससुर बहू की जबर्दश्त चुदाई का सबूत दे रहा था l
भाग 14
माया के पुरा शरीर वासना की आग में तप रहा था, समय के साथ उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी l इधर महेन्द्र भी बहू की चूचियों पे जी भर के हाथ फेरता रहा, जैसे पता नहीं कब ये पल दुबारा आये l
उसके बाद महेंद्र ने बहू के दोनों हाथ ऊपर कर दिए, बहू की दोनों चूचियां की गोलियां और उभर आयी l वो बहू के ऊपर आते हुवे उसकी खुली armpit पे मुंह लगा के चाटने लगा, हलके नमी ली हुई बहू की underarms की गन्ध महेन्द्र पे अलग ही जादू कर रही थी l वो underarms चाटने के साथ साथ बहू के उभरे बूब्स को भी दबा रहा था l
महेन्द्र ने कभी सपने में भी ये नहीं सोचा था की वो एकदिन अपनी बहू की चूचियों को हाथ लगा पायेगा l
माया - आआआअह्ह्ह्ह बाबूजी l
माया और इंतज़ार नहीं कर पाई, उसने एक बूब के ऊपर से spaghetti हटा दी l माया की एक चूची नंगी हो गई, महेन्द्र आँखे फाड़ बहू का नंगापन देखता रहा l sabkuch किसी सपने से कम नहीं था, महेन्द्र सबसे पहले बहू के नंगे बूब को छुवा, ऐसा लग रहा था जैसे उसने गरम gel से भरी कोई पोटली हाथ में ले ली हो l वो अनायास ही बहू पे jhukta चला गया और मुहँ खोल के बहू की डार्क ब्राउन निप्पल को मुहँ में भर लिया l निप्पल चूसते हुवे वो दूसरी बूब के ऊपर से भी spaghetti हटा दिया l नंगे बूब को छूने का मज़ा ही अलग था l

महेन्द्र - (माया के कान में )... बहू जी करता है तुम्हारी चूची खा जाऊं l
माया और महेन्द्र के बीच शर्म का parda हट गया था, तो महेन्द्र उत्तेजना में गंदे शब्द use कर रहा था l
माया भी पूरा साथ देती ससुर का बाल पकड़े अपने बूब पे दबाती l
माया - आह बाबूजी खा जाइये ना मेरी दोनों........ चूची...... l
(माया महेन्द्र की वासना को भड़काने के लिए बेझिझक चूची शब्द का estemaal की )
माया कहर ढा रही थी, एक जवान औरत के मुहँ से उसने कभी इस तरह के गंदे शब्द नहीं सुने थे l और आज खुद की बहू के मुहँ से चूची शब्द सुन कर वो आनंदित हो उठा l
वो पागलों की तरह बड़ा सा मुहँ खोल माया की पूरी चूची मुहँ में भर लेता l कभी बच्चे की तरह निप्पल chusta l माया की चूची लार से भीगी चमक रही थी l
माया की बुर lagataar पानी छोड़ रही थी, वो पूरी तरह से कामोत्तेजित हो गई थी l उसने सोफे पे लेट हुवे पहले बैडरूम की तरफ देखा, वजह साफ़ थी उसने ससुर जी से चुदवाने का मन बना लिया था l
माया मर्दों की कमजोरी से अच्छी तरह वाकिब थी, वो अपना एक हाथ नीचे ले गई और ससुर जी का पायजामा में खड़ा लंड सहला दी l
माया - ( दूसरे हाथ से ससुर जी का फेस अपनी चूची से उठाकर ) बाबूजी.... लंड बाहर निकालो ना..... l
महेन्द्र बहू की नंगी जिस्म का मज़ा तो ले ही रहा था, साथ साथ बहू का खुलापन उसकी वासना को दुगुना कर देता l वो तुरंत सोफे से उतरकर पायजामा खोला और फड़फड़ाता लंड बहू के सामने था l बहू से कुछ उम्मीद कर वो अपना लंड हाथ में लेकर दिखाया, माया कोई नासमझ नहीं थी वो बाबूजी की आँख में देखते हुवे लंड पकड़ ली और उसका स्किन खोल दी l महेन्द्र को तो लगा वो बहू के हाथ में ही स्खलित हो जायेगा, उसकी आंख बंद थी बहू महेन्द्र के लंड का स्किन ऊपर नीचे कर रही थी l
तभी उसे लंड पे कुछ गर्म सा अहसास हुवा, उसने आँख खोल के देखा तो लंड का टोपी माया के मुहँ में था l वो मस्ती में दबाव बना के बाकी का लंड भी बहू के मुँह में पेल दिया l माया चप - चप की आवाज़ के साथ लंड चूसने लगी, ससुर जी के लंड का स्वाद मानस के लंड से बहुत अलग था l महेन्द्र का लंड ज्यादा फुला हुवा था, लंड की टेढ़ी मेढ़ी नस माया को और मज़ा दे रही थी l ससुर जी का तगड़ा लंड चूस के तो वो मानस का लंड भूल गई l
जल्द से जल्द वो इस तगड़े लंड को अपने बुर में भींचना चाहती थी l
लंड चूसते चूसते वो सोफे से उतर फर्श पे आ गई थी l

महेन्द्र - बहू.... मुझे भी तो अपने बुर का स्वाद दिलाओ l ये कहते हुवे महेन्द्र बहू को उठाया और उसे घुमा कर सोफे पे झुका दिया l अगले ही पल उसकी गांड नंगी हो गई, महेंद्र एक झटके में पैंटी नीचे कर दिया था l पैंटी उतरने के बाद बहू की नंगी गांड और बड़ी लग रही थी l नीचे बैठकर वो अपना मुहँ बहू की बड़ी सी गांड में डाल दिया, माया कसमसा के रह गई l महेन्द्र की जीभ उसकी गांड की chhed पे हरकत करने लगी थी l माया के लिए ये बहुत अलग अनुभव था, मानस oral तो करता था लेकिन उसने कभी माया की गांड में मुहँ नहीं लगाया l आज महेन्द्र उसे काफी अलग मज़ा दे रहा था l धीरे धीरे मह्रन्द्र की जीभ माया के बुर तक आ रही थी l बहू के बुर का गन्दा पानी ससुर बड़े मज़े से चाट रहा था l कुछ देर बाद महेन्द्र माया का कमर पकड़ खड़ा हुवा, माया अभी भी झुकी थी, अब वो लंड बिलकुल गांड के बीच सटा दिया l कमर पहले नीचे किया और फिर ऊपर तो जैसे बहू के बुर ने लंड को चुम्बक की तरह अपने अंदर खींच लिया हो l चिपचिपे पानी से सराबोर बहू की बुर में महेन्द्र का लंड बड़ी आसानी से फिसल रहा रहा था l महेन्द्र बहू की लटक रही दोनों चूची को पकड़े पुरे जोश में कस कस के बहू को पेल रहा था l
सोफे पे झुक के माया आज पहली बार पेलवा रही थी, उसे बहुत मज़ा आ रहा था l कुछ देर की चुदाई के बाद महेन्द्र तेज़ से हांफने लगा, उसका क्लाइमेक्स नज़दीक था l बहू की गांड को जोर से पकड़ते हुवे वो पूरा वीर्य बहू की बुर में उड़ेल दिया l महेंद्र 10-15 बार और चोद के जब लंड बाहर निकला तो माया के बुर से सफ़ेद पानी की चासनी जमीन तक चू गई l वो बहू की गांड के पीछे से हाथ डाल बहू की बुर के पानी को हाथ में लिया और अपने लंड के ऊपर लगाया l
महेन्द्र - चाट बहू, ये भी तो चाट
माया एक अच्छी बहू की तरह नीचे बैठ के महेन्द्र का लंड जीभ से साफ़ की l
माया - बाबूजी... आपका लंड बहुत स्वादिष्ट है l
महेंद्र - बहू, लगता है तेरी प्यास नहीं बुझी l
महेन्द्र बहू की गांड पे thappad मारा.... और उसे सोफे पे गिरा दिया l
माया खिलखिलाने लगी और झुक के अपनी position ले li, महेन्द्र इस बार लंड बहू की गांड में डाला l माया कराह उठी वो बाबूजी को पीछे धक्का दीl
माया - आह नहीं बाबूजी ये बहुत बड़ा है l
महेन्द्र - प्लीज बहू, चोदने दो l आज मत रोक मुझे l
माया - ओके बाबूजी आप रुको मैं तेल लेकर आती हूँ l
माया जल्दी से उठ के नंगे ही बैडरूम में आयी l

मानस गहरी नींद सो रहा था l वो टेबल से एक तेल की शीशी उठाई और वापस भाग आयी l
ये लीजिये बाबूजी, महेन्द्र लंड पे तेल लगाया l काला नाग सा लंड चमचमा उठा l
बहू दुबारा झुक गई, महेन्द्र शीशी को उल्टा कर बहू की गांड पे तेल गिराया तो पूरा ढक्कन खुल गया सारा तेल बहू की गांड से होता हुवा सोफे और जमीन पे फ़ैल गया l
महेन्द्र - ओह बहू वो गलती से l
माया - आप चिंता मत करिये बाबूजी मैं साफ़ कर दूँगी आप chodiye मुझे l

तेल की परवाह किये बगैर महेन्द्र बहू की गांड चोदने laga, तेल इतना ज्यादा था की बार बार लंड फिसल जाता दोनों का बदन तेल में फिसल रहे थे l आखिरकार महेन्द्र का वीर्य बहू की गांड पे निकल गया l
सुबह के चार बज गए थे चुदाई करते करते l पूरा कमरा ससुर बहू की जबर्दश्त चुदाई का सबूत दे रहा था l
ileana dcruz वाली मैसेज को देख उसके दिमाग में हलचल hui, क्या पापा भी..... मन में कहते कहते रुक गई l
नो क्या सच में ?... हो भी सकता है... मम्मी से दूर हैं तो शायद करते होंगे l माया पागलों की तरह बेड पे लेटी.. खुद से सवाल और खुद को जवाब भी दे रही थी l थोड़ी देर उसे realize हुवा की वो पापा के बारे में ऐसा सोच रही है l वो बेड से उठी फ्रेश हुई बार बार पापा का चैट खोलती लेकिन कोई मैसेज नहीं था l आखिरकार वो अपनी फ्रेंड को कॉल की शॉपिंग पे जाने के लिए l
माया अपनी सहेली के साथ शॉपिंग कर रही थी, वो बार बार फ़ोन देखती लेकिन पापा का कोई मैसेज नहीं l
फिर दोनों जब एक रेस्टुरेंट में बैठे थे तब माया ने मैसेज किया l उदय का रिप्लाई भी तुरंत आ गया, वो खुश हो कर चैट करने लगी बीच बीच में वो अपनी सहेली के साथ ली हुई सेल्फी फोटोज भी भेजती रही l
दोनों एक दूसरे को पिक्स भेज देते थे, कभी उदय अपने खाने के फोटो भेजाता तो कभी, माया ने रेस्टुरेंट का फोटो भेजती l इस तरह फोटो के साथ साथ देर तक बातें होती रहती हैं l ढेर सारी शॉपिंग ख़त्म कर के बाद माया घर आ गई l घर आकर वो बेड पे लेट गई l
उदय का मैसेज आया l
उदय - कहाँ हो बेटी l
माया - अभी अभी घर aayi पापा
उदय - ok.. बहुत मस्ती की तुमने आज
माया - हाँ
उदय - क्या क्या शॉपिंग की मुझे भी तो दिखाओ
माया शॉपिंग पैकेट बेड पे पलट कर एक साथ फोटो खींच भेज दी l फोटो में हैंडबैग लिपस्टिक पिन deo kajal चूड़ी एक दो टॉप लेग्गिंग जीन्स सारी के साथ साथ उसके innerwear भी थे जिसपे उदय की नज़र भी पड़ी लेकिन उसने इग्नोर किया l
उदय ने माया की भेजी फोटो देख फ़ोन कॉल कर दिया....
उदय - बाप रे इतनी सारी शॉपिंग.... लेकिन ये क्या मुझे लगा पहन के dikhaogi l
माया - अभी नहीं पापा अभी बहुत थक गई हूँ l (माया angdaai लेती बोली )
उदय - ओह समझा बेटी तो तू आराम कर
माया - ऐसी नहीं है पापा फ्री हूँ बस लेटे रहना चाहती हूँ l
उदय - ok. आज मैं भी फ्री हू बेटी, कितना अच्छा होता तू मेरे साथ होती तुझे ढेर सारी शॉपिंग करता l
माया - हाउ स्वीट ऑफ़ यू पापा l
उदय - अच्छा एक बात बाता वो औरत तुम्हारी सहेली थी ?
माया - हँसते हुवे... नहीं पापा सहेली नहीं hai, मेरे पड़ोस में रहती है l मुझसे काफी बड़ी है
उदय - अच्छा बेटी l
माया - काफी paise वाली है papa.. और बहुत मॉडर्न भी l हस्बैंड और उसके 2 बच्चे दुबई में रहते हैं l
उदय - हाँ वो तो दिख रहा था काफी मॉडर्न है l
माया - hmmm... कैसे... ? उसके पहनावे से ?
(उदय की तो जैसे चोरी pakdi गई थी l haan... मेरा मतलब.... )
माया - its ओके पापा.. मैं माँ को नहीं बताउंगी l
(माया खिलखिलाई )
उदय - shut up... तुम गलत सोच रही हो l
माया - क्या पापा आप भी दोस्ती करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है l आप chahein तो मैं introduce करा सकती हूँ l
उदय - माया तू भी ना
माया - वैसे उसका नाम varsha है l
उदय - हम्म..
माया - अच्छी लगती है ना ?
उदय - हाँ सुन्दर है... तुम्हारी तरह
माया - मुझसे ज्यादा.. और बहुत मॉडर्न.. पब पार्टी ड्रिंक्स सब करती है l
उदय - ओह
माया - independent है, शायद पति के साथ उसका कुछ जमता नहीं है l घर पे जब भी मिलती है घंटों उसकी बुराई करती है l वैसे आपको देखा है उसने, आपके बारे में जानती है l
उदय - मुझे कैसे ?
माया - मैंने उसे अपने कई सारे फोटो एल्बम दिखाया है उसने आपको कॉम्पलिमेंट भी दिया की आप बहुत fit and हैंडसम हो l शॉपिंग के वक़्त उसे पता था की आपसे चैट कर रही हूँ l तभी तो हमदोनो की साथ की फोटो भेजने में उसे कोई ऐतराज़ नहीं हुवा l
उदय - ओके समझा l सभी दुबई में हैं, तो वो यहाँ क्यों ?
माया - वो अपनी जॉब नहीं छोड़ना चाहती
उदय - अकेली रहती है
माया - नहीं अपने देवर के साथ रहती है l
(देवर के साथ रहने वाली बात उदय को अटपटी सी लगी साथ ही साथ थोड़ी हॉट भी )
माया - क्या हुवा papa... क्या सोच रहे हो ?
उदय - कुछ भी तो नहीं l
माया - लगता है वर्षा आ रही है l
उदय - ओह फिर se.. तुम्हारे घर... ?
माया - पापा... मैं इस varsha की नहीं बादलों की वर्षा की बात कर रही हूँ l आज baarish होगी l
उदय - ओह sorry
माया - आपके दिमाग पे varsha का जादू चल गया है क्या ?
उदय - कैसी बात कर रही है tu.. मैंने उसे ठीक से देखा भी नहीं, भला मेरे पर उसका जादू कैसे चलेगा l
माया - ओके ये प्रॉब्लम है तो मैं दिखा देती हूँ उसकी बहुत सी फोटो हैं मेरे पास l आप कहो तो उसे घर बुलाऊँ वीडियो कॉल पे देख लेना l
उदय - shut up बेटी...
माया - मम्मी से डरते हो आप ?
(माया को इस वक़्त पापा से शरारत भरी बात करके बहुत मज़ा आ रहा था )
उदय - नहीं प्यार करता हूँ l
माया - उम्म्म सो स्वीट माय डिअर डैड.. muwa..
उदय - हम्म
माया - अच्छा सॉरी वैसे ही आपको तंग कर रही थी, मैं तो सिर्फ दोस्ती के लिए बोल रही थी l
उदय - हाँ वो ठीक है, तेरी बहुत अच्छी दोस्त है वो ?
माया - हाँ बहुत अच्छी
उदय - ओके, उसने भी शॉपिंग की ?
माया - हाँ उसने तो बहुत सारी shopping की, बहुत तंग करती है मुझे 50 trial के बाद एक कपड़े लेती है और मुझे फोटोज लेनी पड़ती है l उसकी shopping से मैं थक जाती हूँ l
उदय - ओके अब समझा
माया - अच्छा ये देखो उसकी कुछ पिक्स
(माया varsha की कुछ पिक्स भेज देती है )

Varsha की टाइट टॉप में बूब देख उदय का मूड बन जाता है l फोटो zoom कर वो दूसरे हाथ से लंड मसलता है l
माया - उसके कपड़े की चॉइस अच्छी है ना पापा ?
उदय - हाँ बहुत ( उदय का ध्यान इस वक़्त कपड़े में नहीं varsha के कपड़ों के अंदर chhupe angon में था l वो धीरे से लंड बाहर निकाल सहलाने लगता है )
माया अपने पापा के harkaton से अनजान non stop बातें करती रहती है l
माया - इसलिए मुझे जब भी कुछ शॉपिंग करनी होती है varsha को he le जाती हूँ l
उदय - हम्म्म्म
(इस बीच उदय varsha की एक क्लीवेज वाली pic dekh मुट्ठ मारने लगता है )

उदय earphone लगा के बात कर रहा होता hai, microphone में उसकी लम्बी लम्बी सांस की आवाज़ माया को साफ़ सुनाई देती hai, इस लम्बी सांस का मतलब वो समझती थी क्योंकि मानस इनदिनों अक्सर माया से बात करते हुवे लंड हिलाता था और उसकी सांस तेज सुनाई पड़ती साथ हे साथ उसकी आवाज़ भी बदल सी जाती थी l
लेकिन उदय नार्मल बात कर रहा था वो थोड़ी दुविधा में थी l तो उसने एक सवाल पूछा...
माया - पापा आप अपने ऑफिस के केबिन का फोटो भेजिए ना l
उदय - अरे बेटी मैं तो गेस्ट हाउस आ गया l (हाथ की स्पीड धीमी करते huwe)
माया का शक जैसे यकीन में बदल गया हो... वो चौंक के बेड पे बैठ गई l earphone को कान के अंदर धकेल वो स्थिति samajhne की कोशिश कर रही थी l.वो varsha की एक और हॉट pic bhej दी.... pic पर whatsapp का blue tick मार्क आया और साथ हे उदय के साँसों की आवाज़ भी तेज हो गई thi, माया ने ghabrahat में झट से फ़ोन काट दिया l
वो सर पे हाथ रखे ascharya से... ओह माय god पापा kya... shit... नहीं नहीं.... शायद नहीं... क्या पता पापा कुछ काम कर रहे होँ, सीढिया चढ़ रहे हों l इसलिए सांस तेज़ हो l
उधर उदय फ़ोन katne के बाद मौका मिलते ही varsha की हॉट pic dekhkar खुलकर मुट्ठ मारने लगा l
माया सोचने लगी.. फ़ोन उसने तुरंत काट दिया था ना जाने papa क्या सोच रहे होंगे l इसलिए वो वापस कॉल की l
उदय ने पहले कभी ईरफ़ोन इस्तेमाल नहीं किया था, बस कुछ हफ़्तों से जबसे वो माया से बात करने लगा था ज्यादातर earphone इस्तेमाल करता था l
खैर उसने फ़ोन पिक किया l
उदय - हाआनंनं बेटी......
इस बार उदय की आवाज़ बहुत बदली सी थी और साँसें तेज़ l माया जान चुकी थी की उसके पापा varsha को dekh मुट्ठ मार रहे हैंl फिर भी माया बातचीत नार्मल रखी ताकि उसके पापा को शक ना हो l
माया - pic देखी पापा ? ये टॉप मैं लेने वाली थी l लेकिन उसे इतना पसंद आया की वो रख ली l
उदय - हाँ.. हाँ.. okkkay.. picccc dekh raha hun.... आह्ह्ह्ह... अच्छी topppppp है वाकईईई... उम्म्म l
उसे इस बात का बिलकुल अहसास नहीं था की माइक्रोफोन पे माया को उसकी सांस की आवाज़ सुनाई दे रही होगी l वो तो बस नार्मल बात करके सोचता था की कोई प्रॉब्लम नहीं होगी l
माया ध्यान से सब सुनती रही... l
माया - पापा आप कभी आओगे तो आपको varsha से भी मिलवाउंगी l
उदय - उम्म्म... उन्ह्ह हाँ मिलवा देनाआआ (उदय मन में बोल रहा था... आह चोदना चाहता हूँ मैं varsha को )
उदय लंड को झटका देते चार लम्बी लम्बी saan ली... l
उदय - उन्हह... आअह्ह....
फच फच करते हुवे उसका लंड पेट पे गरम वीर्य उगल दिया l

upload images
माया भी समझ चुकी थी, की पापा का पानी आ गया है l उसके मुहँ से अनयास ही निकल गया l
माया - निकल गया क्या पापा ?
(उदय एकदम से चौंक पड़ा... ककक kyaaaa ?)
माया - ईरफ़ोन निकल गया क्या पापा... आवाज़ नहीं मिल रही आपकी l
उदय ने rahat ki सांस ली.... वो तो डर हे गया था l
उदय - (earphone ठीक करते हुवे.. ) ok अब ठीक है ?
(माया मुस्कुरा रही थी .. .. उसे अपनी शरारत पे खुद हंसी आ रही थी )
माया - हम्म अच्छा मैं फ़ोन काटती हूँ l पसीने से गन्दी हो गई हूँ साफ़ होना है, आप भी अपनी गन्दगी साफ़ कर लीजिये.. (माया एक बार फिर मुस्कुरा दी )
उदय - (घबराते हुवे bye बेटी )
माया - bye
नो क्या सच में ?... हो भी सकता है... मम्मी से दूर हैं तो शायद करते होंगे l माया पागलों की तरह बेड पे लेटी.. खुद से सवाल और खुद को जवाब भी दे रही थी l थोड़ी देर उसे realize हुवा की वो पापा के बारे में ऐसा सोच रही है l वो बेड से उठी फ्रेश हुई बार बार पापा का चैट खोलती लेकिन कोई मैसेज नहीं था l आखिरकार वो अपनी फ्रेंड को कॉल की शॉपिंग पे जाने के लिए l
भाग 19
माया अपनी सहेली के साथ शॉपिंग कर रही थी, वो बार बार फ़ोन देखती लेकिन पापा का कोई मैसेज नहीं l
फिर दोनों जब एक रेस्टुरेंट में बैठे थे तब माया ने मैसेज किया l उदय का रिप्लाई भी तुरंत आ गया, वो खुश हो कर चैट करने लगी बीच बीच में वो अपनी सहेली के साथ ली हुई सेल्फी फोटोज भी भेजती रही l
दोनों एक दूसरे को पिक्स भेज देते थे, कभी उदय अपने खाने के फोटो भेजाता तो कभी, माया ने रेस्टुरेंट का फोटो भेजती l इस तरह फोटो के साथ साथ देर तक बातें होती रहती हैं l ढेर सारी शॉपिंग ख़त्म कर के बाद माया घर आ गई l घर आकर वो बेड पे लेट गई l
उदय का मैसेज आया l
उदय - कहाँ हो बेटी l
माया - अभी अभी घर aayi पापा
उदय - ok.. बहुत मस्ती की तुमने आज
माया - हाँ
उदय - क्या क्या शॉपिंग की मुझे भी तो दिखाओ
माया शॉपिंग पैकेट बेड पे पलट कर एक साथ फोटो खींच भेज दी l फोटो में हैंडबैग लिपस्टिक पिन deo kajal चूड़ी एक दो टॉप लेग्गिंग जीन्स सारी के साथ साथ उसके innerwear भी थे जिसपे उदय की नज़र भी पड़ी लेकिन उसने इग्नोर किया l
उदय ने माया की भेजी फोटो देख फ़ोन कॉल कर दिया....
उदय - बाप रे इतनी सारी शॉपिंग.... लेकिन ये क्या मुझे लगा पहन के dikhaogi l
माया - अभी नहीं पापा अभी बहुत थक गई हूँ l (माया angdaai लेती बोली )
उदय - ओह समझा बेटी तो तू आराम कर
माया - ऐसी नहीं है पापा फ्री हूँ बस लेटे रहना चाहती हूँ l
उदय - ok. आज मैं भी फ्री हू बेटी, कितना अच्छा होता तू मेरे साथ होती तुझे ढेर सारी शॉपिंग करता l
माया - हाउ स्वीट ऑफ़ यू पापा l
उदय - अच्छा एक बात बाता वो औरत तुम्हारी सहेली थी ?
माया - हँसते हुवे... नहीं पापा सहेली नहीं hai, मेरे पड़ोस में रहती है l मुझसे काफी बड़ी है
उदय - अच्छा बेटी l
माया - काफी paise वाली है papa.. और बहुत मॉडर्न भी l हस्बैंड और उसके 2 बच्चे दुबई में रहते हैं l
उदय - हाँ वो तो दिख रहा था काफी मॉडर्न है l
माया - hmmm... कैसे... ? उसके पहनावे से ?
(उदय की तो जैसे चोरी pakdi गई थी l haan... मेरा मतलब.... )
माया - its ओके पापा.. मैं माँ को नहीं बताउंगी l
(माया खिलखिलाई )
उदय - shut up... तुम गलत सोच रही हो l
माया - क्या पापा आप भी दोस्ती करने में कोई प्रॉब्लम नहीं है l आप chahein तो मैं introduce करा सकती हूँ l
उदय - माया तू भी ना
माया - वैसे उसका नाम varsha है l
उदय - हम्म..
माया - अच्छी लगती है ना ?
उदय - हाँ सुन्दर है... तुम्हारी तरह
माया - मुझसे ज्यादा.. और बहुत मॉडर्न.. पब पार्टी ड्रिंक्स सब करती है l
उदय - ओह
माया - independent है, शायद पति के साथ उसका कुछ जमता नहीं है l घर पे जब भी मिलती है घंटों उसकी बुराई करती है l वैसे आपको देखा है उसने, आपके बारे में जानती है l
उदय - मुझे कैसे ?
माया - मैंने उसे अपने कई सारे फोटो एल्बम दिखाया है उसने आपको कॉम्पलिमेंट भी दिया की आप बहुत fit and हैंडसम हो l शॉपिंग के वक़्त उसे पता था की आपसे चैट कर रही हूँ l तभी तो हमदोनो की साथ की फोटो भेजने में उसे कोई ऐतराज़ नहीं हुवा l
उदय - ओके समझा l सभी दुबई में हैं, तो वो यहाँ क्यों ?
माया - वो अपनी जॉब नहीं छोड़ना चाहती
उदय - अकेली रहती है
माया - नहीं अपने देवर के साथ रहती है l
(देवर के साथ रहने वाली बात उदय को अटपटी सी लगी साथ ही साथ थोड़ी हॉट भी )
माया - क्या हुवा papa... क्या सोच रहे हो ?
उदय - कुछ भी तो नहीं l
माया - लगता है वर्षा आ रही है l
उदय - ओह फिर se.. तुम्हारे घर... ?
माया - पापा... मैं इस varsha की नहीं बादलों की वर्षा की बात कर रही हूँ l आज baarish होगी l
उदय - ओह sorry
माया - आपके दिमाग पे varsha का जादू चल गया है क्या ?
उदय - कैसी बात कर रही है tu.. मैंने उसे ठीक से देखा भी नहीं, भला मेरे पर उसका जादू कैसे चलेगा l
माया - ओके ये प्रॉब्लम है तो मैं दिखा देती हूँ उसकी बहुत सी फोटो हैं मेरे पास l आप कहो तो उसे घर बुलाऊँ वीडियो कॉल पे देख लेना l
उदय - shut up बेटी...
माया - मम्मी से डरते हो आप ?
(माया को इस वक़्त पापा से शरारत भरी बात करके बहुत मज़ा आ रहा था )
उदय - नहीं प्यार करता हूँ l
माया - उम्म्म सो स्वीट माय डिअर डैड.. muwa..
उदय - हम्म
माया - अच्छा सॉरी वैसे ही आपको तंग कर रही थी, मैं तो सिर्फ दोस्ती के लिए बोल रही थी l
उदय - हाँ वो ठीक है, तेरी बहुत अच्छी दोस्त है वो ?
माया - हाँ बहुत अच्छी
उदय - ओके, उसने भी शॉपिंग की ?
माया - हाँ उसने तो बहुत सारी shopping की, बहुत तंग करती है मुझे 50 trial के बाद एक कपड़े लेती है और मुझे फोटोज लेनी पड़ती है l उसकी shopping से मैं थक जाती हूँ l
उदय - ओके अब समझा
माया - अच्छा ये देखो उसकी कुछ पिक्स
(माया varsha की कुछ पिक्स भेज देती है )

Varsha की टाइट टॉप में बूब देख उदय का मूड बन जाता है l फोटो zoom कर वो दूसरे हाथ से लंड मसलता है l
माया - उसके कपड़े की चॉइस अच्छी है ना पापा ?
उदय - हाँ बहुत ( उदय का ध्यान इस वक़्त कपड़े में नहीं varsha के कपड़ों के अंदर chhupe angon में था l वो धीरे से लंड बाहर निकाल सहलाने लगता है )
माया अपने पापा के harkaton से अनजान non stop बातें करती रहती है l
माया - इसलिए मुझे जब भी कुछ शॉपिंग करनी होती है varsha को he le जाती हूँ l
उदय - हम्म्म्म
(इस बीच उदय varsha की एक क्लीवेज वाली pic dekh मुट्ठ मारने लगता है )

उदय earphone लगा के बात कर रहा होता hai, microphone में उसकी लम्बी लम्बी सांस की आवाज़ माया को साफ़ सुनाई देती hai, इस लम्बी सांस का मतलब वो समझती थी क्योंकि मानस इनदिनों अक्सर माया से बात करते हुवे लंड हिलाता था और उसकी सांस तेज सुनाई पड़ती साथ हे साथ उसकी आवाज़ भी बदल सी जाती थी l
लेकिन उदय नार्मल बात कर रहा था वो थोड़ी दुविधा में थी l तो उसने एक सवाल पूछा...
माया - पापा आप अपने ऑफिस के केबिन का फोटो भेजिए ना l
उदय - अरे बेटी मैं तो गेस्ट हाउस आ गया l (हाथ की स्पीड धीमी करते huwe)
माया का शक जैसे यकीन में बदल गया हो... वो चौंक के बेड पे बैठ गई l earphone को कान के अंदर धकेल वो स्थिति samajhne की कोशिश कर रही थी l.वो varsha की एक और हॉट pic bhej दी.... pic पर whatsapp का blue tick मार्क आया और साथ हे उदय के साँसों की आवाज़ भी तेज हो गई thi, माया ने ghabrahat में झट से फ़ोन काट दिया l
वो सर पे हाथ रखे ascharya से... ओह माय god पापा kya... shit... नहीं नहीं.... शायद नहीं... क्या पता पापा कुछ काम कर रहे होँ, सीढिया चढ़ रहे हों l इसलिए सांस तेज़ हो l
उधर उदय फ़ोन katne के बाद मौका मिलते ही varsha की हॉट pic dekhkar खुलकर मुट्ठ मारने लगा l
माया सोचने लगी.. फ़ोन उसने तुरंत काट दिया था ना जाने papa क्या सोच रहे होंगे l इसलिए वो वापस कॉल की l
उदय ने पहले कभी ईरफ़ोन इस्तेमाल नहीं किया था, बस कुछ हफ़्तों से जबसे वो माया से बात करने लगा था ज्यादातर earphone इस्तेमाल करता था l
खैर उसने फ़ोन पिक किया l
उदय - हाआनंनं बेटी......
इस बार उदय की आवाज़ बहुत बदली सी थी और साँसें तेज़ l माया जान चुकी थी की उसके पापा varsha को dekh मुट्ठ मार रहे हैंl फिर भी माया बातचीत नार्मल रखी ताकि उसके पापा को शक ना हो l
माया - pic देखी पापा ? ये टॉप मैं लेने वाली थी l लेकिन उसे इतना पसंद आया की वो रख ली l
उदय - हाँ.. हाँ.. okkkay.. picccc dekh raha hun.... आह्ह्ह्ह... अच्छी topppppp है वाकईईई... उम्म्म l
उसे इस बात का बिलकुल अहसास नहीं था की माइक्रोफोन पे माया को उसकी सांस की आवाज़ सुनाई दे रही होगी l वो तो बस नार्मल बात करके सोचता था की कोई प्रॉब्लम नहीं होगी l
माया ध्यान से सब सुनती रही... l
माया - पापा आप कभी आओगे तो आपको varsha से भी मिलवाउंगी l
उदय - उम्म्म... उन्ह्ह हाँ मिलवा देनाआआ (उदय मन में बोल रहा था... आह चोदना चाहता हूँ मैं varsha को )
उदय लंड को झटका देते चार लम्बी लम्बी saan ली... l
उदय - उन्हह... आअह्ह....
फच फच करते हुवे उसका लंड पेट पे गरम वीर्य उगल दिया l

upload images
माया भी समझ चुकी थी, की पापा का पानी आ गया है l उसके मुहँ से अनयास ही निकल गया l
माया - निकल गया क्या पापा ?
(उदय एकदम से चौंक पड़ा... ककक kyaaaa ?)
माया - ईरफ़ोन निकल गया क्या पापा... आवाज़ नहीं मिल रही आपकी l
उदय ने rahat ki सांस ली.... वो तो डर हे गया था l
उदय - (earphone ठीक करते हुवे.. ) ok अब ठीक है ?
(माया मुस्कुरा रही थी .. .. उसे अपनी शरारत पे खुद हंसी आ रही थी )
माया - हम्म अच्छा मैं फ़ोन काटती हूँ l पसीने से गन्दी हो गई हूँ साफ़ होना है, आप भी अपनी गन्दगी साफ़ कर लीजिये.. (माया एक बार फिर मुस्कुरा दी )
उदय - (घबराते हुवे bye बेटी )
माया - bye
Lund pe he lete raho... Maya Sabka lund legi..Dil par nahi lete he lund par hi lete he tabhi comment kar ke dudh wale kaka ka bola maza badhane ke liye
LajawaabHaan bhai laga hoon
May be success bhi mil jayegi
What's app pe adult msg tak baat pahuch gayi hai
Wo bhi uski shart hai ki hum log kewal raat mein aisi baatein karenge means thoda open hui hai
Boy friend and all
उदय - आह बेटी और फोटो भेजो ना.. ( उदय की आवाज़ में सरसराहट थी )
माया समझ नहीं पा रही थी की पापा बार बार फोटो क्यों मांग रहे hain.. या फिर उस वक़्त वो समझना नहीं चाहती थी l उसे तो पापा पे अपना लाड़लापन दिखाना था, अपनी गलती के लिए सॉरी बोलना था l
उसने इस बार मोबाइल दूर किया और pic li, भेजने से पहले वो pic dekhi तो khud ही शरमा गई l
उदय - क्या हुवा बेटी फोटो भेजा तुमने l
माया - हाँ papa
माया एक टक whatsapp देख रही थी, जैसे ही blue tick लगा माया का दिल जोर जोर से धड़कने लगा l
उदय ने माया का फोटो देखा तो उसके लंड ने जोरदार सलामी दे डाली l उसने एक झटके से अंडरवियर नीचे कर लिया l माया की इतनी हॉट फोटो देख वो खुद को रोक नहीं पाया और मुट्ठ मारने पे मजबूर हो गया l
उदय की सांस तेज़ हो गई, माया इस साँसों की तेजी का कारण भली भाँती समझती थी l उसका भी दिल जोरों से धड़क रहा था, वो कुछ बोल नहीं पाई बस ब्लैंकेट के अंदर तकिये को अपने आगोश में लेकर वो ध्यान पूर्वक खच खच की आ रही आवाज़ को समझने की कोशिश कर रही थी l
दरअसल उदय जितनी तेज़ी से लंड हिलाता उतनी ही तेज़ी से earphone का mike उसके chin से टकराती l
आह बेटी......
माया - क्या पापा... ?
उदय - कुछ नहीं.... (उदय कुछ ना बोल पाया )
माया - बात करो na पापा...
उदय - क्या कहूं... ? आआआहह ...(उदय की सांस और तेज़ थी)
सबकुछ जानते हुवे भी माया को कोई ऐतराज़ नहीं था, वो तो पापा को बस खुश देखना चाहती थीl
माया ने सोचा क्यों na वो पापा ka मज़ा बढ़ा दे ताकि पापा रिलैक्स हो जायें तो उसने बात छेड़ी l
माया - पापा पता है आपकी favorite actress की एक मूवी आ रही है l
uski...फिल्म...
उदय - बेटी प्लीज...... इस वक़्त अपनी बात करो किसी एक्ट्रेसस की नहीं (उदय ने माया को बीच में ही रोक दिया था)l
माया - अच्छा पापा अपनी pic भेजो na l
उदय - (बहाने बनाते huwe..) बेटी इधर पावर कट हो गया है. अँधेरा है l
माया - ओह मेरे घर पे भी पावर कट हो गया अभी थोड़ी देर पहले l
माया - koi baat नहीं आप गूगल से कोई pic भेज दो... जैसे पहले भेजा था l
उदय - नहीं नहीं... तुम bologi मेरी चॉइस ख़राब है l
माया - अरे बाबा नहीं बोलूंगी प्रॉमिस,.. आपको जो चाहो वैसा pic भेजो l (माया ने एक प्रकार से पापा को हल्का खुला आमंत्रण दे दिया )
उदय के दिमाग पे पहले से ही सेक्स हावी था, तो उसने गूगल pe कपल हॉट pic सर्च किया l)
उसने धड़कते दिल से एक फोटो डाउनलोड की जिसमे ladka लड़की को hug करके लेटा है और उसका हाथ लड़की के बूब पे था l

Pic काफी hot था, तो usne pic ke upar बड़े अक्षरों में miss you beti लिखा... text boob के upar paste kiya jisase thoda pic छुप gaya magar अभी भी मालूम होता था की लड़के ने अपना हाथ कहाँ रखा है l
उदय ने हिम्मत करके वो pic भेज दिया, उसे डर था कहीं माया नराज़ न हो जाए l
माया ने जब wo Pic देखा तो सिहर उठी, pic ke Choice से usse इस वक़्त पापा के मूड का पता चल गया था l लेकिन उदय की उम्मीद के विपरीत उसने जवाब दिया -
माया - उम्म्म अच्छी चॉइस है पापा.. i miss u too.. , और भेजो na l
उदय खुश हो गया, माया को इस फोटो से कोई ऐतराज़ नहीं था l उसका लंड और तन गया l
उदय - नहीं अब तुम भेजो beti l
माया - यहाँ भी तो पावर कट है l
उदय - अच्छा तो फिर तुम भी गूगल से खोज के भेजो... जब तक पावर आ नहीं जाता l
माया - ओके पापा...
माया ने भी वैसी ही couple kissing की फोटो निकाली जिसे dekhkar पापा को और हिम्मत मिले l
माया ने दो pic bheji एक में वो थोड़ी अधनंगी बिस्तर में पापा के साथ और दूसरे में वो पापा को kiss कर रही थी l दोनों pic में उसने लड़की के upar माया और लड़के के ऊपर papa लिख दिया था l


उदय ने जब pic dekha तो सेक्स से भर उठा...
उदय - आआआह बेटी ... red blouse में बहुत अच्छी लग रही हो तुम l
माया मुस्कुरा दी l
माया - अब आपकी बारी पापा...
दोनों बाप बेटी को इस game में मज़ा आ रहा था l
उदय की भी हिम्मत बढ़ती जा रही थी और दिमाग सिर्फ सेक्स के बारे में सोच रहा था l
उसने भी खुलेपन से 2 फोटो bheji जिसमे वो माया को kiss कर रहा है और साथ ही बूब को भी अच्छे से दबा रहा है l और दूसरे में वो माया के बूब पे अपना मुँह रखा है l इस बार उदय ने pic को ढंकने की कोशिश नहीं की थी l


माया pic देख कर खुद ही उत्तेजित हो गई, उसने सोचा था पापा का माल निकल जायेगा तो वो रिलैक्स हो जायेंगे l मगर पापा को रिलैक्स करने के बजाय वो खुद बेचैन हो गई थी, उसके शरीर में ऐंठन थी और दोनों जांघो के बीच गीलापन महसूस हो रहा था l
उदय - बेटी pic dekhi..? कौन si pic अच्छी लगी तुम्हे ?
माया मदहोशी में बोल पड़ी....
माया - दूसरी वाली क्योंकि मेरी spaghetti भी ऐसी ही है l
उदय - आआअह्ह्ह्ह beti.... तुम्हे कस के बाँहों में लेने का मन हो रहा है.... आअह्ह्ह्हह ssss... (उदय की सांस और तेज़ हो गई )
इधर माया भी तड़प रही थी और सोच रही थी की ऐसे सिचुएशन में मानस का वीर्य तो 2 min में ही निकल जाता है, पापा इतनी देर से... उफ़ अभी तक नहीं निकला l वो इमेजिन करने लगती है की किस कदर पापा अपना खड़ा लंड सहला रहे होंगे l लंड को याद करते ही माया वासना की आग में सिसकारी भरने लगती है l
माया - आह ह ह papa...
उदय - क्या हुवा बेटी?
माया - बहुत गर्मी लग रही है पापा...
उदय - तो ब्लैंकेट hata दो l
माया - वो तो बहुत पहले हटा दी, फिर भी पसीने से पूरी spaghetti भीग गई है l
(माया ने जानबूझ के स्पघेटी भीगने वाली बात झूठ बोली थी, ताकि पापा उसे इमेजिन कर उत्तेजित हो सके )
उदय भीगी spaghetti में माया को सोच कर मुट्ठ मारे जा रहा था l आह बेटी पावर होता तो तुम्हारी सेल्फी देखता,...
उसके बाद उदय ने जो बोला, माया मुस्कुरा दी... उसका प्लान काम कर रहा था, उसने पापा से यही उम्मीद भी की थीl
उदय - आ... बेटी... गर्मी लग रही है तो spaghetti खोल दो ना l
माया - उम्म्म हाँ theek कहा आपने... (माया ने सच में स्पघेटी उतार फेंकी )
उदय माया को बिना स्पघेटी के नंगे हो चुके बूब को इमेजिन कर जोर जोर से लंड हिलाने लगा l
उदय - उतार दी बेटी.... आह..
माया - हाँ पापा... उतार दी .. (माया सेक्सी आवाज़ में अंगड़ाई लेती बोली )
माया - ओह्होओ...
उदय - अब क्या हुवा... बेटी ?
माया - क्या बताऊँ.. पावर भी मुझसे बदमाशी कर रहा है जब पहनी थी तो पावर कट था अब जब कपड़े उतार दी तो पावर आ गया l
उदय - हाहा
माया ने इसी बीच एक pic भी भेज दिया papa को

उदय ने pic देख के बोला
उदय - ये pic क्यों भेजा तुमने बेटी ?
माया - क्यों पापा.. क्या प्रॉब्लम है इस pic में?
उदय - बेटी प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन pic में लड़की ने top पहन रखा है l
माया - हाँ
उदय - लेकिन बेटी तुमने तो अभी अभी उतार दिया ना.... तो फोटो में भी लड़की को बिना टॉप के होना था l
(माया पापा के इस खुलेपन को एन्जॉय kar रही थी )
माया - छी पापा... आप भी ना...बदमाश हो.. so जाओ आप (माया शरमा गई )
उदय - प्लीज बेटी भेजो ना...
माया - मुझे नहीं आता इस तरह की फोटो खोजने पापा.. ...
उदय - गूगल से नहीं खोज सकती तो अपना selfie bhej do...पावर to आ गया ना .(उदय बिना डरे बोल गया )
माया - papaaaaa...my god..
उदय - हाहाहा बेटी... मजाक कर रहा था.. तो बोलो अब क्या करोगी ?
माया - अपना तो नहीं भेज सकती गूगल से ही खोजती हूँ l
माया ने थोड़ी देर बाद एक pic भेज दी l

upload images
उदय - cheater हो tum.... ये टॉपलेस नहीं है l मुझे pic में लड़की की ब्लैक ब्रा दिख रही है l
माया पापा के मुँह से ब्रा jaise वर्ड सुनकर हंसती है...
माया - मुझे pic नहीं मिल रहा पापा... आप ही खोज दो ना l
पापा - मैं भेजूं .. ? नाराज़ तो नहीं होगी ना ?
माया - नहीं पापा..
उसके बाद उदय ने जो तस्वीर भेजी उसे देख कर माया के होश उड़ गए l तस्वीर में kissing था और ladki puri नंगी थी l

माया - पापा..... छी कितने गंदे हो आप l
उदय - अरे तुमने ही तो कहा था नाराज़ नहीं होगी, वैसे भी ये तुम तो नहीं हो फिर क्यों शरमा रही हो l ये तो कोई हीरोइन है l
माया - हम्म..
उदय - एक बात कहूं बेटी...
माया - हाँ kahiye..
उदय - अगर तुम सचमुच मेरे पास होती यहाँ तो मैं तुम्हे ऐसे ही kiss karta...बेटी aaahhhh.....
माया पापा की बात सुनकर गरम हो गई थी, साथ ही पापा की मुट्ठ मारने की आवाज़ उसपे अलग जादू kar रही thi... बेड pe.मचलते उसके मुहँ से अनायास ही निकला...
माया - उम्म्म्म... पापा... आआ.. और..
उदय - और क्या बेटी l
माया - मदहोश si...अपनी पैंटी के अंदर हाथ डाल li... और क्या करते पापा...
उदय - तुम बुरा मान जाओगी...
माया - नहीं बुरा मानूंगी पापा... बोलो ना... (माया बाएं हाथ का मिडिल फिंगर बुर में डाल अंदर बाहर करने lagi)
उदय - kiss karte हुवे अपना हाथ तुम्हारे बालों में फेरता l
माया - ummm... और papa...
उदय - और फिर हाथ बालों से नीचे कंधे तक... हाथ तुम्हारे सीने पे रखता....
माया - उम्म्म (माया बहुत गरम हो गई थी.. ) और.... papa...
उदय - आआअह्ह्ह्हह्हह तुम्हारे नंगे बूब्स को हाथ फेरता .... आआह्ह्ह हाआअह
उदय ख्यालों में बेटी ki नंगी चूची को फील करता बिस्तर पे 5-6 झटके मारा l उसी ke साथ वो लम्बी लम्बी गरम वीर्य की धार पेट पे बहा दिया l
माया - उम्मम्मम aaaaaaaaaahhhhhh papaaaaaaaa....
इधर माया भी अपनी गीली बुर को हथेली से रगड़ते हुवे.. अपने हथेली पे ही स्खलित हो गई ...
सेक्स की आग को दोनों ने अपने लंड और चूत की पानी से बुझा दिया था l
माया भी समझ चुकी थी की पापा का मुट्ठ निकल गया है, तो उसने धीरे से कॉल काट दिया l
लंड का पानी निकलने के बाद उदय को realize हुवा की उसने क्या kar दिया, उसे दुबारा फ़ोन करने की हिम्मत नहीं हुई l बेड पे निढाल वो सोचता रहा, मुट्ठ मारने में उदय को इतना मज़ा कभी नहीं आया जितना अपनी बेटी से हॉट बात karte हुवे स्खलित होना l
ना जाने माया इस वक़्त क्या सोच रही होगी l
उधर माया मन ही मन अपनी कामयाबी पे मुस्कुरा रही थी, बिना अपने अंगों को दिखाए वो सिर्फ हॉट बातें कर पापा ka मुट्ठ निकाल दी थी l लेकिन इन सब के बीच वो भी काफी गरम हो गई थी, उसका जिस्म थरथरा रहा था l स्खलित होने के बाद भी वो बुर पे हथेली रगड़ती रही वो अपनी फूली चूत में एक मोटे लंड के लिए तड़प रही थी l
माया समझ नहीं पा रही थी की पापा बार बार फोटो क्यों मांग रहे hain.. या फिर उस वक़्त वो समझना नहीं चाहती थी l उसे तो पापा पे अपना लाड़लापन दिखाना था, अपनी गलती के लिए सॉरी बोलना था l
उसने इस बार मोबाइल दूर किया और pic li, भेजने से पहले वो pic dekhi तो khud ही शरमा गई l
भाग 21
फोटो में उसके दोनों बूब spagethi के अंदर से झाँक रहे थे, फोटो se साफ़ मालूम हो रहा था की माया ने अंदर bra नहीं पहनी l स्पगेटी का कपडा भी इतना पतला था की उसके दोनों निप्पल उभरे उभरे नज़र आ रहे थे l माया pic देख कर शरमाई तो, साथ ही उसे अपने बदन की सुंदरता पे नाज़ भी था l थोड़ी घबराई सी माया ने आखिरकार वो pic papa को भेज दिया lउदय - क्या हुवा बेटी फोटो भेजा तुमने l
माया - हाँ papa
माया एक टक whatsapp देख रही थी, जैसे ही blue tick लगा माया का दिल जोर जोर से धड़कने लगा l
उदय ने माया का फोटो देखा तो उसके लंड ने जोरदार सलामी दे डाली l उसने एक झटके से अंडरवियर नीचे कर लिया l माया की इतनी हॉट फोटो देख वो खुद को रोक नहीं पाया और मुट्ठ मारने पे मजबूर हो गया l
उदय की सांस तेज़ हो गई, माया इस साँसों की तेजी का कारण भली भाँती समझती थी l उसका भी दिल जोरों से धड़क रहा था, वो कुछ बोल नहीं पाई बस ब्लैंकेट के अंदर तकिये को अपने आगोश में लेकर वो ध्यान पूर्वक खच खच की आ रही आवाज़ को समझने की कोशिश कर रही थी l
दरअसल उदय जितनी तेज़ी से लंड हिलाता उतनी ही तेज़ी से earphone का mike उसके chin से टकराती l
आह बेटी......
माया - क्या पापा... ?
उदय - कुछ नहीं.... (उदय कुछ ना बोल पाया )
माया - बात करो na पापा...
उदय - क्या कहूं... ? आआआहह ...(उदय की सांस और तेज़ थी)
सबकुछ जानते हुवे भी माया को कोई ऐतराज़ नहीं था, वो तो पापा को बस खुश देखना चाहती थीl
माया ने सोचा क्यों na वो पापा ka मज़ा बढ़ा दे ताकि पापा रिलैक्स हो जायें तो उसने बात छेड़ी l
माया - पापा पता है आपकी favorite actress की एक मूवी आ रही है l
uski...फिल्म...
उदय - बेटी प्लीज...... इस वक़्त अपनी बात करो किसी एक्ट्रेसस की नहीं (उदय ने माया को बीच में ही रोक दिया था)l
माया - अच्छा पापा अपनी pic भेजो na l
उदय - (बहाने बनाते huwe..) बेटी इधर पावर कट हो गया है. अँधेरा है l
माया - ओह मेरे घर पे भी पावर कट हो गया अभी थोड़ी देर पहले l
माया - koi baat नहीं आप गूगल से कोई pic भेज दो... जैसे पहले भेजा था l
उदय - नहीं नहीं... तुम bologi मेरी चॉइस ख़राब है l
माया - अरे बाबा नहीं बोलूंगी प्रॉमिस,.. आपको जो चाहो वैसा pic भेजो l (माया ने एक प्रकार से पापा को हल्का खुला आमंत्रण दे दिया )
उदय के दिमाग पे पहले से ही सेक्स हावी था, तो उसने गूगल pe कपल हॉट pic सर्च किया l)
उसने धड़कते दिल से एक फोटो डाउनलोड की जिसमे ladka लड़की को hug करके लेटा है और उसका हाथ लड़की के बूब पे था l

Pic काफी hot था, तो usne pic ke upar बड़े अक्षरों में miss you beti लिखा... text boob के upar paste kiya jisase thoda pic छुप gaya magar अभी भी मालूम होता था की लड़के ने अपना हाथ कहाँ रखा है l
उदय ने हिम्मत करके वो pic भेज दिया, उसे डर था कहीं माया नराज़ न हो जाए l
माया ने जब wo Pic देखा तो सिहर उठी, pic ke Choice से usse इस वक़्त पापा के मूड का पता चल गया था l लेकिन उदय की उम्मीद के विपरीत उसने जवाब दिया -
माया - उम्म्म अच्छी चॉइस है पापा.. i miss u too.. , और भेजो na l
उदय खुश हो गया, माया को इस फोटो से कोई ऐतराज़ नहीं था l उसका लंड और तन गया l
उदय - नहीं अब तुम भेजो beti l
माया - यहाँ भी तो पावर कट है l
उदय - अच्छा तो फिर तुम भी गूगल से खोज के भेजो... जब तक पावर आ नहीं जाता l
माया - ओके पापा...
माया ने भी वैसी ही couple kissing की फोटो निकाली जिसे dekhkar पापा को और हिम्मत मिले l
माया ने दो pic bheji एक में वो थोड़ी अधनंगी बिस्तर में पापा के साथ और दूसरे में वो पापा को kiss कर रही थी l दोनों pic में उसने लड़की के upar माया और लड़के के ऊपर papa लिख दिया था l


उदय ने जब pic dekha तो सेक्स से भर उठा...
उदय - आआआह बेटी ... red blouse में बहुत अच्छी लग रही हो तुम l
माया मुस्कुरा दी l
माया - अब आपकी बारी पापा...
दोनों बाप बेटी को इस game में मज़ा आ रहा था l
उदय की भी हिम्मत बढ़ती जा रही थी और दिमाग सिर्फ सेक्स के बारे में सोच रहा था l
उसने भी खुलेपन से 2 फोटो bheji जिसमे वो माया को kiss कर रहा है और साथ ही बूब को भी अच्छे से दबा रहा है l और दूसरे में वो माया के बूब पे अपना मुँह रखा है l इस बार उदय ने pic को ढंकने की कोशिश नहीं की थी l


माया pic देख कर खुद ही उत्तेजित हो गई, उसने सोचा था पापा का माल निकल जायेगा तो वो रिलैक्स हो जायेंगे l मगर पापा को रिलैक्स करने के बजाय वो खुद बेचैन हो गई थी, उसके शरीर में ऐंठन थी और दोनों जांघो के बीच गीलापन महसूस हो रहा था l
उदय - बेटी pic dekhi..? कौन si pic अच्छी लगी तुम्हे ?
माया मदहोशी में बोल पड़ी....
माया - दूसरी वाली क्योंकि मेरी spaghetti भी ऐसी ही है l
उदय - आआअह्ह्ह्ह beti.... तुम्हे कस के बाँहों में लेने का मन हो रहा है.... आअह्ह्ह्हह ssss... (उदय की सांस और तेज़ हो गई )
इधर माया भी तड़प रही थी और सोच रही थी की ऐसे सिचुएशन में मानस का वीर्य तो 2 min में ही निकल जाता है, पापा इतनी देर से... उफ़ अभी तक नहीं निकला l वो इमेजिन करने लगती है की किस कदर पापा अपना खड़ा लंड सहला रहे होंगे l लंड को याद करते ही माया वासना की आग में सिसकारी भरने लगती है l
माया - आह ह ह papa...
उदय - क्या हुवा बेटी?
माया - बहुत गर्मी लग रही है पापा...
उदय - तो ब्लैंकेट hata दो l
माया - वो तो बहुत पहले हटा दी, फिर भी पसीने से पूरी spaghetti भीग गई है l
(माया ने जानबूझ के स्पघेटी भीगने वाली बात झूठ बोली थी, ताकि पापा उसे इमेजिन कर उत्तेजित हो सके )
उदय भीगी spaghetti में माया को सोच कर मुट्ठ मारे जा रहा था l आह बेटी पावर होता तो तुम्हारी सेल्फी देखता,...
उसके बाद उदय ने जो बोला, माया मुस्कुरा दी... उसका प्लान काम कर रहा था, उसने पापा से यही उम्मीद भी की थीl
उदय - आ... बेटी... गर्मी लग रही है तो spaghetti खोल दो ना l
माया - उम्म्म हाँ theek कहा आपने... (माया ने सच में स्पघेटी उतार फेंकी )
उदय माया को बिना स्पघेटी के नंगे हो चुके बूब को इमेजिन कर जोर जोर से लंड हिलाने लगा l
उदय - उतार दी बेटी.... आह..
माया - हाँ पापा... उतार दी .. (माया सेक्सी आवाज़ में अंगड़ाई लेती बोली )
माया - ओह्होओ...
उदय - अब क्या हुवा... बेटी ?
माया - क्या बताऊँ.. पावर भी मुझसे बदमाशी कर रहा है जब पहनी थी तो पावर कट था अब जब कपड़े उतार दी तो पावर आ गया l
उदय - हाहा
माया ने इसी बीच एक pic भी भेज दिया papa को

उदय ने pic देख के बोला
उदय - ये pic क्यों भेजा तुमने बेटी ?
माया - क्यों पापा.. क्या प्रॉब्लम है इस pic में?
उदय - बेटी प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन pic में लड़की ने top पहन रखा है l
माया - हाँ
उदय - लेकिन बेटी तुमने तो अभी अभी उतार दिया ना.... तो फोटो में भी लड़की को बिना टॉप के होना था l
(माया पापा के इस खुलेपन को एन्जॉय kar रही थी )
माया - छी पापा... आप भी ना...बदमाश हो.. so जाओ आप (माया शरमा गई )
उदय - प्लीज बेटी भेजो ना...
माया - मुझे नहीं आता इस तरह की फोटो खोजने पापा.. ...
उदय - गूगल से नहीं खोज सकती तो अपना selfie bhej do...पावर to आ गया ना .(उदय बिना डरे बोल गया )
माया - papaaaaa...my god..
उदय - हाहाहा बेटी... मजाक कर रहा था.. तो बोलो अब क्या करोगी ?
माया - अपना तो नहीं भेज सकती गूगल से ही खोजती हूँ l
माया ने थोड़ी देर बाद एक pic भेज दी l

upload images
उदय - cheater हो tum.... ये टॉपलेस नहीं है l मुझे pic में लड़की की ब्लैक ब्रा दिख रही है l
माया पापा के मुँह से ब्रा jaise वर्ड सुनकर हंसती है...
माया - मुझे pic नहीं मिल रहा पापा... आप ही खोज दो ना l
पापा - मैं भेजूं .. ? नाराज़ तो नहीं होगी ना ?
माया - नहीं पापा..
उसके बाद उदय ने जो तस्वीर भेजी उसे देख कर माया के होश उड़ गए l तस्वीर में kissing था और ladki puri नंगी थी l

माया - पापा..... छी कितने गंदे हो आप l
उदय - अरे तुमने ही तो कहा था नाराज़ नहीं होगी, वैसे भी ये तुम तो नहीं हो फिर क्यों शरमा रही हो l ये तो कोई हीरोइन है l
माया - हम्म..
उदय - एक बात कहूं बेटी...
माया - हाँ kahiye..
उदय - अगर तुम सचमुच मेरे पास होती यहाँ तो मैं तुम्हे ऐसे ही kiss karta...बेटी aaahhhh.....
माया पापा की बात सुनकर गरम हो गई थी, साथ ही पापा की मुट्ठ मारने की आवाज़ उसपे अलग जादू kar रही thi... बेड pe.मचलते उसके मुहँ से अनायास ही निकला...
माया - उम्म्म्म... पापा... आआ.. और..
उदय - और क्या बेटी l
माया - मदहोश si...अपनी पैंटी के अंदर हाथ डाल li... और क्या करते पापा...
उदय - तुम बुरा मान जाओगी...
माया - नहीं बुरा मानूंगी पापा... बोलो ना... (माया बाएं हाथ का मिडिल फिंगर बुर में डाल अंदर बाहर करने lagi)
उदय - kiss karte हुवे अपना हाथ तुम्हारे बालों में फेरता l
माया - ummm... और papa...
उदय - और फिर हाथ बालों से नीचे कंधे तक... हाथ तुम्हारे सीने पे रखता....
माया - उम्म्म (माया बहुत गरम हो गई थी.. ) और.... papa...
उदय - आआअह्ह्ह्हह्हह तुम्हारे नंगे बूब्स को हाथ फेरता .... आआह्ह्ह हाआअह
उदय ख्यालों में बेटी ki नंगी चूची को फील करता बिस्तर पे 5-6 झटके मारा l उसी ke साथ वो लम्बी लम्बी गरम वीर्य की धार पेट पे बहा दिया l
माया - उम्मम्मम aaaaaaaaaahhhhhh papaaaaaaaa....
इधर माया भी अपनी गीली बुर को हथेली से रगड़ते हुवे.. अपने हथेली पे ही स्खलित हो गई ...
सेक्स की आग को दोनों ने अपने लंड और चूत की पानी से बुझा दिया था l
माया भी समझ चुकी थी की पापा का मुट्ठ निकल गया है, तो उसने धीरे से कॉल काट दिया l
लंड का पानी निकलने के बाद उदय को realize हुवा की उसने क्या kar दिया, उसे दुबारा फ़ोन करने की हिम्मत नहीं हुई l बेड पे निढाल वो सोचता रहा, मुट्ठ मारने में उदय को इतना मज़ा कभी नहीं आया जितना अपनी बेटी से हॉट बात karte हुवे स्खलित होना l
ना जाने माया इस वक़्त क्या सोच रही होगी l
उधर माया मन ही मन अपनी कामयाबी पे मुस्कुरा रही थी, बिना अपने अंगों को दिखाए वो सिर्फ हॉट बातें कर पापा ka मुट्ठ निकाल दी थी l लेकिन इन सब के बीच वो भी काफी गरम हो गई थी, उसका जिस्म थरथरा रहा था l स्खलित होने के बाद भी वो बुर पे हथेली रगड़ती रही वो अपनी फूली चूत में एक मोटे लंड के लिए तड़प रही थी l
उधर माया मन ही मन अपनी कामयाबी पे मुस्कुरा रही थी, बिना अपने अंगों को दिखाए वो सिर्फ हॉट बातें कर पापा ka मुट्ठ निकाल दी थी l लेकिन इन सब के बीच वो भी काफी गरम हो गई थी, उसका जिस्म थरथरा रहा था l स्खलित होने के बाद भी वो बुर पे हथेली रगड़ती रही वो अपनी फूली चूत में एक मोटे लंड के लिए तड़प रही थी l
लंड का पानी निकलने के बाद उदय कब सो गया उसे पता he नहीं चला l इधर माया की आँखों से नींद कोसो दूर थी l
वो ऊपर छत की तरफ देखती सोचती रही... क्या 10 मिनट पहले जो हुवा... होना चाहिए था ? ना जाने पापा मुझे कैसी लड़की समझ रहे होंगे... माया को इस वक़्त मानस पे गुस्सा आ रहा था ना वो उसे छोड़ के जाता ना वो सेक्स के लिए तड़पती l
माया के कानों में बार बार उसके पापा की वो लम्बी सांसों की आवाज़ सुनाई पड़ती l ना चाहते हुवे भी वो पापा के लंड का अकार इमेजिन करती.. पापा का कितना पानी निकला होगा ? क्या उनके लंड का स्किन पूरा खुल जाता होगा ..पापा अपना वीर्य कहाँ गिराए होंगे ... माया के जहन में हज़ारों सवाल थे, लेकिन जवाब एक भी नहीं l
माया के बुर से अभी भी तपन आ रही थी, वो बुर को कचोटती हुवे बेड पे सीधी सो गई l
सुबह उदय की नींद खुली, सारी रात नंगा सोया था वो l उसने पेट पे हाथ फेरा तो मुट्ठ सूख चूका था l उसे याद आया की कल रात उसने अपनी बेटी के नाम की मुट्ठ मार ली थी l बगल से फ़ोन उठाकर देखा, माया का कोई मैसेज नहीं था l वो रात की चैट खोलने की कोशिश किया मगर माया ने सबकुछ डिलीट कर दिया था l यहाँ तक की माया की भेजी हुई फोटो भी डिलीट थी l वो शुन्य में झांकता सोचता रहा की माया ने ऐसा क्यों किया होगा l
वो बार बार मैसेज चेक करता लेकिन माया का कोई मैसेज नहीं था l उसे डर था की माया नाराज़ तो नहीं और उसने अपनी हरकत की vajah से माया को खो दिया l
धीरे धीरे दोपहर हो गई, उदय का ऑफिस के काम में बिलकुल मन नहीं लग रहा था, वो ऑफिस से गेस्ट हाउस की तरफ चल दियाl ये वो वक़्त था जब दोनों बातें करते थे l उदय गेस्ट हाउस में अकेले बैठा फ़ोन पास रख खाना खा रहा था l उसने निश्चय कर लिया की वो माया को सॉरी बोल देगाl
तभी फ़ोन पे मैसेज tone बजा, उदय तुरंत एक टिश्यू में हाथ साफ़ कर मैसेज को click किया l मैसेज माया का ही था, मैसेज बड़ा था तो उदय बिना पढ़े उदास हो गया उसे लगा माया ने jaroor मुझसे बात ख़त्म करने की बात लिखी होगी l उसने धड़कते दिल से मैसेज पढ़ना शुरू किया l
डिअर पापा,
कल रात आपसे बात करते हुवे बहुत देर हो गई थी, सुबह varsha के साथ शॉपिंग जाना था मैं बहुत जल्दी में तैयार होकर शॉपिंग mall आ गई l मुझे ये अहसास हुवा की कल रात जो मैंने किया वो मुझे नहीं करना चाहिए था l
(उदय मैसेज पढ़ के काफी उदास हो गया, उसने आगे पढ़ना शुरू किया )
Varsha से बात हुई तो पता चला वो उसका online फ्रेंड कोई और ही आदमी है, आपने हमेशा मेरा ख्याल रखा है, मेरी हर इच्छा पूरी की है, कभी मुझे किसी बात के लिए नहीं डांटा और मैंने बात को बिना समझे आपसे गुस्से में बात की l varsha ने मुझे ये भी बताया की वो आपसे बात की आपसे उसने कुछ फोटोज भी शेयर किये ताकि आप उसके कंपनी product और advertising के लिए use कर सकें l जबकि मैंने पूरी बात जाने बिना आपसे चिल्ला के बात की l मुझे प्लीज माफ़ कर दीजियेगा l
I am सो sorry and I love you so much..
उदय ने जब पूरा मैसेज पढ़ा तो बहुत खुश हो गया, कहीं भी माया ने रात के बात की जिक्र नहीं की थी, और वो खामखां परेशान था l उसने सोचा माया एक समझदार मॉडर्न लड़की है भला वो थोड़ी बहुत मजाक मस्ती का बुरा क्यों मानेगी l
उदय ने जवाब में माया को बिलकुल सहज होकर समझाया की उसे इस तरह की छोटी बात के लिए इतना सोचने की जरुरत नहीं है l और साथ हे साथ उदय ने माया को ढेर सारी kiss भेजी l
रिप्लाई में माया ने भी whatsapp पे ढेर सारा किस भेज दिया l दोनों बाप बेटी के बीच सबकुछ ठीक था l .. उदय ख़ुशी ख़ुशी एक बार fir ऑफिस को चला गया, मन लगा के काम किया और शाम ko जल्दी घर आ गया l
घर आते ही usne सबसे पहले maya ko मैसेज किया l
उदय - क्या कर रही हो दूधमलाई ...
कुछ देर बाद maya का रिप्लाई आया ll
माया - दूधमलाई ...? ये कौन है...
उदय - तुम हो... दूधमलाई.. jaisi soft और जूसी
माया - हा हा वैरी funny
उदय - क्या कर रही हो ?
माया - चाय बना रही हूँ l
उदय - मुझे भी पिला दो l
माया - आ जाओ मेरे पास पापा, पिला दूँगी
उदय - कैसे आ जाऊं बेटी.. दूर हूँ ना बहुत l
माया - पापा.. आप chahoge तो आ सकते हो ना...
अपनी बेटी i mean अपनी दूधमलाई से मिलने को दिल नहीं करता आपका l
उदय - हाहा हाँ बेटी लेकिन office Ke काम से आया हूँ ना l
माया - हम्म्म तो छुट्टियों में आ जाओ ना पापा... या फिर मेरे birthday पे आ जाओ l
uday.- अच्छा बाबा कोई छुट्टी मिली तो कोशिश करूँगा l
माया - उमम... ठीक है l
लो चाय पी लो... l (माया ने चाय से भरी कप की फोटो खींच कर bhej दी थी )
उदय - चाय तो ठीक है, मगर चाय से भी मीठी चाय बनाने वाली कहाँ है ?
माया मुस्कुरा दी.. और पापा की baat.समझते हुवे उसने कप ke साथ एक सेल्फी खींची और bhej दी l
उदय - wow मेरी दूधमलाई तो आज काफी अलग दिख रही है l
माया - हाँ, अब साड़ी में थोड़ी अलग तो दिखूंगी ?
उदय - umm... तो आज साड़ी कैसे पहन ली तुमने ?
माया - varsha की vajah se पापा ... वो aaz साड़ी पहनना चाहती थी तो मुझे सुबह ही कॉल करके फाॅर्स किया की मैं भी साड़ी पहनूं l मैडम को अपने स्पेशल friend से मिलना जो था l
उदय - उफ़ तुम मिली क्या स्पेशल friend से ?
माया - मैं क्यों मिलूं ?
उदय - हम्म..
माया - वैसे आप क्या कर रहे हो ?
उदय - बेड पे हूँ बेटी l
माया पापा के बेड पे होने की बात सुनकर थोड़ी परेशान हो जाती hai, उसे डर था की पापा कल की तरह फिर से कुछ शुरू ना कर दें l
माया - क्या पापा ये भी कोई बात हुई, कितना सोते रहते हो l
उदय - नहीं बेटी मैं सो नहीं रहा l
माया - मैं कुछ नहीं सुनूंगी आप वहाँ से उठ कर हॉल में जाओ l अभी...
उदय - अरे बेटी यहाँ क्या problem है
माया - प्रॉब्लम है... आप lazy हो जाओगे.. चलो utho
उदय - ओके मेरी दूधमलाई लो उठ गया l
माया - मैं नहीं मानती
उदय ने हॉल में aane के बाद सोफे पे बैठे अपनी एक फोटो खींच के bhej दी l
उदय - अब तो यकीन हुवा ?
माया - hmm
उदय - यहाँ क्यों बुला लिया... (उदास मन से )
फिर तो तुम्हे भी हॉल में ही बैठ के बात करना होगा l
माया - मैं तो हॉल में ही हूँ l
माया ने तुरंत एक pic खींच भेज दी l
माया - आप फ्री तो हो ना... ?
माया - पापा..
बोलो... फ्री हो ना..
उदय - अरे बेटी मेरी टाइपिंग की स्पीड तुम्हारी तरह तेज़ नहीं है बेटी l हाँ फ्री हूँ l
माया - अच्छा तो वीडियो कॉल करती हूँ l
उदय - ओके
माया सोफे पे बैठे अपना बाल ठीक की फिर अंचल ठीक कर वीडियो कॉल की l
दोनों एक दूसरे को देख बातें करने लगे...
ऐसे हे kareeb 1 घंटे तक माया और उदय बात किये इसी बीच माया एक बार उठ कर किचन की तरफ गई जब उदय के नज़र माया ke गांड के उभार पे गई l
साड़ी में maya.क़यामत lag.रही थी l, वैसे भी माया के अंगो की नक्काशी किसी को भी दीवाना कर दे l
उदय - बेटी एक बार थोड़ा दूर खड़ी हो l
माया - okay क्या हुवा
उदय - बेटी Bhartiya naari की श्रृंगार होता है साड़ी और तुम इतना उबाऊ कलर और ubau tareekey से पहनी हो l
माया - उबाऊ...? मतलब.. वो कैसे ?
उदय - मेरा मतलब तुम साड़ी ऐसे पहनी हो जैसे 40 साल की लेडी पहनती hain l कम से कम अपनी उम्र का तो ध्यान रखती l मैंने तुम्हारी फोटो देखि तो तुम बड़ी लग रही थी लेकिन अब पूरा देखा तो... (उदय कहते कहते रुक गया )
माया - क्याआ ???
उदय - तुम नाराज़ हो जाओगी...
माया - kyon... बोलो ना पापा क्या बोल रहे थे l
उदय - ठीक है तो सुनो... तुम कोई आंटी Jaisi दिख रही हो... (उदय हंसने लगा )
लेकिन माया को पापा के बात पे बिलकुल हंसी नहीं आयी... उल्टा गुस्सा आया l
माया - जैसा भी हो आपसे क्या मतलब.. ?
उदय - अरे... इतना गुस्सा... ??
माया - jaaiye मुझे बात नहीं करनी, मैं सोने जा रही हूँ l
माया ने फ़ोन कट कर दिया l
दरअसल माया ने झूठा गुस्सा दिखाया था, हकीकत में उसे पिशाब लगी थी l और उसे बहाना मिल गया था l
बाथरूम से आकर उसने पहले खुद को शीशे में देखा फिर साड़ी उतारकर एक टॉप और एक ट्रॉउज़र पहन ली l
इस बीच उदय लगातार वीडियो कॉल करता रहा, मगर माया वीडियो कॉल नहीं ली l बाद में जब उसने वीडियो कॉल एक्सेप्ट किया तो उदय ने उसे देखते हे पूछा
उदय - ये क्या मेरी दूधमलाई ने साड़ी क्यों चेंज कर दी
माया - क्यों... ? मैं तो 40 साल की आंटी हूँ l दूधमलाई तो varsha होगी l
उदय - नहीं बेटी दूधमलाई तो तुम ho.. तुम्हारे हर अंग से मलाई टपकता है
माया - अच्छा
उदय - सच बेटी सर से लेकर पाओं तक तुम्हारा हर एक अंग मक्खन है, varsha कुछ भी नहीं
माया - ummm...
उदय - साड़ी पहनो ना l
माया - फिर से ? No आप चिढ़ाओगे...
उदय - नहीं चिढ़ाऊँगा Beti..
माया - ठीक है... तो वीडियो कॉल बंद कर दीजिये मैं तैयार होकर आपको कॉल करुँगी l
उदय - ओके beti
उदय बेसब्री से intzaar करने लगा l कुछ देर बाद वीडियो कॉल आया उदय ने देखा माया एक बहुत सुन्दर साड़ी में लिपटी है l उसके बदन के कटाव साड़ी में और उभर के नज़र आ रहे थे, लेकिन उसका बदन ढका था, वीडियो कॉल पे आने से पहले माया काफी cautious थी l
उदय - बेटी अच्छी तो है मगर कुछ कमी लग रही है l
माया - क्या कमी पापा..
उदय - ऐसी साड़ी पे sleevless ब्लाउज होना चाहिए
माया - हम्म sleevless ब्लाउज एक है but टाइट होती है फिर भी कोशिश करती हूँ l
उदय - हाँ और तुम इतने बड़े शहर में रहती हो थोड़ा मॉडर्न तरीके से साड़ी पहनो
माया - उमम अब मैं Ileana dcruz तो नहीं dikh sakti ना papa
उदय - मेरा वो मतलब नहीं था, जैसे मॉडलिंग करने वाली लड़कियाँ पहनती हैं वैसे l
माया - अच्छा कोशिश करती हूँ l
माया - और एक बात पापा.. फ़ोन का चार्ज ख़त्म हो रहा है तो वीडियो कॉल ना करके आपको फोटो भेजती हूँ ok??
उदय - उम्म्म ठीक है बेटी
थोड़ी देर बाद माया स्लीवलेस ब्लाउज ढून्ढ कर पहनती है to.वो kaafi टाइट होती hai, वो दुबारा बिना ब्रा ke पहनती है तो उसे फिट आ जाती है l
माया - हो गया papa पहन li
उदय - दिखाओ..
माया - ok फोटो भेज रही हूँ l बताना कैसी है l
माया कुछ तस्वीरें भेजती हैl
स्लीवलेस ब्लाउज में माया ki फूली चूची देख उदय की आँखे खुली ki.खुली रह जाती है l
उदय - wow beti तुम तो सचमुच मलाई लग रही हो l तुम्हारा बदन कितना गोरा है उफ़ l
और pic भेजो.. बेटी...
माया - थैंक यू पापा.. भेजी हूँ देखिये l
उदय - बेटी सच कहूं तो मानस बहुत लकी है जिसे तुम जैसी खूबसूरत बीवी मिली
माया मुस्कुरा देती है l
उदय - लेकिन तुमने सभी pic में kamar क्यों dhanki hai...? तुम्हारे stretch marks हैं क्या ?
माया - नहीं तो
उदय - to.क्यों छुपाई ho..? बेटी कमर to saree ki ख़ूबसूरती को और बढ़ा देती है l
उदय सोफे पे बैठा अपना लंड pant के भीतर दबा रहा था l
माया - ठीक है पापा... माया पापा की बात मान साड़ी कमर से नीचे कर देती है l माया की गोरी भरी हुई कमर क़यामत दिख रही थी l
माया - ye कैसी है पापा ?
माया ने इस बार कमर के साथ की फोटो भेजी l उदय यही तो चाहता था, माया की खुली कमर देखकर वो बेकाबू सा लंड बाहर निकाल के रगड़ने लगता है l
Uday - वाओ बेटी तुम्हारी कमर तो और ज्यादा गोरी है l साड़ी में तो तुम किसी अप्सरा की तरह दिखती हो l
उदय टकटकी लगाकर अपनी बेटी की खुली नाभि देखता है l
माया - पापा इतना भी नहीं है l
(माया शरमा रही होती है )
माया - अब चेंज कर लूँ ?
उदय - पहने रहो ना बेटी प्लीज l तुम्हे देख के भी दिल नहीं भर रहा है l khaaskar तुम्हारी कमर से तो नज़र नहीं हट रही l
माया के लिए ये कोई आश्चर्य की बात नहीं थी, उसके बहुत सारे male फ्रेंड उसकी कमर की तारीफ करते थे l यहाँ तक की मानस भी उनमे से एक था l उसे भी कमर का भाग बहुत भाता था l
भाग 22
लंड का पानी निकलने के बाद उदय कब सो गया उसे पता he नहीं चला l इधर माया की आँखों से नींद कोसो दूर थी l
वो ऊपर छत की तरफ देखती सोचती रही... क्या 10 मिनट पहले जो हुवा... होना चाहिए था ? ना जाने पापा मुझे कैसी लड़की समझ रहे होंगे... माया को इस वक़्त मानस पे गुस्सा आ रहा था ना वो उसे छोड़ के जाता ना वो सेक्स के लिए तड़पती l
माया के कानों में बार बार उसके पापा की वो लम्बी सांसों की आवाज़ सुनाई पड़ती l ना चाहते हुवे भी वो पापा के लंड का अकार इमेजिन करती.. पापा का कितना पानी निकला होगा ? क्या उनके लंड का स्किन पूरा खुल जाता होगा ..पापा अपना वीर्य कहाँ गिराए होंगे ... माया के जहन में हज़ारों सवाल थे, लेकिन जवाब एक भी नहीं l
माया के बुर से अभी भी तपन आ रही थी, वो बुर को कचोटती हुवे बेड पे सीधी सो गई l
सुबह उदय की नींद खुली, सारी रात नंगा सोया था वो l उसने पेट पे हाथ फेरा तो मुट्ठ सूख चूका था l उसे याद आया की कल रात उसने अपनी बेटी के नाम की मुट्ठ मार ली थी l बगल से फ़ोन उठाकर देखा, माया का कोई मैसेज नहीं था l वो रात की चैट खोलने की कोशिश किया मगर माया ने सबकुछ डिलीट कर दिया था l यहाँ तक की माया की भेजी हुई फोटो भी डिलीट थी l वो शुन्य में झांकता सोचता रहा की माया ने ऐसा क्यों किया होगा l
वो बार बार मैसेज चेक करता लेकिन माया का कोई मैसेज नहीं था l उसे डर था की माया नाराज़ तो नहीं और उसने अपनी हरकत की vajah से माया को खो दिया l
धीरे धीरे दोपहर हो गई, उदय का ऑफिस के काम में बिलकुल मन नहीं लग रहा था, वो ऑफिस से गेस्ट हाउस की तरफ चल दियाl ये वो वक़्त था जब दोनों बातें करते थे l उदय गेस्ट हाउस में अकेले बैठा फ़ोन पास रख खाना खा रहा था l उसने निश्चय कर लिया की वो माया को सॉरी बोल देगाl
तभी फ़ोन पे मैसेज tone बजा, उदय तुरंत एक टिश्यू में हाथ साफ़ कर मैसेज को click किया l मैसेज माया का ही था, मैसेज बड़ा था तो उदय बिना पढ़े उदास हो गया उसे लगा माया ने jaroor मुझसे बात ख़त्म करने की बात लिखी होगी l उसने धड़कते दिल से मैसेज पढ़ना शुरू किया l
डिअर पापा,
कल रात आपसे बात करते हुवे बहुत देर हो गई थी, सुबह varsha के साथ शॉपिंग जाना था मैं बहुत जल्दी में तैयार होकर शॉपिंग mall आ गई l मुझे ये अहसास हुवा की कल रात जो मैंने किया वो मुझे नहीं करना चाहिए था l
(उदय मैसेज पढ़ के काफी उदास हो गया, उसने आगे पढ़ना शुरू किया )
Varsha से बात हुई तो पता चला वो उसका online फ्रेंड कोई और ही आदमी है, आपने हमेशा मेरा ख्याल रखा है, मेरी हर इच्छा पूरी की है, कभी मुझे किसी बात के लिए नहीं डांटा और मैंने बात को बिना समझे आपसे गुस्से में बात की l varsha ने मुझे ये भी बताया की वो आपसे बात की आपसे उसने कुछ फोटोज भी शेयर किये ताकि आप उसके कंपनी product और advertising के लिए use कर सकें l जबकि मैंने पूरी बात जाने बिना आपसे चिल्ला के बात की l मुझे प्लीज माफ़ कर दीजियेगा l
I am सो sorry and I love you so much..
उदय ने जब पूरा मैसेज पढ़ा तो बहुत खुश हो गया, कहीं भी माया ने रात के बात की जिक्र नहीं की थी, और वो खामखां परेशान था l उसने सोचा माया एक समझदार मॉडर्न लड़की है भला वो थोड़ी बहुत मजाक मस्ती का बुरा क्यों मानेगी l
उदय ने जवाब में माया को बिलकुल सहज होकर समझाया की उसे इस तरह की छोटी बात के लिए इतना सोचने की जरुरत नहीं है l और साथ हे साथ उदय ने माया को ढेर सारी kiss भेजी l
रिप्लाई में माया ने भी whatsapp पे ढेर सारा किस भेज दिया l दोनों बाप बेटी के बीच सबकुछ ठीक था l .. उदय ख़ुशी ख़ुशी एक बार fir ऑफिस को चला गया, मन लगा के काम किया और शाम ko जल्दी घर आ गया l
घर आते ही usne सबसे पहले maya ko मैसेज किया l
उदय - क्या कर रही हो दूधमलाई ...
कुछ देर बाद maya का रिप्लाई आया ll
माया - दूधमलाई ...? ये कौन है...
उदय - तुम हो... दूधमलाई.. jaisi soft और जूसी
माया - हा हा वैरी funny
उदय - क्या कर रही हो ?
माया - चाय बना रही हूँ l
उदय - मुझे भी पिला दो l
माया - आ जाओ मेरे पास पापा, पिला दूँगी
उदय - कैसे आ जाऊं बेटी.. दूर हूँ ना बहुत l
माया - पापा.. आप chahoge तो आ सकते हो ना...
अपनी बेटी i mean अपनी दूधमलाई से मिलने को दिल नहीं करता आपका l
उदय - हाहा हाँ बेटी लेकिन office Ke काम से आया हूँ ना l
माया - हम्म्म तो छुट्टियों में आ जाओ ना पापा... या फिर मेरे birthday पे आ जाओ l
uday.- अच्छा बाबा कोई छुट्टी मिली तो कोशिश करूँगा l
माया - उमम... ठीक है l
लो चाय पी लो... l (माया ने चाय से भरी कप की फोटो खींच कर bhej दी थी )
उदय - चाय तो ठीक है, मगर चाय से भी मीठी चाय बनाने वाली कहाँ है ?
माया मुस्कुरा दी.. और पापा की baat.समझते हुवे उसने कप ke साथ एक सेल्फी खींची और bhej दी l
उदय - wow मेरी दूधमलाई तो आज काफी अलग दिख रही है l
माया - हाँ, अब साड़ी में थोड़ी अलग तो दिखूंगी ?
उदय - umm... तो आज साड़ी कैसे पहन ली तुमने ?
माया - varsha की vajah se पापा ... वो aaz साड़ी पहनना चाहती थी तो मुझे सुबह ही कॉल करके फाॅर्स किया की मैं भी साड़ी पहनूं l मैडम को अपने स्पेशल friend से मिलना जो था l
उदय - उफ़ तुम मिली क्या स्पेशल friend से ?
माया - मैं क्यों मिलूं ?
उदय - हम्म..
माया - वैसे आप क्या कर रहे हो ?
उदय - बेड पे हूँ बेटी l
माया पापा के बेड पे होने की बात सुनकर थोड़ी परेशान हो जाती hai, उसे डर था की पापा कल की तरह फिर से कुछ शुरू ना कर दें l
माया - क्या पापा ये भी कोई बात हुई, कितना सोते रहते हो l
उदय - नहीं बेटी मैं सो नहीं रहा l
माया - मैं कुछ नहीं सुनूंगी आप वहाँ से उठ कर हॉल में जाओ l अभी...
उदय - अरे बेटी यहाँ क्या problem है
माया - प्रॉब्लम है... आप lazy हो जाओगे.. चलो utho
उदय - ओके मेरी दूधमलाई लो उठ गया l
माया - मैं नहीं मानती
उदय ने हॉल में aane के बाद सोफे पे बैठे अपनी एक फोटो खींच के bhej दी l
उदय - अब तो यकीन हुवा ?
माया - hmm
उदय - यहाँ क्यों बुला लिया... (उदास मन से )
फिर तो तुम्हे भी हॉल में ही बैठ के बात करना होगा l
माया - मैं तो हॉल में ही हूँ l
माया ने तुरंत एक pic खींच भेज दी l
माया - आप फ्री तो हो ना... ?
माया - पापा..
बोलो... फ्री हो ना..
उदय - अरे बेटी मेरी टाइपिंग की स्पीड तुम्हारी तरह तेज़ नहीं है बेटी l हाँ फ्री हूँ l
माया - अच्छा तो वीडियो कॉल करती हूँ l
उदय - ओके
माया सोफे पे बैठे अपना बाल ठीक की फिर अंचल ठीक कर वीडियो कॉल की l
दोनों एक दूसरे को देख बातें करने लगे...
ऐसे हे kareeb 1 घंटे तक माया और उदय बात किये इसी बीच माया एक बार उठ कर किचन की तरफ गई जब उदय के नज़र माया ke गांड के उभार पे गई l
साड़ी में maya.क़यामत lag.रही थी l, वैसे भी माया के अंगो की नक्काशी किसी को भी दीवाना कर दे l
उदय - बेटी एक बार थोड़ा दूर खड़ी हो l
माया - okay क्या हुवा
उदय - बेटी Bhartiya naari की श्रृंगार होता है साड़ी और तुम इतना उबाऊ कलर और ubau tareekey से पहनी हो l
माया - उबाऊ...? मतलब.. वो कैसे ?
उदय - मेरा मतलब तुम साड़ी ऐसे पहनी हो जैसे 40 साल की लेडी पहनती hain l कम से कम अपनी उम्र का तो ध्यान रखती l मैंने तुम्हारी फोटो देखि तो तुम बड़ी लग रही थी लेकिन अब पूरा देखा तो... (उदय कहते कहते रुक गया )
माया - क्याआ ???
उदय - तुम नाराज़ हो जाओगी...
माया - kyon... बोलो ना पापा क्या बोल रहे थे l
उदय - ठीक है तो सुनो... तुम कोई आंटी Jaisi दिख रही हो... (उदय हंसने लगा )
लेकिन माया को पापा के बात पे बिलकुल हंसी नहीं आयी... उल्टा गुस्सा आया l
माया - जैसा भी हो आपसे क्या मतलब.. ?
उदय - अरे... इतना गुस्सा... ??
माया - jaaiye मुझे बात नहीं करनी, मैं सोने जा रही हूँ l
माया ने फ़ोन कट कर दिया l
दरअसल माया ने झूठा गुस्सा दिखाया था, हकीकत में उसे पिशाब लगी थी l और उसे बहाना मिल गया था l
बाथरूम से आकर उसने पहले खुद को शीशे में देखा फिर साड़ी उतारकर एक टॉप और एक ट्रॉउज़र पहन ली l
इस बीच उदय लगातार वीडियो कॉल करता रहा, मगर माया वीडियो कॉल नहीं ली l बाद में जब उसने वीडियो कॉल एक्सेप्ट किया तो उदय ने उसे देखते हे पूछा
उदय - ये क्या मेरी दूधमलाई ने साड़ी क्यों चेंज कर दी
माया - क्यों... ? मैं तो 40 साल की आंटी हूँ l दूधमलाई तो varsha होगी l
उदय - नहीं बेटी दूधमलाई तो तुम ho.. तुम्हारे हर अंग से मलाई टपकता है
माया - अच्छा
उदय - सच बेटी सर से लेकर पाओं तक तुम्हारा हर एक अंग मक्खन है, varsha कुछ भी नहीं
माया - ummm...
उदय - साड़ी पहनो ना l
माया - फिर से ? No आप चिढ़ाओगे...
उदय - नहीं चिढ़ाऊँगा Beti..
माया - ठीक है... तो वीडियो कॉल बंद कर दीजिये मैं तैयार होकर आपको कॉल करुँगी l
उदय - ओके beti
उदय बेसब्री से intzaar करने लगा l कुछ देर बाद वीडियो कॉल आया उदय ने देखा माया एक बहुत सुन्दर साड़ी में लिपटी है l उसके बदन के कटाव साड़ी में और उभर के नज़र आ रहे थे, लेकिन उसका बदन ढका था, वीडियो कॉल पे आने से पहले माया काफी cautious थी l
उदय - बेटी अच्छी तो है मगर कुछ कमी लग रही है l
माया - क्या कमी पापा..
उदय - ऐसी साड़ी पे sleevless ब्लाउज होना चाहिए
माया - हम्म sleevless ब्लाउज एक है but टाइट होती है फिर भी कोशिश करती हूँ l
उदय - हाँ और तुम इतने बड़े शहर में रहती हो थोड़ा मॉडर्न तरीके से साड़ी पहनो
माया - उमम अब मैं Ileana dcruz तो नहीं dikh sakti ना papa
उदय - मेरा वो मतलब नहीं था, जैसे मॉडलिंग करने वाली लड़कियाँ पहनती हैं वैसे l
माया - अच्छा कोशिश करती हूँ l
माया - और एक बात पापा.. फ़ोन का चार्ज ख़त्म हो रहा है तो वीडियो कॉल ना करके आपको फोटो भेजती हूँ ok??
उदय - उम्म्म ठीक है बेटी
थोड़ी देर बाद माया स्लीवलेस ब्लाउज ढून्ढ कर पहनती है to.वो kaafi टाइट होती hai, वो दुबारा बिना ब्रा ke पहनती है तो उसे फिट आ जाती है l
माया - हो गया papa पहन li
उदय - दिखाओ..
माया - ok फोटो भेज रही हूँ l बताना कैसी है l
माया कुछ तस्वीरें भेजती हैl
स्लीवलेस ब्लाउज में माया ki फूली चूची देख उदय की आँखे खुली ki.खुली रह जाती है l
उदय - wow beti तुम तो सचमुच मलाई लग रही हो l तुम्हारा बदन कितना गोरा है उफ़ l
और pic भेजो.. बेटी...
माया - थैंक यू पापा.. भेजी हूँ देखिये l
उदय - बेटी सच कहूं तो मानस बहुत लकी है जिसे तुम जैसी खूबसूरत बीवी मिली
माया मुस्कुरा देती है l
उदय - लेकिन तुमने सभी pic में kamar क्यों dhanki hai...? तुम्हारे stretch marks हैं क्या ?
माया - नहीं तो
उदय - to.क्यों छुपाई ho..? बेटी कमर to saree ki ख़ूबसूरती को और बढ़ा देती है l
उदय सोफे पे बैठा अपना लंड pant के भीतर दबा रहा था l
माया - ठीक है पापा... माया पापा की बात मान साड़ी कमर से नीचे कर देती है l माया की गोरी भरी हुई कमर क़यामत दिख रही थी l
माया - ye कैसी है पापा ?
माया ने इस बार कमर के साथ की फोटो भेजी l उदय यही तो चाहता था, माया की खुली कमर देखकर वो बेकाबू सा लंड बाहर निकाल के रगड़ने लगता है l
Uday - वाओ बेटी तुम्हारी कमर तो और ज्यादा गोरी है l साड़ी में तो तुम किसी अप्सरा की तरह दिखती हो l
उदय टकटकी लगाकर अपनी बेटी की खुली नाभि देखता है l
माया - पापा इतना भी नहीं है l
(माया शरमा रही होती है )
माया - अब चेंज कर लूँ ?
उदय - पहने रहो ना बेटी प्लीज l तुम्हे देख के भी दिल नहीं भर रहा है l khaaskar तुम्हारी कमर से तो नज़र नहीं हट रही l
माया के लिए ये कोई आश्चर्य की बात नहीं थी, उसके बहुत सारे male फ्रेंड उसकी कमर की तारीफ करते थे l यहाँ तक की मानस भी उनमे से एक था l उसे भी कमर का भाग बहुत भाता था l
Thank you very much brotherOffffffooooo
Uf
Itna seductive story maine apne 15 saal ke story reading mein nahi padhi
Just wowwwwwwwww
Wow real incest....
हिलाते रहो.. मुट्ठ से नहला दो माया कोKya likhte ho bhai............
Jitni baar Pado utni Baar hilana padta hai.............
Kal se ?? ki diet badami padegi.......????
हाहा very nicepra_ भाई.......
हिला हिला कर ही मरवा डालोगे....
साड़ी ब्लाउज..... सीन क्रिएशन......
बहुत ही Excitation ......एक्सीलेंट....
उम्मीद दे बेहतर अपडेट था....
कई बार पानी निकालना पड़ा...
अभी और निकालूंगा......
...
बनने दो...
???
चोद do yaarMaya ke chakkar mein sabse choti didi chud na jaaye yaar
भाई स्टोरी के बीच में pic कैसे डालते hain?pic ke saath do
थैंक यू भाई कर के देखता हूँ मुझे url link की तरह नहीं बल्कि image पेस्ट होनी चाहिए lPixbb.ga yeh xforum.live ki khud ki image uploading site he,yaha pics/gifs upload karo aur bb image links copy kar ke post karo
Pics aur gif aap ke paas ho to unhe pixbb.com website pe upload karo aur BBCODE yahan Upar Jo image ka arrow mark hai uspar click Karo Uske bad wahan par image URL puchega usme woh code paste Karke ok kijiye Dikh jaayegaa
थैंक यू भाई...बहुत ही गर्म अपडेट था.........भाई.….
माया - तो फिर यहाँ नहीं बेड पे l ( लंड से हाथ हटा लेती है ) तुम सच में ऑफिस नहीं जाओगे ?
मानस इस पल कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं था उसे तो बस 3 वीक से जमा हुवा वीर्य बाहर निकालना था I
(तीन week से वो खुद ही मुट्ठ kyon नहीं मारा उसका reason आगे पता चलेगा )
मानस माया को चोदने के लिए पागल हुवे जा रहा था l
मानस - नहीं जाऊंगा ऑफिस l
नंगे भागते हुवे वो बाथरूम से रूम में आता है, हड़बड़ाहट में mobile लेते हुवे वो अपने बॉस को कॉल करता है l
मानस - हेलो sir... sorry.. ji.... Ji main आज नहीं आ पाउँगा.... हाँ वो फाइल मैंने भेज दी कल रात ही... जी... जी जी बिलकुल.. थैंक यू सो मच l
इधर माया पति की बेताबी पे हंस पड़ती है l मानस का लंड अब सिकुड़ चूका था, शायद बॉस से बात कर के l
मानस और माया की नज़र मिलती है और दोनों हंस पड़ते हैं l मानस माया का हाथ पकड़ अपनी ओर खींचता है और उसे बाँहों में कैद कर लेता है माया भी पति की बाँहों में ढीली पड़ जाती है l
चिकने पीठ पे मानस का हाथ धीरे धीरे फिसल कर ब्लाउज के छोर के पास उसकी कटीली कमर पे आ टिकती है l माया के गर्दन को चूमते हुवे वो दूसरे हाथ से साड़ी में उभरी उसकी नितम्बों को थाम लेता है l
मानस = ओह माया और कितना तडपाओगी...
दोनों के होंठ मिल जाते हैं l मानस अपने दोनों हाथों से माया के भरे बदन की नाप लेता रहता है l
माया भी मदहोशी में हलकी सी आह भर लेती है, गरम सांसों से भारी आह सुन मानस अपने होंठ आगे बढ़ा कर उसकी होंठ के अंदर घुस जाता hai.. maya पति की और नहीं तड़पाना चाहती थी तो वो पैरों पे उचकते हुवे अपने होंठ को पूरा खोल देती है l दोनों के अंदर सेक्स की आग भड़क उठी थी, उठती भी क्यों नहीं 3 हफ्तों के प्यासे थे दोनों l
दोनों पास ही पड़े बेड pe लेट जाते हैं l मानस सीधा लेटा होता है, लेकिन उसका लंड हवा में झटके मार रहा होता है l
बगल में सीने पे हाथ रखी उसकी पत्नी माया अपने पति के लंड को निहारती रहती है l
मानस कंधे से साड़ी का पल्लू हटाता है तो नीले ब्लाउज में माया की चूचियों की गोलाइयाँ देख अपने हाथों को रोक नहीं पाता l वो माया की फूली हुई चूचियों को अपनी हथेली में भींच लेता hai l माया को ऐसा अहसास हो रहा था जैसे उसकी पहली सुहागरात है जबकि 6 महीने से ज्यादा समय बीत चूका था शादी को l ना जाने कितनी बार सेक्स किये हैं दोनों ने लेकिन हर बार एक नया अहसास होताहै l
मानस ब्लाउज में अपनी पत्नी की गोरी चूचियों को देखते हुवे सामने की एक हुक खोलता है, मगर मानस में इतना भी सब्र नहीं था की वो पुरे बूब को बाहर आने देता इससे पहले की बूब बाहर आते वो 2 हुक के बड़े गैप के बीच अपनी जीभ डाल देता है और माया की क्लीवेज चाटने लगता है l
माया गरम जीभ की छुवन से सिहर उठती है, वो नीचे देखती hai तो पाती है की मानस मुट्ठी में लंड पकड़े उसे तेजी से रगड़ रहा था l
वो मानस के हाथ को रोकना चाहती है क्योंकि उसे ये पल लम्बा चाहिए था वो मजे को जल्द ख़त्म नहीं करना चाहती थी l मगर मानस नहीं रुकता वो लगातार क्लीवेज चाटते हुवे हाथों को झटका दे रहा था l इसी बीच फिर मानस माया का हाथ पकड़ अपने लंड पे रख देता है l
लंड काफी गरम हो गया था और अब माया भी अपना होश खो रही थी l क्योंकि मानस तेजी से हरकत करते हुवे ब्लाउज के सारे बटन खोल चूका था और एक हाथ से ब्रा को नीचे खींच उसकी जीभ माया के निप्पल के इर्द गिर्द घूम रही थी l
माया की सिसकारी निकलने लगी, चूड़ियों की खनखनाहट तेज हो गई l माया अब मानस का मुट्ठ मार रही थी l
मानस का मज़ा दोगुना हो गया था, उसकी साँसे तेज हो गई थी l वो सीधा हो गया और बेसब्री से लंड के पानी का इंतज़ार करने लगा l माया को अहसास हुवा की मानस की जीभ उसके बूब पे चलना बंद हो गई हैं l उसका ध्यान टूटा और उसने झट्ट से लंड छोड़ दिया l मानस तड़प के रह गया, उसके लंड का लावा फूटने ही वाला था की माया ने हाथ हटा लिया था l
मानस को भी होश आया तो उसे अपनी गलती का अहसास हुवा l उसने माया को अपने ऊपर ले लिया l माया खुश हो गई उसे ये postion बहुत पसंद था l
मानस ने blouse के दोनों साइड से हाथ फंसाया और ब्रा के साथ ही गर्दन से hote हुवे निकाल फेंका l
माया शरमा गई l उसकी दोनों चूचियां मानस के चेहरेके पास लटक रही थी l वो उठना चाही तो मानस उचक के उसके एक बूब को मुँह में ले लिया l
और दूसरे को हाथ में लेकर दबाने लगा l

imge.to
मानस किसी बच्चे की तरह बारी बारी से माया की दोनों चूची पी रहा था l माया के निप्पल खड़े हो गए थे l
मानस - आहहह माया.... तुम्हारी चूची कितनी मजेदार है l
माया - छी कितनी बार बोली हूँ ऐसा मत बोला करो l
मानस - तो क्या बोलूं मेरी जान
माया - बूब बोला करो l
मानस - मैं तो इसे चूची ही कहूंगा l बूब कहने mein देसी फील नहीं आता I
माया - ठीक है जो कहना है कहो तुम नहीं बदलोगे l अब करो जो करना है l
मानस - क्या बात है, बड़ी बेसब्र हो l
(कहते हुवे मानस ने अपना नंगा लंड माया की चूत के ऊपर सटा दिया l)
माया - नहीं बेसब्र तो तुम थे l
बातों बातों में मानस माया की साड़ी और पेटीकोट दोनों को एक साथ उपर खींच रहा था l एक वक़्त ऐसा आया जब साड़ी ऊपर नहीं जा रही थी तो माया अपनी कमर थोड़ी ऊपर की ताकि साड़ी पूरी उठ जाए l
मानस उसी वक़्त तेज़ी से साड़ी ऊपर कर अपना एक हाथ लंड के ऊपर हथेली खोले उल्टा रख लिया l
माया अपने पति के हरकत से अनजान जब वापस कमर नीचे की तो panty में उसकी चूत सीधा मानस के हाथ पे लगी l मानस ने तुरंत किसी स्पंज ki तरह उसकी चूत को हथेली से निचोड़ दिया l माया इस मीठे अहसास से सरोबोर थी उसके उन्माद का रस panty mein उतरने लगा था I
वो अपने पति के सीने mein सर छिपाए बिना कोई हरकत किये sharm से laal थी l
मानस ने हथेली से panty का छोर ढूंढा और इस बार फिर हाथ माया के नंगी चूत पे सरक गई l
मानस इस पल कुछ भी सोचने की स्थिति में नहीं था उसे तो बस 3 वीक से जमा हुवा वीर्य बाहर निकालना था I
(तीन week से वो खुद ही मुट्ठ kyon नहीं मारा उसका reason आगे पता चलेगा )
भाग 2
मानस माया को चोदने के लिए पागल हुवे जा रहा था l
मानस - नहीं जाऊंगा ऑफिस l
नंगे भागते हुवे वो बाथरूम से रूम में आता है, हड़बड़ाहट में mobile लेते हुवे वो अपने बॉस को कॉल करता है l
मानस - हेलो sir... sorry.. ji.... Ji main आज नहीं आ पाउँगा.... हाँ वो फाइल मैंने भेज दी कल रात ही... जी... जी जी बिलकुल.. थैंक यू सो मच l
इधर माया पति की बेताबी पे हंस पड़ती है l मानस का लंड अब सिकुड़ चूका था, शायद बॉस से बात कर के l
मानस और माया की नज़र मिलती है और दोनों हंस पड़ते हैं l मानस माया का हाथ पकड़ अपनी ओर खींचता है और उसे बाँहों में कैद कर लेता है माया भी पति की बाँहों में ढीली पड़ जाती है l
चिकने पीठ पे मानस का हाथ धीरे धीरे फिसल कर ब्लाउज के छोर के पास उसकी कटीली कमर पे आ टिकती है l माया के गर्दन को चूमते हुवे वो दूसरे हाथ से साड़ी में उभरी उसकी नितम्बों को थाम लेता है l
मानस = ओह माया और कितना तडपाओगी...
दोनों के होंठ मिल जाते हैं l मानस अपने दोनों हाथों से माया के भरे बदन की नाप लेता रहता है l
माया भी मदहोशी में हलकी सी आह भर लेती है, गरम सांसों से भारी आह सुन मानस अपने होंठ आगे बढ़ा कर उसकी होंठ के अंदर घुस जाता hai.. maya पति की और नहीं तड़पाना चाहती थी तो वो पैरों पे उचकते हुवे अपने होंठ को पूरा खोल देती है l दोनों के अंदर सेक्स की आग भड़क उठी थी, उठती भी क्यों नहीं 3 हफ्तों के प्यासे थे दोनों l
दोनों पास ही पड़े बेड pe लेट जाते हैं l मानस सीधा लेटा होता है, लेकिन उसका लंड हवा में झटके मार रहा होता है l
बगल में सीने पे हाथ रखी उसकी पत्नी माया अपने पति के लंड को निहारती रहती है l
मानस कंधे से साड़ी का पल्लू हटाता है तो नीले ब्लाउज में माया की चूचियों की गोलाइयाँ देख अपने हाथों को रोक नहीं पाता l वो माया की फूली हुई चूचियों को अपनी हथेली में भींच लेता hai l माया को ऐसा अहसास हो रहा था जैसे उसकी पहली सुहागरात है जबकि 6 महीने से ज्यादा समय बीत चूका था शादी को l ना जाने कितनी बार सेक्स किये हैं दोनों ने लेकिन हर बार एक नया अहसास होताहै l
मानस ब्लाउज में अपनी पत्नी की गोरी चूचियों को देखते हुवे सामने की एक हुक खोलता है, मगर मानस में इतना भी सब्र नहीं था की वो पुरे बूब को बाहर आने देता इससे पहले की बूब बाहर आते वो 2 हुक के बड़े गैप के बीच अपनी जीभ डाल देता है और माया की क्लीवेज चाटने लगता है l
माया गरम जीभ की छुवन से सिहर उठती है, वो नीचे देखती hai तो पाती है की मानस मुट्ठी में लंड पकड़े उसे तेजी से रगड़ रहा था l
वो मानस के हाथ को रोकना चाहती है क्योंकि उसे ये पल लम्बा चाहिए था वो मजे को जल्द ख़त्म नहीं करना चाहती थी l मगर मानस नहीं रुकता वो लगातार क्लीवेज चाटते हुवे हाथों को झटका दे रहा था l इसी बीच फिर मानस माया का हाथ पकड़ अपने लंड पे रख देता है l
लंड काफी गरम हो गया था और अब माया भी अपना होश खो रही थी l क्योंकि मानस तेजी से हरकत करते हुवे ब्लाउज के सारे बटन खोल चूका था और एक हाथ से ब्रा को नीचे खींच उसकी जीभ माया के निप्पल के इर्द गिर्द घूम रही थी l
माया की सिसकारी निकलने लगी, चूड़ियों की खनखनाहट तेज हो गई l माया अब मानस का मुट्ठ मार रही थी l
मानस का मज़ा दोगुना हो गया था, उसकी साँसे तेज हो गई थी l वो सीधा हो गया और बेसब्री से लंड के पानी का इंतज़ार करने लगा l माया को अहसास हुवा की मानस की जीभ उसके बूब पे चलना बंद हो गई हैं l उसका ध्यान टूटा और उसने झट्ट से लंड छोड़ दिया l मानस तड़प के रह गया, उसके लंड का लावा फूटने ही वाला था की माया ने हाथ हटा लिया था l
मानस को भी होश आया तो उसे अपनी गलती का अहसास हुवा l उसने माया को अपने ऊपर ले लिया l माया खुश हो गई उसे ये postion बहुत पसंद था l
मानस ने blouse के दोनों साइड से हाथ फंसाया और ब्रा के साथ ही गर्दन से hote हुवे निकाल फेंका l
माया शरमा गई l उसकी दोनों चूचियां मानस के चेहरेके पास लटक रही थी l वो उठना चाही तो मानस उचक के उसके एक बूब को मुँह में ले लिया l
और दूसरे को हाथ में लेकर दबाने लगा l

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मानस किसी बच्चे की तरह बारी बारी से माया की दोनों चूची पी रहा था l माया के निप्पल खड़े हो गए थे l
मानस - आहहह माया.... तुम्हारी चूची कितनी मजेदार है l
माया - छी कितनी बार बोली हूँ ऐसा मत बोला करो l
मानस - तो क्या बोलूं मेरी जान
माया - बूब बोला करो l
मानस - मैं तो इसे चूची ही कहूंगा l बूब कहने mein देसी फील नहीं आता I
माया - ठीक है जो कहना है कहो तुम नहीं बदलोगे l अब करो जो करना है l
मानस - क्या बात है, बड़ी बेसब्र हो l
(कहते हुवे मानस ने अपना नंगा लंड माया की चूत के ऊपर सटा दिया l)
माया - नहीं बेसब्र तो तुम थे l
बातों बातों में मानस माया की साड़ी और पेटीकोट दोनों को एक साथ उपर खींच रहा था l एक वक़्त ऐसा आया जब साड़ी ऊपर नहीं जा रही थी तो माया अपनी कमर थोड़ी ऊपर की ताकि साड़ी पूरी उठ जाए l
मानस उसी वक़्त तेज़ी से साड़ी ऊपर कर अपना एक हाथ लंड के ऊपर हथेली खोले उल्टा रख लिया l
माया अपने पति के हरकत से अनजान जब वापस कमर नीचे की तो panty में उसकी चूत सीधा मानस के हाथ पे लगी l मानस ने तुरंत किसी स्पंज ki तरह उसकी चूत को हथेली से निचोड़ दिया l माया इस मीठे अहसास से सरोबोर थी उसके उन्माद का रस panty mein उतरने लगा था I
वो अपने पति के सीने mein सर छिपाए बिना कोई हरकत किये sharm से laal थी l
मानस ने हथेली से panty का छोर ढूंढा और इस बार फिर हाथ माया के नंगी चूत पे सरक गई l
(उदय bolta ही जा रहा था, वो ye सारी बातें लंड से पानी jhaadte हुवे बोल रहा था l उदय आज बिना earphone के बात कर रहा था तो माया को बिलकुल ही पता नहीं चला की पापा उससे बातें कर लंड का पानी गिरा रहे हैं l अपनी बूब की ख़ूबसूरती वाली बात से वो बेहद खुश तो थी, साथ हे हैरान भी की उसके पापा उसके बूब्स को देखते हैं l)
थोड़ी देर बाद उदय का लंड शांत हो गया l उसकी हथेली मुट्ठ से चिपचिपा रही थी, वो हाथ बेड पे ही पोछ लिया l
माया अभी भी फ़ोन पे चुप थी l
उदय - क्या हुवा बेटी क्या सोच रही हो ?
माया - कुछ नहीं पापा
उदय - मेरी मान मानस को बुलाने का यही बेहतर उपाय है l
माया - हम्म
उदय - ओके बेटी तो मैं तुम्हे अकेले छोड़ता हूँ, तुम आराम से मानस को रिझाओ, मेरा पति पत्नी के बीच यहाँ क्या काम.. हाहा l
माया (शर्माते हुवे ) नहीं पापा its ओके l मैं बाद में कर लूंगी l
उदय - नहीं बेटी अभी तुम साड़ी में क़यामत लग रही हो to बेहतर होगा अभी की फोटो भेजो l
माया - नहीं I am ओके उसकी जरुरत नहीं है पापा l
उदय - लेकिन क्यों बेटी... ? मुझे पति पत्नी के के प्राइवेट मामले में बोलने ka हक़ तो नहीं है बेटी.. लेकिन मैं तो बस तुम्हारी हेल्प कर रहा था l क्योंकि तुम बातों से मुझे उदास दिख रही थी l
माया - नहीं पापा वैसी बात नहीं है, दरअसल उनके पास पहले पहले से मेरी हज़ारों तसवीरें हैं l
उदय - मैं समझा नहीं बेटी l
माया - actually पापा मानस सिर्फ बाहर se सीधे दीखते हैं अंदर बहुत शरारती हैं l शादी के पहले से ही उनको मेरी तसवीरें लेने का शौक है, हर जगह मेरी तस्वीर खींचते हैं कभी camera.से कभी phone से.. उनका एक ऑनलाइन अकाउंट है जहाँ wo सारी photos rakhte hain.
मेरी ना जाने कितनी फोटो है वहाँ पे हर तरह ke ड्रेस में l यहाँ तक की हनीमून की पिक्स भी हैं वो हमेशा कैमरा लिए रहते थे, और मेरी फोटोज खींचते rahte.थे l इसलिए मैं कहना chaah रही थी की उनके पास पूरा कलेक्शन है मेरे photo का भला वो क्या करेंगे l
उदय - ओके समझा बेटी... लेकिन अभी की नहीं है ना उसके पास ?
माया - hmm
उदय - अभी तुम बहुत सेक्सी लग रही हो
(उदय धीरे धीरे खुल रहा था, माया भी मुस्कुरा दी )
माया - ओके पापा
उदय - ठीक है तू photos ले के मानस को भेज मैं 10 min बाद फ़ोन करता हूँ
माया - its ok पापा बात करो ना l
(उदय यही चाहता था की सबकुछ फ़ोन पे बात करते हुवे हो )
उदय - ok बेटी तू कहती है तो रुक जाता हूँ l तू बात भी कर और साथ साथ फोटो भी खींच है ना ?
माया - जी पापा
उदय - और हाँ अपनी नाभि की फोटो खींचना मत भूलना
माया - जी पापा
उदय - और बता शादी से पहले की बात, क्या क्या किया तुम दोनों ने l
माया - क्या...
उदय - वही उस दिन छत पे दिखाने के बाद आगे और क्या क्या हुवा l
माया - क्या पापा आप भी ना l
उदय - अरे बता ना बेटी... तेरी कहानी सुनकर मुझे अपने दिन याद आ रहे हैं अच्छा लग रहा है l
माया - hmm
उदय - अब बता भी
माया - ओके.. उस दिन के बाद वो अक्सर मेरी photos मांगते थे l एक दिन मैं फ़ोन ले कर नहाने गई l
उदय - वाओ बेटी
माया - हम्म... और नहाते वक़्त की फोटोज भेजी उन्हेंl
उदय - आहहह पूरी नंगी फोटोज
माया - नहीं.. पैंटी पहनी थी l
( ना चाहते हुवे भी माया को बताना पड़ा )
उदय - आहहह मतलब ऊपर से पूरी नंगी और नीचे सिर्फ एक पैंटी l
माया - जी पापा
उदय - मानस ने पैंटी खोलने को नहीं बोला ?
माया - जी बोले थे, but मुझे बहुत शर्म आ रही थी l
उदय - बेचारा मानस जन्नंत सामने होते हुवे भी जन्नत के द्वार को देख नहीं पाया l
( माया इशारा समझ झेंप गई )
माया - छी पापा
उदय - छी क्या बेटी, वो जन्नत का द्वार ही तो है जिसमे हर मर्द घुसना चाहता है l
माया और उदय दोनों हँस पड़े l
उदय - तेरी माँ तो जन्नत दिखाना चाहती थी मगर स्टूडियो वाले से थोड़ा डर रही थी l
माया - ओह रियली
उदय - हाँ
उदय - मेरे पास आज भी उसकी फोटोज है जो उसने मुझे भेजा था l
माया - वाओ पापा
उदय - देखना चाहोगी ?
माया - क्या अभी है आपके पास ?
उदय - हाँ काफी पहले मैं मोबाइल में रख लिया था l
(दरअसल एक प्लान के tahat उदय ने गूगल से पिक्स ले कर उसे modify कर दिया था, उदय ने बड़ी ख़ूबसूरती से pic को पुराना कर दिया था )
माया - ओके दिखाइए
उदय - ओके बेटी
(उसके बाद उदय ने सारे हॉट pics भेज दिया l pic देख कर माया बहुत हैरान थी l और उससे भी ज्यादा हैरान की पापा ने ऐसी गंदी फोटो माया को भेज दी थी l)



माया - बाप रे..... पापा सच में ये मम्मी हैं ?
उदय - हाँ बेटी l
माया - ओह माय गॉड माँ... कैसे स्टूडियो में ऐसी फोटोज खिचवा ली ufff
माया हैरान थी...
उदय - हा हा बेटी... जवान औरत को नंगा देख उस स्टूडियो वाले का क्या हाल हुवा होगा, उसका तो खड़ा हो गया होगा l
(माया उदय की बात सुन शरमा गई )
उदय - कैसा था pic? और कौन सा अच्छा लगा तुम्हे ?
माया - काफी bold pic है सभी... वो मम्मी की वो बैठने वाली pic अच्छी लग रही है l
उदय - हाँ मुझे भी l
उदय - लेकिन मुझे दूसरी वाली pic इससे भी ज्यादा हॉट लगती है ?
माया - कौन सी वाली ?
उदय - जिसमे तुम्हारी माँ ऊपर से पूरा कपडा हटा दी हैं और एक हाथ में अपनी एक चू... आ मतलब दूध कैमरा की तरफ दिखाया है, जैसे कैमरा मैन को पिलाना चाहती हो l
माया - हम्म... अच्छा..
उदय - मैं तो अक्सर तेरी माँ की चिढ़ाता था, की तुम अपना बूब मुझे दिखा रही थी या स्टूडियो वाले को
माया - सो mean पापा...
उदय - हा हा..
(माहौल को नार्मल करने के लिए उदय बीच बीच में हँस देता, लेकिन मौके का फ़ायदा उठाना नहीं भूलता, वैसे हे मौके का फ़ायदा uthaate हुवे दबी सिसकती आवाज़ में माया से बोला )
उदय - वैसे बेटी तेरे बूब तो तुम्हारी माँ से भी बड़े और सुन्दर हैं l
(माया कुछ भी बोल ना पाई, अपनी तारीफ सुन बस बेसुध सी बिस्तर पे लेटी रही )
(उदय माया की तरफ से कोई विरोध ना देखकर आगे बोला )
उदय - मानस को तो बहुत मज़ा आता होगा, उसे दबाने और चूसने में... है ना बेटी..
(माया कुछ नहीं बोल पा रही थी, पापा के मुँह से अपने बूब की तारीफ सुनकर वो स्तब्ध थी, उसे हल्का हल्का नशा सा रहा था, )
(उदय मुट्ठ मारते हुवे आगे बोला )
उदय - काश तुम्हारी माँ के तुम्हारे जैसे भारी बूब होते, तो उसपे हाथ फेरने में कितना मज़ा आता,,.. उसे ब्रा से बाहर निकाल के चूसने में कितना मज़ा aata... आअह्ह्ह मैं तो तुम्हारे निप्पल को.... मेरा मतलब तुम्हारी माँ के निप्पल को हर वक़्त चूसता रहता l आअह्ह्ह बेटी...
(उदय का लंड बहुत गरम हो गया था )
(माया थूक घोटती पापा की बातें सुन रही थी, जब उदय ने गलती से उसके निप्पल चूसने की बात कही थी तब माया खुद को सिकोड़ती अपनी जांघो को आपस में भींच ली थी, हल्की सी moan लिए माया का कामरस उसकी चूत को भिगो दिया था )
उदय - तू सुन रही है ना बेटी ?
माया बस हम्म्म कर दी l
माया ने अभी भी कोई विरोध नहीं jataya था l
उदय - तेरे जैसे बूब हैं बेटी... वैसी बूब को मलने और चूसने के लिए हर मर्द तरसता है l मानस ने पिछले जनम में जरूर कोई पुण्य किया होगा बेटी.. जो तुझ जैसी सुन्दर शरीर की मालकिन मिली उसे l वो जब चाहे जितना चाहे तेरे शरीर को भोग सकता है, बाकी मर्द तो बस तुझे देखकर अपना पैंट गीला करते होंगे l
(माया पापा की हर बात ध्यान से सुन रही थी... उसकी चूत अब काफी पानी छोड़ रही थी, पापा की मीठी बातें उसपे अलग खुमार ला रहीं थीं l गर्म सांसें उगलती माया के होंठ खुल से गए थे, एक हाथ से वो साड़ी को कमर तक गिरा दी और अपने नर्म गर्म जांघो को दबोचने लगी )

उदय इतना सबकुछ कह गया था, माया कुछ नहीं बोली.. इतनी देर बाद भी उसके मुहँ से सिर्फ एक बात निकली
माया - उम्म्म पापाआआआाा.... I miss you...
उदय लंड को रगड़ते हुवे ये समझ चूका था की उसकी बेटी माया अब गरम हो चुकी है l
भाग 24
थोड़ी देर बाद उदय का लंड शांत हो गया l उसकी हथेली मुट्ठ से चिपचिपा रही थी, वो हाथ बेड पे ही पोछ लिया l
माया अभी भी फ़ोन पे चुप थी l
उदय - क्या हुवा बेटी क्या सोच रही हो ?
माया - कुछ नहीं पापा
उदय - मेरी मान मानस को बुलाने का यही बेहतर उपाय है l
माया - हम्म
उदय - ओके बेटी तो मैं तुम्हे अकेले छोड़ता हूँ, तुम आराम से मानस को रिझाओ, मेरा पति पत्नी के बीच यहाँ क्या काम.. हाहा l
माया (शर्माते हुवे ) नहीं पापा its ओके l मैं बाद में कर लूंगी l
उदय - नहीं बेटी अभी तुम साड़ी में क़यामत लग रही हो to बेहतर होगा अभी की फोटो भेजो l
माया - नहीं I am ओके उसकी जरुरत नहीं है पापा l
उदय - लेकिन क्यों बेटी... ? मुझे पति पत्नी के के प्राइवेट मामले में बोलने ka हक़ तो नहीं है बेटी.. लेकिन मैं तो बस तुम्हारी हेल्प कर रहा था l क्योंकि तुम बातों से मुझे उदास दिख रही थी l
माया - नहीं पापा वैसी बात नहीं है, दरअसल उनके पास पहले पहले से मेरी हज़ारों तसवीरें हैं l
उदय - मैं समझा नहीं बेटी l
माया - actually पापा मानस सिर्फ बाहर se सीधे दीखते हैं अंदर बहुत शरारती हैं l शादी के पहले से ही उनको मेरी तसवीरें लेने का शौक है, हर जगह मेरी तस्वीर खींचते हैं कभी camera.से कभी phone से.. उनका एक ऑनलाइन अकाउंट है जहाँ wo सारी photos rakhte hain.
मेरी ना जाने कितनी फोटो है वहाँ पे हर तरह ke ड्रेस में l यहाँ तक की हनीमून की पिक्स भी हैं वो हमेशा कैमरा लिए रहते थे, और मेरी फोटोज खींचते rahte.थे l इसलिए मैं कहना chaah रही थी की उनके पास पूरा कलेक्शन है मेरे photo का भला वो क्या करेंगे l
उदय - ओके समझा बेटी... लेकिन अभी की नहीं है ना उसके पास ?
माया - hmm
उदय - अभी तुम बहुत सेक्सी लग रही हो
(उदय धीरे धीरे खुल रहा था, माया भी मुस्कुरा दी )
माया - ओके पापा
उदय - ठीक है तू photos ले के मानस को भेज मैं 10 min बाद फ़ोन करता हूँ
माया - its ok पापा बात करो ना l
(उदय यही चाहता था की सबकुछ फ़ोन पे बात करते हुवे हो )
उदय - ok बेटी तू कहती है तो रुक जाता हूँ l तू बात भी कर और साथ साथ फोटो भी खींच है ना ?
माया - जी पापा
उदय - और हाँ अपनी नाभि की फोटो खींचना मत भूलना
माया - जी पापा
उदय - और बता शादी से पहले की बात, क्या क्या किया तुम दोनों ने l
माया - क्या...
उदय - वही उस दिन छत पे दिखाने के बाद आगे और क्या क्या हुवा l
माया - क्या पापा आप भी ना l
उदय - अरे बता ना बेटी... तेरी कहानी सुनकर मुझे अपने दिन याद आ रहे हैं अच्छा लग रहा है l
माया - hmm
उदय - अब बता भी
माया - ओके.. उस दिन के बाद वो अक्सर मेरी photos मांगते थे l एक दिन मैं फ़ोन ले कर नहाने गई l
उदय - वाओ बेटी
माया - हम्म... और नहाते वक़्त की फोटोज भेजी उन्हेंl
उदय - आहहह पूरी नंगी फोटोज
माया - नहीं.. पैंटी पहनी थी l
( ना चाहते हुवे भी माया को बताना पड़ा )
उदय - आहहह मतलब ऊपर से पूरी नंगी और नीचे सिर्फ एक पैंटी l
माया - जी पापा
उदय - मानस ने पैंटी खोलने को नहीं बोला ?
माया - जी बोले थे, but मुझे बहुत शर्म आ रही थी l
उदय - बेचारा मानस जन्नंत सामने होते हुवे भी जन्नत के द्वार को देख नहीं पाया l
( माया इशारा समझ झेंप गई )
माया - छी पापा
उदय - छी क्या बेटी, वो जन्नत का द्वार ही तो है जिसमे हर मर्द घुसना चाहता है l
माया और उदय दोनों हँस पड़े l
उदय - तेरी माँ तो जन्नत दिखाना चाहती थी मगर स्टूडियो वाले से थोड़ा डर रही थी l
माया - ओह रियली
उदय - हाँ
उदय - मेरे पास आज भी उसकी फोटोज है जो उसने मुझे भेजा था l
माया - वाओ पापा
उदय - देखना चाहोगी ?
माया - क्या अभी है आपके पास ?
उदय - हाँ काफी पहले मैं मोबाइल में रख लिया था l
(दरअसल एक प्लान के tahat उदय ने गूगल से पिक्स ले कर उसे modify कर दिया था, उदय ने बड़ी ख़ूबसूरती से pic को पुराना कर दिया था )
माया - ओके दिखाइए
उदय - ओके बेटी
(उसके बाद उदय ने सारे हॉट pics भेज दिया l pic देख कर माया बहुत हैरान थी l और उससे भी ज्यादा हैरान की पापा ने ऐसी गंदी फोटो माया को भेज दी थी l)



माया - बाप रे..... पापा सच में ये मम्मी हैं ?
उदय - हाँ बेटी l
माया - ओह माय गॉड माँ... कैसे स्टूडियो में ऐसी फोटोज खिचवा ली ufff
माया हैरान थी...
उदय - हा हा बेटी... जवान औरत को नंगा देख उस स्टूडियो वाले का क्या हाल हुवा होगा, उसका तो खड़ा हो गया होगा l
(माया उदय की बात सुन शरमा गई )
उदय - कैसा था pic? और कौन सा अच्छा लगा तुम्हे ?
माया - काफी bold pic है सभी... वो मम्मी की वो बैठने वाली pic अच्छी लग रही है l
उदय - हाँ मुझे भी l
उदय - लेकिन मुझे दूसरी वाली pic इससे भी ज्यादा हॉट लगती है ?
माया - कौन सी वाली ?
उदय - जिसमे तुम्हारी माँ ऊपर से पूरा कपडा हटा दी हैं और एक हाथ में अपनी एक चू... आ मतलब दूध कैमरा की तरफ दिखाया है, जैसे कैमरा मैन को पिलाना चाहती हो l
माया - हम्म... अच्छा..
उदय - मैं तो अक्सर तेरी माँ की चिढ़ाता था, की तुम अपना बूब मुझे दिखा रही थी या स्टूडियो वाले को
माया - सो mean पापा...
उदय - हा हा..
(माहौल को नार्मल करने के लिए उदय बीच बीच में हँस देता, लेकिन मौके का फ़ायदा उठाना नहीं भूलता, वैसे हे मौके का फ़ायदा uthaate हुवे दबी सिसकती आवाज़ में माया से बोला )
उदय - वैसे बेटी तेरे बूब तो तुम्हारी माँ से भी बड़े और सुन्दर हैं l
(माया कुछ भी बोल ना पाई, अपनी तारीफ सुन बस बेसुध सी बिस्तर पे लेटी रही )
(उदय माया की तरफ से कोई विरोध ना देखकर आगे बोला )
उदय - मानस को तो बहुत मज़ा आता होगा, उसे दबाने और चूसने में... है ना बेटी..
(माया कुछ नहीं बोल पा रही थी, पापा के मुँह से अपने बूब की तारीफ सुनकर वो स्तब्ध थी, उसे हल्का हल्का नशा सा रहा था, )
(उदय मुट्ठ मारते हुवे आगे बोला )
उदय - काश तुम्हारी माँ के तुम्हारे जैसे भारी बूब होते, तो उसपे हाथ फेरने में कितना मज़ा आता,,.. उसे ब्रा से बाहर निकाल के चूसने में कितना मज़ा aata... आअह्ह्ह मैं तो तुम्हारे निप्पल को.... मेरा मतलब तुम्हारी माँ के निप्पल को हर वक़्त चूसता रहता l आअह्ह्ह बेटी...
(उदय का लंड बहुत गरम हो गया था )
(माया थूक घोटती पापा की बातें सुन रही थी, जब उदय ने गलती से उसके निप्पल चूसने की बात कही थी तब माया खुद को सिकोड़ती अपनी जांघो को आपस में भींच ली थी, हल्की सी moan लिए माया का कामरस उसकी चूत को भिगो दिया था )
उदय - तू सुन रही है ना बेटी ?
माया बस हम्म्म कर दी l
माया ने अभी भी कोई विरोध नहीं jataya था l
उदय - तेरे जैसे बूब हैं बेटी... वैसी बूब को मलने और चूसने के लिए हर मर्द तरसता है l मानस ने पिछले जनम में जरूर कोई पुण्य किया होगा बेटी.. जो तुझ जैसी सुन्दर शरीर की मालकिन मिली उसे l वो जब चाहे जितना चाहे तेरे शरीर को भोग सकता है, बाकी मर्द तो बस तुझे देखकर अपना पैंट गीला करते होंगे l
(माया पापा की हर बात ध्यान से सुन रही थी... उसकी चूत अब काफी पानी छोड़ रही थी, पापा की मीठी बातें उसपे अलग खुमार ला रहीं थीं l गर्म सांसें उगलती माया के होंठ खुल से गए थे, एक हाथ से वो साड़ी को कमर तक गिरा दी और अपने नर्म गर्म जांघो को दबोचने लगी )

उदय इतना सबकुछ कह गया था, माया कुछ नहीं बोली.. इतनी देर बाद भी उसके मुहँ से सिर्फ एक बात निकली
माया - उम्म्म पापाआआआाा.... I miss you...
उदय लंड को रगड़ते हुवे ये समझ चूका था की उसकी बेटी माया अब गरम हो चुकी है l
महेन्द्र - उसे disturb होगा बहू.. तू एक काम कर दरवाजा बाहर से बंद करके आ जा l
(महेन्द्र ने जैसे माया की मन की बात पढ़ ली हो इस situation में माया को भी यही बात अच्छी लगी )
वो हामी भरती हुई उठ कर door के पास आयी देखा तो मानस सो रहा था वो धीरे से door खींची अजीब सी feeling थी माया के मन में उस वक़्त जैसे कोई पाप करने जा रही हो... और नहीं भी.... आखिरकार वो मानस को बेवजह किसी परेशानी में नहीं पड़ने देना चाहती थी l
माया दरवाजा बंद कर दी बाहर से और वापस सोफे के पास आकर खड़ी हो गई l
महेन्द्र - बंद कर दी बहू l
माया - हाँ बाबूजी l
महेन्द्र - तो आ बैठ मेरे पास (महेन्द्र ने बहू को खींच के सोफे पे अपने बिलकुल करीब बैठा दिया )
बहू के कमर में हाथ डाल एक बार फिर उसे अपने करीब खींच लिया l
माया का एक हाथ महेन्द्र के सीने पे था l महेन्द्र ने प्यार से माया का हाथ पकड़ा l
हाथ की रेखा देखते... अरे बहू तुम तो बड़ी भाग्यशाली हो l
माया - क्या मतलब बाबूजी l
महेन्द्र - ये देखो ये किस्मत की rekha होती है और ये धन की l
माया - आपको हाथ देखना आता है ?
महेन्द्र - हाँ हाथ, चेहरा, handwriting सब देखना आता है, जब मैं मुंबई में था आज से 8 साल पहले तब मैं एक फ्रेंड के साथ रहता था उसके अंकल बहुत बड़े astrologer थे l मेरा interest भी था तो उनसे 2 साल शिक्षा ली l
माया - wow बाबूजी आपने कभी बताया नहीं l अच्छा तो मेरी हाथ क्या कहती है l
(महेंद्र बहुत chalak था माया के पापा उसके बहुत अच्छे दोस्त हैं, शादी के दिनों में माया के बारे में बहुत सी जानकारी दी थी, महेन्द्र ने सोचा यही मौका है बहू का भरोसा paane का )
महेन्द्र माया के हाँथ देख उसे पढ़ने की कोशिश करने लगा और बातें बनाने लगा l
महेन्द्र - ओके बहू तुम्हारी ये जो line है वो तुम्हारे बचपन को बयान करती है l तुम्हारा बचपन बहुत अच्छा नहीं था है ना l
माया - उम्म्म हाँ but किस बारे में
महेन्द्र - दुबारा देखते हुवे... तुम्हारी हेल्थ ठीक नहीं रहती थी और शायद तुम बहुत बीमार भी रहती थी किसी कारणवश, क्या कोई हादसा भी हुवा है तुम्हारे साथ बचपन में ?
माया - चौंकते हुवे l हाँ मेरी माँ बताती हैं की मैं बहुत बीमार रहती थी और बचपन में एक बार खेलते खेलते कुवें में गिर गई थी l लेकिन रस्सी में मेरा पाओं फंस गया था तो मैं बच गई गांव वालों ने बचाया था मुझे l
महेन्द्र - हम्म
माया की जिज्ञासा और बढ़ गई, कोई और बात बताइये ना मेरे प्रेजेंट या फ्यूचर के बारे में l
महेन्द्र - ओके ये रेखा देख रही हो ये कहता है की तुमहरे पास काफी पैसा होगा l
माया - ये तो झूठ है, कहाँ पैसा है l
महेन्द्र - वो भविष्य में होगा... अभी तो शुरुवात है बहू l और हाँ तुम्हारे 2 बच्चे होंगे l
माया शरमा गई l
माया - बाबूजी वो सब नहीं कुछ अच्छा बताइये ना, अच्छा मैं आपका टेस्ट लेती हूं l कुछ ऐसा बताइये जो मेरे present se जुड़ा हो देखूं कितना सच है l
महेन्द्र फंस चूका था, लेकिन उसे कुछ तो बोलना था तो उसने बहू की नेचर को धयान में रख बोला l
महेन्द्र - हम्म्म... तुम बहुत सुलझी हुई और सीधी हो किसी का दिल दुखाना नहीं चाहती अगर तुम्हारे पति कोई गलती भी करें तो तुम उसे अपने सर ले लेती हो l सबकी help करती हो, और तुम्हारा वैवाहिक जीवन बहुत सुखदाई हैl और हाँ तुमने एक बहुत बड़ा राज अपने पति से छुपाया है l
माया सुनकर shock हो जाती है, जबकि महेन्द्र ने तो केवल अपने अनुभव का उपयोग किया था l हर किसी के जीवन में कोई ना को कोई सीक्रेट तो होता ही है मगर माया को लगा की बाबूजी सच में कोई विद्वान हैं l
माया - बाबूजी.. आप तो सच में बहुत ज्ञानी है l
महेन्द्र - इतना ही नहीं बहू..... सिर्फ हाथ नहीं बहुत सी ऐसी चीज़ें होती हैं जिनसे हम भूत और भविष्य की बातें जान सकते हैं l
माया - वो क्या बाबूजी ?
(माया महेन्द्र की मीठी बातों के jaal में fansti जा रही थी )
महेन्द्र - जैसे की बहू हाथ की रेखा के साथ साथ, handwriting, नंबर, कलर, शरीर पे तिल वगैरह
माया - तिल.... तिल से भी ?
महेन्द्र - हाँ तिल से भी उसका आकार कलर का गहरापन इन सबसे भी पता चलता है l (महेन्द्र ने एक और जाल फेंका )
माया - मैं कुछ समझी नहीं बाबूजीl
महेन्द्र - कैसे समझाऊं... अच्छा सुन... जैसे मैंने बोला की तुम्हारी हाथ की रेखा तुम्हे धनवान होने की प्रमाण देती है l
माया - हाँ l
महेन्द्र - वैसे ही शरीर के हिस्से पे कोई ख़ास तिल esko होने या ना होने को सत्यापित भी करती है l
माया बड़े गौर से सब सुन रही थी l
अच्छा एक बात बताओ बहू..... शरीर का सबसे अभिन्न अंग क्या है ?
माया - उम्म्म..... पता नहीं
महेन्द्र - हमारा पेट, क्योंकि संसार में मनुष्य जो भी करता है पेट के लिए करता है है ना ? उसी तरह पैर जो हमें आगे बढ़ने में मदद करती है l
माया - हाँ समझी l
महेन्द्र - तो इनमे से किसी जगह पे अगर तिल हो तो वो आदमी या औरत बहुत धनवान होते है l
माया कुछ सोच में पड़ जाती है,
महेन्द्र - तुम्हारे पेट पे तिल है बहू ?
माया भोलेपन से बोली..... पेट पे कहाँ बाबूजी ?
महेन्द्र इस बात का फ़ायदा उठाते हुवे अपना दूसरा हाथ सीधा बहू के पेट पे रखता है l गाउन के ऊपर से सहलाते हुवे वो हथेली नाभि के ऊपर टिका देता है l
महेन्द्र - यहाँ बहू तुम्हारी नाभि पे l
माया शर्म से लाल हो जाती है और थोड़ी मचल भी जाती है l
तभी महेन्द्र वो कह देता है जो अबतक सिर्फ मानस ने उससे कहा था l
महेन्द्र - (नाभि सहलाते huwe) बहू तुम्हारी नाभि तो बहुत गहरी है l
माया महेन्द्र के हाथ के ऊपर हाथ रखती है मगर हटाती नहीं, और महेन्द्र उसकी नाभि पे उँगलियाँ फिरता रहता है l
महेन्द्र - बोलो ना बहू तिल है क्या यहाँ
माया - (नजरें झुकाये )....नहीं बाबूजी l
महेन्द्र - ओह फिर तो तुम्हारे पैर पे होना चाहिए l
(माया दोतरफा हमले से घिर सी गई थी l एक हाथ जो महेन्द्र उसकी कमर पे रगड़ रहा था और दूसरा हाथ उसकी नर्म नाभि पे l माया धीमी आवाज़ में बोली l )
माया - पता नहीं बाबूजी कभी ध्यान नहीं दी l
महेन्द्र - क्यों बहू नहाते हुवे तो देखा होगा....
(नहीं बाबूजी )
महेन्द्र - अरे अच्छा एक काम करो पैर ऊपर करो l
इससे पहले की माया कुछ कहती महेन्द्र ने उसके दोनों पैर जमीन से उठाकर अपने पैरों यानी गोद में रख लिया l
ये इतनी तेजी से हुवा की माया को सँभलने का मौका नहीं मिला l वो सोफे पे लेट सी गई l
महेन्द्र ने भी तुरंत माया के पेट पे हाथ रख दिया ताकि वो उठ ना paaye l और माया को पीछे support के लिए एक तकिया दे दिया l
महेन्द्र ने पहले माया के पैर घुटनो से नीचे तक देखे l
माया को उसके ससुर का उसके खुले अंगो को देखना अजीब लग रहा था l
महेन्द्र - यहाँ to nahi है, (महेन्द्र गाउन को घुटनो से ऊपर खींचने लगा )
माया स्थिर सी लेटी रही,... ना जाने क्यों वो ससुर जी को रोक नहीं पाई l कुछ ही पलों में माया की दूधिया मांसल जाँघे पूरी नंगी हो गईं l महेन्द्र के लंड में उफान मचने लगा जो नीचे से माया की गांड पे चोट कर रहा था l

जवान बहू आधी नंगी महेन्द्र के गोद के ऊपर थी महेन्द्र ने इतने वर्षो मैं ऐसी मांसल जांघ इतने करीब से नहीं देखी थी l उसके सब्र का बांध टूटता जा रहा था l
उसने अपने हाथ बहू के खुले जांघ पे रख दी, इधर माया कसमसाई सी तकिये में अपना मुँह ढक ली l
माया की तरफ से कोई विरोध ना देख महेन्द्र ने उसकी जांघ को अंदर तक छुवा, इतना अंदर हाथ डालने के बावजूद महेन्द्र को कोई पैंटी नहीं मिली, उसका दिल जोर से धड़का क्या बहू गाउन के अंदर कुछ नहीं पहनी l

माया को जब ख्याल आया की उसने गाउन के अंदर panty नहीं पहनी है तो उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा वो शर्म के मारे अपनी दोनों जांघ को आपस में भींच ली l
महेन्द्र का हाथ माया के जांघो के बीच ही फंसा रह गया l माया के खुली चूत से निकलती गर्म भाप को महेन्द्र अपनी हथेली का पिछले हिस्से पे साफ़ महसूस कर सकता था l जांघो पे ससुर की हथेली का स्पर्श पाकर माया की बुर ने पानी छोड़ दिया था l
माया की गीली चूत मानो महेन्द्र के उँगलियों से बस 1 इंच के फासले पे थी l इस बात का अहसास माया को भी था l
लेकिन ये एक इंच का फासला तय करना आसान नहीं था, यहाँ से चीजें या तो बिगड़ सकती थीं या बन सकती थीं l
इसलिए महेन्द्र बड़ी सहजता से वहीँ रुका रहा l माया का चेहरा तकिये se ढका था तो वो समझ नहीं पा रहा था की जो हो रहा है क्या उसमे बहू की रजामंदी है,, कहीं बहू मुझे गन्दा आदमी समझ के अपनी लाइफ से ना निकाल दे हमेशा हमेशा के लिए l
उसने सोचा की बहू से बात करके पता लगाए की बहू के दिल में क्या है l तो उसने चुप्पी तोड़ी, क्या हुवा बहू नींद आ रही है क्या ?
महेन्द्र ने अपना सवाल पूरा भी नहीं किया था की तभी पावर कट हो गया और पुरे कमरे में अँधेरा छा गया l
अँधेरे ने महेन्द्र की हिम्मत बढ़ा दी, उसने हथेली की उंगलियां खोली और बहू की बुर की फांक से दो उंगलि टच हो गई l

माया सिहर उठी उसकी बुर का रस महेन्द्र की उँगलियों पे बह गया l
माया - बाबूजी मैं मोमबत्ती जलाती हूं l (माया ने सर उठा के ऐसे रियेक्ट किया जैसे उसे कुछ नहीं पता लेकिन उसकी बोली और उसका शरीर अलग अलग हरकत कर रही थी )
माया उठने के बहाने अपनी कमर नीचे की ओर दबाई, जैसे वो सख्त उँगलियों को अपने अंदर भींचना चाहती हो l
महेन्द्र को लगा की माया अगर चली गई तो उसे दुबारा ऐसा मौका नहीं मिलेगा, वो तो हर हाल में बहू की बूर को अच्छी तरह फील करना चाहता था l महेन्द्र ने इसी बहाने हथेली सीधी कर एकदम से बहू की नंगी बुर को छू लिया l
महेन्द्र - रहने दे बहू मोमबत्ती की क्या जरुरत l
माया - नहीं बाबूजी लाती हूँ, माया उठ गई थी महेन्द्र ने भी हाथ हटा लिया था l माया उठकर किचन में आयी उसकी बुर कामरस में पूरी तरह गीली हो गई थी l
इधर महेन्द्र की हालत ऐसी थी जैसे हाथ लगा खजाना गुम हो गया हो l वो अपनी हथेली को नाक के पास रगड़ कर बहू की जवान बुर की महक ले रहा था l
(महेन्द्र ने जैसे माया की मन की बात पढ़ ली हो इस situation में माया को भी यही बात अच्छी लगी )
वो हामी भरती हुई उठ कर door के पास आयी देखा तो मानस सो रहा था वो धीरे से door खींची अजीब सी feeling थी माया के मन में उस वक़्त जैसे कोई पाप करने जा रही हो... और नहीं भी.... आखिरकार वो मानस को बेवजह किसी परेशानी में नहीं पड़ने देना चाहती थी l
भाग 11
माया दरवाजा बंद कर दी बाहर से और वापस सोफे के पास आकर खड़ी हो गई l
महेन्द्र - बंद कर दी बहू l
माया - हाँ बाबूजी l
महेन्द्र - तो आ बैठ मेरे पास (महेन्द्र ने बहू को खींच के सोफे पे अपने बिलकुल करीब बैठा दिया )
बहू के कमर में हाथ डाल एक बार फिर उसे अपने करीब खींच लिया l
माया का एक हाथ महेन्द्र के सीने पे था l महेन्द्र ने प्यार से माया का हाथ पकड़ा l
हाथ की रेखा देखते... अरे बहू तुम तो बड़ी भाग्यशाली हो l
माया - क्या मतलब बाबूजी l
महेन्द्र - ये देखो ये किस्मत की rekha होती है और ये धन की l
माया - आपको हाथ देखना आता है ?
महेन्द्र - हाँ हाथ, चेहरा, handwriting सब देखना आता है, जब मैं मुंबई में था आज से 8 साल पहले तब मैं एक फ्रेंड के साथ रहता था उसके अंकल बहुत बड़े astrologer थे l मेरा interest भी था तो उनसे 2 साल शिक्षा ली l
माया - wow बाबूजी आपने कभी बताया नहीं l अच्छा तो मेरी हाथ क्या कहती है l
(महेंद्र बहुत chalak था माया के पापा उसके बहुत अच्छे दोस्त हैं, शादी के दिनों में माया के बारे में बहुत सी जानकारी दी थी, महेन्द्र ने सोचा यही मौका है बहू का भरोसा paane का )
महेन्द्र माया के हाँथ देख उसे पढ़ने की कोशिश करने लगा और बातें बनाने लगा l
महेन्द्र - ओके बहू तुम्हारी ये जो line है वो तुम्हारे बचपन को बयान करती है l तुम्हारा बचपन बहुत अच्छा नहीं था है ना l
माया - उम्म्म हाँ but किस बारे में
महेन्द्र - दुबारा देखते हुवे... तुम्हारी हेल्थ ठीक नहीं रहती थी और शायद तुम बहुत बीमार भी रहती थी किसी कारणवश, क्या कोई हादसा भी हुवा है तुम्हारे साथ बचपन में ?
माया - चौंकते हुवे l हाँ मेरी माँ बताती हैं की मैं बहुत बीमार रहती थी और बचपन में एक बार खेलते खेलते कुवें में गिर गई थी l लेकिन रस्सी में मेरा पाओं फंस गया था तो मैं बच गई गांव वालों ने बचाया था मुझे l
महेन्द्र - हम्म
माया की जिज्ञासा और बढ़ गई, कोई और बात बताइये ना मेरे प्रेजेंट या फ्यूचर के बारे में l
महेन्द्र - ओके ये रेखा देख रही हो ये कहता है की तुमहरे पास काफी पैसा होगा l
माया - ये तो झूठ है, कहाँ पैसा है l
महेन्द्र - वो भविष्य में होगा... अभी तो शुरुवात है बहू l और हाँ तुम्हारे 2 बच्चे होंगे l
माया शरमा गई l
माया - बाबूजी वो सब नहीं कुछ अच्छा बताइये ना, अच्छा मैं आपका टेस्ट लेती हूं l कुछ ऐसा बताइये जो मेरे present se जुड़ा हो देखूं कितना सच है l
महेन्द्र फंस चूका था, लेकिन उसे कुछ तो बोलना था तो उसने बहू की नेचर को धयान में रख बोला l
महेन्द्र - हम्म्म... तुम बहुत सुलझी हुई और सीधी हो किसी का दिल दुखाना नहीं चाहती अगर तुम्हारे पति कोई गलती भी करें तो तुम उसे अपने सर ले लेती हो l सबकी help करती हो, और तुम्हारा वैवाहिक जीवन बहुत सुखदाई हैl और हाँ तुमने एक बहुत बड़ा राज अपने पति से छुपाया है l
माया सुनकर shock हो जाती है, जबकि महेन्द्र ने तो केवल अपने अनुभव का उपयोग किया था l हर किसी के जीवन में कोई ना को कोई सीक्रेट तो होता ही है मगर माया को लगा की बाबूजी सच में कोई विद्वान हैं l
माया - बाबूजी.. आप तो सच में बहुत ज्ञानी है l
महेन्द्र - इतना ही नहीं बहू..... सिर्फ हाथ नहीं बहुत सी ऐसी चीज़ें होती हैं जिनसे हम भूत और भविष्य की बातें जान सकते हैं l
माया - वो क्या बाबूजी ?
(माया महेन्द्र की मीठी बातों के jaal में fansti जा रही थी )
महेन्द्र - जैसे की बहू हाथ की रेखा के साथ साथ, handwriting, नंबर, कलर, शरीर पे तिल वगैरह
माया - तिल.... तिल से भी ?
महेन्द्र - हाँ तिल से भी उसका आकार कलर का गहरापन इन सबसे भी पता चलता है l (महेन्द्र ने एक और जाल फेंका )
माया - मैं कुछ समझी नहीं बाबूजीl
महेन्द्र - कैसे समझाऊं... अच्छा सुन... जैसे मैंने बोला की तुम्हारी हाथ की रेखा तुम्हे धनवान होने की प्रमाण देती है l
माया - हाँ l
महेन्द्र - वैसे ही शरीर के हिस्से पे कोई ख़ास तिल esko होने या ना होने को सत्यापित भी करती है l
माया बड़े गौर से सब सुन रही थी l
अच्छा एक बात बताओ बहू..... शरीर का सबसे अभिन्न अंग क्या है ?
माया - उम्म्म..... पता नहीं
महेन्द्र - हमारा पेट, क्योंकि संसार में मनुष्य जो भी करता है पेट के लिए करता है है ना ? उसी तरह पैर जो हमें आगे बढ़ने में मदद करती है l
माया - हाँ समझी l
महेन्द्र - तो इनमे से किसी जगह पे अगर तिल हो तो वो आदमी या औरत बहुत धनवान होते है l
माया कुछ सोच में पड़ जाती है,
महेन्द्र - तुम्हारे पेट पे तिल है बहू ?
माया भोलेपन से बोली..... पेट पे कहाँ बाबूजी ?
महेन्द्र इस बात का फ़ायदा उठाते हुवे अपना दूसरा हाथ सीधा बहू के पेट पे रखता है l गाउन के ऊपर से सहलाते हुवे वो हथेली नाभि के ऊपर टिका देता है l
महेन्द्र - यहाँ बहू तुम्हारी नाभि पे l
माया शर्म से लाल हो जाती है और थोड़ी मचल भी जाती है l
तभी महेन्द्र वो कह देता है जो अबतक सिर्फ मानस ने उससे कहा था l
महेन्द्र - (नाभि सहलाते huwe) बहू तुम्हारी नाभि तो बहुत गहरी है l
माया महेन्द्र के हाथ के ऊपर हाथ रखती है मगर हटाती नहीं, और महेन्द्र उसकी नाभि पे उँगलियाँ फिरता रहता है l
महेन्द्र - बोलो ना बहू तिल है क्या यहाँ
माया - (नजरें झुकाये )....नहीं बाबूजी l
महेन्द्र - ओह फिर तो तुम्हारे पैर पे होना चाहिए l
(माया दोतरफा हमले से घिर सी गई थी l एक हाथ जो महेन्द्र उसकी कमर पे रगड़ रहा था और दूसरा हाथ उसकी नर्म नाभि पे l माया धीमी आवाज़ में बोली l )
माया - पता नहीं बाबूजी कभी ध्यान नहीं दी l
महेन्द्र - क्यों बहू नहाते हुवे तो देखा होगा....
(नहीं बाबूजी )
महेन्द्र - अरे अच्छा एक काम करो पैर ऊपर करो l
इससे पहले की माया कुछ कहती महेन्द्र ने उसके दोनों पैर जमीन से उठाकर अपने पैरों यानी गोद में रख लिया l
ये इतनी तेजी से हुवा की माया को सँभलने का मौका नहीं मिला l वो सोफे पे लेट सी गई l
महेन्द्र ने भी तुरंत माया के पेट पे हाथ रख दिया ताकि वो उठ ना paaye l और माया को पीछे support के लिए एक तकिया दे दिया l
महेन्द्र ने पहले माया के पैर घुटनो से नीचे तक देखे l
माया को उसके ससुर का उसके खुले अंगो को देखना अजीब लग रहा था l
महेन्द्र - यहाँ to nahi है, (महेन्द्र गाउन को घुटनो से ऊपर खींचने लगा )
माया स्थिर सी लेटी रही,... ना जाने क्यों वो ससुर जी को रोक नहीं पाई l कुछ ही पलों में माया की दूधिया मांसल जाँघे पूरी नंगी हो गईं l महेन्द्र के लंड में उफान मचने लगा जो नीचे से माया की गांड पे चोट कर रहा था l

जवान बहू आधी नंगी महेन्द्र के गोद के ऊपर थी महेन्द्र ने इतने वर्षो मैं ऐसी मांसल जांघ इतने करीब से नहीं देखी थी l उसके सब्र का बांध टूटता जा रहा था l
उसने अपने हाथ बहू के खुले जांघ पे रख दी, इधर माया कसमसाई सी तकिये में अपना मुँह ढक ली l
माया की तरफ से कोई विरोध ना देख महेन्द्र ने उसकी जांघ को अंदर तक छुवा, इतना अंदर हाथ डालने के बावजूद महेन्द्र को कोई पैंटी नहीं मिली, उसका दिल जोर से धड़का क्या बहू गाउन के अंदर कुछ नहीं पहनी l

माया को जब ख्याल आया की उसने गाउन के अंदर panty नहीं पहनी है तो उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा वो शर्म के मारे अपनी दोनों जांघ को आपस में भींच ली l
महेन्द्र का हाथ माया के जांघो के बीच ही फंसा रह गया l माया के खुली चूत से निकलती गर्म भाप को महेन्द्र अपनी हथेली का पिछले हिस्से पे साफ़ महसूस कर सकता था l जांघो पे ससुर की हथेली का स्पर्श पाकर माया की बुर ने पानी छोड़ दिया था l
माया की गीली चूत मानो महेन्द्र के उँगलियों से बस 1 इंच के फासले पे थी l इस बात का अहसास माया को भी था l
लेकिन ये एक इंच का फासला तय करना आसान नहीं था, यहाँ से चीजें या तो बिगड़ सकती थीं या बन सकती थीं l
इसलिए महेन्द्र बड़ी सहजता से वहीँ रुका रहा l माया का चेहरा तकिये se ढका था तो वो समझ नहीं पा रहा था की जो हो रहा है क्या उसमे बहू की रजामंदी है,, कहीं बहू मुझे गन्दा आदमी समझ के अपनी लाइफ से ना निकाल दे हमेशा हमेशा के लिए l
उसने सोचा की बहू से बात करके पता लगाए की बहू के दिल में क्या है l तो उसने चुप्पी तोड़ी, क्या हुवा बहू नींद आ रही है क्या ?
महेन्द्र ने अपना सवाल पूरा भी नहीं किया था की तभी पावर कट हो गया और पुरे कमरे में अँधेरा छा गया l
अँधेरे ने महेन्द्र की हिम्मत बढ़ा दी, उसने हथेली की उंगलियां खोली और बहू की बुर की फांक से दो उंगलि टच हो गई l

माया सिहर उठी उसकी बुर का रस महेन्द्र की उँगलियों पे बह गया l
माया - बाबूजी मैं मोमबत्ती जलाती हूं l (माया ने सर उठा के ऐसे रियेक्ट किया जैसे उसे कुछ नहीं पता लेकिन उसकी बोली और उसका शरीर अलग अलग हरकत कर रही थी )
माया उठने के बहाने अपनी कमर नीचे की ओर दबाई, जैसे वो सख्त उँगलियों को अपने अंदर भींचना चाहती हो l
महेन्द्र को लगा की माया अगर चली गई तो उसे दुबारा ऐसा मौका नहीं मिलेगा, वो तो हर हाल में बहू की बूर को अच्छी तरह फील करना चाहता था l महेन्द्र ने इसी बहाने हथेली सीधी कर एकदम से बहू की नंगी बुर को छू लिया l
महेन्द्र - रहने दे बहू मोमबत्ती की क्या जरुरत l
माया - नहीं बाबूजी लाती हूँ, माया उठ गई थी महेन्द्र ने भी हाथ हटा लिया था l माया उठकर किचन में आयी उसकी बुर कामरस में पूरी तरह गीली हो गई थी l
इधर महेन्द्र की हालत ऐसी थी जैसे हाथ लगा खजाना गुम हो गया हो l वो अपनी हथेली को नाक के पास रगड़ कर बहू की जवान बुर की महक ले रहा था l
भाई सहमत हूँ आपसे, Bahu saree mein भी मज़ा देगी सब होगा धीरे धीरे
मैं आलोचकों का स्वागत करता हूँ, मैंने आपके और स्टोरी पे दिए गए कमैंट्स भी पढ़े l आपको सबसे कम्प्लेन hai, तो मेरे भाई ये fantasy वर्ल्ड है अगर आपको अच्छा नहीं लगता तो आप door ही रहिये इन सब चीज़ों सेManas jaise hi BHADWE PATI hote hai Jo PATNI ko Bhadka kar Dusri ke samne OPEN / FRANK karwate hai aur jab inhi Galtiyo ke karan PATNI Dusro se CHUDANE lagti hai to fir Patni ko ILJAM dete hai.
PATI-PATNI me sirf SEX ya SEX EXPERIMENT hi nahi hota, Ek-Dusre ke prati PYAR, SAMMAN, MAN-MARYADA ka khayal bhi hota hai.
मानस - हाँ हाँ दे दो माया l.... (मानस हँस हँस के पागल हुवे जा रहा था, माया को छेड़ने में वो कोई कसर नहीं छोड़ रहा था )
लेकिन माया के लिए तो वहां खड़ा होना भी दूभर हो गया था, वो भाग के किचन में आ गई l दिल की धड़कन किसी जनरेटर के सामान धक् धक् कर रही थी l
महेन्द्र - अरे क्या हुवा कोई मुझे भी बताएगा l
मानस - कुछ नहीं पापा माया ये curry कल बनायी थी मुझे बहुत पसंद है थोड़ा बचा था तो तड़का लगा दी l और माया आपको बासी curry नहीं देना चाहती l (मानस स्थिति संभालने की कोशिश किया, उधर माया ने भी चालाकी से एक दूसरे कटोरे में अलग curry रख ले आयी l )
(मानस के बगल में बैठी उसकी नज़रें शर्म से अभी भी नीची थी )
महेन्द्र - बस इतनी सी बात बेटा l
क्या बहू तुम भी ना, इतना सोचती हो मेरे लिए l (महेन्द्र वापस टीवी देखते हुई dinner करने laga, स्थिति सम्भल गई थी माया और मानस वापस एक दूसरे को देखते हुवे मुस्कुराये l)
मानस खाते हुवे बाएं हाथ से माया की जांघो पे हाथ फेरता है ऊपर तक तो उसे kahin भी पैंटी की छोर नहीं मिलती, माया बिलकुल नंगी थी अंदर l वो इस अहसास से रोमानचित्त हो जाता है l
मानस - तुम भी khao ना माया l
महेन्द्र - हाँ बहू खाओ l
टेबल के नीचे मानस की उँगलियाँ माया चूत के आस पास हरकत कर रही होती हैं l
वो मुट्ठी बटोरते हुवे माया की गाउन ऊपर खींचने लगता है, कुछ ही देर में माया के घुटने नंगे हो जाते हैं l
माया सुबह हुवे वाकिये को दोहराना नहीं चाहती थी तो वो कोई विरोध नहीं करती बल्कि बड़ी नार्मल होकर अपने ससुर से बातें करती रहती है l
माया - तो पापा मानस के बारे में और बताइये कुछ बचपन के किस्से कितना शैतान थे मानस..
महेन्द्र - बहुत बदमाश था ये,.. स्कूल में एक बार इसने maths teacher की चेयर पे chwingum चिपका दिया था l बाद में इसे बहुत मार भी पड़ी थी l अपनी कॉपी पे मेरा नकली सिग्नेचर कर देता था l
माया - ओह मानस इतने बदमाश थे तुम ?
मानस - वो maths टीचर बहुत खड़ूस थे बच्चों को मारते थे l तो क्या करता l
(मानस ने जवाब dete हुवे टेबल के नीचे गाउन पूरी उठा दी और माया की नंगी खुली बुर को हाथ लगाया )
माया चेहरे का एक्सप्रेशन छिपाते हुवे थूक घोंट पानी पीते हुवे मानस से बोली l
माया - अच्छा और वो बाबूजी का signature वो क्या था l (माया सहमती दिखाते हुवे अपनी नंगी हो चुकी टाँगे फ़ैला दी, जिससे मानस की दो ऊँगली माया की बुर में समां गईं l )
मानस - वो तो मैं पापा के daant से बहुत डरता था l (मानस बहुत ही चालाकी से खाना भी खा रहा था और दूसरे हाथ की दो ऊँगली माया के बुर में पेल रहा था l माया को अब मज़ा आने लगा था, चेयर पे बैठे बैठे वो मचल जा रही थी l)
माया - उम्म्म मानस... तुम्मम तो बड़े बद.... हह..... बदमाश थे l (माया का बुर गीला होने लगा था )
महेन्द्र - बहुत बदमाश था बहू l अब तो शादी के बाद काफी sudhar गया है l
(माया के लिए chair पे बैठना अब मुश्किल हो रहा था, वो बीच बीच में टेबल पे सर झुका कर ससुर जी से छुपाते हुवे गर्म आह भरती l उसे डर था की कहीं वो बाबूजी के सामने ही स्खलित ना हो जाए l तो उसके दिमाग में आईडिया आया वो सोची अब जैसे को taisaa..करना पड़ेगा )
माया - अच्छा बाबूजी आप कैसे थे अपने बचपन में शरारती या शांत l (माया महेन्द्र को question में उलझाए रखी और नीचे से हाथ सीधा मानस के लंड पे रख दी )
महेन्द्र सब से अनजान भोलेपन से उत्तर देता और माया मानस के pant का ज़िप खोल लंड हाथ में ले चुकी थी l

मानस माया में आये इस बदलाव को देख आनंदित था l माया बिलकुल सहज हो कर बात करते हुवे पति के लंड को stroke दे रही थी, अब मचलने की बारी मानस की थीl
दोनों के बीच जैसे कोई competition हो कभी माया मानस का लंड जोर से हिला देती तो कभी मानस कस के ऊँगली माया की गीली बुर में पेल देता l)
लेकिन मानस फिर भी माया पे भारी पड़ रहा था क्योंकि महेन्द्र माया से बातें कर रहा था और माया के लिए मस्ती भरा expression छिपाना बहुत मुश्किल था l आखिरकार वो कुछ सोच खड़ी हो गई...
माया - ओह मानस ये तुमने curry कैसे गिरा दी फर्श pe l मैं कुछ टॉवल ला के साफ़ करती हूँ l
मानस को कुछ समझ नहीं आया कौन सी curry यहाँ तो कुछ नहीं गिरा माया क्या बोल रही है l
महेन्द्र - अरे बहू डिनर कर लो पहले साफ़ बाद में कर देना l
माया - कोई बात नहीं बाबूजी मैं वैसे भी खा ली, आप खाइये ना l माया हाथ में एक छोटा टॉवल लिए वापस आ गई l
वो अब टेबल टेबल के नीचे बैठ गई l
महेन्द्र - मानस बेटा कल क्या काम हो jayega ?? मैं सोच रहा था काम जल्दी ख़तम कर घर चला जाऊं l
मानस - हाँ पापा कोशिश करता हूँ...
(मानस अपनी बात भी पूरी नहीं किया था की तभी उसे अपने लंड पे कुछ गर्म soft सा अनुभव हुवा l वो नीचे देखा तो शॉक हो गया l
माया के नर्म होंठ मानस के लंड पे फिसल रहे थे l ओह my गॉड क्या अहसास है, आज माया तो उफ़... ये मुझे blowjob दे रही है वो भी मेरे पापा के मौजूदगी में l)
माया टेबल के नीचे से ही मानस के आँखों में देखते हुवे ब्लोजॉब दे रही थी l
महेंद्र - अरे बहू बस भी कर, बाद में कर लेना साफ़ l
(माया टेबल के नीचे से ही लंड मुँह से बाहर निकाल बोली... बस बाबूजी हो गया... और दुबारा लंड चूसने लगी )
फिर उसने मानस का शर्ट पकड़ नीचे झुकाया और कान में धीरे से बोली.... मानस..... गिरा दो मेरे मुहँ में )
मानस को अपने कानों पे मानो यकीन ही ना हुवा l मस्ती में वो chair पे ढीला सा पड़ गया... सर पीछे कर वो कमर को धीरे धीरे झटका देने लगा l माया किसी पोर्न एक्ट्रेस की तरह लंड चूस रही थी मानस के सब्र का बाँध टूट गया वो झटके खाता माया के मुँह में स्खलित होता गया l नीचे नज़रें झुका के देखा तो माया उसे ही देख रही थी, माया का पूरा मुँह सफ़ेद वीर्य से भर गया था मुँह के किनारे से वीर्य बह रहा था फिर भी वो छप... छप.. चूसती रही l

माया का ये रूप मानस ने कभी नहीं देखा था वो आनंद विभोर था l माया ने ना सिर्फ उसका लंड चूसा था बल्कि उसका सारा वीर्य भी पी गई थी l
माया सेक्सी अंदाज़ से मुँह पोछी और टेबल से बाहर आ गई l
महेन्द्र - हो गया बहू l
माया - हाँ बाबूजी सब साफ़ हो गया.... क्यों मानस सब साफ़ हो गया ना... (आँख मारते हुवे )
मानस तो शॉक में कुछ भी बोल नहीं पा रहा था l
लेकिन माया के लिए तो वहां खड़ा होना भी दूभर हो गया था, वो भाग के किचन में आ गई l दिल की धड़कन किसी जनरेटर के सामान धक् धक् कर रही थी l
भाग 8
महेन्द्र - अरे क्या हुवा कोई मुझे भी बताएगा l
मानस - कुछ नहीं पापा माया ये curry कल बनायी थी मुझे बहुत पसंद है थोड़ा बचा था तो तड़का लगा दी l और माया आपको बासी curry नहीं देना चाहती l (मानस स्थिति संभालने की कोशिश किया, उधर माया ने भी चालाकी से एक दूसरे कटोरे में अलग curry रख ले आयी l )
(मानस के बगल में बैठी उसकी नज़रें शर्म से अभी भी नीची थी )
महेन्द्र - बस इतनी सी बात बेटा l
क्या बहू तुम भी ना, इतना सोचती हो मेरे लिए l (महेन्द्र वापस टीवी देखते हुई dinner करने laga, स्थिति सम्भल गई थी माया और मानस वापस एक दूसरे को देखते हुवे मुस्कुराये l)
मानस खाते हुवे बाएं हाथ से माया की जांघो पे हाथ फेरता है ऊपर तक तो उसे kahin भी पैंटी की छोर नहीं मिलती, माया बिलकुल नंगी थी अंदर l वो इस अहसास से रोमानचित्त हो जाता है l
मानस - तुम भी khao ना माया l
महेन्द्र - हाँ बहू खाओ l
टेबल के नीचे मानस की उँगलियाँ माया चूत के आस पास हरकत कर रही होती हैं l
वो मुट्ठी बटोरते हुवे माया की गाउन ऊपर खींचने लगता है, कुछ ही देर में माया के घुटने नंगे हो जाते हैं l
माया सुबह हुवे वाकिये को दोहराना नहीं चाहती थी तो वो कोई विरोध नहीं करती बल्कि बड़ी नार्मल होकर अपने ससुर से बातें करती रहती है l
माया - तो पापा मानस के बारे में और बताइये कुछ बचपन के किस्से कितना शैतान थे मानस..
महेन्द्र - बहुत बदमाश था ये,.. स्कूल में एक बार इसने maths teacher की चेयर पे chwingum चिपका दिया था l बाद में इसे बहुत मार भी पड़ी थी l अपनी कॉपी पे मेरा नकली सिग्नेचर कर देता था l
माया - ओह मानस इतने बदमाश थे तुम ?
मानस - वो maths टीचर बहुत खड़ूस थे बच्चों को मारते थे l तो क्या करता l
(मानस ने जवाब dete हुवे टेबल के नीचे गाउन पूरी उठा दी और माया की नंगी खुली बुर को हाथ लगाया )
माया चेहरे का एक्सप्रेशन छिपाते हुवे थूक घोंट पानी पीते हुवे मानस से बोली l
माया - अच्छा और वो बाबूजी का signature वो क्या था l (माया सहमती दिखाते हुवे अपनी नंगी हो चुकी टाँगे फ़ैला दी, जिससे मानस की दो ऊँगली माया की बुर में समां गईं l )
मानस - वो तो मैं पापा के daant से बहुत डरता था l (मानस बहुत ही चालाकी से खाना भी खा रहा था और दूसरे हाथ की दो ऊँगली माया के बुर में पेल रहा था l माया को अब मज़ा आने लगा था, चेयर पे बैठे बैठे वो मचल जा रही थी l)
माया - उम्म्म मानस... तुम्मम तो बड़े बद.... हह..... बदमाश थे l (माया का बुर गीला होने लगा था )
महेन्द्र - बहुत बदमाश था बहू l अब तो शादी के बाद काफी sudhar गया है l
(माया के लिए chair पे बैठना अब मुश्किल हो रहा था, वो बीच बीच में टेबल पे सर झुका कर ससुर जी से छुपाते हुवे गर्म आह भरती l उसे डर था की कहीं वो बाबूजी के सामने ही स्खलित ना हो जाए l तो उसके दिमाग में आईडिया आया वो सोची अब जैसे को taisaa..करना पड़ेगा )
माया - अच्छा बाबूजी आप कैसे थे अपने बचपन में शरारती या शांत l (माया महेन्द्र को question में उलझाए रखी और नीचे से हाथ सीधा मानस के लंड पे रख दी )
महेन्द्र सब से अनजान भोलेपन से उत्तर देता और माया मानस के pant का ज़िप खोल लंड हाथ में ले चुकी थी l

मानस माया में आये इस बदलाव को देख आनंदित था l माया बिलकुल सहज हो कर बात करते हुवे पति के लंड को stroke दे रही थी, अब मचलने की बारी मानस की थीl
दोनों के बीच जैसे कोई competition हो कभी माया मानस का लंड जोर से हिला देती तो कभी मानस कस के ऊँगली माया की गीली बुर में पेल देता l)
लेकिन मानस फिर भी माया पे भारी पड़ रहा था क्योंकि महेन्द्र माया से बातें कर रहा था और माया के लिए मस्ती भरा expression छिपाना बहुत मुश्किल था l आखिरकार वो कुछ सोच खड़ी हो गई...
माया - ओह मानस ये तुमने curry कैसे गिरा दी फर्श pe l मैं कुछ टॉवल ला के साफ़ करती हूँ l
मानस को कुछ समझ नहीं आया कौन सी curry यहाँ तो कुछ नहीं गिरा माया क्या बोल रही है l
महेन्द्र - अरे बहू डिनर कर लो पहले साफ़ बाद में कर देना l
माया - कोई बात नहीं बाबूजी मैं वैसे भी खा ली, आप खाइये ना l माया हाथ में एक छोटा टॉवल लिए वापस आ गई l
वो अब टेबल टेबल के नीचे बैठ गई l
महेन्द्र - मानस बेटा कल क्या काम हो jayega ?? मैं सोच रहा था काम जल्दी ख़तम कर घर चला जाऊं l
मानस - हाँ पापा कोशिश करता हूँ...
(मानस अपनी बात भी पूरी नहीं किया था की तभी उसे अपने लंड पे कुछ गर्म soft सा अनुभव हुवा l वो नीचे देखा तो शॉक हो गया l
माया के नर्म होंठ मानस के लंड पे फिसल रहे थे l ओह my गॉड क्या अहसास है, आज माया तो उफ़... ये मुझे blowjob दे रही है वो भी मेरे पापा के मौजूदगी में l)
माया टेबल के नीचे से ही मानस के आँखों में देखते हुवे ब्लोजॉब दे रही थी l
महेंद्र - अरे बहू बस भी कर, बाद में कर लेना साफ़ l
(माया टेबल के नीचे से ही लंड मुँह से बाहर निकाल बोली... बस बाबूजी हो गया... और दुबारा लंड चूसने लगी )
फिर उसने मानस का शर्ट पकड़ नीचे झुकाया और कान में धीरे से बोली.... मानस..... गिरा दो मेरे मुहँ में )
मानस को अपने कानों पे मानो यकीन ही ना हुवा l मस्ती में वो chair पे ढीला सा पड़ गया... सर पीछे कर वो कमर को धीरे धीरे झटका देने लगा l माया किसी पोर्न एक्ट्रेस की तरह लंड चूस रही थी मानस के सब्र का बाँध टूट गया वो झटके खाता माया के मुँह में स्खलित होता गया l नीचे नज़रें झुका के देखा तो माया उसे ही देख रही थी, माया का पूरा मुँह सफ़ेद वीर्य से भर गया था मुँह के किनारे से वीर्य बह रहा था फिर भी वो छप... छप.. चूसती रही l

माया का ये रूप मानस ने कभी नहीं देखा था वो आनंद विभोर था l माया ने ना सिर्फ उसका लंड चूसा था बल्कि उसका सारा वीर्य भी पी गई थी l
माया सेक्सी अंदाज़ से मुँह पोछी और टेबल से बाहर आ गई l
महेन्द्र - हो गया बहू l
माया - हाँ बाबूजी सब साफ़ हो गया.... क्यों मानस सब साफ़ हो गया ना... (आँख मारते हुवे )
मानस तो शॉक में कुछ भी बोल नहीं पा रहा था l
उस दिन के बाद माया से दोपहर में बात होती और रात में भी l लेकिन रात में उदय ज्यादा बात नहीं करता, अक्सर व्हाट्सप्प चैट पे ही बात होती l लेकिन माया के लगातार disturbance और messages से वो ठीक से मजे नहीं कर पाता l 4 दिन बीत गए थे, माया के डिस्टर्बेंस की वजह से वो मुट्ठ नहीं मार पाया था l आलम यह था की 4 दिन बाद उदय हर कोई लड़की को देख उत्तेजित हो जाता था l जब भी उसे मौका मिलता वो पुरे dhanke कपड़े में भी लड़की की गोलाई और शरीर का उभार बड़े गौर से देखता और आनंदित होता था l
एक दिन माया सुबह 5 बजे बेड पे लेटी करवटें बदल रही थी, तभी फ़ोन के व्हाट्सप्प पे मैसेज आया, माया फ़ोन हाथ में लेकर देखी तो पापा का मैसेज था l
गुड मॉर्निंग बेटी...
माया मुस्कुराते हुवे लेटे लेटे जवाब di...
माया - गुड morning papa..
आज इतनी सुबह सुबह...
उदय - हाँ बेटी.. आज मैंने काम से छुट्टी ली है, अब तुमसे क्या छिपाऊं कल रात कुछ पुराने दोस्तों के साथ बियर पी ली थी.. थोड़ी देर पहले तक सर बहुत भारी लग रहा था तो उठ गया, एक दवा ली और वापस बेड पे आया तो सोचा तुझे मैसेज करूँ देखूं तो मेरी बेटी क्या कर रही है l
माया - अच्छा तो आप drink करते हो वहाँ.... मैं माँ को सब बताउंगी l
उदय - नहीं बेटी प्लीज अपनी माँ को मत बताना l
माया - क्यों ?
उदय - वो खामोंखां मेरे दोस्तों को भला बुरा कहेगी.. प्लीज बेटी
माया - ओके ओके... नहीं बताउंगी, मैं मजाक कर रही थी l
उदय - तूने तो dara ही दिया मुझे l
माया - कितने दोस्त थे ? और पार्टी कहाँ थी ?
उदय - 2 दोस्त थे बेटी... और पार्टी जैसा नहीं था बस मेरे गेस्ट हाउस पे he डिनर था... रुक मैं तुझे photos भेजता हूँ l
(उदय ने रात की कमरे में ली gayin कुछ तसवीरें व्हाट्सप्प पे भेजी )
माया उन tasveeron को गौर से देख रही थी,
माया - wow पापा खूब मस्ती की आपने तो.. और सभी freind में सबसे हैंडसम आप लग रहे हो l
उदय - ( अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया ) थैंक यू बेटी
माया - लेकिन आपका कमरा कितना बिखरा पड़ा है l
उदय - अरे बेटी अकेला हूँ कमरा तो बिखरा ही रहेगा l
माया - मैं भी तो अकेली हूँ, लेकिन मैंने तो अच्छे से रखा है कमरा l ये देखो l
(माया ने तुरंत लेटे लेटे बैडरूम की एक फोटो निकाली और भेज दी )
उदय - अच्छा जी तुमसे नहीं जीत सकता मैं... l
माया - हम्म
उदय - वैसे तुम्हारी नींद ख़राब कर दी मैंने l क्या कर रही हो ?
माया - लेटी हूँ बेड पे ब्लैंकेट के अंदर... आप क्या कर रहे हो ?
उदय - मैं भी लेटा हूँ l
माया - उन्हह... कॉल करूँ ? मेरा हाथ दुःख रहा है सुबह सुबह ढेर सारा मैसेज type नहीं कर सकती l
उदय - हँसते हुवे... okay
(माया call करती है दोनों बातें करने लगते हैं )
.
.
.
(थोड़ी देर बाद.... )
माया - नहीं पापा... वो एक्टर तो मुझे बिलकुल पसंद नहीं है....
उदय - तो फिर कौन ?
माया - कार्तिक.. क्यूट है ना...
उदय - हम्म्म
माया - अच्छा है आपको दोस्तों के साथ टाइम बिताने को मिलता है l मैं तो दोस्तों के साथ नहीं जाती l
उदय - हाँ
माया - अच्छा आपको कौन सी एक्ट्रेस पसंद है ?
उदय - ileana D'cruz
माया - ओके बहुत क्यूट है वो, मुझे भी पसंद है l
उदय मन में (क्यूट भी और सेक्सी भी )
माया - लेकिन इन दिनों बहुत मोटी हो गई है l
(उदय कुछ बोल ना पाया कैसे समझाता माया को की उसको motapa नहीं कहते... उसकी बदन गदरायी है जो मर्दों को बहुत लुभाती है )
माया - हेलो
उदय - हाँ वो network इशू था शायद l
ओके बेटी सुबह हो गई, बात करते हुवे 1 घंटे हो गए पता ही नहीं चला मैं बाद में कॉल करूँगा l
माया - ok
(सारा दिन दोनों चैट करते रहे कभी माया अपने kitchen में पके खाने का फोटोज भेजती तो कभी उदय उसे अपने कमरे ठीक करने के बाद की फोटो दिखता ).
रात को जब माया बिस्तर पे थी तो करीब 10 बजे एक मैसेज आया, माया जानती थी पापा का होगा, पढ़ा तो कार्तिक के फोटो के साथ बगल में गुड नाईट लिखा था l

Good Night beti
वो मुस्कुरा दी... बेड पे लेटे वो भी फ़ोन में ileana d' cruz की pics सर्च की और पिक्स के साथ उसने भी गुड नाईट पापा लिख के भेज दिया l.

www imagepost com
Good night papa
उदय भी हँस पड़ा लेकिन Ileana की pics उसके सर पे अलग जादू कर रही थी l वो लेटे हुवे गूगल पे ileana की हॉट pics सर्च किया, सर्च रिजल्ट ने उसकी गर्मी बढ़ा दी वो बेड पे pant खोला और अंडरवियर में एक हाथ डाल दिया ileana के कुछ हॉट पिक्स देखता लंड पे वो दबाव बढ़ा रहा था l

वो Ileana के pic में खोया अंडरवियर नीचे कर एक हाथ से लंड मसलने लगा l इसी बीच माया के कई मैसेज आये जिसे वो देख ना पाया l
माया - गुड night Message के लिए thanks
माया - आपको भी गुड नाईट
माया - क्या हुवा पापा.. क्या कर रहे हो ?
माया - सो गए क्या ?
उदय ने जब मैसेज देखा तो अंडरवियर ऊपर करते हुवे रिप्लाई किया
उदय - सॉरी बेटी कुछ काम कर रहा था
माया - काम इस वक़्त
उदय - हाँ वो थोड़ा internet पे कंपनी से judi कुछ आर्टिकल पढ़ रहा था l
माया - ओके आप बिजी हो.. मैं सोच रही थी बात करूँ l
उदय का मूड अबतक चला गया था, आज भी वो मुट्ठ निकाल नहीं पाया था l उसने सोचा बात ही करते हैं l
उदय - नहीं बिजी नहीं हूँ l
और उदय ने माया को कॉल किया,,, दोनों बेड पे लेटे बातें करने लगे l करीब एक घंटे बात करने के बाद
माया - पापा.... मानस की कॉल आ रही है, मैं बाद में बात करती हूँ l
उदय - ओके बेटी l
माया मानस के साथ कॉल पे बिजी हो गई, इधर उदय बेड से उठ कर वाशरूम गया और दुबारा बेड पे आया l
फिर से मोबाइल हाथ में लेकर वो ileana की गन्दी pics देखने लगा l उसने ileana की एक हॉट pic चुनी और मोबाइल बेड पे रख वो अंडरवियर नीचे कर बैठ गया l


pic में ileana का शरीर देख वो मुट्ठ मारने लगा, उसने मन बना लिया था की आज वो ileana के नाम का वीर्य निकलेगा l वो तेज़ी से लंड रगड़ता raha, उसकी सांस भारी होने लगी... आआह आआह ileana... घुटने पे बैठा उदय ने सोचा मुट्ठ वो ileana ke pic के ऊपर ही छोड़ेगा l आआह्ह्ह sssss...आअह्ह ileana उसका मुट्ठ लंड के मुहाने पे था की तभी माया का वापस कॉल आ गया l तबतक देर हो गई thi उदय झड़ने laga...मोबाइल से ileana की pic हट गई thi और उसकी जगह caller ID पे माया की क्लोज़अप pic आ गई l उदय कराहता रहा और उसकी सारी मुट्ठ माया के तस्वीर के ऊपर निकल गई l

उदय को बहुत ग्लानि महसूस हुई, कॉल कट गया था l उसने मोबाइल हाथ में लिया तो माया की दुबारा कॉल आने लगी, इस बार उदय ने ध्यान दिया तो पाया उसकी गाढ़ी मुठ माया के ठीक होठो पे थी l अंगूठे से जब वो मुट्ठ पोछता तो ऐसा लगता जैसे वो अपना वीर्य माया के होंठ पे रगड़ रहा हो l एक बार फिर कॉल miss हो गई l उदय का ध्यान टूटा वो मोबाइल को बिस्तर पे साफ़ किया और बगल में रख के सो गया l
भाग 17
एक दिन माया सुबह 5 बजे बेड पे लेटी करवटें बदल रही थी, तभी फ़ोन के व्हाट्सप्प पे मैसेज आया, माया फ़ोन हाथ में लेकर देखी तो पापा का मैसेज था l
गुड मॉर्निंग बेटी...
माया मुस्कुराते हुवे लेटे लेटे जवाब di...
माया - गुड morning papa..
आज इतनी सुबह सुबह...
उदय - हाँ बेटी.. आज मैंने काम से छुट्टी ली है, अब तुमसे क्या छिपाऊं कल रात कुछ पुराने दोस्तों के साथ बियर पी ली थी.. थोड़ी देर पहले तक सर बहुत भारी लग रहा था तो उठ गया, एक दवा ली और वापस बेड पे आया तो सोचा तुझे मैसेज करूँ देखूं तो मेरी बेटी क्या कर रही है l
माया - अच्छा तो आप drink करते हो वहाँ.... मैं माँ को सब बताउंगी l
उदय - नहीं बेटी प्लीज अपनी माँ को मत बताना l
माया - क्यों ?
उदय - वो खामोंखां मेरे दोस्तों को भला बुरा कहेगी.. प्लीज बेटी
माया - ओके ओके... नहीं बताउंगी, मैं मजाक कर रही थी l
उदय - तूने तो dara ही दिया मुझे l
माया - कितने दोस्त थे ? और पार्टी कहाँ थी ?
उदय - 2 दोस्त थे बेटी... और पार्टी जैसा नहीं था बस मेरे गेस्ट हाउस पे he डिनर था... रुक मैं तुझे photos भेजता हूँ l
(उदय ने रात की कमरे में ली gayin कुछ तसवीरें व्हाट्सप्प पे भेजी )
माया उन tasveeron को गौर से देख रही थी,
माया - wow पापा खूब मस्ती की आपने तो.. और सभी freind में सबसे हैंडसम आप लग रहे हो l
उदय - ( अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया ) थैंक यू बेटी
माया - लेकिन आपका कमरा कितना बिखरा पड़ा है l
उदय - अरे बेटी अकेला हूँ कमरा तो बिखरा ही रहेगा l
माया - मैं भी तो अकेली हूँ, लेकिन मैंने तो अच्छे से रखा है कमरा l ये देखो l
(माया ने तुरंत लेटे लेटे बैडरूम की एक फोटो निकाली और भेज दी )
उदय - अच्छा जी तुमसे नहीं जीत सकता मैं... l
माया - हम्म
उदय - वैसे तुम्हारी नींद ख़राब कर दी मैंने l क्या कर रही हो ?
माया - लेटी हूँ बेड पे ब्लैंकेट के अंदर... आप क्या कर रहे हो ?
उदय - मैं भी लेटा हूँ l
माया - उन्हह... कॉल करूँ ? मेरा हाथ दुःख रहा है सुबह सुबह ढेर सारा मैसेज type नहीं कर सकती l
उदय - हँसते हुवे... okay
(माया call करती है दोनों बातें करने लगते हैं )
.
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(थोड़ी देर बाद.... )
माया - नहीं पापा... वो एक्टर तो मुझे बिलकुल पसंद नहीं है....
उदय - तो फिर कौन ?
माया - कार्तिक.. क्यूट है ना...
उदय - हम्म्म
माया - अच्छा है आपको दोस्तों के साथ टाइम बिताने को मिलता है l मैं तो दोस्तों के साथ नहीं जाती l
उदय - हाँ
माया - अच्छा आपको कौन सी एक्ट्रेस पसंद है ?
उदय - ileana D'cruz
माया - ओके बहुत क्यूट है वो, मुझे भी पसंद है l
उदय मन में (क्यूट भी और सेक्सी भी )
माया - लेकिन इन दिनों बहुत मोटी हो गई है l
(उदय कुछ बोल ना पाया कैसे समझाता माया को की उसको motapa नहीं कहते... उसकी बदन गदरायी है जो मर्दों को बहुत लुभाती है )
माया - हेलो
उदय - हाँ वो network इशू था शायद l
ओके बेटी सुबह हो गई, बात करते हुवे 1 घंटे हो गए पता ही नहीं चला मैं बाद में कॉल करूँगा l
माया - ok
(सारा दिन दोनों चैट करते रहे कभी माया अपने kitchen में पके खाने का फोटोज भेजती तो कभी उदय उसे अपने कमरे ठीक करने के बाद की फोटो दिखता ).
रात को जब माया बिस्तर पे थी तो करीब 10 बजे एक मैसेज आया, माया जानती थी पापा का होगा, पढ़ा तो कार्तिक के फोटो के साथ बगल में गुड नाईट लिखा था l

Good Night beti
वो मुस्कुरा दी... बेड पे लेटे वो भी फ़ोन में ileana d' cruz की pics सर्च की और पिक्स के साथ उसने भी गुड नाईट पापा लिख के भेज दिया l.

www imagepost com
Good night papa
उदय भी हँस पड़ा लेकिन Ileana की pics उसके सर पे अलग जादू कर रही थी l वो लेटे हुवे गूगल पे ileana की हॉट pics सर्च किया, सर्च रिजल्ट ने उसकी गर्मी बढ़ा दी वो बेड पे pant खोला और अंडरवियर में एक हाथ डाल दिया ileana के कुछ हॉट पिक्स देखता लंड पे वो दबाव बढ़ा रहा था l

वो Ileana के pic में खोया अंडरवियर नीचे कर एक हाथ से लंड मसलने लगा l इसी बीच माया के कई मैसेज आये जिसे वो देख ना पाया l
माया - गुड night Message के लिए thanks
माया - आपको भी गुड नाईट
माया - क्या हुवा पापा.. क्या कर रहे हो ?
माया - सो गए क्या ?
उदय ने जब मैसेज देखा तो अंडरवियर ऊपर करते हुवे रिप्लाई किया
उदय - सॉरी बेटी कुछ काम कर रहा था
माया - काम इस वक़्त
उदय - हाँ वो थोड़ा internet पे कंपनी से judi कुछ आर्टिकल पढ़ रहा था l
माया - ओके आप बिजी हो.. मैं सोच रही थी बात करूँ l
उदय का मूड अबतक चला गया था, आज भी वो मुट्ठ निकाल नहीं पाया था l उसने सोचा बात ही करते हैं l
उदय - नहीं बिजी नहीं हूँ l
और उदय ने माया को कॉल किया,,, दोनों बेड पे लेटे बातें करने लगे l करीब एक घंटे बात करने के बाद
माया - पापा.... मानस की कॉल आ रही है, मैं बाद में बात करती हूँ l
उदय - ओके बेटी l
माया मानस के साथ कॉल पे बिजी हो गई, इधर उदय बेड से उठ कर वाशरूम गया और दुबारा बेड पे आया l
फिर से मोबाइल हाथ में लेकर वो ileana की गन्दी pics देखने लगा l उसने ileana की एक हॉट pic चुनी और मोबाइल बेड पे रख वो अंडरवियर नीचे कर बैठ गया l


pic में ileana का शरीर देख वो मुट्ठ मारने लगा, उसने मन बना लिया था की आज वो ileana के नाम का वीर्य निकलेगा l वो तेज़ी से लंड रगड़ता raha, उसकी सांस भारी होने लगी... आआह आआह ileana... घुटने पे बैठा उदय ने सोचा मुट्ठ वो ileana ke pic के ऊपर ही छोड़ेगा l आआह्ह्ह sssss...आअह्ह ileana उसका मुट्ठ लंड के मुहाने पे था की तभी माया का वापस कॉल आ गया l तबतक देर हो गई thi उदय झड़ने laga...मोबाइल से ileana की pic हट गई thi और उसकी जगह caller ID पे माया की क्लोज़अप pic आ गई l उदय कराहता रहा और उसकी सारी मुट्ठ माया के तस्वीर के ऊपर निकल गई l

उदय को बहुत ग्लानि महसूस हुई, कॉल कट गया था l उसने मोबाइल हाथ में लिया तो माया की दुबारा कॉल आने लगी, इस बार उदय ने ध्यान दिया तो पाया उसकी गाढ़ी मुठ माया के ठीक होठो पे थी l अंगूठे से जब वो मुट्ठ पोछता तो ऐसा लगता जैसे वो अपना वीर्य माया के होंठ पे रगड़ रहा हो l एक बार फिर कॉल miss हो गई l उदय का ध्यान टूटा वो मोबाइल को बिस्तर पे साफ़ किया और बगल में रख के सो गया l
Thank you भाई
अरि साला लंड खड़ा हो गया
काश ऐसा होता
नहीं
Kya biwi ke karnaame story xossip me tum likhe the bhai..
Friends.. कुछ काम में बिजी हूँ.. 2 दिन में अपडेट दूंगा
मैंने अपना sarcastic comment hata diya hai...
Sorry doston... Morningstar और kaamdev sorry ?
Sorry doston... Morningstar और kaamdev sorry ?
मानस के लंड का maza तो माया कई बार ली है अब और लंड लेने दो उसे lबड़े भाई आप गलत समझ रहे है ।
नज़र लगाने से मतलब ये था कि
लेखक महोदय को अभी स्टोरी
जहां चल रही है
लिखने दो
..
मानस ने तो खूब मज़े ले लिए
जब तक बाहर से लौटकर
नहीं आता ..
तब तक पापा को मज़े लेने दो...
???
माया - ईरफ़ोन निकल गया क्या पापा... आवाज़ नहीं मिल रही आपकी l
उदय ने rahat ki सांस ली.... वो तो डर हे गया था l
उदय - (earphone ठीक करते हुवे.. ) ok अब ठीक है ?
(माया मुस्कुरा रही थी .. .. उसे अपनी शरारत पे खुद हंसी आ रही थी )
माया - हम्म अच्छा मैं फ़ोन काटती हूँ l पसीने से गन्दी हो गई हूँ साफ़ होना है, आप भी अपनी गन्दगी साफ़ कर लीजिये.. (माया एक बार फिर मुस्कुरा दी )
उदय - (घबराते हुवे bye बेटी )
माया - bye
माया देर शाम तक पापा के बारे में सोचती रही, उसे यकीन नहीं हो रहा था की पापा ने फ़ोन पे varsha को देख मुट्ठ मारी l वो तो पापा को अच्छा मानती थी, उसने कभी नहीं सोचा था की पापा ऐसा करेंगे l
लेकिन माया पापा से बहुत प्यार करती थी, उसे लगा अगर मम्मी उनके साथ होती तो वो ऐसा कभी नहीं करते l
एक तरफ वो पापा की साइड लेती उनकी मज़बूरी समझती तो दूसरी तरफ
उसे varsha पे बहुत गुस्सा आ रहा था, वो मन हे बोल पड़ी l जो अपने पति की ना हुई वो किसी की नहीं हो सकती l साली कुतिया ना जाने कपड़े उतार के मर्दों को क्यों रिझाती है l
अबतक varsha माया की बहुत अच्छी फ्रेंड थी लेकिन दोपहर के वाकिये ने उसका मन बदल दिया था, वो hate करने लगी उससे l
तभी varsha का फ़ोन aaya.. माया गुस्से को दबाते हुवे बोली l
माया - hey varsha..
varsha - हेलो माया
माया - क्या हुवा varsha फ़ोन कैसे की l
Varsha - यार मुझे कुछ ड्रेस return kar दूसरा लेना है l चलेगी कल सुबह ?
माया - अब क्या huwa... varsha (माया दांत पीसते बोली )
Varsha - चलो ना प्लीज..., तुझे पता है वो मेरा online फ्रेंड
माया - haan
varsha - वो आया है, होटल ड्रीम में रुका है l सोच रही थी तेरे साथ शॉपिंग करके मैं उससे मिलने चली jaungi l और हाँ घर पे मेरा देवर पूछे तो बोलना मैं तुम्हारे साथ हूँ और next डे आउंगी l
(Maya gusse से तिलमिला उठी )
माया - तू उसके साथ पूरा एक दिन rukne वाली है ?
Varsha - ofcourse यार इतनी दूर से आया है वो l तो कल 10 बजे ओके ?
मैं बाद में बात करुँगी l
Varsha ने फ़ोन काट diya, माया gusse से तिलमिलाहट में बोल पड़ी साली रंडी online फ्रेंड से रात भर chudegi... धोखेबाज़ पति को धोखा दे रही है l और मेरे पापा पे भी डोरे daalegi... no way.. मैं ऐसा नहीं होने दूँगी l
माया रात के डिनर के बाद बेड पे आयी...अभी भी वो varsha और पापा की ही बात सोच रही थी l
माया बेड पे लेटी अपने पापा को मैसेज की
माया - क्या कर रहे हो पापा ?
उदय भी मोबाइल लिए बेड पे लेटा था, माया का मैसेज आते ही उसने आँखे बंद कर एक सेल्फी ली और लिखा सो रहा हूँ l
माया हँस पड़ी
माया - very funny पापा...
उदय - उममम
माया भी जवाब में लेटे हुवे अपनी एक सेल्फी भेज दी l
उदय - बहुत प्यारी लग रही हो l
माया - थैंक यू पापा
उदय - ये जो टॉप पहनी हो वो आज नयी खरीदी ? या कोई पुरानी है l
माया - (हँसते हुवे... ) टॉप नहीं है वो पापा... वो ब्लैंकेट है lol
उदय - ओह क्लोज़अप पिक्स में समझ नहीं आया, तो टॉप क्या पहनी हो ?
(उदय ने यही पूछ लिया था )
माया - (थोड़ा झिझकते हुवे.. ) spaghetti टॉप hai पापा..
उदय - sphegetti... ? ये क्या होता है l
माया को समझ नहीं आ रहा था कैसे बताए, अपनी pic भी नहीं भेज सकती थी, क्योंकी स्पघेटी के अंदर bra नहीं था l
तो माया ने गूगल से एक pic nikaal के bhej दी l ऐसी होती है spaghetti

उदय pic को बड़े ध्यान से देख रहा था, और मन में बोला... Wow कितनी हॉट dress होती है काश varsha की एक फोटो मिल जाती spaghetti mein.... वैसे ये लड़की भी कम नहीं है l उदय का लंड हल्का हल्का फड़फड़ा रहा था l
उदय - अच्छा इसे बोलते हैं spaghetti.. समझा
माया - हम्म्म
उदय - वैसे बेटी तुम्हे एक बात बतानी थीl
माया चौंक सी गई,,, (क्या बताना चाहते हैं पापा.. कोई राज़... )
उदय - मैसेज पे नहीं... कॉल करूँ ?
माया - हाँ l
उदय ने माया को कॉल किया...
माया - हेलो papa...जी बोलिये
उदय - कैसे कहूं... sorry मैंने तुम्हे पहले नहीं बताया l
माया घबरा गई... पापा क्या बात है बताइये प्लीज..
उदय - बेटी मैंने तुमसे पूछा था ना varsha के बारे में.. पता है क्यों ?
माया - क्यों पापा...
उदय - दरअसल करीब 1 हफ्ते पहले मुझे फेसबुक पे एक लेडी की फ्रेंड रिक्वेस्ट आयी... मैंने देखा तो वो तुम्हारी फ्रेंड लिस्ट में थी l मगर तुमने कभी जिक्र नहीं किया इस फ्रेंड का तो मैंने वो रिक्वेस्ट वैसे ही छोड़ दिया l
वो लेडी varsha थी
(माया के लिए ये बहुत shocking था.. )
माया - ओह fir..
उदय - फिर जब तुमने उसके बारे में बताया तो मैं आज दोपहर में उसका फ्रेंड रिक्वेस्ट accept किया l वो ऑनलाइन थी और मुझे उसने तुरंत मैसेज किया फिर सारा दिन उसी से बात कर रहा l इसलिए तुझे कॉल नहीं कर पाया l
(माया गुस्से में आग बबूला थी )
माया ने गुस्से में ही पापा से पूछा....
माया - तो अब क्यों बता रहे हो पापा...जाओ उसी से बात करो l
उदय - नहीं बेटी, मुझे गलत ना समझ.. मैंने तो सिर्फ इसलिए accept किया क्योंकि तुमने उसे बेस्ट फ्रेंड बताया था l
माया - अब नहीं है वो मेरी बेस्ट फ्रेंड पापा.. i hate her
उदय - क्यों क्या हो गया... सुबह तो तुम बहुत तारीफ कर रही थी और अब.. क्या हुवा...
(माया कैसे बताती.... )
माया - बस नहीं है पापा.... reason नहीं बता सकती l
(इस बीच माया ने फेसबुक खोला तो देखा varsha के फ्रेंड लिस्ट में पापा hain)
उदय - सच कहूं बेटी तो मुझे भी वो लेडी कुछ अजीब लगी l
(माया ये बात सुनकर थोड़ा सा नार्मल हुई )
माया - क्या हुवा पापा..
उदय - बस अजीब लगी l क्या बताऊँ l
माया - अच्छा पापा... क्या varsha ने आपको अपनी फोटो भी भेजी हैं ?
उदय - हाँ बेटी भेजी थी... लेकिन तुम kaise...जानती ho...
(माया ka gussa सातवें आस्मां पे था.. उसे varsha pe itna गुस्सा आ रहा था की अगर वो सामने होती तो वो उसे कस के थप्पड़ लगा देती l)
माया - एक बात पूछूं... सच सच बताना आपको मेरी कसम है l क्या आप कल varsha se mil rahe ho ?
(माया को लगा varsha jis online friend की बात कर रही थी कहीं वो पापा तो नहीं )
उदय - ये क्या कह रही हो बेटी l nahi बिलकुल nahi l
माया - पापा... सच बोलो पापा.. आपको मेरी कसम है l varsha kal kisi से मिलने जा रही hai... वो आप हो na... bolo... चुप क्यों ho...
(माया बेड पे बैठी गुस्से से आग बबूला थी )
उदय - बेटी... मैं इतना खुदगर्ज नहीं जो अपनी ख़ुशी के लिए तुम्हे जरा सा भी ठेस पहुचाऊं l (उदय की आवाज़ में अलग भाव the) अगर तुम्हे पसंद नहीं बेटी तो मैं उससे मिलना तो दूर उसका कभी नाम भी नहीं लूँगा l
फ़ोन की line कट हो गई थी, माया स्तब्ध सी बैठी सोच में पड़ जाती है तभी
उसके मोबाइल पे फेसबुक का notification आया, वो open की तो देखी उसके पापा ने varsha को unfriend कर दिया था l
(माया के आंसू निकल आये, उसने सोचा varsha की वजह से कितनी ग़लतफ़हमी हो गई मैंने ये तक नहीं सोचा की भला ek दिन में varsha कैसे पापा के पास पहुंच जाएगी, और पापा से कितनी berukhi से बात की )
माया ने तुरंत पापा को मैसेज की..
माया - पापा im sorry
उदय - sorry क्यों बेटी
माया - मैंने आपसे अच्छे से बात नहीं की, उस कुतिया varsha के कारण मैं गुस्से में thi... आप मुझे माफ़ कर दो l
उदय - ओह मेरी बेटी गाली भी deti hai?
माया - गन्दी गाली भी देती हूँ मैं... और उस varsha को तो बहुत गंदी गाली दूँगी, जिसकी वजह से मैंने आपको भला बुरा कहा l
उदय - बाप रे l कौन सी गंदी गाली दोगी...
माया - बहुत गंदी वाली
उदय - de के बताओ.. मैं भी तो देखूं l
माया - मैं दे दूँगी सच बोल रही हूँ l
उदय - तो फिर दो..
माया - varsha साली कुतिया.. रन... आगे आप समझ जाओ
उदय - हाहा बाप रे बहुत बदमाश हो तुम l
माया... उम्म्म्म (माया बेड पे लेट गई )
माया - पापा...
उदय - क्या बेटी...
माया - गुस्सा नहीं हो ना... ?
उदय - नहीं बेटी
माया - मुझे hug चाहिए l
उदय - hug कैसे दूँ l तुम तो यहाँ हो nahi.
माया - मुझे नहीं मालूम... कैसे भी दो...
उदय - ओके वेट करो l
माया सोचने लगी पापा क्या करेंगे l
तब एक फोटो मैसेज आया, माया ओपन की तो उसकी हंसी निकल गई l
photo में उदय एक तकिये को जोर से बाँहों में कसा था l
नीचे लिखा tha a sweet hug for world best daughter उसके बाद एक और pic मिला जो गूगल से डाउनलोड था जिसमे एक foreighner आदमी एक लड़की को बाँहों में लिए गाल pe किस कर रहा था नीचे लिखा था miss you my lovely daughter.
माया खुश हो गई थी, फिर उसने लिखा क्या पापा आप ना ही foreigner हो ना ही इतने मोटे... आपको तो pic bhi सेलेक्ट करने नहीं आता l
उदय - अच्छा तो खोजने दो कोई pic...
माया बेसब्री से wait करने लगी... उसके बाद जो pic उदय ने भेजा वो देख माया और नाराज़ ho गई l
pic mein एक aadmi ladki के gaal पे kiss कर रहा था मगर लड़की किसी कामवाली जैसी दिख रही थी... बदसूरत l
माया गुस्से में चिल्लाई... पापा...... इतनी ख़राब दिखती हूँ क्या मैं ?
आप मत खोजो प्लीज l
उदय - सॉरी सॉरी बेटी एक लास्ट चांस l
इस बार उदय ने जो pic भेजा, उसे देख कर माया शरमा गई l
Pic में एक आदमी एक बहुत ही खूबसूरत लड़की का chin उठा उसकी गर्दन को चूम रहा था l chin पकड़ने से उसके हाथ का elbow लड़की के बूब्स को टच कर रहा था l लड़की के होंठ भी खुले थे ऐसा लग रहा था जैसे लड़की गर्दन पे kiss ko sexually enjoy कर रही हो l बेशक ये kiss किसी बाप बेटी के नहीं लगते थे l लेकिन उदय ने शायद ये pic लड़की की ख़ूबसूरती देख सेलेक्ट कर लिया था l

उदय - ये कैसा है बेटी l
माया - बहुत अच्छा है l
उदय - तुम भी bhejo ना कुछ l
माया सोच में पड़ गई l फिर वो बेड pe उठ कर बैठी, front कैमरा on किया और कैमरा पे kiss देते हुवे का एक्शन कर एक फोटो भेज दी l फोटो भेजते ही blue टिक लग गया, बाद में उसने जब खुद अपनी pic गौर se dekhi to शरमा गई l फोटो में चेहरे का तो closeup था मगर उसकी क्लीवेज भी नज़र आ रही थी l

लेकिन उदय ने pic dekh li थी माया अब कुछ नहीं कर सकती थी l
थोड़ी देर ख़ामोशी के बाद उदय बोला...
उदय - बेटी you look so beautiful
वीडियो कॉल करूँ...
माया को कुछ समझ नहीं आया क्या करे, उसने बहाना बना दिया की network बहुत खराब है वीडियो कॉल नहीं हो पायेगा l
उदय - ओह अच्छा तो फिर और फोटो भेजो ना तुम्हे देखने का बहुत मन हो रहा है l
माया ने लेटे लेटे गर्दन घुमा के 2-3 pics लीं और सारी भेज दी l
उदय सारी फोटो को चुपचाप एक एक करके देखता रहा l सभी pics में माया के क्लीवेज दिख रही थी उसका ध्यान बार बार माया के क्लीवेज पे चला जाता था l
थोड़ी देर चुप्पी के बाद....
माया - क्या कर रहे हो पापा...
उदय - तुम्हे देख रहा हूँ बेटी.... तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो... और तुमपे sleevless काफी अच्छा लगता है l I miss you so much beti
माया - उम्म्म पापा... i miss you too... please मेरी बात का बुरा मत मानना, varsha की vajah से main अपना आपा खो दी थी l
उदय - ओह तू अभी तक उसी बात को सोच रही hai... भूल जा बेटी मेरी बाँहों में आ l
माया - उम्म्म आ गई पापा l
उदय - उमम... ऐसे नहीं.. अपने ब्लैंकेट से निकल और मेरे ब्लैंकेट में आ जा l
माया - हीही... लो आ गई... उमम पापा आपका ब्लैंकेट तो बहुत soft है l
उदय - हाँ मगर तुम तो blanket से भी ज्यादा सॉफ्ट ho... उम्मम्मम आह (उदय न जाने कब अपना एक हाथ लंड पे रख लिया tha, वो बात करते हुवे अपने लंड को मुट्ठी में भींच रहा था l )
उदय - आह बेटी और फोटो भेजो ना.. ( उदय की आवाज़ में सरसराहट थी )
माया समझ नहीं पा रही थी की पापा बार बार फोटो क्यों मांग रहे hain.. या फिर उस वक़्त वो समझना नहीं चाहती थी l उसे तो पापा पे अपना लाड़लापन दिखाना था, अपनी गलती के लिए सॉरी बोलना था l
उसने इस बार मोबाइल दूर किया और pic li, भेजने से पहले वो pic dekhi तो khud ही शरमा गई l
उदय ने rahat ki सांस ली.... वो तो डर हे गया था l
उदय - (earphone ठीक करते हुवे.. ) ok अब ठीक है ?
(माया मुस्कुरा रही थी .. .. उसे अपनी शरारत पे खुद हंसी आ रही थी )
माया - हम्म अच्छा मैं फ़ोन काटती हूँ l पसीने से गन्दी हो गई हूँ साफ़ होना है, आप भी अपनी गन्दगी साफ़ कर लीजिये.. (माया एक बार फिर मुस्कुरा दी )
उदय - (घबराते हुवे bye बेटी )
माया - bye
भाग 20
माया देर शाम तक पापा के बारे में सोचती रही, उसे यकीन नहीं हो रहा था की पापा ने फ़ोन पे varsha को देख मुट्ठ मारी l वो तो पापा को अच्छा मानती थी, उसने कभी नहीं सोचा था की पापा ऐसा करेंगे l
लेकिन माया पापा से बहुत प्यार करती थी, उसे लगा अगर मम्मी उनके साथ होती तो वो ऐसा कभी नहीं करते l
एक तरफ वो पापा की साइड लेती उनकी मज़बूरी समझती तो दूसरी तरफ
उसे varsha पे बहुत गुस्सा आ रहा था, वो मन हे बोल पड़ी l जो अपने पति की ना हुई वो किसी की नहीं हो सकती l साली कुतिया ना जाने कपड़े उतार के मर्दों को क्यों रिझाती है l
अबतक varsha माया की बहुत अच्छी फ्रेंड थी लेकिन दोपहर के वाकिये ने उसका मन बदल दिया था, वो hate करने लगी उससे l
तभी varsha का फ़ोन aaya.. माया गुस्से को दबाते हुवे बोली l
माया - hey varsha..
varsha - हेलो माया
माया - क्या हुवा varsha फ़ोन कैसे की l
Varsha - यार मुझे कुछ ड्रेस return kar दूसरा लेना है l चलेगी कल सुबह ?
माया - अब क्या huwa... varsha (माया दांत पीसते बोली )
Varsha - चलो ना प्लीज..., तुझे पता है वो मेरा online फ्रेंड
माया - haan
varsha - वो आया है, होटल ड्रीम में रुका है l सोच रही थी तेरे साथ शॉपिंग करके मैं उससे मिलने चली jaungi l और हाँ घर पे मेरा देवर पूछे तो बोलना मैं तुम्हारे साथ हूँ और next डे आउंगी l
(Maya gusse से तिलमिला उठी )
माया - तू उसके साथ पूरा एक दिन rukne वाली है ?
Varsha - ofcourse यार इतनी दूर से आया है वो l तो कल 10 बजे ओके ?
मैं बाद में बात करुँगी l
Varsha ने फ़ोन काट diya, माया gusse से तिलमिलाहट में बोल पड़ी साली रंडी online फ्रेंड से रात भर chudegi... धोखेबाज़ पति को धोखा दे रही है l और मेरे पापा पे भी डोरे daalegi... no way.. मैं ऐसा नहीं होने दूँगी l
माया रात के डिनर के बाद बेड पे आयी...अभी भी वो varsha और पापा की ही बात सोच रही थी l
माया बेड पे लेटी अपने पापा को मैसेज की
माया - क्या कर रहे हो पापा ?
उदय भी मोबाइल लिए बेड पे लेटा था, माया का मैसेज आते ही उसने आँखे बंद कर एक सेल्फी ली और लिखा सो रहा हूँ l
माया हँस पड़ी
माया - very funny पापा...
उदय - उममम
माया भी जवाब में लेटे हुवे अपनी एक सेल्फी भेज दी l
उदय - बहुत प्यारी लग रही हो l
माया - थैंक यू पापा
उदय - ये जो टॉप पहनी हो वो आज नयी खरीदी ? या कोई पुरानी है l
माया - (हँसते हुवे... ) टॉप नहीं है वो पापा... वो ब्लैंकेट है lol
उदय - ओह क्लोज़अप पिक्स में समझ नहीं आया, तो टॉप क्या पहनी हो ?
(उदय ने यही पूछ लिया था )
माया - (थोड़ा झिझकते हुवे.. ) spaghetti टॉप hai पापा..
उदय - sphegetti... ? ये क्या होता है l
माया को समझ नहीं आ रहा था कैसे बताए, अपनी pic भी नहीं भेज सकती थी, क्योंकी स्पघेटी के अंदर bra नहीं था l
तो माया ने गूगल से एक pic nikaal के bhej दी l ऐसी होती है spaghetti

उदय pic को बड़े ध्यान से देख रहा था, और मन में बोला... Wow कितनी हॉट dress होती है काश varsha की एक फोटो मिल जाती spaghetti mein.... वैसे ये लड़की भी कम नहीं है l उदय का लंड हल्का हल्का फड़फड़ा रहा था l
उदय - अच्छा इसे बोलते हैं spaghetti.. समझा
माया - हम्म्म
उदय - वैसे बेटी तुम्हे एक बात बतानी थीl
माया चौंक सी गई,,, (क्या बताना चाहते हैं पापा.. कोई राज़... )
उदय - मैसेज पे नहीं... कॉल करूँ ?
माया - हाँ l
उदय ने माया को कॉल किया...
माया - हेलो papa...जी बोलिये
उदय - कैसे कहूं... sorry मैंने तुम्हे पहले नहीं बताया l
माया घबरा गई... पापा क्या बात है बताइये प्लीज..
उदय - बेटी मैंने तुमसे पूछा था ना varsha के बारे में.. पता है क्यों ?
माया - क्यों पापा...
उदय - दरअसल करीब 1 हफ्ते पहले मुझे फेसबुक पे एक लेडी की फ्रेंड रिक्वेस्ट आयी... मैंने देखा तो वो तुम्हारी फ्रेंड लिस्ट में थी l मगर तुमने कभी जिक्र नहीं किया इस फ्रेंड का तो मैंने वो रिक्वेस्ट वैसे ही छोड़ दिया l
वो लेडी varsha थी
(माया के लिए ये बहुत shocking था.. )
माया - ओह fir..
उदय - फिर जब तुमने उसके बारे में बताया तो मैं आज दोपहर में उसका फ्रेंड रिक्वेस्ट accept किया l वो ऑनलाइन थी और मुझे उसने तुरंत मैसेज किया फिर सारा दिन उसी से बात कर रहा l इसलिए तुझे कॉल नहीं कर पाया l
(माया गुस्से में आग बबूला थी )
माया ने गुस्से में ही पापा से पूछा....
माया - तो अब क्यों बता रहे हो पापा...जाओ उसी से बात करो l
उदय - नहीं बेटी, मुझे गलत ना समझ.. मैंने तो सिर्फ इसलिए accept किया क्योंकि तुमने उसे बेस्ट फ्रेंड बताया था l
माया - अब नहीं है वो मेरी बेस्ट फ्रेंड पापा.. i hate her
उदय - क्यों क्या हो गया... सुबह तो तुम बहुत तारीफ कर रही थी और अब.. क्या हुवा...
(माया कैसे बताती.... )
माया - बस नहीं है पापा.... reason नहीं बता सकती l
(इस बीच माया ने फेसबुक खोला तो देखा varsha के फ्रेंड लिस्ट में पापा hain)
उदय - सच कहूं बेटी तो मुझे भी वो लेडी कुछ अजीब लगी l
(माया ये बात सुनकर थोड़ा सा नार्मल हुई )
माया - क्या हुवा पापा..
उदय - बस अजीब लगी l क्या बताऊँ l
माया - अच्छा पापा... क्या varsha ने आपको अपनी फोटो भी भेजी हैं ?
उदय - हाँ बेटी भेजी थी... लेकिन तुम kaise...जानती ho...
(माया ka gussa सातवें आस्मां पे था.. उसे varsha pe itna गुस्सा आ रहा था की अगर वो सामने होती तो वो उसे कस के थप्पड़ लगा देती l)
माया - एक बात पूछूं... सच सच बताना आपको मेरी कसम है l क्या आप कल varsha se mil rahe ho ?
(माया को लगा varsha jis online friend की बात कर रही थी कहीं वो पापा तो नहीं )
उदय - ये क्या कह रही हो बेटी l nahi बिलकुल nahi l
माया - पापा... सच बोलो पापा.. आपको मेरी कसम है l varsha kal kisi से मिलने जा रही hai... वो आप हो na... bolo... चुप क्यों ho...
(माया बेड पे बैठी गुस्से से आग बबूला थी )
उदय - बेटी... मैं इतना खुदगर्ज नहीं जो अपनी ख़ुशी के लिए तुम्हे जरा सा भी ठेस पहुचाऊं l (उदय की आवाज़ में अलग भाव the) अगर तुम्हे पसंद नहीं बेटी तो मैं उससे मिलना तो दूर उसका कभी नाम भी नहीं लूँगा l
फ़ोन की line कट हो गई थी, माया स्तब्ध सी बैठी सोच में पड़ जाती है तभी
उसके मोबाइल पे फेसबुक का notification आया, वो open की तो देखी उसके पापा ने varsha को unfriend कर दिया था l
(माया के आंसू निकल आये, उसने सोचा varsha की वजह से कितनी ग़लतफ़हमी हो गई मैंने ये तक नहीं सोचा की भला ek दिन में varsha कैसे पापा के पास पहुंच जाएगी, और पापा से कितनी berukhi से बात की )
माया ने तुरंत पापा को मैसेज की..
माया - पापा im sorry
उदय - sorry क्यों बेटी
माया - मैंने आपसे अच्छे से बात नहीं की, उस कुतिया varsha के कारण मैं गुस्से में thi... आप मुझे माफ़ कर दो l
उदय - ओह मेरी बेटी गाली भी deti hai?
माया - गन्दी गाली भी देती हूँ मैं... और उस varsha को तो बहुत गंदी गाली दूँगी, जिसकी वजह से मैंने आपको भला बुरा कहा l
उदय - बाप रे l कौन सी गंदी गाली दोगी...
माया - बहुत गंदी वाली
उदय - de के बताओ.. मैं भी तो देखूं l
माया - मैं दे दूँगी सच बोल रही हूँ l
उदय - तो फिर दो..
माया - varsha साली कुतिया.. रन... आगे आप समझ जाओ
उदय - हाहा बाप रे बहुत बदमाश हो तुम l
माया... उम्म्म्म (माया बेड पे लेट गई )
माया - पापा...
उदय - क्या बेटी...
माया - गुस्सा नहीं हो ना... ?
उदय - नहीं बेटी
माया - मुझे hug चाहिए l
उदय - hug कैसे दूँ l तुम तो यहाँ हो nahi.
माया - मुझे नहीं मालूम... कैसे भी दो...
उदय - ओके वेट करो l
माया सोचने लगी पापा क्या करेंगे l
तब एक फोटो मैसेज आया, माया ओपन की तो उसकी हंसी निकल गई l
photo में उदय एक तकिये को जोर से बाँहों में कसा था l
नीचे लिखा tha a sweet hug for world best daughter उसके बाद एक और pic मिला जो गूगल से डाउनलोड था जिसमे एक foreighner आदमी एक लड़की को बाँहों में लिए गाल pe किस कर रहा था नीचे लिखा था miss you my lovely daughter.
माया खुश हो गई थी, फिर उसने लिखा क्या पापा आप ना ही foreigner हो ना ही इतने मोटे... आपको तो pic bhi सेलेक्ट करने नहीं आता l
उदय - अच्छा तो खोजने दो कोई pic...
माया बेसब्री से wait करने लगी... उसके बाद जो pic उदय ने भेजा वो देख माया और नाराज़ ho गई l
pic mein एक aadmi ladki के gaal पे kiss कर रहा था मगर लड़की किसी कामवाली जैसी दिख रही थी... बदसूरत l
माया गुस्से में चिल्लाई... पापा...... इतनी ख़राब दिखती हूँ क्या मैं ?
आप मत खोजो प्लीज l
उदय - सॉरी सॉरी बेटी एक लास्ट चांस l
इस बार उदय ने जो pic भेजा, उसे देख कर माया शरमा गई l
Pic में एक आदमी एक बहुत ही खूबसूरत लड़की का chin उठा उसकी गर्दन को चूम रहा था l chin पकड़ने से उसके हाथ का elbow लड़की के बूब्स को टच कर रहा था l लड़की के होंठ भी खुले थे ऐसा लग रहा था जैसे लड़की गर्दन पे kiss ko sexually enjoy कर रही हो l बेशक ये kiss किसी बाप बेटी के नहीं लगते थे l लेकिन उदय ने शायद ये pic लड़की की ख़ूबसूरती देख सेलेक्ट कर लिया था l

उदय - ये कैसा है बेटी l
माया - बहुत अच्छा है l
उदय - तुम भी bhejo ना कुछ l
माया सोच में पड़ गई l फिर वो बेड pe उठ कर बैठी, front कैमरा on किया और कैमरा पे kiss देते हुवे का एक्शन कर एक फोटो भेज दी l फोटो भेजते ही blue टिक लग गया, बाद में उसने जब खुद अपनी pic गौर se dekhi to शरमा गई l फोटो में चेहरे का तो closeup था मगर उसकी क्लीवेज भी नज़र आ रही थी l

लेकिन उदय ने pic dekh li थी माया अब कुछ नहीं कर सकती थी l
थोड़ी देर ख़ामोशी के बाद उदय बोला...
उदय - बेटी you look so beautiful
वीडियो कॉल करूँ...
माया को कुछ समझ नहीं आया क्या करे, उसने बहाना बना दिया की network बहुत खराब है वीडियो कॉल नहीं हो पायेगा l
उदय - ओह अच्छा तो फिर और फोटो भेजो ना तुम्हे देखने का बहुत मन हो रहा है l
माया ने लेटे लेटे गर्दन घुमा के 2-3 pics लीं और सारी भेज दी l
उदय सारी फोटो को चुपचाप एक एक करके देखता रहा l सभी pics में माया के क्लीवेज दिख रही थी उसका ध्यान बार बार माया के क्लीवेज पे चला जाता था l
थोड़ी देर चुप्पी के बाद....
माया - क्या कर रहे हो पापा...
उदय - तुम्हे देख रहा हूँ बेटी.... तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो... और तुमपे sleevless काफी अच्छा लगता है l I miss you so much beti
माया - उम्म्म पापा... i miss you too... please मेरी बात का बुरा मत मानना, varsha की vajah से main अपना आपा खो दी थी l
उदय - ओह तू अभी तक उसी बात को सोच रही hai... भूल जा बेटी मेरी बाँहों में आ l
माया - उम्म्म आ गई पापा l
उदय - उमम... ऐसे नहीं.. अपने ब्लैंकेट से निकल और मेरे ब्लैंकेट में आ जा l
माया - हीही... लो आ गई... उमम पापा आपका ब्लैंकेट तो बहुत soft है l
उदय - हाँ मगर तुम तो blanket से भी ज्यादा सॉफ्ट ho... उम्मम्मम आह (उदय न जाने कब अपना एक हाथ लंड पे रख लिया tha, वो बात करते हुवे अपने लंड को मुट्ठी में भींच रहा था l )
उदय - आह बेटी और फोटो भेजो ना.. ( उदय की आवाज़ में सरसराहट थी )
माया समझ नहीं पा रही थी की पापा बार बार फोटो क्यों मांग रहे hain.. या फिर उस वक़्त वो समझना नहीं चाहती थी l उसे तो पापा पे अपना लाड़लापन दिखाना था, अपनी गलती के लिए सॉरी बोलना था l
उसने इस बार मोबाइल दूर किया और pic li, भेजने से पहले वो pic dekhi तो khud ही शरमा गई l
Sorry readers.. एक trip की वजह से बिजी हो गया था l
Bhai samajh gaya main... Doodh wale ka episode khatm nahi huwa.. Usko Launga.... Main writer ke saath reader bhi hoon... Main apni kahaani mein etne character nahi daalunga ki reader yaad na rakh sake kiska kya naam aur relation hai... Meri kahaani mein kam log honge aur beech beech mein unka jikra karoonga jisase reader character bhoole nahi... Aur kaka ko bhi choot milegi befikra rahein ..Bhai sorry ki bat nahi he yaar tum chate to story ko or hot kar ke likh sakte the hame to maza aa rahe he padhne me par ladki jawan he ghar me akeli he lund ke liye tadap rahi he dudh wale ke sath pehle hi masti kar chuki he dudh wala be uske badan ko dekh kar garam ho gaya tha to aise me to ek lekh banta tha na
kahani ki baat Karun to Sabki alag rai hoti hai kisi ko lamba seduction chahiye kissi ko boring lagta hai aur chudaai chahiye jald se jald. Agar kaka pe jyada dhyaan diya to bahut saare mere reader Kahte hain ki incest ki category se hatao... Lekin main suggestion lekar kahaani ko apne flavor mein monde ki koshish karta hun..
DeletedBhai kya dudh wala kaka mar gaya he ya ab maya ke ghar dudh nahi aata he
थैंक यू बड़े भाई... मेरी समझ से सेक्स का मज़ा सिर्फ सेक्स करना नहीं उसे फील करना भी है l कभी कभी लड़की को चोदने से jyada उसको चोदने की लालसा ज्यादा आनंददायक होती हैl किसी संस्कारी बहु की ब्लाउज के ऊपर से चूची दबाना रंडी को चोदने से ज्यादा मस्ती भरा है lभाई कितना गर्म लिखते हो....
बिना सेक्स करवाये ही...
गर्मागर्म वीर्य निकलवा देते हो..
.जो भी पड़े मुठ मारने लगे.....
.....Outstanding Update.....
Thank you brother...Kyaa bhaii ye bhi koi baat hai
Subah subah mutthi marni pad gayii
Bhai kamaal ho yaaar sach mein
Rockinggg
Aisi hi dirty and slow talk karwaye raho
Thnks bro paani nikalte raho
Umeed se kahi Jyada Behtar Update
Aapki Story to Hum Ladko ka "Pani" hi nikalwa deti hai.![]()
भाइयों स्टोरी के बीच gif image कैसे डालते हैं प्लीज बताओ l
भाई क्या मतलब है आपका story अच्छी नहीं लग रही है ?Manas jaise hi BHADWE PATI hote hai Jo PATNI ko Bhadka kar Dusri ke samne OPEN / FRANK karwate hai aur jab inhi Galtiyo ke karan PATNI Dusro se CHUDANE lagti hai to fir Patni ko ILJAM dete hai.
PATI-PATNI me sirf SEX ya SEX EXPERIMENT hi nahi hota, Ek-Dusre ke prati PYAR, SAMMAN, MAN-MARYADA ka khayal bhi hota hai.
माया वापस आ के पति की ये हरकत देखती है तो उसे मारने को दौड़ती है, लेकिन मानस उसका हाथ पकड़ अपनी ओर खींच लेता है l
ऊपर से टॉपलेस माया की चूची को वो कस के रगड़ देता है l तभी घर की door bell बजती है ओर दोनों alag होते हैं l
माया - सुबह के 9 बज रहे हैं, कौन आया होगा जाओ देखो l
मानस - मैं नहीं जा सकता तुम ही देखो शायद दूध वाला हो (मानस बेड पे ही करवट बदलता hai, तभी एक बार और bell बजती है )
माया - मेरी ब्रा तो तुमने ख़राब कर दी क्या मैं बिना ब्रा के ब्लाउज पहनू l
(माया झुंझलाते हुवे जल्दी से ब्लाउज पहनती है)
माया - ohoo तुमने ये हुक भी tod दी
मानस - यार पल्लू डाल लो ना, दूध वाले ने अगर थोड़ी सी तुम्हारी चूची देख भी लीं तो कौन सी आफत आ जाएगी l उल्टा बेचारे का दिन बन जायेगा मेरी सेक्सी माया को देख कर l
माया - तुम कभी भी नहीं सुधरोगे l
(माया हलकी सी स्माइल देती hai, उसे पुराने दिन याद आते हैं जब वो मानस के रिक्वेस्ट पे किसी अजनबी को अपने जिस्म की नुमाईश कराती और फिर दोनों रात में वाकिया को याद कर जम के सेक्स का मज़ा लेते थे )
तीसरी बार bell बजी तो माया साड़ी संभालते तेज़ कदमो से door की तरफ भागती hai l
Door खोली तो सामने दूध वाले काका खड़े मिले l
काका - बिटिया बड़ी देर लगा दी I
माया - काका वो मैं नहा रही थी l ( माया बिना सोचे एक झट से बोल di, उधर मानस कमरे में लेटा माया की नहाने वाली बात सुन लंड पे हाथ फेरा l)
काका - ओके बिटिया, बर्तन ले आओ l
(काका की नज़र सीधे माया की गोल उभरी छातियों पे गई, फिर कुछ सोच वो नज़र हटा लिए )
माया बर्तन ले के वापस आयी, काका धीरे धीरे दूध नाप रहे थे l
काका - बिटिया.. साहब आ गए क्या ?
माया - हाँ काका आज ही सुबह आये l
काका - अच्छा बिटिया इसलिए आज बहुत खुश लग रही हो l सुबह सुबह नहा भी ली l
मानस बेड से उठ कर कपड़े पहनते हुवे दोनों की बातें सुन रहा था l ख़ास कर काका के मुंह से अपनी बीवी की नहाने वाली बात सुनकर उसके लंड में थोड़ी हलचल मच रही थी l
वो कमरे से बाहर आया, काका...
काका - अरे साहब आप नमस्ते
मानस - नमस्ते l कैसे हो रामलाल l
काका - बस दुवा है मालिक l
मानस माया के बगल में आ खड़ा हुवा और अपना एक हाथ माया की कमर पे टिका दिया l
मानस - बीवी बच्चे सब ठीक तो हैं ना
काका - जी साहेब
काका - अच्छा हुवा साहेब आप आ गए, माया बिटिया बड़ी उदास दिखती थी आपके बिना l
मानस - हाँ आपकी बिटिया ने तो सुबह सुबह ही थका दिया मुझे....
.
.
.
बहुत सारी बातें कर कर के l
माया मानस की डबल meaning बात समझ रही थी वो कमर पे पड़े मानस के हाथ पे कस के नाखून चुभा दी l
मानस - काका आइये ना अंदर, मैं सोच रहा था पिछले month का भी पैसा बाकी है तो अभी दे दूँ सब जोड़ के.. क्यों माया ? (कमर पे हल्का सा दबाव डालते हुवे )
माया मानस का चेहरा पढ़ रही थी आखिर उसके दिमाग में क्या चल रहा है l
माया - हाँ आईये ना काका l
काका - ओके बिटिया l
तीनो लिविंग हॉल में सोफे पे बैठ जाते हैं l कुछ बातें करने के बाद माया किचन में आ जाती है l
मानस टेबल पे पड़ी एक डायरी और पेन उठता हैl
मानस - ये लो काका इसपे पिछले month से अब तक का दूध का किराया लिख दो l
काका - जी साहब अभी लिख देता हूँ l
मानस उठ कर किचन में आता है, माया की साड़ी में उभरी गांड देख वो अपना लंड सहलाता है और माया को बाँहों में भींच पीछे से ही लंड गांड की दरार में चिपका देता है l
माया सख्त लंड के अहसास से चौंक जाती है, तभी मानस उसकी पीठ पे kiss करते हुवे अपना हाथ आगे किये साड़ी की गाँठ नीचे push कर देता है l
माया की गहरी नाभि नंगी हो जाती है l आगे की तरफ आ के वो फर्श पे घुटने के सहारे बैठ जाता है और अपना मुँह सीधा माया की नाभि में घुसा देता है l
माया की साँसे तेज़ हो जाती है, वो सोचने लगती है की आज ये मानस को क्या हो गया है l
मानस किस करने के साथ साथ धीरे धीरे उसकी साड़ी उठा लेता है l नंगी जांघो से लेकर panty तक हाँथ फेरता है l मस्ती में डूबी माया की panty घुटनो से नीचे आ जाती है, मानस अब नीचे की तरफ जाते हुवे panty को पूरा निकाल हवा में फेंक देता है l
माया को पता था.... आगे वो होने वाला था जो उसे सबसे ज्यादा पसंद है वो मानस का बाल पकड़ती है और पैर खोल देती है l मानस अपने होंठ को माया की गरम चूत पे रगड़ रहा होता है l माया की तेज सिसकारी निकल जाती है, वो काका का ख्याल कर अपना मुँह बंद करती है l
लेकिन मानस उसका हाथ मुहं से हटा देता है और चूत के अंदर तक जीभ डाल देता है l
माया मानस का इरादा भांप लेती है और पीछे हटती हुई साड़ी नीचे कर देती है l फिर वो मानस का कान पकड़ के उठाती है l
किसी टीचर की तरह उसे डांटते हुवे पूछती है
माया - क्या कर रहे थे तुम ?
मानस -कुछ तो नहीं l
माया - सब समझती हूँ मैं, मेरे मुहँ से हाथ क्यों हटाए ?
मानस - common माया जबसे काका ने तुम्हारे नहाने की बात की है मेरा लंड तन गया है l तुम भी तो enjoy करती थी याद है new year का दिन हम गोवा गए थे और होटल में तुम बाथरूम से बिना ब्रा के बाहर आ गई थी जबकि रूम सर्विस वाला ladka वहीँ था l तुम्हे नंगा देख उसकी तो जैसे जान निकल गई थी, बाद में हम जहाँ जाते वो वहीँ आता और तुमने भी तो उसे कई बार अपने बूब के दर्शन कराये थे l
माया - मैंने तुम्हारे कहने पे दिखाया था l
मानस - जो भी हो लेकिन उस रात 4 बार हम सेक्स किये थे याद है l उस सर्विस बॉय ki बातें कर सेक्स का कितना मज़ा आया था l
माया - हाँ याद है मैं नशे में थी, और वो एक अजनबी था लेकिन काका (माया कहते कहते रुक गई )
मानस - प्लीज माया प्लीज
माया - ओह तुम कभी नहीं सुधरोगे, अच्छा क्या करूँ बोलो l
मानस - (खुश होते huwe) इन कबूतरों को ब्लाउज से आज़ाद कर दो और काका को enke दर्शन करा दो l
माया - छी मानस तुम पागल हो गए ho?
मानस - हँसते huwe.... अरे बाबा मज़ाक कर रहा था, कमसे कम अपनी नाभि तो दिखा सकती हो l
माया - हम्म्म ठीक है l
मानस आगे बढ़ माया को चूम लेता है, तुम कितनी अच्छी हो l
माया साड़ी को अपनी चिकनी गहरी नाभि के नीचे करती है, पल्लू से हल्का सा ढंकते हुवे वो living हॉल में आती है l
काका - अरे बिटिया... (डायरी बढ़ाते हुवे) लो एक बार देख लो सब ठीक है ना
माया डायरी पकड़ती है और बड़ी चालाकी से बाहँ को पेट से रगड़ते हुवे साड़ी का पल्लू नाभि से दूर कर देती है l

काका सोफे पे बैठे हुवे जब माया की गोरी कमर देखते हैं तो उनकी आँख बड़ी हो जाती है l वो टकटकी लगा के कमर को निहारते हैं, जबकि माया अनजान सी डायरी देखती खड़ी रहती हैl इसका फ़ायदा उठा के काका आँखों से ही नाभि की गहराई नापते होते हैं l धोती में उनका लंड बेतहाशा झटके मारने लगता है l
थोड़ी देर बाद मानस आता है,
मानस - अरे माया... काका को पसीना हो रहा है fan चला दो l
काका आपकी तबियत तो ठीक hai?
काका - haan साहेब
माया और मानस एक दूसरे को देख हल्का सा मुस्कुराते हैं l
माया - काका यहाँ कुछ गड़बड़ है l
काका -कहाँ बिटिया ?
माया काका के बिलकुल करीब खड़ी हो जाती है उसकी खुली नाभि काका के फेस के करीब था l
माया - यहाँ देखिये काका... इधर 250 होना चाहिए 200 नहीं l
काका इतने करीब से गोरी नाभि देख पसीने पसीने हो जातें हैं l
काका - हाँ हाँ... आ हाँ... बेटी.. बिटिया... टोटल 15.. 2500 हो गया
साहब....
काका की जुबान लड़खड़ाने लगती है l
मानस - ये लो काका 2500
मानस - काका आपकी तबियत तो ठीक hai?
काका - जी जी साहब वो मुझे याद आया... मुझे एक और जगह जाना है l
मैं फिर कभी आता हूँ l
काका जल्दी से धोती संभालते अपने लंड के आगे हाथ किये door की तरफ भागते हैं l
मानस और माया दोनों ही अपनी हंसी दबा रहे होते हैं l
माया - ओके काका
काका बिना सुने तेजी से सीढ़ियां उतरते दूर चले जाते हैं l
माया door बंद करती है दोनों सोफे पे आकर बैठते हैं और जोर जोर से हँसते हैं l
मानस - यार काका का तो काम ही हो जाता आज l
माया - हाहा ओह माय गॉड उनसे तो बोला ही नहीं ja रहा था l
मानस - माया को बाँहों में लेते हुवे, तुम हो ही इतनी हॉट l बेचारे खड़े लंड के साथ भाग गए l तुम तो किसी को भी अपना दीवाना बना दो l
माया अपनी तारीफ सुन रोमांचित होती है l
मानस - अब तुम्हारा इनाम l
माया को सोफे पे लिटा के वो उसकी साड़ी उठा देता है panty तो पहले ही निकल चुकी थी l
मानस अपना मुहँ माया की चूत पे लगा देता है l चूत से मादक गन्ध आ रही थी l
माया भी टाँगे पूरी खोले अपनी चूत चटवाने को बेकरार थी l

मानस मुँह खोले चूत की फैंको से होता हुवा अंदर तक चाटने लगा
माया - आह आआअह्हह्ह्ह्ह माआनाआस
मानस - मानस नहीं काका बोलो l
माया - aaah मानस ससससस l
मानस - बोलो ना बिटिया l
माया - काका आआआ........ आआह्ह मेरी चूत चाटो काका l
मानस किसी पागल कुत्ते की तरह चूत को चाटता रहता है l माया की चूत अब ढेर सारा पानी छोड़ने लगती है l
माया - ओह काका
मानस -(मुँह उठा कर माया की तरफ देख ) माया बिटिया काका से chudwaogi ना
माया - माया आँख बंद किये हुवे जवाब देती hai..... हाँ काका chudwaungi
मानस तड़प उठता है वो अपना pant और अंडरवियर खोले माया के फेस के करीब आता है l उसके लंड से तेज बदबू आ रही थी, फिर भी माया हाथ में लंड थामती है l लंड पहले से ज्यादा गरम और मोटा लगता है l
माया - ये क्या मानस तुम तो बहुत horny हो l
माया आगे बढ़ उसके लंड को चूम लेती है l मानस वैसे ही खड़ा रहता है उसका लंड बार बार माया के गाल पे झटके मार रहा होता है l
माया देखती है तो मानस आनंद से आँखे बंद किये हुवे है, वो आगे बढ़ पूरा लंड मुँह में भर लेती है l
मानस - aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh maaaaaayaaaaaa
दो तीन बार लंड को मुहँ के लार से भिगो कर माया लंड छोड़ देती है l
मानस माया को सोफे से नीचे उतरता है और उसपे सवार हो के लंड सीधा चूत के अंदर पेल देता है l मोटा सख्त लंड माया की चूत में अंदर तक घुस जाता है l
मानस - आह माया बिटिया तुम्हारी बुर कितनी गरम है और गीली है l
माया - छी मानस कितना गन्दा बोलते हो तुम l
मानस - काका तो बुर ही बोलते होंगे इसे ना जाने कहाँ वो तुम्हारे नाम की मुट्ठ मार रहे होंगे l
माया ये सुनकर अपने दोनों जांघो को जकड लेती है l माया का orgasm आ गया था l वो अपनी चूत से पानी का रिसना महसूस कर सकती थी l
मानस भी माया ki उत्तेजना समझते हुवे उसे कस के चोदने लगता है l
Aaah आह aaah आआह ससस आआह
माया की moan तेज हो जाती है l चोदते चोदते मानस एक झटके से लंड बाहर निकलता है और लम्बी सांस लेते हुवे मुट्ठ की पिचकारी छोड़ता है l मुट्ठ की पहली धार तो माया के सर के ऊपर से निकल जाती है, दूसरी माया के चेहरे पे पड़ती है तीसरी बूब पे और बाकी की 3-4 धार माया के पेट पे लंड से
सीधा नीचे की तरफ गिरती है l
माया खुद ही हाँथ आगे बढ़ाते हुवे मानस के juicy लंड से वीर्य की आखिरी बूँद निचोड़ती है l मानस माया के ऊपर लेट कर उसे kiss करता है l
दोनों के शरीर ऊपर से नीचे तक मुट्ठ में चिपचिपे से हो जाते हैं, बावजूद इसके माया बिना कुछ कहे kiss करती होती है l और अपने गाल से मुट्ठ पोछती है l ताज्जुब की बात थी की माया जो थोड़ी देर पहले मुट्ठ को छूना भी नहीं चाहती थी वो अब उसी फिसलन का मज़ा ले रही थी l
माया - ओह मानस सुबह से भी ज्यादा अच्छे से चोदे तुम i love u so much
मानस - i love you too
मानस - माया काका का रोलप्ले कैसा लगा l?
माया - (शरमाती हुई ) हाँ बहुत अच्छा l
मानस - किसका लंड ज्यादा अच्छा था मेरा या काका का ?
माया - तुम्हारा
मानस - सच बोलो ना l
माया - अच्छा बाबा काका का l
मानस - oh.माया मानस का लंड फिर से उठने लगा था
माया - (लंड पकड़ती हुई ) अब काका मुझे जाने दो रात में फिर आ जाना l
मानस मुस्कुराता है l
तभी फ़ोन की घंटी बजती है l
फ़ोन पे मानस का बॉस था, किसी जरुरी काम के लिए उसे ऑफिस जाना था l
मानस - सॉरी माया जाना होगा l
मानस माया को kiss कर bathroom की तरफ चला जाता है l
ऊपर से टॉपलेस माया की चूची को वो कस के रगड़ देता है l तभी घर की door bell बजती है ओर दोनों alag होते हैं l
भाग 4
माया - सुबह के 9 बज रहे हैं, कौन आया होगा जाओ देखो l
मानस - मैं नहीं जा सकता तुम ही देखो शायद दूध वाला हो (मानस बेड पे ही करवट बदलता hai, तभी एक बार और bell बजती है )
माया - मेरी ब्रा तो तुमने ख़राब कर दी क्या मैं बिना ब्रा के ब्लाउज पहनू l
(माया झुंझलाते हुवे जल्दी से ब्लाउज पहनती है)
माया - ohoo तुमने ये हुक भी tod दी
मानस - यार पल्लू डाल लो ना, दूध वाले ने अगर थोड़ी सी तुम्हारी चूची देख भी लीं तो कौन सी आफत आ जाएगी l उल्टा बेचारे का दिन बन जायेगा मेरी सेक्सी माया को देख कर l
माया - तुम कभी भी नहीं सुधरोगे l
(माया हलकी सी स्माइल देती hai, उसे पुराने दिन याद आते हैं जब वो मानस के रिक्वेस्ट पे किसी अजनबी को अपने जिस्म की नुमाईश कराती और फिर दोनों रात में वाकिया को याद कर जम के सेक्स का मज़ा लेते थे )
तीसरी बार bell बजी तो माया साड़ी संभालते तेज़ कदमो से door की तरफ भागती hai l
Door खोली तो सामने दूध वाले काका खड़े मिले l
काका - बिटिया बड़ी देर लगा दी I
माया - काका वो मैं नहा रही थी l ( माया बिना सोचे एक झट से बोल di, उधर मानस कमरे में लेटा माया की नहाने वाली बात सुन लंड पे हाथ फेरा l)
काका - ओके बिटिया, बर्तन ले आओ l
(काका की नज़र सीधे माया की गोल उभरी छातियों पे गई, फिर कुछ सोच वो नज़र हटा लिए )
माया बर्तन ले के वापस आयी, काका धीरे धीरे दूध नाप रहे थे l
काका - बिटिया.. साहब आ गए क्या ?
माया - हाँ काका आज ही सुबह आये l
काका - अच्छा बिटिया इसलिए आज बहुत खुश लग रही हो l सुबह सुबह नहा भी ली l
मानस बेड से उठ कर कपड़े पहनते हुवे दोनों की बातें सुन रहा था l ख़ास कर काका के मुंह से अपनी बीवी की नहाने वाली बात सुनकर उसके लंड में थोड़ी हलचल मच रही थी l
वो कमरे से बाहर आया, काका...
काका - अरे साहब आप नमस्ते
मानस - नमस्ते l कैसे हो रामलाल l
काका - बस दुवा है मालिक l
मानस माया के बगल में आ खड़ा हुवा और अपना एक हाथ माया की कमर पे टिका दिया l
मानस - बीवी बच्चे सब ठीक तो हैं ना
काका - जी साहेब
काका - अच्छा हुवा साहेब आप आ गए, माया बिटिया बड़ी उदास दिखती थी आपके बिना l
मानस - हाँ आपकी बिटिया ने तो सुबह सुबह ही थका दिया मुझे....
.
.
.
बहुत सारी बातें कर कर के l
माया मानस की डबल meaning बात समझ रही थी वो कमर पे पड़े मानस के हाथ पे कस के नाखून चुभा दी l
मानस - काका आइये ना अंदर, मैं सोच रहा था पिछले month का भी पैसा बाकी है तो अभी दे दूँ सब जोड़ के.. क्यों माया ? (कमर पे हल्का सा दबाव डालते हुवे )
माया मानस का चेहरा पढ़ रही थी आखिर उसके दिमाग में क्या चल रहा है l
माया - हाँ आईये ना काका l
काका - ओके बिटिया l
तीनो लिविंग हॉल में सोफे पे बैठ जाते हैं l कुछ बातें करने के बाद माया किचन में आ जाती है l
मानस टेबल पे पड़ी एक डायरी और पेन उठता हैl
मानस - ये लो काका इसपे पिछले month से अब तक का दूध का किराया लिख दो l
काका - जी साहब अभी लिख देता हूँ l
मानस उठ कर किचन में आता है, माया की साड़ी में उभरी गांड देख वो अपना लंड सहलाता है और माया को बाँहों में भींच पीछे से ही लंड गांड की दरार में चिपका देता है l
माया सख्त लंड के अहसास से चौंक जाती है, तभी मानस उसकी पीठ पे kiss करते हुवे अपना हाथ आगे किये साड़ी की गाँठ नीचे push कर देता है l
माया की गहरी नाभि नंगी हो जाती है l आगे की तरफ आ के वो फर्श पे घुटने के सहारे बैठ जाता है और अपना मुँह सीधा माया की नाभि में घुसा देता है l
माया की साँसे तेज़ हो जाती है, वो सोचने लगती है की आज ये मानस को क्या हो गया है l
मानस किस करने के साथ साथ धीरे धीरे उसकी साड़ी उठा लेता है l नंगी जांघो से लेकर panty तक हाँथ फेरता है l मस्ती में डूबी माया की panty घुटनो से नीचे आ जाती है, मानस अब नीचे की तरफ जाते हुवे panty को पूरा निकाल हवा में फेंक देता है l
माया को पता था.... आगे वो होने वाला था जो उसे सबसे ज्यादा पसंद है वो मानस का बाल पकड़ती है और पैर खोल देती है l मानस अपने होंठ को माया की गरम चूत पे रगड़ रहा होता है l माया की तेज सिसकारी निकल जाती है, वो काका का ख्याल कर अपना मुँह बंद करती है l
लेकिन मानस उसका हाथ मुहं से हटा देता है और चूत के अंदर तक जीभ डाल देता है l
माया मानस का इरादा भांप लेती है और पीछे हटती हुई साड़ी नीचे कर देती है l फिर वो मानस का कान पकड़ के उठाती है l
किसी टीचर की तरह उसे डांटते हुवे पूछती है
माया - क्या कर रहे थे तुम ?
मानस -कुछ तो नहीं l
माया - सब समझती हूँ मैं, मेरे मुहँ से हाथ क्यों हटाए ?
मानस - common माया जबसे काका ने तुम्हारे नहाने की बात की है मेरा लंड तन गया है l तुम भी तो enjoy करती थी याद है new year का दिन हम गोवा गए थे और होटल में तुम बाथरूम से बिना ब्रा के बाहर आ गई थी जबकि रूम सर्विस वाला ladka वहीँ था l तुम्हे नंगा देख उसकी तो जैसे जान निकल गई थी, बाद में हम जहाँ जाते वो वहीँ आता और तुमने भी तो उसे कई बार अपने बूब के दर्शन कराये थे l
माया - मैंने तुम्हारे कहने पे दिखाया था l
मानस - जो भी हो लेकिन उस रात 4 बार हम सेक्स किये थे याद है l उस सर्विस बॉय ki बातें कर सेक्स का कितना मज़ा आया था l
माया - हाँ याद है मैं नशे में थी, और वो एक अजनबी था लेकिन काका (माया कहते कहते रुक गई )
मानस - प्लीज माया प्लीज
माया - ओह तुम कभी नहीं सुधरोगे, अच्छा क्या करूँ बोलो l
मानस - (खुश होते huwe) इन कबूतरों को ब्लाउज से आज़ाद कर दो और काका को enke दर्शन करा दो l
माया - छी मानस तुम पागल हो गए ho?
मानस - हँसते huwe.... अरे बाबा मज़ाक कर रहा था, कमसे कम अपनी नाभि तो दिखा सकती हो l
माया - हम्म्म ठीक है l
मानस आगे बढ़ माया को चूम लेता है, तुम कितनी अच्छी हो l
माया साड़ी को अपनी चिकनी गहरी नाभि के नीचे करती है, पल्लू से हल्का सा ढंकते हुवे वो living हॉल में आती है l
काका - अरे बिटिया... (डायरी बढ़ाते हुवे) लो एक बार देख लो सब ठीक है ना
माया डायरी पकड़ती है और बड़ी चालाकी से बाहँ को पेट से रगड़ते हुवे साड़ी का पल्लू नाभि से दूर कर देती है l

काका सोफे पे बैठे हुवे जब माया की गोरी कमर देखते हैं तो उनकी आँख बड़ी हो जाती है l वो टकटकी लगा के कमर को निहारते हैं, जबकि माया अनजान सी डायरी देखती खड़ी रहती हैl इसका फ़ायदा उठा के काका आँखों से ही नाभि की गहराई नापते होते हैं l धोती में उनका लंड बेतहाशा झटके मारने लगता है l
थोड़ी देर बाद मानस आता है,
मानस - अरे माया... काका को पसीना हो रहा है fan चला दो l
काका आपकी तबियत तो ठीक hai?
काका - haan साहेब
माया और मानस एक दूसरे को देख हल्का सा मुस्कुराते हैं l
माया - काका यहाँ कुछ गड़बड़ है l
काका -कहाँ बिटिया ?
माया काका के बिलकुल करीब खड़ी हो जाती है उसकी खुली नाभि काका के फेस के करीब था l
माया - यहाँ देखिये काका... इधर 250 होना चाहिए 200 नहीं l
काका इतने करीब से गोरी नाभि देख पसीने पसीने हो जातें हैं l
काका - हाँ हाँ... आ हाँ... बेटी.. बिटिया... टोटल 15.. 2500 हो गया
साहब....
काका की जुबान लड़खड़ाने लगती है l
मानस - ये लो काका 2500
मानस - काका आपकी तबियत तो ठीक hai?
काका - जी जी साहब वो मुझे याद आया... मुझे एक और जगह जाना है l
मैं फिर कभी आता हूँ l
काका जल्दी से धोती संभालते अपने लंड के आगे हाथ किये door की तरफ भागते हैं l
मानस और माया दोनों ही अपनी हंसी दबा रहे होते हैं l
माया - ओके काका
काका बिना सुने तेजी से सीढ़ियां उतरते दूर चले जाते हैं l
माया door बंद करती है दोनों सोफे पे आकर बैठते हैं और जोर जोर से हँसते हैं l
मानस - यार काका का तो काम ही हो जाता आज l
माया - हाहा ओह माय गॉड उनसे तो बोला ही नहीं ja रहा था l
मानस - माया को बाँहों में लेते हुवे, तुम हो ही इतनी हॉट l बेचारे खड़े लंड के साथ भाग गए l तुम तो किसी को भी अपना दीवाना बना दो l
माया अपनी तारीफ सुन रोमांचित होती है l
मानस - अब तुम्हारा इनाम l
माया को सोफे पे लिटा के वो उसकी साड़ी उठा देता है panty तो पहले ही निकल चुकी थी l
मानस अपना मुहँ माया की चूत पे लगा देता है l चूत से मादक गन्ध आ रही थी l
माया भी टाँगे पूरी खोले अपनी चूत चटवाने को बेकरार थी l

मानस मुँह खोले चूत की फैंको से होता हुवा अंदर तक चाटने लगा
माया - आह आआअह्हह्ह्ह्ह माआनाआस
मानस - मानस नहीं काका बोलो l
माया - aaah मानस ससससस l
मानस - बोलो ना बिटिया l
माया - काका आआआ........ आआह्ह मेरी चूत चाटो काका l
मानस किसी पागल कुत्ते की तरह चूत को चाटता रहता है l माया की चूत अब ढेर सारा पानी छोड़ने लगती है l
माया - ओह काका
मानस -(मुँह उठा कर माया की तरफ देख ) माया बिटिया काका से chudwaogi ना
माया - माया आँख बंद किये हुवे जवाब देती hai..... हाँ काका chudwaungi
मानस तड़प उठता है वो अपना pant और अंडरवियर खोले माया के फेस के करीब आता है l उसके लंड से तेज बदबू आ रही थी, फिर भी माया हाथ में लंड थामती है l लंड पहले से ज्यादा गरम और मोटा लगता है l
माया - ये क्या मानस तुम तो बहुत horny हो l
माया आगे बढ़ उसके लंड को चूम लेती है l मानस वैसे ही खड़ा रहता है उसका लंड बार बार माया के गाल पे झटके मार रहा होता है l
माया देखती है तो मानस आनंद से आँखे बंद किये हुवे है, वो आगे बढ़ पूरा लंड मुँह में भर लेती है l
मानस - aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh maaaaaayaaaaaa
दो तीन बार लंड को मुहँ के लार से भिगो कर माया लंड छोड़ देती है l
मानस माया को सोफे से नीचे उतरता है और उसपे सवार हो के लंड सीधा चूत के अंदर पेल देता है l मोटा सख्त लंड माया की चूत में अंदर तक घुस जाता है l
मानस - आह माया बिटिया तुम्हारी बुर कितनी गरम है और गीली है l
माया - छी मानस कितना गन्दा बोलते हो तुम l
मानस - काका तो बुर ही बोलते होंगे इसे ना जाने कहाँ वो तुम्हारे नाम की मुट्ठ मार रहे होंगे l
माया ये सुनकर अपने दोनों जांघो को जकड लेती है l माया का orgasm आ गया था l वो अपनी चूत से पानी का रिसना महसूस कर सकती थी l
मानस भी माया ki उत्तेजना समझते हुवे उसे कस के चोदने लगता है l
Aaah आह aaah आआह ससस आआह
माया की moan तेज हो जाती है l चोदते चोदते मानस एक झटके से लंड बाहर निकलता है और लम्बी सांस लेते हुवे मुट्ठ की पिचकारी छोड़ता है l मुट्ठ की पहली धार तो माया के सर के ऊपर से निकल जाती है, दूसरी माया के चेहरे पे पड़ती है तीसरी बूब पे और बाकी की 3-4 धार माया के पेट पे लंड से
सीधा नीचे की तरफ गिरती है l
माया खुद ही हाँथ आगे बढ़ाते हुवे मानस के juicy लंड से वीर्य की आखिरी बूँद निचोड़ती है l मानस माया के ऊपर लेट कर उसे kiss करता है l
दोनों के शरीर ऊपर से नीचे तक मुट्ठ में चिपचिपे से हो जाते हैं, बावजूद इसके माया बिना कुछ कहे kiss करती होती है l और अपने गाल से मुट्ठ पोछती है l ताज्जुब की बात थी की माया जो थोड़ी देर पहले मुट्ठ को छूना भी नहीं चाहती थी वो अब उसी फिसलन का मज़ा ले रही थी l
माया - ओह मानस सुबह से भी ज्यादा अच्छे से चोदे तुम i love u so much
मानस - i love you too
मानस - माया काका का रोलप्ले कैसा लगा l?
माया - (शरमाती हुई ) हाँ बहुत अच्छा l
मानस - किसका लंड ज्यादा अच्छा था मेरा या काका का ?
माया - तुम्हारा
मानस - सच बोलो ना l
माया - अच्छा बाबा काका का l
मानस - oh.माया मानस का लंड फिर से उठने लगा था
माया - (लंड पकड़ती हुई ) अब काका मुझे जाने दो रात में फिर आ जाना l
मानस मुस्कुराता है l
तभी फ़ोन की घंटी बजती है l
फ़ोन पे मानस का बॉस था, किसी जरुरी काम के लिए उसे ऑफिस जाना था l
मानस - सॉरी माया जाना होगा l
मानस माया को kiss कर bathroom की तरफ चला जाता है l
ऐसी है माया.... 

बहू तो ना जाने कितनो को अपना बुर पिलाएगी lबहुत ही नमकीन टेस्टी स्टोरी है.....
बहु की पानी का टेस्ट भी नमकीन
है.............
अगले अपडेट का बेसब्री से इंतजार है..
माया - अब चेंज कर लूँ ?
उदय - पहने रहो ना बेटी प्लीज l तुम्हे देख के भी दिल नहीं भर रहा है l khaaskar तुम्हारी कमर से तो नज़र नहीं हट रही l
माया के लिए ये कोई आश्चर्य की बात नहीं थी, उसके बहुत सारे male फ्रेंड उसकी कमर की तारीफ करते थे l यहाँ तक की मानस भी उनमे से एक था l उसे भी कमर का भाग बहुत भाता था l
उदय - बेटी manas कब आ रहा है ?
माया - शायद next week तक, बता रहे थे की काम बहुत ज्यादा है, समय लगेगा l
उदय - एक काम कर साड़ी में अपनी कुछ फोटो le के उसे भी भेज दे वो सब कुछ बंद कर दौड़ा चला आएगा तेरे पास l
माया - हाहा गुड आईडिया पापा l
(दोनों हंसने लगे )
उदय - जब मैं कभी काम से बाहर जाता था, तो तेरी माँ मुझे चिट्ठी लिखती थी और साथ ही apne कुछ फोटोग्राप्स भेजती थी और मैं भागा चला आता था l
माया - रियली ? वाओ how रोमांटिक
उदय - हमारे jamaane में whatsapp नहीं था ना बेटी, होता तो teri माँ आजकल की लड़कियों ko पीछे छोड़ देती l
माया - वो कैसे... ? मैं समझी नहीं पापा
उदय - अरे बेटी कैसे बताऊँ पति पत्नी के बीच की प्राइवेट बातें हैं l (उदय झूठी कहानियां बना रहा था )
माया - ओह
माया को लगा ki कोई ऐसी बात होगी जो शायद उसे नहीं पूछना चाहिए तो chup रही, मगर दिल ही दिल में वो सुनना भी चाहती थी l उदय भी चाहता था की माया पूछे मगर जब माया ने सिर्फ hmm किया तो उसने एक और बात बोली l
उदय - but तू तो अब जवान हो गई है शादी शुदा है सब समझती है l
माया - तो फिर बताइये ना l
(उदय यही चाहता था की माया पूछे, उसकी chaal कामयाब हो गई थी )
उदय - ओके बेटी लेकिन तू कभी ये बात अपनी माँ को तो नहीं बताएगी ?
(उदय को डर था की कहीं उसकी झूठी कहानी ना पकड़ी जाए )
माया - नहीं बोलूंगी पापा बताओ ना l
उदय - अच्छा रुक तो मैं पिशाब कर के आता हूँ l फिर बेड पे लेट के आराम से बताता हूँ l
माया हामी भर पापा का वेट करने लगती है l
कुछ देर बाद.. उदय ने माया को कॉल किया l
उदय - हाँ हो गया बेटी, बिस्तर पे आ गया l तू कहाँ है ?
माया - मैं भी बेड पे हूँ l
मैंने सोचा पूरी कहानी टाइप कैसे करूँ तो कॉल कर लिया तुझे...
माया - हाँ ठीक किया पापा l
उसके बाद पापा ने जो पूछा वो सुनकर माया चौंक गई l
उदय - बेटी तुझे पिशाब नहीं लगी ? कर के आ जा तू भी, काफी देर से बात कर रहे हैं हम l
(सवाल अटपटा था लेकिन माया सोची इतने दिनों से बात kar रहे हैं दोनों to इतना खुलना तो बनता है वैसे भी ये तो प्राकृतिक क्रिया है.. तो its normal )
माया - (शर्माते हुवे.. ) नहीं पापा मैं ठीक हूँ l
उदय - ok
उदय - तो बेटी बात उस समय की hai जब मैं कुछ week के लिया कोलकाता गया था l तू तो पैदा भी नहीं हुई थी l
माया - (ध्यान लगा के सुनती हुई ) ओके
उदय - एक दिन तेरी माँ को शरारत सूझी, उस वक़्त ghar पे कैमरा था मगर उसे तेरी माँ को chalaane नहीं आता था l
तो वो पास ke एक स्टूडियो गई, उसने साड़ी में कुछ पिक्स खिचवाये स्टूडियो में cemera वाला कुछ 19-20 साल का लड़का था l तेरी माँ ने उससे कहा की उसे कुछ गंदी फोटो खिचवानी है क्या वो खीचेगा ?
माया - गंदी मतलब..क्या पापा ?... नंगी तसवीरें ?
उदय - हाँ
माया चौंक सी गई...
माया - ओह माय गॉड मम्मी...
उदय - हाँ beti, और भला कौन मर्द औरत की नंगी तस्वीर खींचने से माना करेगा l
माया - हाहा
उदय - तब तेरी माँ ने ब्लाउज के बटन खोल अपने दोनों नंगे दूध बाहर किये और उस लड़के ने फोटो खींचा l
माया पापा के मुहँ से नंगे दूध जैसे गंदे वर्ड सुनकर कुछ भी कह नहीं पाई l वो चुप थी l
माया को तो यकीन हे nahi हो रहा था l
माया - बाप रे, और उन्होंने आपको तस्वीर पोस्ट की l
उदय - हाँ बेटी, तस्वीर देखते हे मैंने तो दूसरे हे दिन वापसी की ट्रैन पकड़ ली l हाहा lll
माया भी हंसने लगी...
माया - बहुत शरारती थी मम्मी.. माय गॉड लेकिन आपका next डे ट्रैन पकड़ना इस सो रोमांटिक l
उदय - थैंक यू बेटी, उस जमाने में whatsup होता तो तेरी माँ ना जाने kya क्या करती l
उदय - वैसे तूने भी किया ही होगा l
(माया शरमा गई )
उदय - (मौके का फ़ायदा उठाते हुवे... ) है ना बेटी ? तेरी चुप्पी ये बता रही है की तूने भी किया है l सभी हस्बैंड वाइफ करते हैं l की हो ना?
माया (धीरे से ) - हाँ
उदय - वाओ क्या की थी बताओ.. (उदय की झूठी कहानी रंग लायी वो उत्तेजना में लंड सहलाता है )
माया - नहीं
उदय - बताओ ना प्लीज.. मैंने भी तो बताया ना ?
माया - hmm
माया - Ok...आप daantoge तो नहीं l
उदय - नहीं बेटी पति के साथ शरारत करना तो पत्नी का हक़ होता है, भला मैं क्यों daatunga..
माया - हाँ मगर ये बात मानस के पति बनाने से पहले की है l
उदय - ( excited होते हुवे ) ओह batao..
माया - हमारी इंगेजमेंट हो गई थी, हम फ़ोन पे बातें करते थे l एक बार घर पे बहुत भीड़ हो गई थी, मामा जी का परिवार आया था l
उदय - हाँ याद है मुझे
माया - तो मैं उन दिनों छत पे चली जाती और बातें करती l
एक दिन मानस जिद्द करने लगेl
उदय - कैसी जिद्द बेटी ?
माया (शर्माते हुवे... ) - वही आ ऊपर.. आ ऊपर का देखने के लिए
उदय - ऊपर क्या beti... तेरी दुधु ?
(माया को पापा के मुहँ से अपने लिए दुधु वर्ड सुन अजीब सा हुवा.. उदय ने भी जानबूझ कर तेरी दुधु बोला था )
माया बस हम्म्म कर के रह गई, और करती भी क्या ?
उदय - बहुत बदमाश था मानस बेटा... फिर क्या हुवा बेटी ?
माया - मैं मानस को बहुत माना की मगर वो नहीं माने आखिरकार मैं छत पे एक कोने में गई और फोटो खींच के भेज दी l (माया जल्दी से बोल गई )
उदय - मतलब तुम छत पे नंगी हूई थी l
(उदय.. जानबूझ कर अनजान बनते हुवे और माया से हर बारीकी उगलवाने के लिए बोला )
माया - छी नहीं नहीं.. पापा l
उदय - तो कैसे बता ना...
(इधर उदय खड़े लंड का स्किन खोल उसे ऊपर नीचे कर रहा था )

माया - मैं साइड में बैठ गई और टॉप के अंदर हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दी, बिना टॉप उतारे l
(माया ऐसे बता रही थी जैसे उसके पापा कोई नौसिखिया हो, मगर उदय ने तो जानबूझ कर पूछा था ताकि वो बेटी की चूची दिखाने के वाकिये को इमेजिन कर लंड हिलाये )
उदय - फिर क्या की बेटी ? आह..
माया - फिर आस पास देखि कोई नहीं था तो कैमरा on कर धीरे से टॉप उठाई
उदय - टॉप के साथ साथ ब्रा भी उठाई होगी ना l
माया - हाँ पापा l
उदय - ओह फिर तो तुम्हारे दोनों गोल बूब बाहर आ गए होंगे l ससस...
(माया शर्म से झेंप गई )
माया - दोनों नहीं पापा एक बाहर करके कुछ पिक्स ले कर भेज दी l
(माया nadaani में ही सही लेकिन इस वक़्त वो उदय के लंड का तनाव lagataar बढ़ा रही थी )

माया शादी से पहले मानस को अपना बूब दर्शन कराती हुई
उदय - wow शादी से पहले हे मज़ा दे दिया होगा तुमने मानस को l मैं कहाँ था उस वक़्त ?
माया - आप नीचे रूम में मामा जी से बातें kar रहे थे l
उदय - ओह.. और मेरी बेटी उसी घर में छत पे बैठी एक मर्द को अपने गोल नंगे बूब्स दिखा रही थी l.. वो भी शादी से पहले l
माया - सॉरी पापा.. मानस बिलकुल सुन नहीं रही थे मेरी कोई बात l
उदय - चलो कोई बात नहीं.. बेटी अब वो तेरा पति है l मानस की तो लॉटरी लग गई होगी तुम्हारा वो देख के.. क्या बोला उसने l
माया शर्म से पानी पानी हुवे जा रही थी...
माया - तारीफ कर रहे थे l
उदय - क्या बोल रहा था.. वो बताओ..
माया - ओह पापा... वो सब नहीं बता सकती.. ना..
उदय - क्यों बेटी.. अच्छा समझा..
(उदय हँस दिया )
माया - क्या... ? हँस क्यों रहे हो पापा.. ?
उदय - कुछ नहीं बेटी.. दिमाग में एक बात आ गई थी l
माया - (उत्सुकता से ) क्या.. ?
उदय - नहीं बोल सकता beti...
माया की उत्सुकता और बढ़ गयी.. बोलिये ना पापा...
उदय - एक shart पे tum भी बताओगी की मानस तुम्हारे बूब्स देख के क्या बोला
माया - नहीं पापा... वो बहुत बेशर्म हैं, मैं वो चीज़ नहीं बोल सकती
उदय - तो फिर रहने दो बेटी मैं भी नहीं बताता l डिनर क्या किया आज तुमने ?
( उदय भली भाँती जानता था की माया की उत्सुकता badhegi इसलिए वो बातचीत चेंज करने के लिए दूसरा सवाल पूछा था )
माया उतावली थी l
माया - पापा वो छोड़ो, बोलो ना क्या सोच रहे थे आप l
उदय - ओके तो.. तुम भी बताओगी है ना ?
(माया ने बिना सोचे हाँ कह दिया l)
माया - हाँ बता doongi... अब बोलो ना
उदय - प्रॉमिस ??
माया - हाँ
उदय - बुरा तो नहीं manogi ?
माया - नहीं पापा
उदय - ओके मैं उस वक़्त सोच रहा था बेटी की.. की.. शादी से पहले मानस इतना betaab था तुम्हारा वो देखने के लिए, तब तो utne बड़े भी नहीं थे तुम्हारे l अब शादी के बाद तुम्हारा काफी बड़ा और सूडओल भी हो गया, ऐसे मैं मानस अभी तुम्हारे दूध को नंगे देख ले तो वो सारे काम छोड़ आ जायेगा l
माया पूरी तरह शर्मशार हो गई.... खुद उसके पापा उसके बूब्स की साइज के बात कर रहे थे वो वो भी बिना किसी jhjjhak के l
माया - पापा... ( वो आगे कुछ नहीं बोल पाई )
उदय - अब तुम bato बेटी... क्या बोला मानस जब पहली बार तुम्हारा दूध देखा.. l
(माया बुरी तरह अपनी हे बातों में फंस सी है गई थी )
उदय - बोलो बेटी.. l
माया - वो तारीफ किये और बोले की मेरा वो बहुत गोरा है l
उदय - वो तो सच ही होगा बेटी, तेरा रंग दूध की तरह गोरा और तेरा बदन मलाई की तरह मुलायम मालूम होती है l
माया - उम्म्म
उदय - और क्या क्या बोला मानस ?
माया - पापा प्लीज.. मैं नहीं बोल सकती l
उदय - तूने प्रॉमिस किया था बेटी, ठीक है अगर तू प्रॉमिस tod रही है तो मैं क्या बोलूं l
(माया परेशान हो गई )
माया - पापा ऐसे नहीं hai.. मैं कैसे बताऊँ आपको l
उदय - ठीक है छोड़ो बेटी ... मत बताओ ना
माया - पापा प्लीज आप समझ नहीं रहे, मैं आपसे वो बात नहीं बोल सकती l
उदय - its ok बेटी, मैं कुछ नहीं कह रहा... प्रॉमिस ही तो है l
माया - पापा...
माया - ok वो बोले की मेरा वो देख कर उनको मुँह में लेने का मन हो रहा है l
(माया शर्माते हुवे आखिरकार बोल गई )
उदय ने बड़े साफ़ shabdon में सुना था फिर भी जैसे वो दुबारा माया के मुहँ से सुनना चाहता हो l
उदय - क्या बेटी क्या बोला मानस ने sorry... network ख़राब थी आवाज़ नहीं आ रही थी..
माया - (दोहराती हुई ) मानस बोल रहे थे की मेरे दोनों बूब्स को वो अपने मुहँ में लेना चाहते हैं l
(उदय जब खुद अपनी बेटी के मुहँ से बूब्स वाली बात जैसे उदय के लंड ने सुन li हो...., उसका लंड फच फच्च करता उसकी मुट्ठी में पानी छोड़ दिया l
उदय भी पीछे हटने वाला नहीं था, वो भी चिपचिपे लंड को रगड़ते bolta रहा )

उदय - आह्ह.... हाँ बेटी..... भला मानस की इसमें क्या गलती l तेरी बूब्स भी तो lajawaab hai, उसकी तो गोलाई देखकर लड़के मचल जाते होंगे l sssss aaaaah और ऐसे मैं कोई Khuskismat मर्द तेरी बूब्स को पूरा नंगा देख ले तो उसकी raaton की नींद udd जाए l वो तो दिन रात तेरे बूब्स को मुँह में ले ke चूसने की khwahish रखेगा l
(उदय bolta ही जा रहा था, वो ye सारी बातें लंड से पानी jhaadte हुवे बोल रहा था l उदय आज बिना earphone के बात कर रहा था तो माया को बिलकुल ही पता नहीं चला की पापा उससे बातें कर लंड का पानी गिरा रहे हैं l अपनी बूब की ख़ूबसूरती वाली बात से वो बेहद खुश तो थी, साथ हे हैरान भी की उसके पापा उसके बूब्स को देखते हैं l)
उदय - पहने रहो ना बेटी प्लीज l तुम्हे देख के भी दिल नहीं भर रहा है l khaaskar तुम्हारी कमर से तो नज़र नहीं हट रही l
माया के लिए ये कोई आश्चर्य की बात नहीं थी, उसके बहुत सारे male फ्रेंड उसकी कमर की तारीफ करते थे l यहाँ तक की मानस भी उनमे से एक था l उसे भी कमर का भाग बहुत भाता था l
भाग 23
उदय - बेटी manas कब आ रहा है ?
माया - शायद next week तक, बता रहे थे की काम बहुत ज्यादा है, समय लगेगा l
उदय - एक काम कर साड़ी में अपनी कुछ फोटो le के उसे भी भेज दे वो सब कुछ बंद कर दौड़ा चला आएगा तेरे पास l
माया - हाहा गुड आईडिया पापा l
(दोनों हंसने लगे )
उदय - जब मैं कभी काम से बाहर जाता था, तो तेरी माँ मुझे चिट्ठी लिखती थी और साथ ही apne कुछ फोटोग्राप्स भेजती थी और मैं भागा चला आता था l
माया - रियली ? वाओ how रोमांटिक
उदय - हमारे jamaane में whatsapp नहीं था ना बेटी, होता तो teri माँ आजकल की लड़कियों ko पीछे छोड़ देती l
माया - वो कैसे... ? मैं समझी नहीं पापा
उदय - अरे बेटी कैसे बताऊँ पति पत्नी के बीच की प्राइवेट बातें हैं l (उदय झूठी कहानियां बना रहा था )
माया - ओह
माया को लगा ki कोई ऐसी बात होगी जो शायद उसे नहीं पूछना चाहिए तो chup रही, मगर दिल ही दिल में वो सुनना भी चाहती थी l उदय भी चाहता था की माया पूछे मगर जब माया ने सिर्फ hmm किया तो उसने एक और बात बोली l
उदय - but तू तो अब जवान हो गई है शादी शुदा है सब समझती है l
माया - तो फिर बताइये ना l
(उदय यही चाहता था की माया पूछे, उसकी chaal कामयाब हो गई थी )
उदय - ओके बेटी लेकिन तू कभी ये बात अपनी माँ को तो नहीं बताएगी ?
(उदय को डर था की कहीं उसकी झूठी कहानी ना पकड़ी जाए )
माया - नहीं बोलूंगी पापा बताओ ना l
उदय - अच्छा रुक तो मैं पिशाब कर के आता हूँ l फिर बेड पे लेट के आराम से बताता हूँ l
माया हामी भर पापा का वेट करने लगती है l
कुछ देर बाद.. उदय ने माया को कॉल किया l
उदय - हाँ हो गया बेटी, बिस्तर पे आ गया l तू कहाँ है ?
माया - मैं भी बेड पे हूँ l
मैंने सोचा पूरी कहानी टाइप कैसे करूँ तो कॉल कर लिया तुझे...
माया - हाँ ठीक किया पापा l
उसके बाद पापा ने जो पूछा वो सुनकर माया चौंक गई l
उदय - बेटी तुझे पिशाब नहीं लगी ? कर के आ जा तू भी, काफी देर से बात कर रहे हैं हम l
(सवाल अटपटा था लेकिन माया सोची इतने दिनों से बात kar रहे हैं दोनों to इतना खुलना तो बनता है वैसे भी ये तो प्राकृतिक क्रिया है.. तो its normal )
माया - (शर्माते हुवे.. ) नहीं पापा मैं ठीक हूँ l
उदय - ok
उदय - तो बेटी बात उस समय की hai जब मैं कुछ week के लिया कोलकाता गया था l तू तो पैदा भी नहीं हुई थी l
माया - (ध्यान लगा के सुनती हुई ) ओके
उदय - एक दिन तेरी माँ को शरारत सूझी, उस वक़्त ghar पे कैमरा था मगर उसे तेरी माँ को chalaane नहीं आता था l
तो वो पास ke एक स्टूडियो गई, उसने साड़ी में कुछ पिक्स खिचवाये स्टूडियो में cemera वाला कुछ 19-20 साल का लड़का था l तेरी माँ ने उससे कहा की उसे कुछ गंदी फोटो खिचवानी है क्या वो खीचेगा ?
माया - गंदी मतलब..क्या पापा ?... नंगी तसवीरें ?
उदय - हाँ
माया चौंक सी गई...
माया - ओह माय गॉड मम्मी...
उदय - हाँ beti, और भला कौन मर्द औरत की नंगी तस्वीर खींचने से माना करेगा l
माया - हाहा
उदय - तब तेरी माँ ने ब्लाउज के बटन खोल अपने दोनों नंगे दूध बाहर किये और उस लड़के ने फोटो खींचा l
माया पापा के मुहँ से नंगे दूध जैसे गंदे वर्ड सुनकर कुछ भी कह नहीं पाई l वो चुप थी l
माया को तो यकीन हे nahi हो रहा था l
माया - बाप रे, और उन्होंने आपको तस्वीर पोस्ट की l
उदय - हाँ बेटी, तस्वीर देखते हे मैंने तो दूसरे हे दिन वापसी की ट्रैन पकड़ ली l हाहा lll
माया भी हंसने लगी...
माया - बहुत शरारती थी मम्मी.. माय गॉड लेकिन आपका next डे ट्रैन पकड़ना इस सो रोमांटिक l
उदय - थैंक यू बेटी, उस जमाने में whatsup होता तो तेरी माँ ना जाने kya क्या करती l
उदय - वैसे तूने भी किया ही होगा l
(माया शरमा गई )
उदय - (मौके का फ़ायदा उठाते हुवे... ) है ना बेटी ? तेरी चुप्पी ये बता रही है की तूने भी किया है l सभी हस्बैंड वाइफ करते हैं l की हो ना?
माया (धीरे से ) - हाँ
उदय - वाओ क्या की थी बताओ.. (उदय की झूठी कहानी रंग लायी वो उत्तेजना में लंड सहलाता है )
माया - नहीं
उदय - बताओ ना प्लीज.. मैंने भी तो बताया ना ?
माया - hmm
माया - Ok...आप daantoge तो नहीं l
उदय - नहीं बेटी पति के साथ शरारत करना तो पत्नी का हक़ होता है, भला मैं क्यों daatunga..
माया - हाँ मगर ये बात मानस के पति बनाने से पहले की है l
उदय - ( excited होते हुवे ) ओह batao..
माया - हमारी इंगेजमेंट हो गई थी, हम फ़ोन पे बातें करते थे l एक बार घर पे बहुत भीड़ हो गई थी, मामा जी का परिवार आया था l
उदय - हाँ याद है मुझे
माया - तो मैं उन दिनों छत पे चली जाती और बातें करती l
एक दिन मानस जिद्द करने लगेl
उदय - कैसी जिद्द बेटी ?
माया (शर्माते हुवे... ) - वही आ ऊपर.. आ ऊपर का देखने के लिए
उदय - ऊपर क्या beti... तेरी दुधु ?
(माया को पापा के मुहँ से अपने लिए दुधु वर्ड सुन अजीब सा हुवा.. उदय ने भी जानबूझ कर तेरी दुधु बोला था )
माया बस हम्म्म कर के रह गई, और करती भी क्या ?
उदय - बहुत बदमाश था मानस बेटा... फिर क्या हुवा बेटी ?
माया - मैं मानस को बहुत माना की मगर वो नहीं माने आखिरकार मैं छत पे एक कोने में गई और फोटो खींच के भेज दी l (माया जल्दी से बोल गई )
उदय - मतलब तुम छत पे नंगी हूई थी l
(उदय.. जानबूझ कर अनजान बनते हुवे और माया से हर बारीकी उगलवाने के लिए बोला )
माया - छी नहीं नहीं.. पापा l
उदय - तो कैसे बता ना...
(इधर उदय खड़े लंड का स्किन खोल उसे ऊपर नीचे कर रहा था )

माया - मैं साइड में बैठ गई और टॉप के अंदर हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दी, बिना टॉप उतारे l
(माया ऐसे बता रही थी जैसे उसके पापा कोई नौसिखिया हो, मगर उदय ने तो जानबूझ कर पूछा था ताकि वो बेटी की चूची दिखाने के वाकिये को इमेजिन कर लंड हिलाये )
उदय - फिर क्या की बेटी ? आह..
माया - फिर आस पास देखि कोई नहीं था तो कैमरा on कर धीरे से टॉप उठाई
उदय - टॉप के साथ साथ ब्रा भी उठाई होगी ना l
माया - हाँ पापा l
उदय - ओह फिर तो तुम्हारे दोनों गोल बूब बाहर आ गए होंगे l ससस...
(माया शर्म से झेंप गई )
माया - दोनों नहीं पापा एक बाहर करके कुछ पिक्स ले कर भेज दी l
(माया nadaani में ही सही लेकिन इस वक़्त वो उदय के लंड का तनाव lagataar बढ़ा रही थी )

माया शादी से पहले मानस को अपना बूब दर्शन कराती हुई
उदय - wow शादी से पहले हे मज़ा दे दिया होगा तुमने मानस को l मैं कहाँ था उस वक़्त ?
माया - आप नीचे रूम में मामा जी से बातें kar रहे थे l
उदय - ओह.. और मेरी बेटी उसी घर में छत पे बैठी एक मर्द को अपने गोल नंगे बूब्स दिखा रही थी l.. वो भी शादी से पहले l
माया - सॉरी पापा.. मानस बिलकुल सुन नहीं रही थे मेरी कोई बात l
उदय - चलो कोई बात नहीं.. बेटी अब वो तेरा पति है l मानस की तो लॉटरी लग गई होगी तुम्हारा वो देख के.. क्या बोला उसने l
माया शर्म से पानी पानी हुवे जा रही थी...
माया - तारीफ कर रहे थे l
उदय - क्या बोल रहा था.. वो बताओ..
माया - ओह पापा... वो सब नहीं बता सकती.. ना..
उदय - क्यों बेटी.. अच्छा समझा..
(उदय हँस दिया )
माया - क्या... ? हँस क्यों रहे हो पापा.. ?
उदय - कुछ नहीं बेटी.. दिमाग में एक बात आ गई थी l
माया - (उत्सुकता से ) क्या.. ?
उदय - नहीं बोल सकता beti...
माया की उत्सुकता और बढ़ गयी.. बोलिये ना पापा...
उदय - एक shart पे tum भी बताओगी की मानस तुम्हारे बूब्स देख के क्या बोला
माया - नहीं पापा... वो बहुत बेशर्म हैं, मैं वो चीज़ नहीं बोल सकती
उदय - तो फिर रहने दो बेटी मैं भी नहीं बताता l डिनर क्या किया आज तुमने ?
( उदय भली भाँती जानता था की माया की उत्सुकता badhegi इसलिए वो बातचीत चेंज करने के लिए दूसरा सवाल पूछा था )
माया उतावली थी l
माया - पापा वो छोड़ो, बोलो ना क्या सोच रहे थे आप l
उदय - ओके तो.. तुम भी बताओगी है ना ?
(माया ने बिना सोचे हाँ कह दिया l)
माया - हाँ बता doongi... अब बोलो ना
उदय - प्रॉमिस ??
माया - हाँ
उदय - बुरा तो नहीं manogi ?
माया - नहीं पापा
उदय - ओके मैं उस वक़्त सोच रहा था बेटी की.. की.. शादी से पहले मानस इतना betaab था तुम्हारा वो देखने के लिए, तब तो utne बड़े भी नहीं थे तुम्हारे l अब शादी के बाद तुम्हारा काफी बड़ा और सूडओल भी हो गया, ऐसे मैं मानस अभी तुम्हारे दूध को नंगे देख ले तो वो सारे काम छोड़ आ जायेगा l
माया पूरी तरह शर्मशार हो गई.... खुद उसके पापा उसके बूब्स की साइज के बात कर रहे थे वो वो भी बिना किसी jhjjhak के l
माया - पापा... ( वो आगे कुछ नहीं बोल पाई )
उदय - अब तुम bato बेटी... क्या बोला मानस जब पहली बार तुम्हारा दूध देखा.. l
(माया बुरी तरह अपनी हे बातों में फंस सी है गई थी )
उदय - बोलो बेटी.. l
माया - वो तारीफ किये और बोले की मेरा वो बहुत गोरा है l
उदय - वो तो सच ही होगा बेटी, तेरा रंग दूध की तरह गोरा और तेरा बदन मलाई की तरह मुलायम मालूम होती है l
माया - उम्म्म
उदय - और क्या क्या बोला मानस ?
माया - पापा प्लीज.. मैं नहीं बोल सकती l
उदय - तूने प्रॉमिस किया था बेटी, ठीक है अगर तू प्रॉमिस tod रही है तो मैं क्या बोलूं l
(माया परेशान हो गई )
माया - पापा ऐसे नहीं hai.. मैं कैसे बताऊँ आपको l
उदय - ठीक है छोड़ो बेटी ... मत बताओ ना
माया - पापा प्लीज आप समझ नहीं रहे, मैं आपसे वो बात नहीं बोल सकती l
उदय - its ok बेटी, मैं कुछ नहीं कह रहा... प्रॉमिस ही तो है l
माया - पापा...
माया - ok वो बोले की मेरा वो देख कर उनको मुँह में लेने का मन हो रहा है l
(माया शर्माते हुवे आखिरकार बोल गई )
उदय ने बड़े साफ़ shabdon में सुना था फिर भी जैसे वो दुबारा माया के मुहँ से सुनना चाहता हो l
उदय - क्या बेटी क्या बोला मानस ने sorry... network ख़राब थी आवाज़ नहीं आ रही थी..
माया - (दोहराती हुई ) मानस बोल रहे थे की मेरे दोनों बूब्स को वो अपने मुहँ में लेना चाहते हैं l
(उदय जब खुद अपनी बेटी के मुहँ से बूब्स वाली बात जैसे उदय के लंड ने सुन li हो...., उसका लंड फच फच्च करता उसकी मुट्ठी में पानी छोड़ दिया l
उदय भी पीछे हटने वाला नहीं था, वो भी चिपचिपे लंड को रगड़ते bolta रहा )

उदय - आह्ह.... हाँ बेटी..... भला मानस की इसमें क्या गलती l तेरी बूब्स भी तो lajawaab hai, उसकी तो गोलाई देखकर लड़के मचल जाते होंगे l sssss aaaaah और ऐसे मैं कोई Khuskismat मर्द तेरी बूब्स को पूरा नंगा देख ले तो उसकी raaton की नींद udd जाए l वो तो दिन रात तेरे बूब्स को मुँह में ले ke चूसने की khwahish रखेगा l
(उदय bolta ही जा रहा था, वो ye सारी बातें लंड से पानी jhaadte हुवे बोल रहा था l उदय आज बिना earphone के बात कर रहा था तो माया को बिलकुल ही पता नहीं चला की पापा उससे बातें कर लंड का पानी गिरा रहे हैं l अपनी बूब की ख़ूबसूरती वाली बात से वो बेहद खुश तो थी, साथ हे हैरान भी की उसके पापा उसके बूब्स को देखते हैं l)
मैंने तो चुतियापा कहने पे जवाब दिया l बेशक critics अच्छा होता hai, मैंने कई रीडर के critics का पहले भी सम्मान किया है लेकिन critics का chutiyape का नहीं l
रीडर बेशक सवाल करे...
लेकिन आप प्यार से softly सवाल करेंगे तो प्यार से softly जवाब मिलेगा l
आप ही बताओ रीडर मेरे पोस्ट को chuttiyapa बोले तो फिर भी आप कहते हो रीडर सिर्फ सवाल कर रहा है l
मैंने समझदारी और ज्ञानी जैसा word use किया तो आप उसे जवाब नहीं mera attitude बोलते हो l
आप मुझे बोल रहे हो की softly जवाब दो.. आपने रीडर को बोला की softly सवाल करो ?
रीडर बेशक सवाल करे...
लेकिन आप प्यार से softly सवाल करेंगे तो प्यार से softly जवाब मिलेगा l
आप ही बताओ रीडर मेरे पोस्ट को chuttiyapa बोले तो फिर भी आप कहते हो रीडर सिर्फ सवाल कर रहा है l
मैंने समझदारी और ज्ञानी जैसा word use किया तो आप उसे जवाब नहीं mera attitude बोलते हो l
आप मुझे बोल रहे हो की softly जवाब दो.. आपने रीडर को बोला की softly सवाल करो ?
Thank youSuper hot ????
मानस ने चुदाई कर दी ना पहले के episode mein..Bhai story me manas ka kuch role hai ya nhi,ya sirf wo side character hai
Thank you bhai... उम्मीद है माया आपका मुट्ठ निकालने में कामयाब रहीBhai ye table wala part to full khara kardiya mera
उदय इतना सबकुछ कह गया था, माया कुछ नहीं बोली.. इतनी देर बाद भी उसके मुहँ से सिर्फ एक बात निकली
माया - उम्म्म पापाआआआाा.... I miss you...
उदय लंड को रगड़ते हुवे ये समझ चूका था की उसकी बेटी माया अब गरम हो चुकी है l
उदय पास में पड़े earphone को उठा कर मोबाइल में लगा लेता है ताकि उसके दोनों हाथ free हो l
उदय - I miss you too बेटी... आआह्ह्ह
(उदय की उत्तेजना एक बार फिर बढ़ने लगती है वो धीरे धीरे अपना लंड रगड़ने लगता है )
उदय - आह काश बेटी तू इस वक़्त मेरे पास होती.. ससससस आअह्ह्ह
तो तुझे बताता मैं तुम्हे कितना मिस कर रहा हूँ l
माया भी जैसे इस वक़्त आलिंगनबद्ध होना चाहती थी l
माया - हल्का मोअन करते हुवे... आह पापा... क्या कर रहे हो आप अभी ?
उदय - एक तकिये को कस के दबा रहा हूँ बेटी, तुम्हे समझकर l
माया - आह पापा.. मेरी जान निकलोगे क्या ? इतना कस के क्यों पकड़े ho मुझे उम्म्म्म ?
उदय - हाहा..नहीं बेटी तुम्हे प्यार से बाँहों में लिया हूँ, और तेरे ऊपर हूँ l मेरा वजन ज्यादा तो नहीं है ना बेटी ?
माया - थोड़ा है पापा...
उदय - तो tu आजा मेरे ऊपर l आ...ना...
माया - उम्म्म अच्छा जी.... लो आआ गई पापा आपके ऊपर l
उदय - ससससस आअह्ह बेटी.. मक्खन सा बदन है तुम्हारा... तुम्हारी पीठ कितनी मुलायम है ll आअह्ह्ह
(मौका देखते he उदय ने गूगल से एक gif pic भेज दी )

माया - उम्म्म
उदय - pic कैसा hai...?
माया - अच्छा..
उदय - बेटी तूने जो अभी ब्लाउज पहन रखी है उसमे ऐसी डोरी है क्या?
माया - नहीं पापा... क्यों ?
उदय - यूँही पूछा मुझे डोरी वाली ब्लाउज बहुत पसंद है l
माया - ओके
उदय - बेटी अभी जैसी ब्लाउज है उसकी फोटो भेजो ना, मुझे देखना है l
माया थोड़ी सोचते हुवे.. ब्लाउज में एक सेल्फी ली और भेज दी l

उदय - आहहह आहहह बेटी कितना अच्छा ब्लाउज है इसमें तो तुम्हारे और भी बड़े दिख रहे हैं l जी करता है तुझे कस के गले लगा लूँ l
माया - उम्म्म पापा तो लगा लो ना... किसने roka है l
उदय - ummmm.... लो तुम्हे अपनी बाँहों में भर लिया बेटी l
बिलकुल ऐसे....
उदय माया की रजामंदी देख उसे हॉट pics भेजता है l


माया - उम्म्म पापा...
उदय - कैसा लग रहा है तुझे बेटी
माया - अच्छा लग रहा है पापा..
उदय - जी करता है बेटी, तुझे आज रात भर प्यार करूँ मैं सससससस... आअह्ह
(उदय बात करते हुवे लंड को चप चप मुठ मारने लगता है )
माया - सच पापा ?
उदय - हाँ बेटी... तू भी अपने पापा को प्यार करेगी ना ?
माया - हां करुँगी papaaaa
उदय - कैसे करेगी l
माया - आपसे लिपट कर आपको किस कर
उदय - बस इतना ही l इतना प्यार तो तू हमेशा करती है l
माया - तो फिर मैं क्या करूँ ?
उदय - कुछ स्पेशल करो ना बेटी...
(इस बीच उदय ने एक और तस्वीर भेजी जिससे माया देख कर विचलित हो गई l माया सारे इशारे भलीभांति समझ रही थी, फिर भी अनजान सी प्रतीत होती l शायद rishte की डोर उसे रोक रही थी, लेकिन धीरे धीरे उसका भी सब्र टूट रहा था, उसकी चूत से गर्म भाप धधक रही थी, जिसे वो पैंटी के ऊपर से अपनी हथेली पे महसूस कर रही थी )

जिस प्रकार gif image में लड़की की चूची को सहलाया जा रहा था, वैसे ही माया भी अपने उरोजों को किसी मर्द के हाथ में देना चाहती थी l
उदय - क्या कर रही हो बेटी ?
माया - आपकी भेजी हुई pic देख रही हूँ l
उदय - आअह्ह्ह्हह मानस भी तुझे ऐसे ही परेशान करता होगा है ना ?
माया - जी
उदय - अब उसे परेशान करने की बारी तेरी है बेटी, तूने pics भेजी उसे ?
माया - नहीं पापा अभी नहीं
उदय - तो खींच ना अभी ब्लाउज उतार दो बेटी l
माया पापा की बात मान धीरे से ब्लाउज kholi, बिना ब्रा के उसके दोनों बूब ब्लाउज खुलते हे बाहर आ गए l
माया ने कुछ पिक्स खींचे, सेल्फी में अपने भरे बूब देखकर वो खुद भी लजा गई l
उदय - खींच ली फोटो बेटी ?
माया - जी पापा..
उदय - wow... देखना तेरी नंगी बूब देख कैसे मचल जायेगा मानस l
माया - ummm
उदय - बहुत गोरी होगी ना तुम ब्लाउज के अंदर ?
माया - जी पापा l
उदय - जरा मुझे भी एक pic भेज दे बिना ब्लाउज के l मानस को जैसा भेजी है वैसा नहीं तो कम से कम मुझे अपना गोरापन ही दिखा दो l
मैं भी तो देखूं मेरी बेटी कितनी गोरी है l
माया - पापा... उतनी भी गोरी नहीं हूँ l और कमरे में लाइट कम है l
उदय - अरे दिखा तो... तू तो इतनी गोरी है की अँधेरे कमरे में भी उजियारा ला दे l
माया - अच्छा रुको.. भेजती हूँ
(माया ने अपने हाथों से अपना नंगापन छुपाते हुवे एक सेल्फी ली और पापा को भेज दी )

(इधर उदय ने ये नहीं सोचा था की माया इतनी आसानी से मान जाएगी, वो फोटो के इंतज़ार में लंड रगड़ता रहा, जैसे हे माया की फोटो आयी वो देखते ही उत्तेजना से भर गया, पहले तो उसने मोबाइल में माया के फोटो पे अपना खड़ा लंड रगड़ा.. जैसे माया को लंड पीला रहा हो फिर बोला.. )
उदय - आअह्ह्ह्ह माया... ससस क्या लग रही हो... नंगी अप्सरा... बाँहों में आ जाओ.... आआह्ह्ह्ह मायाआआ मेरी बेटी... सससससस aaaaahhhh
(उदय खुल कर लम्बी लम्बी सिसकारियां भरता रहा, जैसे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता हो अगर माया को पता लगे की वो उसे देखकर मुट्ठ मार रहा है l माया भी समझ चुकी थी, लेकिन उसे कोई ऐतराज़ नहो था l वो तो खुद साड़ी उठाये पैंटी के ऊपर से अपनी गरम चूत को दबा रही थी l माया भी पापा का साथ देने की सोची... )
माया - आअह्ह पापा.. आपकी बाँहों में ही तो हूँ l
उदय - आआह्ह्ह्ह (उदय ने गूगल से हॉट gif भेज दिया )

माया भी कहाँ पीछे हटने वाली थी l
माया - ओह पापा... इस pic में तो आपकी बेटी ने ब्रा पहन रखी है l
(माया ने जानबूझ कर pic में दिख रही लड़की को बेटी कह कर सम्बोधित किया था, उदय भी माया के इशारे को समझ गया और उसने अगले जो कुछ gif भेजी उसे देखकर तो माया का बुर पिचपिचा गया l)


माया - आआह्ह्ह्ह पाआपाआ..
उदय - क्या हुवा बेटी...
माया - ये क्या hai पापा...
उदय - oh बेटी मैं तो तुझे प्यार कर रहा हूँ l काश तू मेरे पास होती तो तुझे ऐसे हे प्यार करता....
माया - पापा.....
उदय - बेटी एक बार हाथ हटा के फोटो भेज दे प्लीज... .. बहुत मन हो रहा hai तुझे देखने का
माया मचल रही थी l
माया - पापा.... no....
उदय - प्लीज बेटी... बस एक बार प्लीज... थोड़ा सा हाथ हटा दे l
माया - पापा...
उदय - प्लीज बेटी बस एक बार
माया - ओह
माया - ठीक है l
माया अपनी नंगी बूब का फोटो ली, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था l फिर उसने ठंडी सांस लेते फोटो भेज दिया l

उदय को तो अपनी किस्मत पे यकीन ही नहीं हो रहा था, उसकी बेटी ने उसे अपनी नंगी फोटो भेज दी थी l
उदय - आअह्हह्ज बेटी क्या बूब हैं तेरे आआह्ह ssssss....
उदय बेशर्मी से मोअन करने लगा
उदय - जी करता है इन्हे मुहँ में ले लूँ l
माया - पापा... क्या हो गया आपको
उदय - मत रोको मुझे बेटी... आअह्ह्ह्ह पीने दो तेरी चूची l
(उदय अब खुल के बोल रहा था )
माया - पापा प्लीज.... गंदे हो आप.....
अभी क्या कर रहे हो ?
(माया जानते हुवे भी पापा के मुहँ से सुनना चाहती थी, और हुवा भी ऐसा हे )
उदय - तेरी गोल बूब्स देखते हुवे हिला रहा हूँ l
माया को भी मज़ा आ रहा था,,,,,
माया - क्या हिला रहे हो पापा...?
उदय धीमे आवाज़ में बोला...
उदय - अपना लंड....
माया - उम्म्म्म पापा क्यों ??
उदय - तेरी नंगी फोटो ने मेरा लंड खड़ा कर दिया है l
माया - सच पापा ??.
उदय - हाँ बेटी.. dekhogi ?
माया - नो नो
उदय - देख लो बेटी भेज रहा हूँ l देखो तेरी चूची ने मेरे लंड पे क्या असर डाला है
उदय ने अपने लंड को रगड़ते हुवे एक छोटा वीडियो बनाकर भेज दिया... जीवन में पहली बार माया खुद अपने पापा का खुला लंड देख रही थी l मुट्ठ में चिचिपाया खड़ा लंड देख वो भी मचलने लगी l जैसे जैसे उसके पापा लंड ऊपर नीचे सहला रहे थे वैसे hi लंड फुफकार मार रहा था l लंड से निकलता precum माया को तड़पाने के लिए काफी था l वो hamesha,से जूसी लंड देखना पसंद करती थी l पापा के लंड से उसकी नज़र मानों हट ही नहीं रही थी l

माया - ओ माय गॉड... पापा....
इतना bada....आप तो बहुत मूड में हैं और आपका जूस बह रहा है l
उदय - ये तो precum है बेटी l जूस तो तब बहेगा जब तू इसे अपने नर्म हाथों में legi l
माया - उम्म्म
माया बातों बातों में पैंटी के अंदर हाथ डाल अपनी नंगी बुर को मसल रही थी l पापा के मुट्ठ मारने का वीडियो वो बार बार देख रही थी l
उदय - लो न बेटी प्लीज..
माया - पापा... ये गलत है
उदय - कुछ भी गलत नहीं है बेटी, मुझे पता है तेरी भी बुर चिपचिपा रही है l
माया - छी पापा ऐसा मत कहो l
उदय - आ बेटी तेरी चिपचिपी गरम बुर चाट लूँ l
माया - पापा प्लीज रुक जाओ...
उदय - (उदय बोलता चला गया ) तेरी बुर को तबतक चाटता रहूँगा जबतक की तू मेरे मुहँ में अपना पानी नहीं छोड़ देती l
माया उत्तेजना में अपने आप हवा में कमर लहराने लगी...
माया - आअह्ह्ह्ह पापा nooooo....
ठीक है मैं आपका लंड पकड़ लेती हूँ आप प्लीज बोलना बंद करिये l
माया - लो पापा पकड़ ली आपका लंड अब गिरा भी दो अपना वीर्य ummmmmm
माया एक pic भेजी जिसमे वो पापा ka लंड को सहला रही थी l

माया - उम्म्म पापाआआआाा.... I miss you...
उदय लंड को रगड़ते हुवे ये समझ चूका था की उसकी बेटी माया अब गरम हो चुकी है l
भाग 25
उदय पास में पड़े earphone को उठा कर मोबाइल में लगा लेता है ताकि उसके दोनों हाथ free हो l
उदय - I miss you too बेटी... आआह्ह्ह
(उदय की उत्तेजना एक बार फिर बढ़ने लगती है वो धीरे धीरे अपना लंड रगड़ने लगता है )
उदय - आह काश बेटी तू इस वक़्त मेरे पास होती.. ससससस आअह्ह्ह
तो तुझे बताता मैं तुम्हे कितना मिस कर रहा हूँ l
माया भी जैसे इस वक़्त आलिंगनबद्ध होना चाहती थी l
माया - हल्का मोअन करते हुवे... आह पापा... क्या कर रहे हो आप अभी ?
उदय - एक तकिये को कस के दबा रहा हूँ बेटी, तुम्हे समझकर l
माया - आह पापा.. मेरी जान निकलोगे क्या ? इतना कस के क्यों पकड़े ho मुझे उम्म्म्म ?
उदय - हाहा..नहीं बेटी तुम्हे प्यार से बाँहों में लिया हूँ, और तेरे ऊपर हूँ l मेरा वजन ज्यादा तो नहीं है ना बेटी ?
माया - थोड़ा है पापा...
उदय - तो tu आजा मेरे ऊपर l आ...ना...
माया - उम्म्म अच्छा जी.... लो आआ गई पापा आपके ऊपर l
उदय - ससससस आअह्ह बेटी.. मक्खन सा बदन है तुम्हारा... तुम्हारी पीठ कितनी मुलायम है ll आअह्ह्ह
(मौका देखते he उदय ने गूगल से एक gif pic भेज दी )

माया - उम्म्म
उदय - pic कैसा hai...?
माया - अच्छा..
उदय - बेटी तूने जो अभी ब्लाउज पहन रखी है उसमे ऐसी डोरी है क्या?
माया - नहीं पापा... क्यों ?
उदय - यूँही पूछा मुझे डोरी वाली ब्लाउज बहुत पसंद है l
माया - ओके
उदय - बेटी अभी जैसी ब्लाउज है उसकी फोटो भेजो ना, मुझे देखना है l
माया थोड़ी सोचते हुवे.. ब्लाउज में एक सेल्फी ली और भेज दी l

उदय - आहहह आहहह बेटी कितना अच्छा ब्लाउज है इसमें तो तुम्हारे और भी बड़े दिख रहे हैं l जी करता है तुझे कस के गले लगा लूँ l
माया - उम्म्म पापा तो लगा लो ना... किसने roka है l
उदय - ummmm.... लो तुम्हे अपनी बाँहों में भर लिया बेटी l
बिलकुल ऐसे....
उदय माया की रजामंदी देख उसे हॉट pics भेजता है l


माया - उम्म्म पापा...
उदय - कैसा लग रहा है तुझे बेटी
माया - अच्छा लग रहा है पापा..
उदय - जी करता है बेटी, तुझे आज रात भर प्यार करूँ मैं सससससस... आअह्ह
(उदय बात करते हुवे लंड को चप चप मुठ मारने लगता है )
माया - सच पापा ?
उदय - हाँ बेटी... तू भी अपने पापा को प्यार करेगी ना ?
माया - हां करुँगी papaaaa
उदय - कैसे करेगी l
माया - आपसे लिपट कर आपको किस कर
उदय - बस इतना ही l इतना प्यार तो तू हमेशा करती है l
माया - तो फिर मैं क्या करूँ ?
उदय - कुछ स्पेशल करो ना बेटी...
(इस बीच उदय ने एक और तस्वीर भेजी जिससे माया देख कर विचलित हो गई l माया सारे इशारे भलीभांति समझ रही थी, फिर भी अनजान सी प्रतीत होती l शायद rishte की डोर उसे रोक रही थी, लेकिन धीरे धीरे उसका भी सब्र टूट रहा था, उसकी चूत से गर्म भाप धधक रही थी, जिसे वो पैंटी के ऊपर से अपनी हथेली पे महसूस कर रही थी )

जिस प्रकार gif image में लड़की की चूची को सहलाया जा रहा था, वैसे ही माया भी अपने उरोजों को किसी मर्द के हाथ में देना चाहती थी l
उदय - क्या कर रही हो बेटी ?
माया - आपकी भेजी हुई pic देख रही हूँ l
उदय - आअह्ह्ह्हह मानस भी तुझे ऐसे ही परेशान करता होगा है ना ?
माया - जी
उदय - अब उसे परेशान करने की बारी तेरी है बेटी, तूने pics भेजी उसे ?
माया - नहीं पापा अभी नहीं
उदय - तो खींच ना अभी ब्लाउज उतार दो बेटी l
माया पापा की बात मान धीरे से ब्लाउज kholi, बिना ब्रा के उसके दोनों बूब ब्लाउज खुलते हे बाहर आ गए l
माया ने कुछ पिक्स खींचे, सेल्फी में अपने भरे बूब देखकर वो खुद भी लजा गई l
उदय - खींच ली फोटो बेटी ?
माया - जी पापा..
उदय - wow... देखना तेरी नंगी बूब देख कैसे मचल जायेगा मानस l
माया - ummm
उदय - बहुत गोरी होगी ना तुम ब्लाउज के अंदर ?
माया - जी पापा l
उदय - जरा मुझे भी एक pic भेज दे बिना ब्लाउज के l मानस को जैसा भेजी है वैसा नहीं तो कम से कम मुझे अपना गोरापन ही दिखा दो l
मैं भी तो देखूं मेरी बेटी कितनी गोरी है l
माया - पापा... उतनी भी गोरी नहीं हूँ l और कमरे में लाइट कम है l
उदय - अरे दिखा तो... तू तो इतनी गोरी है की अँधेरे कमरे में भी उजियारा ला दे l
माया - अच्छा रुको.. भेजती हूँ
(माया ने अपने हाथों से अपना नंगापन छुपाते हुवे एक सेल्फी ली और पापा को भेज दी )

(इधर उदय ने ये नहीं सोचा था की माया इतनी आसानी से मान जाएगी, वो फोटो के इंतज़ार में लंड रगड़ता रहा, जैसे हे माया की फोटो आयी वो देखते ही उत्तेजना से भर गया, पहले तो उसने मोबाइल में माया के फोटो पे अपना खड़ा लंड रगड़ा.. जैसे माया को लंड पीला रहा हो फिर बोला.. )
उदय - आअह्ह्ह्ह माया... ससस क्या लग रही हो... नंगी अप्सरा... बाँहों में आ जाओ.... आआह्ह्ह्ह मायाआआ मेरी बेटी... सससससस aaaaahhhh
(उदय खुल कर लम्बी लम्बी सिसकारियां भरता रहा, जैसे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता हो अगर माया को पता लगे की वो उसे देखकर मुट्ठ मार रहा है l माया भी समझ चुकी थी, लेकिन उसे कोई ऐतराज़ नहो था l वो तो खुद साड़ी उठाये पैंटी के ऊपर से अपनी गरम चूत को दबा रही थी l माया भी पापा का साथ देने की सोची... )
माया - आअह्ह पापा.. आपकी बाँहों में ही तो हूँ l
उदय - आआह्ह्ह्ह (उदय ने गूगल से हॉट gif भेज दिया )

माया भी कहाँ पीछे हटने वाली थी l
माया - ओह पापा... इस pic में तो आपकी बेटी ने ब्रा पहन रखी है l
(माया ने जानबूझ कर pic में दिख रही लड़की को बेटी कह कर सम्बोधित किया था, उदय भी माया के इशारे को समझ गया और उसने अगले जो कुछ gif भेजी उसे देखकर तो माया का बुर पिचपिचा गया l)


माया - आआह्ह्ह्ह पाआपाआ..
उदय - क्या हुवा बेटी...
माया - ये क्या hai पापा...
उदय - oh बेटी मैं तो तुझे प्यार कर रहा हूँ l काश तू मेरे पास होती तो तुझे ऐसे हे प्यार करता....
माया - पापा.....
उदय - बेटी एक बार हाथ हटा के फोटो भेज दे प्लीज... .. बहुत मन हो रहा hai तुझे देखने का
माया मचल रही थी l
माया - पापा.... no....
उदय - प्लीज बेटी... बस एक बार प्लीज... थोड़ा सा हाथ हटा दे l
माया - पापा...
उदय - प्लीज बेटी बस एक बार
माया - ओह
माया - ठीक है l
माया अपनी नंगी बूब का फोटो ली, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था l फिर उसने ठंडी सांस लेते फोटो भेज दिया l

उदय को तो अपनी किस्मत पे यकीन ही नहीं हो रहा था, उसकी बेटी ने उसे अपनी नंगी फोटो भेज दी थी l
उदय - आअह्हह्ज बेटी क्या बूब हैं तेरे आआह्ह ssssss....
उदय बेशर्मी से मोअन करने लगा
उदय - जी करता है इन्हे मुहँ में ले लूँ l
माया - पापा... क्या हो गया आपको
उदय - मत रोको मुझे बेटी... आअह्ह्ह्ह पीने दो तेरी चूची l
(उदय अब खुल के बोल रहा था )
माया - पापा प्लीज.... गंदे हो आप.....
अभी क्या कर रहे हो ?
(माया जानते हुवे भी पापा के मुहँ से सुनना चाहती थी, और हुवा भी ऐसा हे )
उदय - तेरी गोल बूब्स देखते हुवे हिला रहा हूँ l
माया को भी मज़ा आ रहा था,,,,,
माया - क्या हिला रहे हो पापा...?
उदय धीमे आवाज़ में बोला...
उदय - अपना लंड....
माया - उम्म्म्म पापा क्यों ??
उदय - तेरी नंगी फोटो ने मेरा लंड खड़ा कर दिया है l
माया - सच पापा ??.
उदय - हाँ बेटी.. dekhogi ?
माया - नो नो
उदय - देख लो बेटी भेज रहा हूँ l देखो तेरी चूची ने मेरे लंड पे क्या असर डाला है
उदय ने अपने लंड को रगड़ते हुवे एक छोटा वीडियो बनाकर भेज दिया... जीवन में पहली बार माया खुद अपने पापा का खुला लंड देख रही थी l मुट्ठ में चिचिपाया खड़ा लंड देख वो भी मचलने लगी l जैसे जैसे उसके पापा लंड ऊपर नीचे सहला रहे थे वैसे hi लंड फुफकार मार रहा था l लंड से निकलता precum माया को तड़पाने के लिए काफी था l वो hamesha,से जूसी लंड देखना पसंद करती थी l पापा के लंड से उसकी नज़र मानों हट ही नहीं रही थी l

माया - ओ माय गॉड... पापा....
इतना bada....आप तो बहुत मूड में हैं और आपका जूस बह रहा है l
उदय - ये तो precum है बेटी l जूस तो तब बहेगा जब तू इसे अपने नर्म हाथों में legi l
माया - उम्म्म
माया बातों बातों में पैंटी के अंदर हाथ डाल अपनी नंगी बुर को मसल रही थी l पापा के मुट्ठ मारने का वीडियो वो बार बार देख रही थी l
उदय - लो न बेटी प्लीज..
माया - पापा... ये गलत है
उदय - कुछ भी गलत नहीं है बेटी, मुझे पता है तेरी भी बुर चिपचिपा रही है l
माया - छी पापा ऐसा मत कहो l
उदय - आ बेटी तेरी चिपचिपी गरम बुर चाट लूँ l
माया - पापा प्लीज रुक जाओ...
उदय - (उदय बोलता चला गया ) तेरी बुर को तबतक चाटता रहूँगा जबतक की तू मेरे मुहँ में अपना पानी नहीं छोड़ देती l
माया उत्तेजना में अपने आप हवा में कमर लहराने लगी...
माया - आअह्ह्ह्ह पापा nooooo....
ठीक है मैं आपका लंड पकड़ लेती हूँ आप प्लीज बोलना बंद करिये l
माया - लो पापा पकड़ ली आपका लंड अब गिरा भी दो अपना वीर्य ummmmmm
माया एक pic भेजी जिसमे वो पापा ka लंड को सहला रही थी l

समय बीतता जा रहा था, आखिरकार बहु और मनीष बैडरूम में जा चुके थे l महेन्द्र की बाकी उम्मीद भी टूट गई l वो निराश मन से अपने कमरे में आ गया l
कमरे में पहुंचकर महेन्द्र ने कपड़े चेंज किये एक बनियॉन और पायजामा पहन लिया l बिस्तर पे लेटने के बाद महेन्द्र की नींद जैसे कोसों दूर थी, लंड में रह रह कर हल्की हल्की तनाव आती रहती l बेचैन सा वो करवटें बदलता रहा, फिर कुछ सोच कर मोबाइल ले लेट गया l वो गूगल पे एक्ट्रेस की सेक्सी पिक्स सर्च किया, पहले पेज पे एलीयाना डिक्रूजा की फोटो आते ही वो मचल सा गया, एक एक कर सारी एक्ट्रेस की हॉट पिक्स देखता फिर कभी देसी हॉट गर्ल्स, कभी इंडियन गर्ल्स गांड सर्च कर सारी फोटोज देखने लगा l महेन्द्र के पुरे शरीर mein आज बेचैनी थी, आज उसे लड़कियों की गांड की पिक्स बहुत पसंद आ रही थी l

(महेन्द्र internet पे देसी लड़कियों की बड़ी गांड वाली pic देखते हुवे )
नंगी लड़कियों को घूरते हुवे अपना एक हाथ पायजामा में डाल लिया और लंड को धीरे धीरे सहलाने लगा l महेंद्र ने फिर सर्च किया और इस बार लिखा नंगी बहु, उसे technology पे गुस्सा आ रहा था, वो सोच रहा था बरसों हो गए मगर आविष्कार अभी भी कितना पीछे है l वो सोच रहा रहा kaash ऐसा होता की वो गूगल पे नंगी बहु लिखता और माया की नंगी तस्वीर आ जाती l
आखिरकार उसने हिंदी पोर्न खोजा और देखने लगा, पोर्न में अधेड़ उम्र का आदमी एक जवान लड़की को सोफे पे लिटाये किस कर रहा था और लड़की उसका लंड सहला रही थी l फिर वो आदमी उसकी चूत में ऊँगली करता है महेन्द्र मोबाइल बंद कर साइड में रखता है उसे आज पोर्न में भी मज़ा नहीं आ रहा था l
वो बिस्तर पे पड़ी चादर खींचता है अपने को ढकता है और पायजामा की डोरी खींच उसे अंडरवियर सहित घुटनो के नीचे कर देता है l
पुरे लंड को रगड़ते हुवे वो आँखें बंद किये सोचता है जैसे वो खुद मूवी जैसे ही लड़की की पीठ चूमता हुवा गांड तक जा रहा हो l लेग्गिंग में एक्ट्रेस की गांड पे मुँह रगड़ता है और नीचे करता है, लड़की सामने घूम जाती है दुधीया भरी जांघ और कसी जांघ के ऊपर पैंटी l वो पैंटी सरका लड़की की फूली हुई बुर चूमता है, लड़की आह आह महेन्द्र करती है, इधर महेन्द्र सोच में डूबा चादर के अंदर तेज तेज मुट्ठ मारने लगा था l पूरा बिस्तर हिलने लगा था, मूवी वाली एक्ट्रेस महेन्द्र को बुर चटा रही thi l तभी महेन्द्र की काल्पनिक लड़की बोली ओह्ह्ह बाबूजी.... l महेन्द्र ने आँख खोल दी l हाँथ भी रुक गया l लेकिन महेन्द्र रुकना नहीं चाहता था अब बहुत देर हो गई थी l महेन्द्र ने दुबारा आँख बंद करी, और इस बार वो काल्पनिक लड़की का चेहरा साफ़ था, वो कोई और नहीं महेन्द्र की बहु माया थी l
रुक क्यों गए बाबूजी चाटिये न, माया ने महेन्द्र का सर पकड़ा टांग खोली और अपने बुर में लगा दी l आह बाबूजी पी जाइये अपनी बहु का बुर l.महेन्द्र बेतहाशा बहु की बुर चाटे जा रहा था l आह बाबूजी मानस के ऑफिस जाने के बाद मैं रोज आपको ऐसे ही बुर पिलाऊंगी l महेन्द्र अब चरम सीमा पे था उसका लंड उल्टियां करने लगा l आह bahu...आह आँखे बंद किये वो देर तक स्खलित होता रहा l
पूरा संतुष्ट होने ke बाद वो आँख खोला तो तो देखा मुट्ठ के सैलाब में लंड चिपचिपा रहा था और उसपे पड़ी चादर पूरी भीग गई l चादर के अंदर वीर्य की तेज गन्ध आ रही थी l महेन्द्र थक चूका था वो अंडरवियर से ही अपना वीर्य साफ़ करते हुवे पहन लिया l महेन्द्र को जहाँ एक तरफ अपने किये पे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी वहीँ चेहरे पे एक अलग सा satisfaction का भाव भी था l उसे आज़तक मुट्ठ मारने में उतना मज़ा नहीं आया जितना की आज l थोड़ी देर बाद महेन्द्र को नींद आ गई l

महेन्द्र सिंह अपनी बहु माया को सोच के वीर्य गिराते हुवे l
भाग 6
कमरे में पहुंचकर महेन्द्र ने कपड़े चेंज किये एक बनियॉन और पायजामा पहन लिया l बिस्तर पे लेटने के बाद महेन्द्र की नींद जैसे कोसों दूर थी, लंड में रह रह कर हल्की हल्की तनाव आती रहती l बेचैन सा वो करवटें बदलता रहा, फिर कुछ सोच कर मोबाइल ले लेट गया l वो गूगल पे एक्ट्रेस की सेक्सी पिक्स सर्च किया, पहले पेज पे एलीयाना डिक्रूजा की फोटो आते ही वो मचल सा गया, एक एक कर सारी एक्ट्रेस की हॉट पिक्स देखता फिर कभी देसी हॉट गर्ल्स, कभी इंडियन गर्ल्स गांड सर्च कर सारी फोटोज देखने लगा l महेन्द्र के पुरे शरीर mein आज बेचैनी थी, आज उसे लड़कियों की गांड की पिक्स बहुत पसंद आ रही थी l

(महेन्द्र internet पे देसी लड़कियों की बड़ी गांड वाली pic देखते हुवे )
नंगी लड़कियों को घूरते हुवे अपना एक हाथ पायजामा में डाल लिया और लंड को धीरे धीरे सहलाने लगा l महेंद्र ने फिर सर्च किया और इस बार लिखा नंगी बहु, उसे technology पे गुस्सा आ रहा था, वो सोच रहा था बरसों हो गए मगर आविष्कार अभी भी कितना पीछे है l वो सोच रहा रहा kaash ऐसा होता की वो गूगल पे नंगी बहु लिखता और माया की नंगी तस्वीर आ जाती l
आखिरकार उसने हिंदी पोर्न खोजा और देखने लगा, पोर्न में अधेड़ उम्र का आदमी एक जवान लड़की को सोफे पे लिटाये किस कर रहा था और लड़की उसका लंड सहला रही थी l फिर वो आदमी उसकी चूत में ऊँगली करता है महेन्द्र मोबाइल बंद कर साइड में रखता है उसे आज पोर्न में भी मज़ा नहीं आ रहा था l
वो बिस्तर पे पड़ी चादर खींचता है अपने को ढकता है और पायजामा की डोरी खींच उसे अंडरवियर सहित घुटनो के नीचे कर देता है l
पुरे लंड को रगड़ते हुवे वो आँखें बंद किये सोचता है जैसे वो खुद मूवी जैसे ही लड़की की पीठ चूमता हुवा गांड तक जा रहा हो l लेग्गिंग में एक्ट्रेस की गांड पे मुँह रगड़ता है और नीचे करता है, लड़की सामने घूम जाती है दुधीया भरी जांघ और कसी जांघ के ऊपर पैंटी l वो पैंटी सरका लड़की की फूली हुई बुर चूमता है, लड़की आह आह महेन्द्र करती है, इधर महेन्द्र सोच में डूबा चादर के अंदर तेज तेज मुट्ठ मारने लगा था l पूरा बिस्तर हिलने लगा था, मूवी वाली एक्ट्रेस महेन्द्र को बुर चटा रही thi l तभी महेन्द्र की काल्पनिक लड़की बोली ओह्ह्ह बाबूजी.... l महेन्द्र ने आँख खोल दी l हाँथ भी रुक गया l लेकिन महेन्द्र रुकना नहीं चाहता था अब बहुत देर हो गई थी l महेन्द्र ने दुबारा आँख बंद करी, और इस बार वो काल्पनिक लड़की का चेहरा साफ़ था, वो कोई और नहीं महेन्द्र की बहु माया थी l
रुक क्यों गए बाबूजी चाटिये न, माया ने महेन्द्र का सर पकड़ा टांग खोली और अपने बुर में लगा दी l आह बाबूजी पी जाइये अपनी बहु का बुर l.महेन्द्र बेतहाशा बहु की बुर चाटे जा रहा था l आह बाबूजी मानस के ऑफिस जाने के बाद मैं रोज आपको ऐसे ही बुर पिलाऊंगी l महेन्द्र अब चरम सीमा पे था उसका लंड उल्टियां करने लगा l आह bahu...आह आँखे बंद किये वो देर तक स्खलित होता रहा l
पूरा संतुष्ट होने ke बाद वो आँख खोला तो तो देखा मुट्ठ के सैलाब में लंड चिपचिपा रहा था और उसपे पड़ी चादर पूरी भीग गई l चादर के अंदर वीर्य की तेज गन्ध आ रही थी l महेन्द्र थक चूका था वो अंडरवियर से ही अपना वीर्य साफ़ करते हुवे पहन लिया l महेन्द्र को जहाँ एक तरफ अपने किये पे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी वहीँ चेहरे पे एक अलग सा satisfaction का भाव भी था l उसे आज़तक मुट्ठ मारने में उतना मज़ा नहीं आया जितना की आज l थोड़ी देर बाद महेन्द्र को नींद आ गई l

महेन्द्र सिंह अपनी बहु माया को सोच के वीर्य गिराते हुवे l
महेन्द्र को जहाँ एक तरफ अपने किये पे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी वहीँ चेहरे पे एक अलग सा satisfaction का भाव भी था l उसे आज़तक मुट्ठ मारने में उतना मज़ा नहीं आया जितना की आज l थोड़ी देर बाद महेन्द्र को नींद आ गई l
अगले दिन सुबह महेन्द्र काफी देर तक सोता रहा l माया झाड़ू लगा रही थी, और मानस ऑफिस के लिए निकल चूका था l
नींद खुलने पे महेन्द्र सबसे पहले पायजामा की डोरी बांधता है जो खुला ही रह गया था कल रात l रात हुवी वाकिये को ले कर महेन्द्र बहुत शर्मिंदा था उसने सपने में भी नहीं सोचा था की वो कभी अपनी बहु के बारे में इतना गन्दा सोचेगा, खैर महेन्द्र बाहर आया वो मानस को आवाज़ लगाया l
बहु रूम में झाड़ू लगा रही thi, बाबूजी की आवाज़ सुन वो बाहर आयी, बाबूजी उठ गए आप ?
माया इस वक़्त एक ढीले gown में थी ऊपर से नीचे तक dhaki हुई थी l
Good morning बहु, एक अच्छी हंसी देता हुवा वो माया को greet किया l
माया - good morning बाबूजी, मानस ऑफिस निकल गए, आप अच्छी नींद सो रहे थे तो डिस्टर्ब नहीं की l आखिर आप घर से आने के बाद वकील से मिलने चले गए थे din भर ऑफिसेस का चक्कर काटते थक गए होंगे l हैं ना ?
महेंद्र मन में सोचता है बहु इतनी अच्छी है मेरा कितना ख्याल रखती है, और एक मैं जो ऐसी नेक बहु के बारे में गन्दा सोच के.....अपना.. छी... मुझ जैसा पापी कोई नहीं होगा l ये सब सोच रहा था की तभी माया ने चुप्पी तोड़ी l बाबूजी आप फ्रेश हो जाइये मैंने आपकी पसंद की भिंडी बनायी है l
महेन्द्र - ओह थैंक यू बहु, तुम कितनी अच्छी हो l मैं अभी फ्रेश हो लेता हूँ l
(महेन्द्र वापस अपने कमरे में आता है कपड़े लेके वो सीधा बाथरूम चला जाता है l इधर माया नाश्ता निकालते हुवे मानस से फ़ोन पे बात कर रही होती है l )
माया - क्यों ऑफिस में क्यों नहीं मन लग रहा ?
मानस - 2 दिन से भूख लगी है जान l
माया - शरारत करते हुवे.... अच्छा तो भूख मिटा लो l
मानस - कैसे मिटा लूँ ?
माया - वाशरूम जा के l
मानस - क्या माया... tum हो फिर भी वाशरूम जाऊं l कबतक चलेगा ऐसे l
माया - क्या कर सकते हैं, बाबूजी को तुमने ही तो बुलाया l
मानस - हाँ मगर मुझे पता नहीं था इतनी तड़प होगी तुम्हारे पास ना होने सेl
माया - तो अब वेट करो उनके जाने तक l
मानस - माया.... तुम्हारा मन क्या कहता है, (मानस गर्म आहें भरते हुवे पूछा )
माया समझ गई थी की उसके पति बहुत प्यासे हैं तो वो भी मानस को सेक्सी आवाज़ में बोली
माया - तुम्हे टूट के प्यार करने को जी करता है l
मानस - कैसे ??
माया - सारे कपड़े उतार के tumhare सामने पूरी नंगी हो के l
मानस - ओह माया l और क्या करोगी ?
माया - (माहौल को और गरम करते हुवे ) तुम्हारा pant खोलूँगी और बड़े प्यार से लंड bahafमुँह में ले कर चूसूंगी l
मानस - तुम बहुत चालाक हो, फ़ोन पे सेक्सी बातें करती हो और सामने होने पर लंड को मुहँ नहीं लगाती l
माया - अरे नहीं बाबा सच, रात से मैं भी बहुत तड़प रही हूँ l
मानस - सच माया...
लेकिन मैं कैसे विशवास करूँ l
माया - सच... बहुत प्यासी हूँ l
मानस - मैं नहीं मानता प्रूफ दो l
माया - proof ?? वो कैसे ?
मानस - अपनी ऊँगली चूत में डालो और उसकी फोटो भेजो अभी l
माया - तुम्हे sach mein विशवास नहीं ना ruko.... फ़ोन रख देती है और मुस्कुराते हुवे उसे शरारत सूझती है l
वो किचन mein चासनी ढूँढ़ती है, उसमे दो ऊँगली डाल कर गीला करती है और उसकी फोटो मानस को भेज देती है l
मानस जब वो pic देखता है तो उत्तेजित हो जाता है, वो तुरंत माया को फ़ोन करता है l
माया फ़ोन का इंतज़ार ही कर रही थी l
मानस - ओह माया तुम इतनी wet हो l
माया - हाँ my love देखो ना कितनी wet hu subah से ही l (मन ही मन muskuraati हुई )
मानस - ओह माया.. (मानस ऑफिस में अपने केबिन में बैठा लंड बाहर निकाल रगड़ने लगता है, फ़ोन पे उसकी सांस तेज चलने लगती हैं )
माया साँसों की तेज आवाज़ सुन स्थिति को भांपते हुवे पूछती है, क्या कर रहे हो मानस ?
मानस - ओह माया masturbate कर रहा हूँ, u मेड me so crazy
माया - चौंकते हुवे... ओह माय गॉड ऑफिस में ??
मानस - हाँ माया door बंद है केबिन का आअह्ह्ह l
माया - पागल हो तुम, चासनी इतनी अच्छी लगी tumhe? खिलखिलाते हुवे l
मानस - स्पीड कम करते हुवे क्या मतलब है तुम्हारा l
माया जोर से हंस पड़ी.... मानस वो मेरा जूस नहीं... डब्बे से निकला चासनी था जिसे तुम कुछ और समझ रहे l और माया खिलखिलाने लगी l
मानस को माया का ये मजाक बिलकुल रास नहीं आया, गुस्से से उसका face लाल हो गया उसने गुस्से में फ़ोन काट दिया l
माया की हंसी बंद पड़ गई, वो दुबारा फ़ोन की लेकिन मानस ने फ़ोन नहीं उठाया वो कई बार कोशिश की लेकिन हर बार मानस फ़ोन काट देता l आखिरकार मानस ne फ़ोन स्विच ऑफ कर दिया l
माया कसोट के रह गई, उसे ऐसा मजाक नहीं करना चाहिए था l वो खुद पे बहुत शर्मिंदा थी l उसने कई बार sorry लिखा मगर कोई फ़ायदा नहीं मानस तो मोबाइल बंद कर दिया था l
वो उदास सी खड़ी थी जब महेन्द्र वाशरूम से बाहर आया l
महेन्द्र - क्या हुवा बहू ? सब ठीक तो है l
माया झूठी हंसी दिखाती सब ठीक होने का इशारा की, उसका गला भर आया था l
उदास मन से वो नाश्ता दी l महेन्द्र सिंह पेपर पढ़ते हुवे नाश्ता किये l
पुरे दिन माया मानस को फ़ोन लगाती रही लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुवा l देखते देखते शाम हो गई l
काफी देर तक राह देखने के बाद मानस घर आया l माया मानस से लिपट गई और सॉरी बोली l मानस झूटी smile दे बैडरूम में चला गया l बैडरूम से attach वाशरूम में वो फ्रेश हुवा तबतक माया टेबल पे खाना saja दी l dining टेबल पे मानस और महेन्द्र आमने सामने बैठे थे l महेन्द्र के सामने टीवी था तो वो बीच बीच में नज़रें टीवी पे gada देता जबकि मानस के पीछे टीवी थी और वो चुपचाप था l
माया टेबल के पास आती है, टेबल काफी बड़ा था तो वहां बहुत सारे प्लेट्स और हॉट case रखे थे महेन्द्र और मानस के लिए अलग अलग l
महेन्द्र ढक्कन खोल कुछ curry लेता है प्लेट में l मानस भी एक हॉट केस खोलता है curry लेता है मगर दूसरा हॉट केस खोलते ही उसे झटका लगता है l वो तुरंत अपनी हथेली से cover करता है और पापा की तरफ घबराये हुवे देखता hai l मानस के पापा महेंद्र singh तो टीवी में busy the l
माया वहीँ खड़ी मुस्कुरा रही थी l मानस वापस ढक्कन धीरे से खोल देखता है तो उसमे brown कलर की माया की पैंटी थी l और साथ में एक लेटर l मानस सावधानी से लेटर खींचता है l
तभी महेन्द्र सिंह देखते हैं...
महेन्द्र सिंह - अरे बेटा ये क्या तुम खाने के टेबल पे भी ऑफिस का काम लिए बैठे हो l पहले खा लो l
मानस - हाँ पापा its ओके, wo ek client ka कुछ नोटिस था important main padh nahi paya.. To socha dekh लूँ l आप खाइये ना पापा l
महेन्द्र - ओके बेटा l
लेटर.......
My dear husband,
मैं आज सुबह किये गए मजाक के लिए बहुत शर्मिंदा हूँ l मैं आज सारा दिन परेशान रही और dukhi भी l गलती मेरी थी, मुझे maaf कर दो l मैंने बड़ी मेहनत से ये dish ख़ास तुम्हारे लिए बनाई है l उम्मीद है तुम्हे पसंद आएगी l ये पैंटी मैं कल से पहनी थी और अभी 5 min पहले उतारी हूँ l yakeen ना हो तो सूंघ के देख लो l उसमे मेरी चूत की तीव्र महक समायी होगी l हाँ और एक बात पैंटी तुम्हारे सामने है और मैं भी तो तुम समझ ही गए होगे की मैं इस वक़्त गाउन के अंदर बिना पैंटी के तुम्हारे सामने खड़ी हूँ l मुझे subah की हरकत के लिए प्लीज माफ़ कर दो l अगर तुमने मेरी पैंटी सूंघी तो मैं समझूंगी तुमने मुझे माफ़ किया, और अगर नहीं तो पैंटी नीचे फेंक देना l मुझे तुम्हारा माफ़ ना करना भी मंजूर होगा l
तुम्हारी माया
इतनी pyaari letter पढ़ के मानस का गुस्सा ही शांत हो गया l wo माया से नज़रें मिलाये उसका हाथ pakad अपने पास बैठा लिया l उसने टेबल पे पड़े fruits की टोकरी हॉट केस के सामने रख दी l और झुक के ढक्कन खोलते हुवे माया की पैंटी smell किया l वाकई smell बहुत strong थी l माया ख़ुशी से झूम उठी l
तभी महेन्द्र ने उसे ऐसा करते देख लिया l
महेन्द्र - क्या हुवा बेटा कुछ बात है...? क्या smell कर रहे हो l
मानस - कुछ नहीं पापा बहुत भूख लगी है और ये तो माया ने स्पेशल curry बनाया है ख़ास मेरे लिए तो उसकी smell में ही इतना मज़ा है की भूख बढ़ जा रही है l क्यों maya.. मानस माया को छेड़ते हुवे कहा था l
मानस ने माया के जांघो पे गाउन के ऊपर से हाथ फेरा, दोनों एक दूसरे को देख smile दिए l अब सब ठीक हो गया था माया बहुत खुश थी, तभी ऐसा हुवा जिसने माया को शर्म से पानी पानी कर दिया l
महेन्द्र सिंह स्थिति से अनजान बड़े भोलेपन से बोले l
हाँ बहू तू तो बड़े स्वादिष्ट खाने बनाती है जादू है तेरे हाथों में l अरे बहू जरा मुझे भी तो वो curry दिखा तो... अगर मानस बेटा के लिए ही स्पेशल है तो कोई बात नहीं लेकिन इधर ला कम से कम मुझे भी तो अपनी curry ki महक लेने दे बहू l
महेन्द्र सिंह का इतना कहना था माया को जैसे 440 volt का झटका लगा हो l वो चौंक के खड़ी हो गई, जैसे कुछ काट दिया हो l
बाबूजी ईईईई....... (मुंह पे हाथ रखे वो चीख पड़ी और शर्मशार हो गई )
महेन्द्र - ऐसा क्या कह दिया मैंने बहू l
माया - क क क... कुछ नहीं.... आ ... (माया को कुछ नहीं समझ आ रहा था वो क्या बोले... )
उधर मानस की हंसी नहीं रुक रही थी l
मानस - हाँ हाँ दे दो माया l.... (मानस हँस हँस के पागल हुवे जा रहा था, माया को छेड़ने में वो कोई कसर नहीं छोड़ रहा था )
लेकिन माया के लिए तो वहां खड़ा होना भी दूभर हो गया था, वो भाग के किचन में आ गई l दिल की धड़कन किसी जनरेटर के सामान धक् धक् कर रही थी l
भाग 7
अगले दिन सुबह महेन्द्र काफी देर तक सोता रहा l माया झाड़ू लगा रही थी, और मानस ऑफिस के लिए निकल चूका था l
नींद खुलने पे महेन्द्र सबसे पहले पायजामा की डोरी बांधता है जो खुला ही रह गया था कल रात l रात हुवी वाकिये को ले कर महेन्द्र बहुत शर्मिंदा था उसने सपने में भी नहीं सोचा था की वो कभी अपनी बहु के बारे में इतना गन्दा सोचेगा, खैर महेन्द्र बाहर आया वो मानस को आवाज़ लगाया l
बहु रूम में झाड़ू लगा रही thi, बाबूजी की आवाज़ सुन वो बाहर आयी, बाबूजी उठ गए आप ?
माया इस वक़्त एक ढीले gown में थी ऊपर से नीचे तक dhaki हुई थी l
Good morning बहु, एक अच्छी हंसी देता हुवा वो माया को greet किया l
माया - good morning बाबूजी, मानस ऑफिस निकल गए, आप अच्छी नींद सो रहे थे तो डिस्टर्ब नहीं की l आखिर आप घर से आने के बाद वकील से मिलने चले गए थे din भर ऑफिसेस का चक्कर काटते थक गए होंगे l हैं ना ?
महेंद्र मन में सोचता है बहु इतनी अच्छी है मेरा कितना ख्याल रखती है, और एक मैं जो ऐसी नेक बहु के बारे में गन्दा सोच के.....अपना.. छी... मुझ जैसा पापी कोई नहीं होगा l ये सब सोच रहा था की तभी माया ने चुप्पी तोड़ी l बाबूजी आप फ्रेश हो जाइये मैंने आपकी पसंद की भिंडी बनायी है l
महेन्द्र - ओह थैंक यू बहु, तुम कितनी अच्छी हो l मैं अभी फ्रेश हो लेता हूँ l
(महेन्द्र वापस अपने कमरे में आता है कपड़े लेके वो सीधा बाथरूम चला जाता है l इधर माया नाश्ता निकालते हुवे मानस से फ़ोन पे बात कर रही होती है l )
माया - क्यों ऑफिस में क्यों नहीं मन लग रहा ?
मानस - 2 दिन से भूख लगी है जान l
माया - शरारत करते हुवे.... अच्छा तो भूख मिटा लो l
मानस - कैसे मिटा लूँ ?
माया - वाशरूम जा के l
मानस - क्या माया... tum हो फिर भी वाशरूम जाऊं l कबतक चलेगा ऐसे l
माया - क्या कर सकते हैं, बाबूजी को तुमने ही तो बुलाया l
मानस - हाँ मगर मुझे पता नहीं था इतनी तड़प होगी तुम्हारे पास ना होने सेl
माया - तो अब वेट करो उनके जाने तक l
मानस - माया.... तुम्हारा मन क्या कहता है, (मानस गर्म आहें भरते हुवे पूछा )
माया समझ गई थी की उसके पति बहुत प्यासे हैं तो वो भी मानस को सेक्सी आवाज़ में बोली
माया - तुम्हे टूट के प्यार करने को जी करता है l
मानस - कैसे ??
माया - सारे कपड़े उतार के tumhare सामने पूरी नंगी हो के l
मानस - ओह माया l और क्या करोगी ?
माया - (माहौल को और गरम करते हुवे ) तुम्हारा pant खोलूँगी और बड़े प्यार से लंड bahafमुँह में ले कर चूसूंगी l
मानस - तुम बहुत चालाक हो, फ़ोन पे सेक्सी बातें करती हो और सामने होने पर लंड को मुहँ नहीं लगाती l
माया - अरे नहीं बाबा सच, रात से मैं भी बहुत तड़प रही हूँ l
मानस - सच माया...
लेकिन मैं कैसे विशवास करूँ l
माया - सच... बहुत प्यासी हूँ l
मानस - मैं नहीं मानता प्रूफ दो l
माया - proof ?? वो कैसे ?
मानस - अपनी ऊँगली चूत में डालो और उसकी फोटो भेजो अभी l
माया - तुम्हे sach mein विशवास नहीं ना ruko.... फ़ोन रख देती है और मुस्कुराते हुवे उसे शरारत सूझती है l
वो किचन mein चासनी ढूँढ़ती है, उसमे दो ऊँगली डाल कर गीला करती है और उसकी फोटो मानस को भेज देती है l
मानस जब वो pic देखता है तो उत्तेजित हो जाता है, वो तुरंत माया को फ़ोन करता है l
माया फ़ोन का इंतज़ार ही कर रही थी l
मानस - ओह माया तुम इतनी wet हो l
माया - हाँ my love देखो ना कितनी wet hu subah से ही l (मन ही मन muskuraati हुई )
मानस - ओह माया.. (मानस ऑफिस में अपने केबिन में बैठा लंड बाहर निकाल रगड़ने लगता है, फ़ोन पे उसकी सांस तेज चलने लगती हैं )
माया साँसों की तेज आवाज़ सुन स्थिति को भांपते हुवे पूछती है, क्या कर रहे हो मानस ?
मानस - ओह माया masturbate कर रहा हूँ, u मेड me so crazy
माया - चौंकते हुवे... ओह माय गॉड ऑफिस में ??
मानस - हाँ माया door बंद है केबिन का आअह्ह्ह l
माया - पागल हो तुम, चासनी इतनी अच्छी लगी tumhe? खिलखिलाते हुवे l
मानस - स्पीड कम करते हुवे क्या मतलब है तुम्हारा l
माया जोर से हंस पड़ी.... मानस वो मेरा जूस नहीं... डब्बे से निकला चासनी था जिसे तुम कुछ और समझ रहे l और माया खिलखिलाने लगी l
मानस को माया का ये मजाक बिलकुल रास नहीं आया, गुस्से से उसका face लाल हो गया उसने गुस्से में फ़ोन काट दिया l
माया की हंसी बंद पड़ गई, वो दुबारा फ़ोन की लेकिन मानस ने फ़ोन नहीं उठाया वो कई बार कोशिश की लेकिन हर बार मानस फ़ोन काट देता l आखिरकार मानस ne फ़ोन स्विच ऑफ कर दिया l
माया कसोट के रह गई, उसे ऐसा मजाक नहीं करना चाहिए था l वो खुद पे बहुत शर्मिंदा थी l उसने कई बार sorry लिखा मगर कोई फ़ायदा नहीं मानस तो मोबाइल बंद कर दिया था l
वो उदास सी खड़ी थी जब महेन्द्र वाशरूम से बाहर आया l
महेन्द्र - क्या हुवा बहू ? सब ठीक तो है l
माया झूठी हंसी दिखाती सब ठीक होने का इशारा की, उसका गला भर आया था l
उदास मन से वो नाश्ता दी l महेन्द्र सिंह पेपर पढ़ते हुवे नाश्ता किये l
पुरे दिन माया मानस को फ़ोन लगाती रही लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुवा l देखते देखते शाम हो गई l
काफी देर तक राह देखने के बाद मानस घर आया l माया मानस से लिपट गई और सॉरी बोली l मानस झूटी smile दे बैडरूम में चला गया l बैडरूम से attach वाशरूम में वो फ्रेश हुवा तबतक माया टेबल पे खाना saja दी l dining टेबल पे मानस और महेन्द्र आमने सामने बैठे थे l महेन्द्र के सामने टीवी था तो वो बीच बीच में नज़रें टीवी पे gada देता जबकि मानस के पीछे टीवी थी और वो चुपचाप था l
माया टेबल के पास आती है, टेबल काफी बड़ा था तो वहां बहुत सारे प्लेट्स और हॉट case रखे थे महेन्द्र और मानस के लिए अलग अलग l
महेन्द्र ढक्कन खोल कुछ curry लेता है प्लेट में l मानस भी एक हॉट केस खोलता है curry लेता है मगर दूसरा हॉट केस खोलते ही उसे झटका लगता है l वो तुरंत अपनी हथेली से cover करता है और पापा की तरफ घबराये हुवे देखता hai l मानस के पापा महेंद्र singh तो टीवी में busy the l
माया वहीँ खड़ी मुस्कुरा रही थी l मानस वापस ढक्कन धीरे से खोल देखता है तो उसमे brown कलर की माया की पैंटी थी l और साथ में एक लेटर l मानस सावधानी से लेटर खींचता है l
तभी महेन्द्र सिंह देखते हैं...
महेन्द्र सिंह - अरे बेटा ये क्या तुम खाने के टेबल पे भी ऑफिस का काम लिए बैठे हो l पहले खा लो l
मानस - हाँ पापा its ओके, wo ek client ka कुछ नोटिस था important main padh nahi paya.. To socha dekh लूँ l आप खाइये ना पापा l
महेन्द्र - ओके बेटा l
लेटर.......
My dear husband,
मैं आज सुबह किये गए मजाक के लिए बहुत शर्मिंदा हूँ l मैं आज सारा दिन परेशान रही और dukhi भी l गलती मेरी थी, मुझे maaf कर दो l मैंने बड़ी मेहनत से ये dish ख़ास तुम्हारे लिए बनाई है l उम्मीद है तुम्हे पसंद आएगी l ये पैंटी मैं कल से पहनी थी और अभी 5 min पहले उतारी हूँ l yakeen ना हो तो सूंघ के देख लो l उसमे मेरी चूत की तीव्र महक समायी होगी l हाँ और एक बात पैंटी तुम्हारे सामने है और मैं भी तो तुम समझ ही गए होगे की मैं इस वक़्त गाउन के अंदर बिना पैंटी के तुम्हारे सामने खड़ी हूँ l मुझे subah की हरकत के लिए प्लीज माफ़ कर दो l अगर तुमने मेरी पैंटी सूंघी तो मैं समझूंगी तुमने मुझे माफ़ किया, और अगर नहीं तो पैंटी नीचे फेंक देना l मुझे तुम्हारा माफ़ ना करना भी मंजूर होगा l
तुम्हारी माया
इतनी pyaari letter पढ़ के मानस का गुस्सा ही शांत हो गया l wo माया से नज़रें मिलाये उसका हाथ pakad अपने पास बैठा लिया l उसने टेबल पे पड़े fruits की टोकरी हॉट केस के सामने रख दी l और झुक के ढक्कन खोलते हुवे माया की पैंटी smell किया l वाकई smell बहुत strong थी l माया ख़ुशी से झूम उठी l
तभी महेन्द्र ने उसे ऐसा करते देख लिया l
महेन्द्र - क्या हुवा बेटा कुछ बात है...? क्या smell कर रहे हो l
मानस - कुछ नहीं पापा बहुत भूख लगी है और ये तो माया ने स्पेशल curry बनाया है ख़ास मेरे लिए तो उसकी smell में ही इतना मज़ा है की भूख बढ़ जा रही है l क्यों maya.. मानस माया को छेड़ते हुवे कहा था l
मानस ने माया के जांघो पे गाउन के ऊपर से हाथ फेरा, दोनों एक दूसरे को देख smile दिए l अब सब ठीक हो गया था माया बहुत खुश थी, तभी ऐसा हुवा जिसने माया को शर्म से पानी पानी कर दिया l
महेन्द्र सिंह स्थिति से अनजान बड़े भोलेपन से बोले l
हाँ बहू तू तो बड़े स्वादिष्ट खाने बनाती है जादू है तेरे हाथों में l अरे बहू जरा मुझे भी तो वो curry दिखा तो... अगर मानस बेटा के लिए ही स्पेशल है तो कोई बात नहीं लेकिन इधर ला कम से कम मुझे भी तो अपनी curry ki महक लेने दे बहू l
महेन्द्र सिंह का इतना कहना था माया को जैसे 440 volt का झटका लगा हो l वो चौंक के खड़ी हो गई, जैसे कुछ काट दिया हो l
बाबूजी ईईईई....... (मुंह पे हाथ रखे वो चीख पड़ी और शर्मशार हो गई )
महेन्द्र - ऐसा क्या कह दिया मैंने बहू l
माया - क क क... कुछ नहीं.... आ ... (माया को कुछ नहीं समझ आ रहा था वो क्या बोले... )
उधर मानस की हंसी नहीं रुक रही थी l
मानस - हाँ हाँ दे दो माया l.... (मानस हँस हँस के पागल हुवे जा रहा था, माया को छेड़ने में वो कोई कसर नहीं छोड़ रहा था )
लेकिन माया के लिए तो वहां खड़ा होना भी दूभर हो गया था, वो भाग के किचन में आ गई l दिल की धड़कन किसी जनरेटर के सामान धक् धक् कर रही थी l
Ok broबीच बीच में pic अपलोड करो तो
बहुत ज्यादा मज़ा आएगा...
Do let me know what scene you like the most
दोस्तों पोस्ट में फोटो कैसे डालते डालते हैं ?
मैं स्टोरी की गर्मी बढ़ाने के लिए साथ साथ कुछ hot pics भी डालना चाहता हूँ जिससे मज़ा और बढे l
सलाह दीजिये l
मैं स्टोरी की गर्मी बढ़ाने के लिए साथ साथ कुछ hot pics भी डालना चाहता हूँ जिससे मज़ा और बढे l
सलाह दीजिये l
Adultery जैसा अभी तक तो कुछ हुवा नहीं... फिर आप कैसे बोल सकते हो lIs story ko incest category mein rakha hai.. shift it to adultery
और incest ससुर बहू का शुरू हो चूका है, थोड़ा सब्र रखो भाई







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